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Business Buzz

डॉ. ब्लॉसम कोचर ने भारत का पहला एरोमाथेरेपी-आधारित प्रोफेशनल मेन्स ग्रूमिंग ब्रांड ‘ERTH’ लॉन्च किया

नई दिल्ली : पुरुषों की ग्रूमिंग आज केवल हेयरकट और शेविंग तक सीमित नहीं रही। आधुनिक उपभोक्ता अब बेहतर त्वचा स्वास्थ्य, रिलैक्सेशन और माइंडफुल सेल्फ-केयर को भी अपने ग्रूमिंग अनुभव का हिस्सा मान रहे हैं। इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखते हुए, प्रसिद्ध एरोमाथेरेपिस्ट डॉ. ब्लॉसम कोचर ने ERTH लॉन्च किया है, भारत का पहला एरोमाथेरेपी-आधारित प्रोफेशनल मेन्स ग्रूमिंग ब्रांड, जिसे विशेष रूप से बारबर्स और प्रोफेशनल सैलून के लिए विकसित किया गया है। ERTH आवश्यक तेलों की शक्ति को विज्ञान-आधारित स्किनकेयर फॉर्म्युलेशन और बायोएक्टिव वनस्पति घटकों के साथ जोड़ता है। इसका उद्देश्य केवल प्रभावी ग्रूमिंग प्रदान करना नहीं, बल्कि हर प्रोफेशनल सेवा को एक अधिक संपूर्ण और संवेदनात्मक अनुभव में बदलना है। _”एरोमाथेरेपी में चार दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, डॉ. ब्लॉसम कोचर, संस्थापक एवं मास्टर एरोमाथेरेपिस्ट, ब्लॉसम कोचर ग्रुप ऑफ कंपनीज_ंग सर्विस देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि त्वचा और ग्रूग्रूमिंग में लाना था। ब्लॉसम कोचर, संस्थापक एवं मास्टर एरोमाथेरेपिस्ट, ब्लॉसम कोचर ग्रुप ऑफ कंपनीज ग्रुप ऑफ कंपनीजारा उद्देश्य इस विशेषज्ञता को पुरुषों की प्रोफेशनल ग्रूमिंग में लाना था। हमने ऐसे फॉर्म्युलेशन तैयार किए हैं जो त्वचा की देखभाल के साथ पूरे ग्रूमिंग अनुभव को बेहतर बनाते हैं। हर शेव के बाद व्यक्ति को तरोताजा, आत्मविश्वासी और पुनर्जीवित महसूस होना चाहिए।” — डॉ. ब्लॉसम कोचर, संस्थापक एवं मास्टर एरोमाथेरेपिस्ट, ब्लॉसम कोचर ग्रुप ऑफ कंपनीज_ ERTH का प्रोफेशनल पोर्टफोलियो ग्रूमिंग के हर चरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें अल्ट्रा क्लींजिंग मिल्क, डिटॉक्सिफाइंग फेस स्क्रब, प्री-शेव ऑयल, शेविंग फोम, फिटकरी जेल, डीप नरिशिंग मसाज क्रीम, स्किन ब्राइटनिंग फेस पैक, आफ्टर शेव लोशन, सूदिंग मॉइस्चराइजिंग बाम और सैंडलवुड एसेंशियल ऑयल शामिल हैं। प्री-शेव ऑयल रेज़र ग्लाइड को बेहतर बनाने में मदद करता है, जबकि आफ्टर-शेव लोशन और फिटकरी जेल शेव के बाद त्वचा को शांत करने के लिए तैयार किए गए हैं। उत्पादों के साथ, ERTH ने तीन सिग्नेचर सर्विस रूटीन—रॉयल शेव, अल्फा शेव और एक्सप्रेस शेव, भी पेश किए हैं, जिन्हें नियमित बारबरिंग अपॉइंटमेंट्स को अधिक प्रीमियम और अनुभव-केंद्रित बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। ब्रांड का फोकस केवल उत्पादों तक सीमित नहीं है। ERTH बारबर्स के लिए प्रोफेशनल शिक्षा और प्रशिक्षण पर भी जोर देता है, ताकि वे बेहतर तकनीक, उत्पाद ज्ञान और वेलनेस-केंद्रित ग्रूमिंग अनुभव प्रदान कर सकें। ERTH के माध्यम से डॉ. ब्लॉसम कोचर पुरुषों की प्रोफेशनल ग्रूमिंग में प्रकृति, विज्ञान और शिल्प कौशल को एक साथ लाने का प्रयास कर रही हैं, एक ऐसा दृष्टिकोण जो आधुनिक बारबरिंग अनुभव को एक नया आयाम देता है।

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वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में भारत 10वें स्थान पर रहा; 6 सिल्वर मेडल और 20 ‘मेडल फॉर एक्सीलेंस’ जीते

