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कंगना रनौत ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का जताया आभार, ‘भारत भाग्य विधाता’ को किया टैक्स फ्री घोषित

नई दिल्ली : स्टारर फिल्म भारत भाग्य विधाता 12 जून को रिलीज़ होने जा रही है। फिल्म की रिलीज़ से पहले कंगना अपनी टीम के साथ देशभर में यात्रा कर रही हैं, जहां वे उन असली नायकों को सम्मानित कर रही हैं जो संकट के समय चुपचाप देश की सेवा करते हैं। भुवनेश्वर और रायपुर के बाद यह अभियान दिल्ली पहुंचा, जहां फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस मौके पर दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री भी मौजूद रहीं। कंगना और मुख्यमंत्री ने मिलकर दिल्ली के कई रियल-लाइफ हीरोज को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया। फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भारत भाग्य विधाता को दिल्ली में टैक्स फ्री घोषित करने का ऐलान किया। इस कार्यक्रम में कई केंद्रीय मंत्री और गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए, जिनमें अन्नपूर्णा देवी, गजेंद्र सिंह शेखावत, डॉ. राज भूषण चौधरी, प्रताप राव जाधव, गिरिराज सिंह और आशीष सूद प्रमुख रहे। इस अवसर पर कंगना रनौत ने कहा, “मैं हमारी फिल्म की पूरी टीम की ओर से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दिल से धन्यवाद करती हूं। उन्होंने दिल्ली के विकास और प्रशासन में जो परिवर्तन किए हैं, वह सराहनीय हैं। जब मैंने उन्हें इस स्क्रीनिंग के लिए आमंत्रित किया, तो उन्होंने तुरंत हामी भर दी, जिसके लिए मैं सदैव आभारी रहूंगी।” वहीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कंगना की सराहना करते हुए कहा, “कंगना रनौत संसद में एक मजबूत आवाज हैं, जो सिनेमा और देश के लोगों के लिए लगातार संघर्ष करती हैं। उनकी फिल्म यह संदेश देती है कि देशभक्ति केवल वर्दीधारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक के भीतर होती है।” इस विशेष पहल के तहत फिल्म की टीम देशभर में अलग-अलग शहरों में स्क्रीनिंग आयोजित कर रही है, जहां पुलिसकर्मी, नर्स, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड और अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स को आमंत्रित कर सम्मानित किया जा रहा है। दिल्ली में भी कई अनदेखे नायकों—निशी पाठक, पुष्पा, सुमन, मेनका, नम्रता यादव, नीति शर्मा, बीके खुराना और शशि लाल—को ‘भारत भाग्य विधाता’ बैज देकर सम्मानित किया गया। फिल्म को डॉ. जयंतीलाल गड़ा (पेन स्टूडियोज) द्वारा प्रस्तुत किया गया है और इसे पेन स्टूडियोज, मणिकर्णिका फिल्म्स और परमहंस क्रिएशंस ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

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अटारी बॉर्डर पर ‘मैं वापस आऊंगा’ ने रचा इतिहास

ए.आर. रहमान और इम्तियाज़ अली ने दी देश के वीरों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ ने आज एक ऐतिहासिक पल दर्ज किया, जब इसके संगीतकार पद्म भूषण सम्मानित, ऑस्कर और ग्रैमी विजेता ए.आर. रहमान ने पहली बार प्रतिष्ठित अटारी बॉर्डर पोस्ट पर लाइव परफॉर्मेंस दी। यह प्रस्तुति देश के बहादुर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों को समर्पित थी। प्रसिद्ध बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के दौरान आयोजित ‘जय हो – ए म्यूज़िकल सैल्यूट टू द ब्रेवहार्ट्स’ कार्यक्रम में हजारों दर्शक JCP स्टेडियम में जुटे। देशभक्ति, गर्व और कृतज्ञता के भाव से सराबोर यह माहौल बेहद भावुक और ऊर्जा से भरपूर रहा। स्टेडियम में गूंजती तालियों और जयकारों ने इस आयोजन को एक ऐतिहासिक क्षण बना दिया।  अटारी बॉर्डर पर इस आयोजन का फिल्म से विशेष संबंध भी है। ‘मैं वापस आऊंगा’ भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित एक भावनात्मक कहानी है, जो उस दौर के लोगों की यादों और अनुभवों से प्रेरित है। यह कहानी बिछड़े रिश्तों, अधूरी मोहब्बत और दिलों में बसे दर्द को दर्शाती है। कार्यक्रम की शुरुआत निर्देशक इम्तियाज़ अली, बिरला स्टूडियोज़ की अनन्या बिरला, अभिनेता वेदांग रैना और विंडो सीट फिल्म्स के निर्माता मोहित चौधरी ने दर्शकों का स्वागत कर और BSF के जवानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। फिल्म के निर्माताओं ने अपने आगामी म्यूज़िक एल्बम को भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को समर्पित किया। संगीतमय शाम की शुरुआत ए.आर. रहमान के मधुर गीत ‘चंदा सूरज लाखों तारे’ से हुई। इसके बाद फिल्म के गीतों की प्रस्तुतियों ने माहौल को और जीवंत बना दिया। ‘मस्कारा’ गीत को नीलांजना घोष और वेदांग रैना ने प्रस्तुत किया, जबकि ‘इश्क मस्ताना’ को मोहित चौहान, पूजा तिवारी और नरगिस ने अपनी आवाज़ दी। कार्यक्रम का समापन रहमान के प्रसिद्ध गीत ‘मां तुझे सलाम’ के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति से भर दिया। इस मौके पर इम्तियाज़ अली ने कहा, “यह एक अनोखा और यादगार क्षण है। अटारी गेट पर ए.आर. रहमान की प्रस्तुति हमारे राष्ट्रीय जज़्बे, BSF और भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और एकता के प्रतीक के रूप में है। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि इस आयोजन का हिस्सा हूं। ‘मैं वापस आऊंगा’ जैसी फिल्म, जो 1947 के विभाजन की पृष्ठभूमि से जन्मी है, हमें याद दिलाती है कि उस समय सिर्फ घर और ज़िंदगियां ही नहीं, बल्कि दिल भी टूटे थे। हम इस फिल्म के जरिए प्यार का संदेश लेकर आए हैं, क्योंकि अंत में वही हमें जोड़कर रखता है।” इम्तियाज़ अली की भावनात्मक दुनिया में रची-बसी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, शरवरी और वेदांग रैना मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि गीत इरशाद कामिल ने लिखे हैं। बिरला स्टूडियोज़, अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट और विंडो सीट फिल्म्स द्वारा निर्मित यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। फिल्म का संगीत टिप्स म्यूज़िक पर उपलब्ध होगा।

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दिल्ली में आयोजित हुआ अभिनेता असरानी की आखिरी फिल्म “हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं” का प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली : बहुप्रतीक्षित हिंदी फिल्म “हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं” का भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस राजधानी दिल्ली के फिल्म डिवीजन में आयोजित किया गया। यह फिल्म दिग्गज अभिनेता असरानी की आखिरी फिल्मों में से एक मानी जा रही है, जिसके चलते इस प्रोजेक्ट को लेकर दर्शकों और फिल्म प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। इस मौके पर अभिनेता मुश्ताक खान, निर्देशक राकेश