चीन के शंघाई में आयोजित प्रतिष्ठित 48वीं ‘वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता 2026’ में टीम इंडिया ने 10वां स्थान हासिल किया। टीम इंडिया ने 6 सिल्वर मेडल और 20 ‘मेडल फॉर एक्सीलेंस’ जीते। ‘वर्ल्डस्किल्स ल्योन 2024’ में भारत ने 13वां स्थान हासिल किया था (तब भारत ने 4 ब्रॉन्ज़ मेडल और 12 ‘मेडल फॉर एक्सीलेंस’ मेडल जीते थे); और इस बार बेहतर प्रदर्शन करते हुए हासिल किए गए ये मेडल देश के कुशल युवाओं के लिए वैश्विक मंच पर एक अहम उपलब्धि है। बेकरी में स्मृति नाम्बियार; डेंटल प्रोस्थेटिक्स में मोहम्मद सलाम; डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया डिज़ाइन में कोविद अजय गंगराडे; इंडस्ट्रियल डिज़ाइन टेक्नोलॉजी में पार्थ वोहरा; लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग में मेहरुन्निसा बेगम; और रिटेल सेल्स में सानिया जोशी ने छह सिल्वर मेडल जीते वर्ल्डस्किल्स शंघाई मे। उनकी उपलब्धियाँ क्रिएटिव, टेक्निकल और सर्विस-सेक्टर स्किल्स से जुड़ी हैं, जो वैश्विक मंच पर भारतीय प्रतिभा की विविधता को दर्शाती हैं। भारत ने टेक्निकल, इंडस्ट्रियल, डिजिटल, क्रिएटिव और सर्विस स्किल्स में लिए 20 मेडल फॉर एक्सीलेंस भी हासिल किए। बेकरी में सिल्वर मेडल विजेता स्मृति नांबियार को भारत के लिए बेस्ट ऑफ़ नेशन के तौर पर पहचान मिली। 22 से 27 सितंबर 2026 तक आयोजित इस छह-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में लगभग 70 देशों और क्षेत्रों के 1,400 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दल में 70 प्रतिभागी शामिल थे, जो अब तक का सबसे बड़ा दल था। ये प्रतिभागी 63 अलग-अलग स्किल्स में शामिल हुए, जिनमें उभरती हुई तकनीकें, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ और विशेष सेवाएँ शामिल थीं। 23 से 26 सितंबर तक चले ज़बरदस्त मुक़ाबले के बाद, 27 सितंबर को एक शानदार समापन समारोह में विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस समारोह में बेहतरीन तकनीकी कौशल, इनोवेशन, सटीकता और शिल्प कौशल का उत्सव हुआ, जिसमें दुनिया भर के प्रतियोगी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल, एक्सपर्ट और इंडस्ट्री के प्रतिनिधि शामिल हुए। टीम इंडिया के प्रदर्शन पर बधाई देते हुए, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार, श्री जयन्त चौधरी ने कहा: “वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में टीम इंडिया का शानदार प्रदर्शन – जिसमें 6 सिल्वर मेडल और 20 ‘मेडल फॉर एक्सीलेंस’ शामिल हैं – हमारी वैश्विक कौशल यात्रा में एक बड़ी कामयाबी है। अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करते हुए, हमारे युवा प्रतिभागियों ने भारत के स्किल्ड टैलेंट की बढ़ती ताकत और कॉम्पिटिशन की क्षमता को साबित किया है। मैं इस कामयाबी में योगदान देने वाले हर प्रतियोगी, एक्सपर्ट, ट्रेनर और इंडस्ट्री पार्टनर को बधाई देता हूँ। मेडल के अलावा, जिस बात से हमें गर्व होता है, वह है हमारे युवाओं का आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और बेहतरीन प्रदर्शन, जिसके साथ उन्होंने दुनिया के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी सफलता भविष्य के लिए तैयार स्किलिंग इकोसिस्टम बनाने और हर युवा भारतीय को दुनिया के बेहतरीन लोगों के साथ मुकाबला करने का मौका देने के हमारे संकल्प को और मज़बूत करती है।” भारत की यह कामयाबी हमारे युवा प्रतियोगियों के समर्पण को दिखाती है, जिसे महीनों की कड़ी तैयारी, खास ट्रेनिंग, मेंटरशिप और इंटरनेशनल बेंचमार्किंग का साथ मिला है। ‘मेडल फॉर एक्सीलेंस’ उन प्रतियोगियों को दिया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय वर्ल्डस्किल्स स्टैंडर्ड्स के मुकाबले बेहतरीन प्रोफेशनल काबिलियत दिखाते हैं। इस साल भारत की भागीदारी की एक खास बात यह रही कि उसने 11 नई और उभरती हुई स्किल कैटेगरी में पहली बार हिस्सा लिया। इनमें डेंटल प्रोस्थेटिक्स, डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया डिज़ाइन, इंटेलिजेंट सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी, लैंडस्केप गार्डनिंग, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी, रिटेल सेल्स, अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स, इंडस्ट्रियल मैकेनिक्स, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, हेवी व्हीकल टेक्नोलॉजी और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस शामिल हैं। इन खास कैटेगरी में भारत का प्रवेश देश के स्किलिंग इकोसिस्टम में आ रहे बदलावों को दिखाता है, जिसमें भविष्य के लिए जरूरी व्यवसायों, नई टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री की ज़रूरतों के मुताबिक स्किल्स पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है। अलग-अलग टेक्निकल, क्रिएटिव और सर्विस-ओरिएंटेड क्षेत्रों में युवा महिलाओं की भागीदारी एक और अहम बात रही। महिला प्रतियोगियों ने केमिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग से लेकर फैशन टेक्नोलॉजी, विज़ुअल मर्चेंडाइजिंग, हेल्थ और सोशल केयर, हॉस्पिटैलिटी और विशिष्ट व्यवसायों तक के स्किल्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह वोकेशनल एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट में महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों को दिखाता है। इस प्रतियोगिता ने भारतीय प्रतिभागियों और एक्सपर्ट्स को बहुमूल्य अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्रदान किया। इससे उन्हें ग्लोबल ऑक्यूपेशनल स्टैंडर्ड्स, उभरती टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिसेस के बारे में जानकारी मिली, जो भारत के ट्रेनिंग और असेसमेंट इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं।

Education

पाठ्य पुस्तक से आगे : क्या भारत की शिक्षा व्यवस्था को बच्चों को देखना, सुनना और सवाल करना सिखाना चाहिए?