सावंत और निर्माता भंवर सिंह पुंडीर उपस्थित रहे और उन्होंने मीडिया के साथ फिल्म से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। फिल्म में मिलिंद गुणाजी, जरीना वहाब, मुश्ताक खान सहित कई अनुभवी कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन राकेश सावंत ने किया है, जबकि इसे श्वेता चौहान, भंवर सिंह पुंडीर और राकेश सावंत ने प्रोड्यूस किया है। इससे पहले मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राखी सावंत ने असरानी जी को श्रद्धांजलि देते हुए फिल्म शोले के उनके आइकॉनिक जेलर किरदार पर एक विशेष प्रस्तुति दी थी, जिसने सभी को भावुक कर दिया था। दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्देशक राकेश सावंत ने बताया कि जब असरानी जी को फिल्म का शीर्षक “हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं” बताया गया, तो वे बेहद खुश हुए और उन्होंने फिल्म की सफलता के लिए आशीर्वाद दिया। फिल्म की कहानी एक रोमांचक मर्डर मिस्ट्री थ्रिलर पर आधारित है, जिसमें ठाकुर विश्वजीत सिंह और सवातेई परिवार के बीच का विवाद खौफनाक अपराध और चौंकाने वाले खुलासों में बदल जाता है। इस रहस्य की जांच इंस्पेक्टर देव और इंस्पेक्टर राणा करते हैं, जो दर्शकों को सस्पेंस, ड्रामा, रोमांस और एक्शन से भरपूर यात्रा पर ले जाते हैं। उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में शूट की गई यह फिल्म शानदार विजुअल्स, भावनात्मक कहानी और मधुर संगीत का बेहतरीन संगम प्रस्तुत करती है। निर्देशक राकेश सावंत ने कहा, “यह फिल्म हमारे लिए बेहद खास और भावुक है क्योंकि इसमें असरानी जी की यादगार परफॉर्मेंस जुड़ी हुई है। हमने दर्शकों को एक सम्पूर्ण मनोरंजन देने की कोशिश की है।” निर्माता भंवर सिंह पुंडीर ने कहा, “ट्रेलर को मिला शानदार रिस्पॉन्स हमारे लिए गर्व की बात है। यह फिल्म असरानी जी के योगदान को समर्पित है और दर्शकों को एक बेहतरीन थ्रिलर अनुभव देगी।” जया फिल्म्स और गजानन मोशन मूवीज के बैनर तले बनी इस फिल्म में असरानी, मिलिंद गुणाजी, जरीना वहाब, रक्षा गुप्ता, मुस्कान वर्मा, विष्णु शर्मा, अभिनव चौहान और मुश्ताक खान प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। “हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं” 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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‘पेद्दि’ देखते ही झूम उठे फैंस, थिएटर्स पर छाया राम चरण स्टारर ब्लॉकबस्टर का क्रेज

‘पेद्दि’ में जाह्नवी कपूर के चार्म और राम चरण के दमदार अंदाज ने जीता फैंस का दिल, सिनेमाघरों में दिख रही है दीवानगी ​राम चरण और जाह्नवी कपूर स्टारर मच-अवेटीड स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘पेद्दि’ 4 जून को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। बुच्ची बाबू सना के निर्देशन में बनी यह फिल्म काफी समय से चर्चा में है क्योंकि इसकी कहानी ‘पेद्दि राजू’ नाम के एक छोटे लड़के से प्रेरित है। पेद्दि राजू अपने गाँव में कंस्ट्रक्शन साइट्स (निर्माण स्थलों) पर काम करने वाला एक दिहाड़ी मजदूर है। फिल्म मेकर उसकी इसी प्रेरणादायक कहानी को ‘पेद्दि’ के जरिए बड़े पर्दे पर लेकर आ रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर शेयर किए जा रहे पोस्ट्स से साफ है कि नेटिजन्स (इंटरनेट यूजर्स) इस फिल्म और इसके कलाकारों की एक्टिंग की जमकर तारीफ कर रहे हैं। ​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में ‘पेद्दि’ को “प्योर सिनेमैटिक फायर” (सिनेमा के पर्दे पर आग) बताया गया है। इसमें राम चरण की तारीफ करते हुए लिखा गया है कि उन्होंने “अपने करियर की सबसे इंटेंस और बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है, और अपनी अनमैच्ड स्क्रीन प्रेजेंस से हर फ्रेम पर राज किया है, वहीं जाह्नवी कपूर कहानी में चार्म, इमोशन और गहराई लेकर आई हैं।” पोस्ट में आगे लिखा है, “फिल्म के एक्शन सीन्स दमदार हैं, इमोशन्स सीधे दिल को छूते हैं और बैकग्राउंड स्कोर हर बड़े सीन को अगले लेवल पर ले जाता है। यह मास एंटरटेनमेंट और दिल छू लेने वाली स्टोरीटेलिंग का एक ऐसा पावरफुल कॉम्बिनेशन है जो आपको शुरू से अंत तक बांधे रखता है। यह बड़े पर्दे का एक असली नजारा है और इस साल के सबसे यादगार थिएट्रिकल एक्सपीरियंसेज में से एक है।” एक दूसरे पोस्ट में लिखा है, “#Peddi का पहला हाफ बेहद एंगेजिंग है और हर मामले में एकदम सटीक बैठता है। इसका बैकग्राउंड स्कोर बहुत बढ़िया काम करता है। ‘राई राई रा रा’ गाना और उसके विजुअल्स थिएटर्स में एकदम धमाकेदार हैं। फर्स्ट हाफ में कई क्वालिटी सीन्स हैं, खासकर वो ‘एक रुपये वाला सीन’। क्या स्क्रीन प्रेजेंस और ऑरा है, एकदम टॉप-नॉच। शिवराज कुमार सिर्फ दो सीन्स में नजर आते हैं, लेकिन उनकी परफॉर्मेंस बेहद पावरफुल है और पहले हाफ में एक गहरी छाप छोड़ती है। फिल्म में कई इमोशनल हिस्से हैं जो बहुत खूबसूरती से काम करते हैं और दर्शकों से सीधा जुड़ाव बनाते हैं… और यह काफी रिलेटेबल भी है। खासकर प्री-इंटरवल और इंटरवल का सीक्वेंस बहुत शानदार लिखा गया है।” एक और वायरल पोस्ट में लिखा है, “#PEDDI ब्लॉकबस्टर फर्स्ट हाफ। प्री-इंटरवल से लेकर इंटरवल तक पूरी तरह से रोंगटे खड़े कर देने वाला एक्सपीरियंस है। ग्लोबल स्टार राम चरण की परफॉर्मेंस लाजवाब है और बुच्ची बाबू का डायरेक्शन बहुत बढ़िया है। हर तरफ फिल्म को लेकर बहुत पॉजिटिव बातें चल रही हैं।” ​पेद्दि एडवांस बुकिंग अपडेट: ​4 जून को रिलीज होने जा रही राम चरण की ‘पेद्दि’ ने एडवांस बुकिंग के मामले में बेहद शानदार शुरुआत की है। 3 जून को चुनिंदा स्क्रीन्स पर फिल्म के कई पेड प्रीमियर भी रखे गए थे। इंडस्ट्री ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने बिना ब्लॉक बुकिंग के एडवांस बुकिंग के शुरुआती दिनों में ही 9.82 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। अगर इसमें ब्लॉक बुकिंग को भी शामिल कर लिया जाए, तो बुधवार दोपहर तक यह आंकड़ा 16.66 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। वहीं ग्लोबल बॉक्स ऑफिस की बात करें, तो फिल्म ने दुनिया भर में एडवांस सेल्स के जरिए 35 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है।

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मूवी रिव्यू : गाँव से मैदान तक संघर्ष, पहचान और आत्मसम्मान के लिए – पेड्डी की कहानी