आर्काइव, तस्वीरों, ध्वनियों और रोज़मर्रा की वस्तुओं को सीखने का हिस्सा बनाने की जरूरत पर Neville Tuli का जोर नई दिल्ली : भारत की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से पाठ्यपुस्तक को सीखने का सबसे प्रमुख माध्यम मानती रही है। परीक्षा में विद्यार्थियों से अपेक्षा होती है कि वे दी गई जानकारी को याद रखें और उसे दोहरा सकें। लेकिन क्या सीखना केवल पढ़ने और याद करने तक सीमित होना चाहिए? क्या एक तस्वीर, पुराना अखबार, राजनीतिक पोस्टर, गीत, विज्ञापन, भाषण, पत्र या रोजमर्रा की कोई वस्तु भी इतिहास और समाज को समझने का उतना ही महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है? Tuli Research Centre for India Studies (T.R.I.S.) के संस्थापक Neville Tuli का मानना है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को पाठ्यपुस्तक से आगे बढ़कर देखने, सुनने, निरीक्षण करने, समझने और सवाल करने की क्षमताओं पर अधिक जोर देना चाहिए। उनके अनुसार Academic और Archival Learning systems का गहरा एकीकरण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। Tuli के अनुसार पारंपरिक शिक्षा की एक बड़ी सीमा यह है कि इसमें ज्ञान का आधार मुख्यतः लिखित पाठ रहता है, जबकि visual, audio और material sources को अक्सर सहायक सामग्री के रूप में देखा जाता है। उनका तर्क है कि दुनिया को हम केवल पढ़कर नहीं, बल्कि देखकर और सुनकर भी समझते हैं—और इन सभी माध्यमों के बीच के संदर्भ को समझना उतना ही जरूरी है। उदाहरण के लिए, एक राजनीतिक पोस्टर केवल किसी घटना की जानकारी नहीं देता; वह यह भी दिखा सकता है कि उस समय लोगों को क्या मानने या सोचने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। एक तस्वीर किसी ऐतिहासिक घटना को दर्ज करने के साथ यह सवाल भी खड़ा करती है कि कैमरे के पीछे कौन था और किस दृष्टिकोण को सामने रखा गया। इसी तरह कोई गीत किसी दौर की भावनाओं को पकड़ सकता है, जबकि विज्ञापन या कोई रोजमर्रा की वस्तु यह बता सकती है कि सामाजिक और राजनीतिक विचार आम जीवन में कैसे प्रवेश करते थे। Tuli के विचार में visual material को केवल सजावट या illustration की तरह देखना पर्याप्त नहीं है। तस्वीर, ध्वनि और material culture अपने आप में ज्ञान के स्रोत हैं। जब विद्यार्थी इन स्रोतों को साथ पढ़ना सीखते हैं, तो वे किसी विषय को एक ही narrative के बजाय कई दृष्टिकोणों से समझने की क्षमता विकसित कर सकते हैं। याद करने से जिज्ञासा तक Tuli का प्रस्ताव केवल कक्षा में अधिक तस्वीरें या वीडियो जोड़ने का नहीं है। उनका जोर सीखने की पूरी प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने पर है। यदि शिक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से जानकारी को याद रखने और उसे दोहराने को पुरस्कृत करती है, तो जिज्ञासा पीछे छूट सकती है। इसके बजाय शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थी को दोबारा देखने, फिर से सुनने, सवाल करने और किसी उत्तर के पीछे छिपे अगले प्रश्न तक पहुंचने के लिए प्रेरित करे। उनके अनुसार शिक्षक की भूमिका भी केवल जानकारी देने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। Learning और Self-Discovery की प्रक्रिया में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद, खोज और प्रश्न करने की जगह बननी चाहिए। इस दृष्टिकोण में Archive केवल पुरानी सामग्री का संग्रह नहीं, बल्कि अकादमिक जुड़ाव और नए सवाल पैदा करने का माध्यम बन जाता है। डिजिटल दौर में Visual Literacy क्यों जरूरी है आज बच्चे और युवा हर दिन बड़ी मात्रा में visual और audio information से घिरे हैं। सोशल मीडिया, short-form video, digital archives और AI-generated content ने जानकारी के स्वरूप को बदल दिया है। ऐसे समय में विद्यार्थियों के लिए केवल सूचना का उपभोग करना पर्याप्त नहीं है; उन्हें यह समझना भी जरूरी है कि वे जो देख या सुन रहे हैं, उसका संदर्भ क्या है, उसका स्रोत क्या है और उसे किस दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। इस संदर्भ में archival material विद्यार्थियों को सूचना को आलोचनात्मक रूप से देखने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकता है। किसी पुराने newspaper extract, film showcard, song booklet, photograph या matchbox label को पढ़ना इतिहास को केवल तारीखों और घटनाओं की सूची के रूप में नहीं, बल्कि उस समय के सामाजिक जीवन और मानसिकता के हिस्से के रूप में देखने का अवसर देता है। भारत जैसे विविध देश में यह दृष्टिकोण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। भारतीय इतिहास और सामाजिक संरचना को किसी एक linear narrative में पूरी तरह समेटना कठिन है। लोक, आदिवासी, शहरी और अंतरराष्ट्रीय दृश्य परंपराओं सहित अनेक स्रोत मिलकर भारत के अतीत और वर्तमान की जटिल तस्वीर बनाते हैं। शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते को नए सिरे से देखना इस विचार के केंद्र में शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते को अधिक संवादात्मक बनाना भी है। जब विद्यार्थियों को एक ही विषय से जुड़े कई स्रोत देखने और अपने सवाल बनाने का अवसर मिलता है, तो कक्षा केवल information transfer की जगह exploration का स्थान बन सकती है। Tuli के अनुसार learning में आनंद, संवाद, आपसी सम्मान और सीखने के प्रति स्वाभाविक प्रेम वापस लाना जरूरी है। यह दृष्टिकोण arts, humanities और social sciences के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां शिक्षा कई बार परीक्षा, qualification और certificate-driven outcomes तक सीमित हो जाती है। इस सोच के अनुसार रोजगार और बौद्धिक आत्मविश्वास गहरे learning experience से विकसित होने चाहिए, न कि केवल qualification को अंतिम लक्ष्य मानकर। एक व्यापक Knowledge Ecosystem की जरूरत T.R.I.S. इसी सोच के अनुरूप visual, textual, audio और material sources को एक साथ लाकर भारत को समझने के लिए एक व्यापक knowledge ecosystem विकसित करने की दिशा में काम करता है। इसका Archive & Library इस विचार पर आधारित है कि किसी सभ्यता की जटिलता को कोई एक format पूरी तरह प्रस्तुत नहीं कर सकता। नई सामग्री और नए संदर्भ सामने आने पर scholarship को भी अपने निष्कर्षों की समीक्षा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। आखिरकार, बहस केवल इस बात पर नहीं है कि बच्चों को क्या पढ़ाया जाए, बल्कि इस पर भी है कि उन्हें ज्ञान से सामना करना कैसे सिखाया जाए। क्या वे केवल अतीत को याद करें, या उसे देखने, समझने और उस पर सवाल करने की क्षमता भी विकसित करें? पाठ्यपुस्तक से आगे बढ़कर archive, image, sound और material culture को learning process

Cultural Journeys

गांधी स्मृति भवन में भक्ति और संस्कृति का संगम, आशिम खेत्रपाल ने ‘हनुमान अंश’ की टीम को ‘साइटेशन ऑफ ऑनर’ से किया सम्मानित

शिरडी साईं बाबा फाउंडेशन के संस्थापक,आशिम खेत्रपाल  ने ‘हनुमान अंश’ की टीम को किया सम्मानित नई दिल्ली : फिल्म ‘शिरडी साईं बाबा’ के निर्माता और शिरडी साईं बाबा फाउंडेशन के संस्थापक एवं मैनेजिंग ट्रस्टी आशिम खेरतपाल ने नई दिल्ली स्थित गांधी स्मृति में आयोजित एक विशेष समारोह में फिल्म ‘हनुमान अंश’ के कलाकारों, निर्माता और निर्देशक को ‘‘साइटेशन ऑफ ऑनर”’ से सम्मानित किया। शिरडी साईं बाबा फाउंडेशन और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (GSDS) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह का उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना, आस्था और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष श्री विजय गोयल, शिरडी लोकसभा क्षेत्र के सांसद भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, शिरडी साईं बाबा फाउंडेशन के संस्थापक आशिम खेत्रपाल और साईं बाबा पीस अवॉर्ड्स की इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिस्ट संजना जॉन विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह में फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी, मुख्य अभिनेता शोभिनव सत्य, बाल कलाकार विहान शेगड़े, जिन्होंने फिल्म में 14 वर्षीय बाबा की भूमिका निभाई है, तथा निर्माता नम्रता और रागिनी सोना सहित फिल्म की टीम ने शिरकत की। इस दौरान आशिम खेत्रपाल ने फिल्म की पूरी टीम को ‘साइटेशन ऑफ ऑनर’ प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में  आशिम खेत्रपाल कहा, “आज से 26 साल पहले हमने शिरडी के साईं बाबा के जीवन पर फिल्म ‘Shirdi Sai Baba’ बनाई थी, जिसका उद्देश्य साईं बाबा के संदेशों और उनकी जनकल्याण की भावना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना था। आज मुझे खुशी है कि ‘हनुमान अंश’ के निर्माताओं और कलाकारों ने भी एक ऐसी फिल्म बनाई है, जो दर्शकों के भीतर आस्था और धार्मिक चेतना को जागृत करती है। इस फिल्म की पूरी टीम को ‘साइटेशन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित करते हुए मुझे एक विशेष आध्यात्मिक अनुभूति हो रही है। मेरा मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करने का एक सशक्त जरिया भी है।” इस अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष श्री विजय गोयल ने कहा, “‘हनुमान अंश जैसी फिल्में हमारी आध्यात्मिक परंपराओं और धार्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। आज महात्मा गांधी के स्मृति स्थल पर इस फिल्म की पूरी टीम का सम्मान होना अपने आप में विशेष महत्व रखता है। यह सम्मान उन कलाकारों और फिल्मकारों के प्रयासों को प्रोत्साहित करता है, जो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को सिनेमा के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं।” समारोह का मुख्य आकर्षण ‘हनुमान अंश’ की पूरी टीम का सम्मान रहा। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। ऐतिहासिक गांधी स्मृति परिसर में आयोजित यह समारोह शिरडी साईं बाबा फाउंडेशन और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति की शांति, सद्भाव, सांस्कृतिक जागरूकता और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने की साझा पहल का हिस्सा रहा। कार्यक्रम के अंत में आशिम खेत्रपाल ने ‘हनुमान अंश’ की पूरी टीम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और फिल्मकारों से भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से प्रेरित विषयों पर सार्थक सिनेमा बनाने का आह्वान किया।

Lifestyle & Glamour

फैशन शिक्षा में बड़ा बदलाव: पारंपरिक 4 साल की डिग्री के मुकाबले मात्र 12 महीने में AI से तैयार होंगे ग्लोबल ब्रांड फाउंडर्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रेखांकित डिज़ाइन प्रोफेशनल्स की कमी को पूरा करने के लिए ‘एमरल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन’ (EIF) ने लॉन्च किए देश के पहले एडवांस्ड AI फैशन प्रोग्राम। नई दिल्ली : भारत में दशकों पुरानी और महंगी फैशन शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से बदलने के उद्देश्य से, देश के पहले प्राइवेट AI फैशन डिज़ाइन संस्थान, एमरल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन (EIF) ने नई दिल्ली में अपने विशेष फास्ट-ट्रैक प्रोग्राम्स की घोषणा की है। यह संस्थान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हर 7 दिन में अपडेट होने वाले लाइव करिकुलम की मदद से पारंपरिक 4 साल की डिग्रियों के विकल्प के रूप में मात्र 12 महीने का कोर्स लेकर आया है, जो छात्रों को सीधे ग्लोबल फैशन एंटरप्रेन्योर (बिजनेस मालिक) बनने के लिए तैयार करेगा। लाखों रुपये और समय की होगी बचत : देश में पारंपरिक फैशन डिग्रियों की अवधि चार साल की होती है और इसकी लागत 15 से 40 लाख रुपये के बीच आती है, जहाँ छात्र अक्सर आउटडेटेड थ्योरी सीखते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए EIF ने अपना खुद का प्रोप्राइटरी एआई इंजन, “Emerald Intelligence” और ‘मॉडर्न डिज़ाइनर टूलकिट’ विकसित किया है। यह तकनीक छात्रों को किसी भी फैशन कलेक्शन को सामान्य से 50 गुना तेजी से तैयार करने में सक्षम बनाती है। इसके अलावा, छात्रों को लाइव ट्रेंड्स, कलर्स और स्टाइल फोरकास्टिंग का मुफ्त एक्सेस मिलता है, जिससे बाजार रिसर्च पर खर्च होने वाले करीब 10 से 15 लाख रुपये की सीधी बचत होती है और बिना बिके माल (Dead Stock) का जोखिम खत्म होता है। वित्त मंत्री के विज़न को मिलेगा बढ़ावा : हाल ही में माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश भर में प्रशिक्षित डिज़ाइन प्रोफेशनल्स की भारी कमी और बढ़ती मांग को रेखांकित किया था। वर्तमान में वैश्विक फैशन उद्योग $1.8 ट्रिलियन का है, जिसके साल 2030 तक $3 ट्रिलियन (लाख करोड़) पार करने का अनुमान है। EIF का मुख्य उद्देश्य भारतीय डिजाइनरों और स्थानीय ब्रांड्स को वैश्विक स्तर पर इस विशाल बाजार के शीर्ष पर खड़ा करना है। वर्ल्ड-क्लास फैकल्टी और इनोवेटिव कोर्सेस : संस्थान ने वैश्विक स्तर की फैकल्टी और NIFT मास्टर्स गोल्ड मेडलिस्ट्स के मार्गदर्शन में तीन विशेष हाई-इम्पैक्ट प्रोग्राम्स पेश किए हैं: 1. 12-महीने का AI फैशन मास्टर प्रोग्राम: फैशन डिजाइनिंग, एडवांस्ड बिजनेस मैनेजमेंट, 10 लाख+ डिजिटल एसेट्स, हाई-एंड फैशन शो और गारंटेड इंडस्ट्री इंटर्नशिप का संपूर्ण सफर। 2. 6-महीने का AI फैशन प्रोग्राम: डिजिटल गारमेंट क्यूरेशन और 50 गुना अधिक प्रोडक्टिविटी वाला शॉर्ट-टर्म कोर्स। 3. 3-महीने का AI फैशन स्पीड कोर्स: उन लोगों के लिए एक एडवांस एक्सीलेटर प्रोग्राम, जिन्हें पहले से फैशन का बेसिक ज्ञान है। संस्थान का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद मजबूत है और इसके एलुमनाई नेटवर्क में IIT बॉम्बे के पूर्व छात्रों से लेकर भारत और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के स्थापित ब्रांड ओनर्स शामिल हैं। एडमिशन के लिए रिज्यूमे की ज़रूरत नहीं, सीधे व्हाट्सऐप पर होगी पिच : EIF ने पारंपरिक कागज़ी दाखिला प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए ‘विज़न-फर्स्ट’ एडमिशन प्रोसेस अपनाया है। इसके तहत आवेदकों को केवल एक 60-सेकंड का वीडियो रिकॉर्ड करना होगा, जिसमें उन्हें बताना होगा कि वे फैशन की दुनिया में क्या नया करना चाहते हैं। इस वीडियो पिच को सीधे व्हाट्सऐप (WhatsApp) के ज़रिए सबमिट किया जा सकता है। इच्छुक छात्र और आवेदक कोर्स, एआई टूल्स या प्रवेश प्रक्रिया की पूरी जानकारी के लिए संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट eifdelhi.com पर जा सकते हैं या मीडिया संपर्क सूत्र +91 8899212368 पर संपर्क कर सकते हैं।