मूवी रिव्यू: पेड्डी  निर्देशक: बुच्ची बाबू सना कलाकार: राम चरण, जाह्नवी कपूर, बोमन ईरानी, दिव्येंदु शर्मा, शिवराजकुमार संगीत: ए. आर. रहमान रेटिंग : ⭐⭐⭐⭐ (4/5) एक साहासिक और ऊर्जा से भरा खिलाड़ी पेद्दी, जिसके क्रिकेट खेला, जिसने कुश्ती खेली, जिसने किस्मत और समय से हार न मानते हुए अपने एक पैर को गवां कर भी दौड़ में गोल्ड मेडल जीता, वो भी अपने गांव और गांव के लोगों को पहचान दिलाने के लिए। खेलों के किरदारों को लेकर इतिहास में अभी तक जितनी भी बाॅयोपिक फिल्में बनी हैं, शायद यह पेद्दी के संघर्ष को दिखाती यह फिल्म सबसे ज्यादा दमदार फिल्म है। अगर पेद्दी की जीत और संघर्ष की कहानी को इस फिल्म के माध्यम से नहीं दिखाया जाता तो, देश के इस युवा खिलाड़ी द्वारा लड़ी जंग को कोई समझ और जान नहीं पाता। धन्य हैं, वे निर्माता और निर्देशक जिन्होंने पेद्दी फिल्म को बनाकर अपनी मेहनत को बड़े पर्दे पर साकार किया। असल में कहानी यह है कि फिल्म पेड्डी एक ऐसे युवा खिलाड़ी की गाथा है जो खेल के माध्यम से अपने गाँव और समुदाय को पहचान दिलाने की कोशिश करता है। विजयनगरम का ‘आटा कूली’ यानी किराए पर खेलने वाला पहाड़िया खिलाड़ी पेद्दी (राम चरण) सिर्फ जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि अपने लोगों की अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई का चेहरा भी है। क्रिकेट से लेकर कुश्ती और दौड़ तक, उसका संघर्ष सिर्फ खेल का नहीं बल्कि सम्मान और पहचान का है। उसने अपने पूरे जीवन में अपने अस्तित्व और गांव और वहां के लोगों के आत्मसम्मान के लिए और गांव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जो लड़ाई लड़ी है। वह अद्वित्य है। पेड्डी नेे खेल के जरिए अपने गाँव और समुदाय को पहचान दिलाने का सपना देखा तो उसको पूरा भी किया। यह सिर्फ जीत की लड़ाई नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और अस्मिता की गाथा है। जहां एक खेल का मैदान उसके लिए जीवन का प्रतीक बन जाता है, जहाँ हर संघर्ष उसे सम्मान की ओर ले जाता है। अभिनय: राम चरण ने इस फिल्म में अपने करियर का सबसे दमदार प्रदर्शन दिया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, इमोशन और दृढ़ संकल्प हर फ्रेम में झलकता है। जाह्नवी कपूर का किरदार सीमित है, लेकिन उनकी मौजूदगी कहानी में एक भावनात्मक परत जोड़ती है। दिव्येंदु शर्मा का यह पहला तेलुगू डूब्यू है, उनका किरदार भी आकर्षक है। बोमन ईरानी ने मिस्टर पैस्वाल का किरदार निभाया है, जो युवा मामलों और खेल मंत्रालय से जुड़े अधिकारी हैं। वे विजयनगरम पहुँचकर पेड्डी (राम चरण) की असाधारण खेल प्रतिभा को देखते हैं और उसकी कहानी को सामने लाने का प्रयास करते हैं। वहीं केसरी पहलवान के रूप में शिवराजकुमार ने भी शानदार काम किया है। संगीत: ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म की आत्मा है। रहमान का दिल छू लेने वाला संगीत, बैकग्राउंड स्कोर हर सीन को और भी गहराई देता है। सिनेमैटोग्राफी हरे-भरे जंगल के दृश्य, गाँव की मिट्टी खेल के जुनून को बड़े परदे पर जीवंत बना देती है। खासियत: जहां इस फिल्म में खेल और इमोशन का बेहतरीन तालमेल मिलता है, वहीं राम चरण का करिश्माई अभिनय दर्शकों को जरूर भाएगा। फिल्म द्वारा एक विजेता खिलाड़ी ने किस तरह अपने गाँव की पहचान के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया यह उसी जीवन को दर्शाती एक जमीनी कहानी है। कमजोरियाँ: फिल्म की लंबाई (3 घंटे से अधिक) दर्शकों को भारी लग सकती है। असल में कहानी के दृश्य फास्ट हैं, तो कहीं-कहीं आपको कुछ बोरियत सी हो सकती है। लेकिन अभिनत्री जाह्नवी का किरदार और भी मजबूत लिखा जा सकता था। उनके किरदार के आकर्षण में कमी देखने को मिलती है। पेड्डी सिर्फ एक स्पोर्ट्स ड्रामा नहीं, बल्कि संघर्ष, पहचान और आत्मसम्मान की कहानी है। यह फिल्म दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोरती है और खेल के मैदान से बाहर भी एक गहरी सोच छोड़ जाती है। तो देर किस बात की है कल रिलीज हो रही है। अपने दोस्तों और अपने परिवार के साथ जाकर यह फिल्म जरूर देख कर आएं।