Business Buzz

एसबीआई कार्ड ने एसबीआई योनो के ज़रिए फिक्स्ड डिपॉज़िट पर आधारित सिक्योर्ड एडवांटेज एसबीआई कार्ड लॉन्च किया

इसके जरिए ग्राहक अब एसबीआई योनो पर 100% डिजिटल और आसान प्रक्रिया से सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड ले सकते हैं डिजिटल आवेदन प्रक्रिया के ज़रिए बस 10 मिनट में सिक्योर्ड एडवांटेज एसबीआई कार्ड प्राप्त किया जा सकता है नई दिल्ली : भारत में क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली सबसे बड़ी कंपनी, एसबीआई कार्ड ने एसबीआई योनो पर एडवांटेज एसबीआई कार्ड के लॉन्च की घोषणा की, जिससे ग्राहकों को बिना किसी झंझट के डिजिटल तरीके से फिक्स्ड डिपॉज़िट पर आधारित सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड पाने की सुविधा मिलेगी। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अध्यक्ष, श्री चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने इस डिजिटल प्रक्रिया का शुभारंभ किया और इस मौके पर एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर, श्री अश्विनी कुमार तिवारी और एसबीआई कार्ड की मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ, श्रीमती सलिला पांडे भी मौजूद थीं। एसबीआई योनो पर शुरू की गई इस पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से ग्राहकों के लिए क्रेडिट की सुविधा पाना अब और भी आसान हो गया है। ग्राहक एसबीआई योनो के ज़रिए चार अलग-अलग सिक्योर्ड एडवांटेज एसबीआई कार्ड – यानी एसबीआई कार्ड एलीट, एसबीआई कार्ड प्राइम, सिंपलीक्लिक एसबीआई कार्ड और सिंपलीसेव एसबीआई कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस लॉन्च के जरिए एसबीआई कार्ड की क्रेडिट कार्ड विशेषज्ञता और एसबीआई की व्यापक पहुंच के साथ योनो प्लेटफ़ॉर्म की डिजिटल खूबियों को जोड़ा गया है, ताकि ग्राहकों को एक सरल और बेहतर अनुभव मिल सके। एसबीआई में फिक्स्ड डिपॉज़िट रखने वाले ग्राहक अब एसबीआई योनो पर बिना किसी कागजी कार्रवाई के सिक्योर्ड एडवांटेज एसबीआई कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह पहल फिक्स्ड डिपॉज़िट की सुरक्षा को क्रेडिट कार्ड की सुविधा और फ़ायदों के साथ जोड़ती है, जो ग्राहकों के लिए रोज़मर्रा के खर्चों को और भी फ़ायदेमंद बना देती है। एसबीआई कार्ड की मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफ़िसर, श्रीमती सलिला पांडे ने कहा, “अब ग्राहक बेहद आसान और सुविधाजनक तरीके से, बिना किसी कागजी कार्रवाई के 100% डिजिटल प्रक्रिया के ज़रिए सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड ले सकते हैं। एसबीआई योनो पर एडवांटेज एसबीआई कार्ड के लिए शुरू की गई इस नई डिजिटल प्रक्रिया से क्रेडिट कार्ड प्राप्त करना अब और भी आसान हो गया है, जिससे ग्राहक कुछ ही मिनटों में अपने फिक्स्ड डिपॉज़िट पर आधारित सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड हासिल कर सकते हैं। एसबीआई योनो पर उपलब्ध एसबीआई क्रेडिट कार्ड्स की बड़ी रेंज ग्राहकों को ज़्यादा विकल्प देती है और वे अपनी ज़रूरतों के हिसाब से अपने लिए सही कार्ड चुन सकते हैं। एसबीआई कार्ड में, हमने ग्राहकों को हमेशा सबसे ज्यादा अहमियत दी है और हम हर कदम पर ग्राहकों के अनुभव को बेहतर और सार्थक बनाने की कोशिश करते रहते हैं।” एसबीआई योनो पर उपलब्ध सिक्योर्ड एडवांटेज एसबीआई कार्ड लोगों के लिए औपचारिक क्रेडिट सिस्टम से जुड़ने का एक आसान माध्यम है, खासकर उन ग्राहकों के लिए जो अपना क्रेडिट प्रोफ़ाइल बनाना या उसे मज़बूत करना चाहते हैं। इस नए कदम से साफ जाहिर है कि एसबीआई कार्ड डिजिटल तरीके से ग्राहकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने की कोशिश के साथ औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहा है। मौजूदा दौर में ग्राहक फाइनेंस से जुड़ी सेवाएं तुरंत, आसान तरीके से और एक ही जगह पर प्राप्त करने की उम्मीद करते हैं, और एसबीआई कार्ड ने टेक्नोलॉजी पर आधारित ऐसे समाधानों में निवेश करना जारी रखा है जो रोजमर्रा के वित्तीय लेनदेन को और भी ज्यादा आसान बनाते हैं।

Bollywood Beats

संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ से रणबीर कपूर के फर्स्ट लुक पोस्टर ने दर्शकों पर छोड़ा कभी न मिटने वाला इंप्रेशन

रणबीर कपूर का सामने आया संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ से फर्स्ट लुक, देख कर हो जाएंगे दीवाने संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ से रणबीर कपूर के फर्स्ट लुक ने बढ़ाई फैंस की धड़कन संजय लीला भंसाली द्वारा बनाई जा रही ‘लव एंड वॉर’ सच में उन सबसे बड़ी फिल्मों में से एक है, जिसका दर्शकों द्वारा सबसे ज्यादार किया जा रहा है। इस फिल्म में इंडस्ट्री के तीन सबसे बड़े और बेहद टैलेंटेड स्टार्स जैसे रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, और विक्की कौशल लीड रोल में हैं। इस तरह से SLB अपनी दमदार कास्ट के साथ दर्शकों के लिए एक बेहतरीन और कभी न भूलने वाली वन-ऑफ-अ-काइंड सिनेमैटिक स्पेक्टेकल बना रहे हैं। बेसब्री से फिल्म से जुड़ी अपडेट का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए अब मेकर्स ने फिल्म की मच अवेटेड पहली झलक पेश कर दी है। जी हां, फिल्म से रणबीर कपूर का फर्स्ट लुक पोस्टर आउट कर दिया गया है। रणबीर कपूर जारी किए गए फर्स्ट लुक पोस्टर में बहुत अच्छे लग रहे हैं, और एक और अलग किरदार में परफेक्शन के साथ डूबे हुए नजर आ रहे हैं। SLB के हर प्रोजेक्ट की तरह इस प्रोजेक्ट में भी भव्यता और बारीकी से हर एक बात पर ध्यान दिया गया है, जिसका सबूत यह पोस्टर है। पोस्टर से यह साफ है कि फिल्म सिल्वर स्क्रीन पर अपना जादू चलाने वाली है। रणबीर इस तरह के अवतार में पहले कभी नहीं देखे गए हैं, और दर्शकों ने भी लव एंड वॉर में उनके इस तरह के लुक की उम्मीद नहीं की थी। कहना होगा कि SLB ने इस बार भी अपना कमाल दिखाया है, जिससे दर्शक हैरान रह गए हैं। पोस्टर से साथ सामने आया BGM विज़ुअल्स के साथ पूरी तरह से जा रहा है। इस तरह से एक बार फिर म्यूजिक के मामले में SLB अपनी कमाल के परफेक्शन को दर्शकों के सामने पेश कर रहे हैं। मेकर्स ने सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है – https://www.instagram.com/p/DdqIVtKoV_s/?stkn=anhiOGk3cXNqcGJ2 SLB द्वारा स्क्रीन पर रोमांस लाते देखना किसी ट्रीट से कम नहीं होता, ऐसे में दर्शक लव एंड वॉर के जरिए लंबे समय के बाद फिर से प्यार का जादू देखने के साथ महसूस करने वाले हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि पोस्टर ने फिल्म की रिलीज़ के लिए एक्साइटमेंट को अलग लेवल पर पहुंचा दिया है। संजय लीला भंसाली की “लव एंड वॉर” में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल लीड रोल्स में हैं। यह 21 जनवरी 2027 को दुनिया भर में हिंदी, तमिल और तेलुगु में रिलीज होने के लिए तैयार है।

Expert Opinion

Seed industry aims to raise India’s share of global seed trade from 1% to 10% by 2035 : FSII

Seed industry experts launched the report on vegetable seed market on 10th AGM of FSII Industry seeks a single national framework, faster approvals and stronger IP protection to boost innovation in oilseeds and pulses New Delhi : The Indian seed industry aims to raise India’s share of global seed trade from around 1% to 10% by 2035, while strengthening domestic innovation and self-reliance in strategically important crops such as oilseeds and pulses, the Federation of Seed Industry of India (FSII) said on Thursday. Setting out the goal at the FSII Knowledge Day 2026, held as part of its 10th Annual General Meeting in New Delhi, FSII said the industry, valued at $3.6 billion and expected to cross $5 billion by 2030, will contribute to Atmanirbharta in line with the vision of Prime Minister Narendra Modi. Ajai Rana, Chairman, FSII and MD & CEO, Savannah Seeds, said, “India has the science, the talent and the farmers to become a major player in the global seed market. Government initiatives such as the national Mission on High-Yielding Seeds are important steps. The industry is ready to invest more in research, especially in oilseeds and pulses.” Outlining the industry’s asks, he said, “We need a single national framework for seed regulation with predictable timelines, faster science-based approvals for new varieties, traits and technologies, and stronger protection of intellectual property, especially in oilseeds and pulses. This will give companies the confidence to make long-term investments.” The industry believes that there is merit in giving a decisive push to R&D investments as it is directly proportional to a nation’s GDP. “While developed countries spend about 3-4% of their GDP on R&D, our investment is much below one percent. Research suggests that every rupee spent on on R&D can give a return of Rs 13,” added Rana. Rana also said that there was need for the industry and government to work together. Citing edible oil import dependence, he added, “If government and industry can come together, we can achieve self sufficiency in edible oil in less than 10 years. The industry has developed mustard hybrids which give farmers yields of one tonne per acre adding significantly to their incomes, unlike wheat which gives less returns. If we can divert some land to mustard from wheat, this shall significantly enhance farmers income, while ensuring self-sufficiency, and reducing our import dependence.” Kishore Jaiswal, progressive farmer and Convenor, National Farmers’ Empowerment Initiative (NFEI), said, “Farmers adopt better seed once they see the results in their fields. Good seed gives us higher yields and better protection against pests and bad weather. Indian farmers want access to the latest seed technologies at the same time as farmers in other countries.” Experts also highlighted the growing economic and resilience value of improved seed technologies among vegetable farmers in India. Evidence from vegetable farmers across five major vegetable-producing states shows that 93% of farmers use hybrid seed, with 68% sourcing seed through dealers, while quality, cost and reliability remain key considerations in seed selection. “Our findings indicate that improved seed is translating into economic value, with an average cultivation cost of Rs 1.07 lakh per acre and an average reported return on investment (ROI) of 2.7x. Importantly, 85% of farmers reported improved crop resilience, while 61% considered contemporary varieties climate-ready, underlining the role of varietal innovation in helping farmers respond to changing growing conditions,” said Dr K Vijayaraghavan, Chairman and CEO, Sathguru Management Consultants, Hyderabad. A Report “Transformation of India’s Vegetable Seed Sector” prepared by Sathguru Management Consultants and Ministry of Foreign Affairs, Netherlands. The findings of the Report also point to an opportunity to unlock further value, with awareness and adoption of specific climate- and biotic-stress traits remaining limited and farmers continuing to rely on generic pesticide applications for crop protection. Also present were Dr. Paresh Verma, Director General, FSII; Marion van Schaik, Counsellor, Agriculture, Embassy of the Kingdom of the Netherlands, New Delhi; and Dr. Manish Diwan, GGM & Head, RDF, BIRAC.