Technology & AI

हांगकांग के ईडीवेंचर्स 2026 में गलगोटिया विश्वविद्यालय के भारतीय छात्रों को ग्लोबल पहचान, 10 देशों की 19 टीमों के बीच हासिल की बड़ी सफलता

ग्रेटर नोएडा : गलगोटिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने ईडीवेंचर्स 2026 में शीर्ष स्थान प्राप्त कर ग्लोबल स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ​​यह एक ग्लोबल इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप कॉम्पिटिशन है जिसे द एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ़ हांगकांग ने होस्ट किया था। इसमें दुनिया भर की विश्वविद्यालयों के यंग इनोवेटर्स ने यूनाइटेड नेशंस सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के हिसाब से सॉल्यूशन पेश किए। 10 देशों की 19 टीमों के साथ मुकाबला करते हुए, गलगोटिया विश्वविद्यालय की दो छात्र टीमों ने इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर भारत को रिप्रेजेंट किया और एक्सेसिबिलिटी और इमर्सिव लर्निंग पर फोकस करने वाले अपने इनोवेशन-लेड सॉल्यूशंस के लिए पहचान हासिल की। अभी, खासकर ग्लोबल साउथ में, देखने में दिक्कत वाले छात्रों का एक छोटा सा हिस्सा ही सबको साथ लेकर चलने वाले और इंटरैक्टिव स्टेम लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल कर पाता है, जिससे कोडिंग और टेक्नोलॉजी एजुकेशन में एक्सेसिबिलिटी में एक बड़ा गैप पैदा हो गया है। इस चुनौती का सामना करने के लिए, टीम ने एक सबको साथ लेकर चलने वाला लर्निंग सॉल्यूशन बनाया है जो बटन, सेंसर और ऑडियो फीडबैक का इस्तेमाल करके देखने में दिक्कत वाले स्टूडेंट्स को टच और सेंसरी इंटरैक्शन के ज़रिए कोडिंग के बेसिक कॉन्सेप्ट समझने में मदद करता है। इस प्रोजेक्ट का मकसद देखने में दिक्कत वाले छात्रों के लिए कोडिंग एजुकेशन को ज़्यादा आसान, दिलचस्प और एक्सपीरिएंशियल बनाना है, जो क्वालिटी और सबको साथ लेकर चलने वाली एजुकेशन पर फोकस करने वाले यूनाइटेड नेशंस सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 4 में मदद करता है। प्रोजेक्ट टैक्टो का प्रतिनिधित्व वर्ष 2027 के तृतीय वर्ष के बीटेक कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग छात्र गौरांग पंत, वर्ष 2028 की द्वितीय वर्ष की बीटेक कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग (डेटा साइंस) छात्रा श्रृष्टि मंडोलिया, तथा वर्ष 2026 की तृतीय वर्ष की बीबीए फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट एनालिसिस छात्रा काव्या सिंह ने किया। प्रतियोगिता में एक अन्य छात्र स्टार्टअप टेक्यूरियस प्राइवेट लिमिटेड भी ग्लोबल फाइनलिस्ट्स में शामिल हुआ। इस स्टार्टअप ने एक वर्चुअल रियलिटी आधारित इमर्सिव लर्निंग प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक रोचक और इंटरैक्टिव बनाना है। इस कामयाबी के बारे में बात करते हुए, प्रोजेक्ट टैक्टो के फाउंडर्स ने कहा, “दुनिया भर की टीमों के साथ मुकाबला करना और अपने आइडिया को दुनिया भर में पहचान मिलते देखना एक यादगार अनुभव था। हम कुछ ऐसा बनाना चाहते थे जो देखने में दिक्कत वाले स्टूडेंट्स के लिए सीखने को ज़्यादा आसान और आसान बना सके, और इस पहचान ने हमारे इस