Cultural Journeys

ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026 : हमारी कहानियाँ, हमारा भविष्य” – नौ देशों के रंगमंच से गूंजेगी एकता की गाथा

भारत की मेजबानी में सजेगा विश्व रंगमंच – “हमारी कहानियाँ, हमारा भविष्य” थीम पर होगा ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल संस्कृति मंत्रालय/ नई दिल्ली : ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026, ‘हमारी कहानियाँ, हमारा भविष्य’ थीम के तहत अलग-अलग थिएटर ट्रेडिशन को एक साथ लाएगा, जिसमें 9 देश और 100 से ज़्यादा देश शामिल होंगे। श्री विवेक अग्रवाल, IAS, माननीय सेक्रेटरी, मिनिस्ट्री ऑफ़ कल्चर, नई दिल्ली में होने वाले तीन दिन के इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल पर मीडिया को संबोधित किया। नई दिल्ली, भारत में हुए ब्रिक्स समिट के सफल समापन के बाद, भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत ‘ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल’ 2026 के साथ एक और महत्वपूर्ण महोत्सव का आतिथ्य करने के लिए तैयार है । यह फेस्टिवल 12 से 14 अक्टूबर, 2026 तक नई दिल्ली में 9 देशों – भारत, थाईलैंड, इंडोनेशिया, रूस, वियतनाम, ईरान, साउथ अफ्रीका, कज़ाकिस्तान, इथियोपिया और ब्रिक्स के सदस्य और पार्टनर देशों के सौ से अधिक कला-प्रेमियों के साथ होगा। यह फेस्टिवल ब्रिक्स सदस्य देशों और पार्टनर देशों के थिएटर प्रैक्टिशनर, स्कॉलर्स, स्टूडेंट्स और ऑडियंस को थिएटर ट्रेडिशन, कंटेंपररी परफॉर्मेंस प्रैक्टिस और शेयर्ड कल्चरल वैल्यूज़ की विविधता का संगम के लिए एक साथ लाएगा । इस महोत्सव में हिस्सा लेने वाले देशों के ‘नेशनल थिएटर स्कूल’ और महत्वपूर्ण थिएटर इंस्टीट्यूशन हिस्सा लेंगे, जिसमें रूस को उसके ‘नेशनल इंस्टीट्यूट’ और ‘नेशनल कल्चरल इंस्टीट्यूट’ के दो समूह अपनी प्रस्तुति करेंगे। महोत्सव का उद्घाटन 12 अक्टूबर को नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा परिसर में होगा । नई दिल्ली के चार प्रेक्षागृहों में नाट्य प्रस्तुतियाँ होंगी, जिनमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अभिमंच ऑडिटोरियम तथा सम्मुख सभागार, कमानी सभागार, एल.टी.जी. सभागार, मेघदूत थिएटर शामिल हैं। प्रतुतियों के लिए टिकट BookMyShow पर ₹200/- प्रति टिकट की आसान कीमत पर मिलेंगे, जिससे दर्शक इंटरनेशनल थिएटर शो-केस का अनुभव कर सकेंगे। मीडिया को संबोधित करते हुए, श्री विवेक अग्रवाल, IAS, माननीय सेक्रेटरी, मिनिस्ट्री ऑफ़ कल्चर, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया, भारत की ओर से ‘ब्रिक्स  कल्चरल एजेंडा’ में इस पहल की अहमियत पर ज़ोर दिया गया । भारत ने 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है, जिसका थीम है “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी”, यानी ‘”सुदृढ़ता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” जिसमें ब्रिक्स देशों में कोऑपरेशन को मज़बूत करने के लिए आम-जन को ध्यान में रखकर तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए दृष्टि अपनाया गया है। श्री विवेक अग्रवाल, आईएएस, माननीय सचिव, संस्कृति मंत्रालय ने कहा, भारत की अध्यक्षता में, ब्रिक्स कल्चर ट्रैक के ज़रिए सहयोग तीन ज़रूरी क्षेत्र पर केंद्रित है: • कॉपीराइट, डिजिटल इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित कल्चरल और क्रिएटिव इंडस्ट्री में सहयोग को बढ़ावा देना; • कल्चरल हेरिटेज की सुरक्षा को मज़बूत करना और कल्चरल प्रॉपर्टी की वापसी के लिए सहयोग करना; और • क्लाइमेट रेजिलिएंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में कल्चर की भूमिका पर बातचीत को बढ़ावा देना। भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स कल्चर वर्किंग ग्रुप के एंगेजमेंट के दौरान संस्कृति मंत्रालय इन ज़रूरी बातों पर भी ज़ोर देगी। कल्चर ट्रैक के तहत BRICS कल्चर वर्किंग ग्रुप (CWG) और ब्रिक्स देशों  के कल्चर मिनिस्टर्स की बैठक के ज़रिए एंगेजमेंट को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे हिस्सा लेने वाले देशों के बीच कोलेबोरेटिव इनिशिएटिव, प्रोफेशनल एक्सचेंज और इंस्टीट्यूशनल पार्टनरशिप हो रही है। इस बैकग्राउंड में, ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026 थिएटर के ज़रिए आर्टिस्टिक और कल्चरल एक्सचेंज के लिए एक डेडिकेटेड प्लेटफॉर्म देना चाहता है। यह फेस्टिवल हिस्सा लेने वाले देशों की नाट्य प्रस्तुतियाँ दिखाएगा, जो क्लासिकल, कंटेम्पररी और एक्सपेरिमेंटल फॉर्म्स सहित थिएटर ट्रेडिशन की एक बड़ी रेंज को रिप्रेजेंट करेगा। गम्भीर आर्टिस्टिक एंगेजमेंट और प्रोफेशनल एक्सचेंज को बढ़ावा देने के लिए, हर थिएटर परफॉर्मेंस के बाद सुबह एक इंटरैक्टिव थिएटर वर्कशॉप और डिस्कशन सेशन रखा जाएगा। इन सेशन में उन प्रस्तुतियों के डायरेक्टर, कास्ट और क्रू मेंबर शामिल होंगे। इंटरैक्टिव सेशन में ये शामिल होंगे: ● उस प्रोडक्शन के आर्टिस्टिक विज़न, थीम और प्रोडक्शन प्रोसेस पर डिस्कशन; ● परफॉर्मेंस ट्रेडिशन, एक्टिंग मेथड, स्टेजक्राफ्ट और टेक्निकल डिज़ाइन पर एक्सचेंज; ● ऑडियंस के साथ इंटरेक्शन और सवाल-जवाब सेशन; और ● इंटरकल्चरल लर्निंग और क्रिएटिव डायलॉग को बढ़ावा देने के मकसद से कोलेबोरेटिव एक्सरसाइज। इस महोत्सव का उद्येश्य ब्रिक्स  देशों में थिएटर कम्युनिटी के बीच आपसी सीख को बढ़ावा देना, प्रोफेशनल नेटवर्क को मजबूत करना और लंबे समय तक सहयोग को बढ़ावा देना है। थिएटर, अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराओं और वर्तमान से जुड़ी कहानियों को एक साथ लाने की अपनी काबिलियत से, इंसानी अनुभवों को जानने के लिए एक मज़बूत प्लेटफॉर्म देता है। यह फेस्टिवल परफॉर्मेंस की इस आम भाषा का इस्तेमाल समाजों के बीच कनेक्शन को दिखाने के लिए करना चाहता है, साथ ही ब्रिक्स देशों के बीच कल्चरल सहयोग, सबको साथ लेकर चलने और क्रिएटिव सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। इसलिए यह फेस्टिवल न सिर्फ थिएटर की बेहतरीन कला दिखाने का काम करेगा, बल्कि ब्रिक्स सहयोग के दूरदर्शिता के साथ कल्चरल बातचीत, प्रोफेशनल लेन-देन और लोगों के बीच जुड़ाव के लिए एक आधार भी बनेगा। नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (NSD), जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है, ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026 को सुव्यवस्थित रूप में आयोजित करने के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगा।

Bollywood Beats

फातिमा सना शेख ने फेमिनिज़्म, प्रियंका चोपड़ा जोनस और ‘हुंकार: द रोअर’ में पुलिसवाले का किरदार निभाने पर की बात

“मैं सिर्फ बराबरी के अधिकार मांग रही हूं”: फातिमा सना शेख ने बताया कि वह खुद को फेमिनिस्ट क्यों कहती हैं फातिमा सना शेख बोलीं, “फेमिनिज्म का मतलब पुरुषों के अधिकार छीनना नहीं, बराबरी मांगना है” फातिमा सना शेख ने हमेशा खुद को फेमिनिस्ट कहने से परहेज़ नहीं किया है। ‘हुंकार: द रोअर’ में एक जांबाज़ पुलिस ऑफिसर का किरदार निभाने वाली फातिमा ने उस शब्द को लेकर खुलकर बात की, जिसे इंडस्ट्री में आज भी कई लोग कहने से बचते हैं। इस दौरान उन्होंने प्रियंका चोपड़ा जोनस का भी ज़िक्र किया, जिन्होंने हमेशा इस शब्द को खुलकर अपनाया है। फातिमा कहती हैं, “फेमिनिज़्म को बहुत से लोग एक बुरे शब्द की तरह देखते हैं। यह देखकर हैरानी होती है कि कुछ एक्ट्रेसेस खुद को फेमिनिस्ट नहीं कहतीं। फेमिनिस्ट होने का मतलब यह नहीं है कि मैं किसी पुरुष के अधिकार छीन रही हूं। मैं तो सिर्फ अपने लिए बराबरी के अधिकार मांग रही हूं।” वह प्रियंका चोपड़ा का उदाहरण देते हुए कहती हैं कि खुद को फेमिनिस्ट कहने से दर्शकों का प्यार कम नहीं होता। “प्रियंका चोपड़ा खुद को फेमिनिस्ट कहती हैं और उनकी बहुत बड़ी मेल फैन फॉलोइंग है। अगर आपकी नीयत साफ है और आप इस बात को सही तरीके से रखते हैं, तो लोग आपकी बात जरूर सुनेंगे।” जियोहॉटस्टार की इस सीरीज में फातिमा एक पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभा रही हैं, जो एक ऐसे मामले की जांच करती है, जिसमें अनीत पड्डा द्वारा निभाया गया एक नाबालिग लड़की का किरदार एक आध्यात्मिक गुरु पर यौन शोषण का आरोप लगाता है। फातिमा इसे अपने करियर के सबसे शानदार और सीख देने वाले अनुभवों में से एक मानती हैं। उनके मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की खास बात यह रही कि मेकर्स ने उन्हें हमेशा बराबरी का दर्जा दिया और उनकी राय को महत्व दिया। बिरला स्टूडियोज और अप्लॉज एंटरटेनमेंट ने पर्पल पेबल पिक्चर्स और मंगाटा फिल्म्स के साथ मिलकर इस सीरीज का निर्माण किया है। करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा के निर्देशन में बनी ‘हुंकार: द रोअर’ 25 सितंबर से जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम होगी।

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