विश्वास को और मज़बूत किया है कि टेक्नोलॉजी समाज पर अच्छा असर डालने का एक पावरफुल टूल बन सकती है।” प्रोजेक्ट टैक्टो के एंटरप्रेन्योर और मेंटर, मिस्टर रचित माथुर ने कहा, “जो मेंटरशिप के तौर पर शुरू हुआ था, वह आखिरकार को-फाउंडर्स के साथ काम करने जैसा लगा। हमारे बीच बिजनेस मॉडल, पिचिंग और स्ट्रैटेजी को लेकर बहस, असहमति और लंबी चर्चाएं हुईं, लेकिन टीम की कड़ी मेहनत और अपने आइडिया पर विश्वास पूरे सफर में सबसे अलग रहा। एक दमदार और सार्थक इनोवेशन बनाने का क्रेडिट सच में उन्हें जाता है। पिछले छह महीनों में, हमने उनकी पिच, जीटीएम स्ट्रैटेजी, फाउंडर माइंडसेट और इन्वेस्टर के सवालों की तैयारी को बेहतर बनाने पर काम किया। स्टार्टअप इकोसिस्टम में 15 साल से ज़्यादा समय बिताने के बाद, मैंने अपने अनुभव को इस प्रोसेस में लाने की कोशिश की। जब नतीजे घोषित हुए, तो यह बहुत ही पर्सनल और इमोशनल लगा। यह बात कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने टीमों के पार्टिसिपेशन और हांगकांग की इंटरनेशनल यात्रा को पूरी तरह से स्पॉन्सर किया, यह भी दिखाता है कि डॉ. ध्रुव गलगोटिया के नेतृत्व में किस तरह का मजबूत सपोर्ट सिस्टम और स्टार्टअप कल्चर बन रहा है।” ईडीवेंचर्स 2026 में हिस्सा लेने वाली यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूशन में द एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ़ हांगकांग, हांगकांग; नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एजुकेशन, सिंगापुर; किंग सऊद यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब; ईस्ट चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी, चीन; यूनिवर्सिटास इंडोनेशिया, इंडोनेशिया; अजमान यूनिवर्सिटी, संयुक्त अरब अमीरात; बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी, चीन; द चाइनीज़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ हांगकांग, हांगकांग; और माहिडोल यूनिवर्सिटी, थाईलैंड शामिल थे। गलगोटिया विश्वविद्यालय के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने कहा, “हमारे छात्रों ने ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर देश को रिप्रेजेंट करके भारत को गर्व महसूस कराया है। उनका इनोवेशन, देखने में दिक्कत वाले छात्रों के लिए इनक्लूसिव एजुकेशन की चुनौती का सॉल्यूशन है। आज के युवा ऐसे सॉल्यूशन बना रहे हैं जिनके लिए टेक्नोलॉजी, एंपैथी और इंटरडिसिप्लिनरी सोच को एक साथ लाने की ज़रूरत है। यह देखना बहुत हिम्मत देने वाला है कि हमारे छात्र बड़ी इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज़ के साथ कॉन्फिडेंस से मुकाबला कर रहे हैं और ऐसे आइडियाज़ के लिए पहचान पा रहे हैं जो सोशली मीनिंगफुल और इनोवेशन से प्रेरित हैं। हम लगातार एक ऐसे इकोसिस्टम को मजबूत कर रहे हैं जो छात्रों को टेक्नोलॉजी, मेंटरशिप, ग्लोबल एक्सपोजर, स्टार्टअप सपोर्ट और आइडियाज़ को असल दुनिया में असरदार बनाने के मौके देता है।” गलगोटिया विश्वविद्यालय इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग, इंडस्ट्री एंगेजमेंट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन एकेडमिक इनिशिएटिव के ज़रिए इनोवेशन, रिसर्च, ग्लोबल एक्सपोज़र और प्रॉब्लम-सॉल्विंग का एक मज़बूत कल्चर बनाने पर फोकस करती है।

Lifestyle & Glamour

Indian Designers and Jewellery Labels Showcased at the 79th Festival de Cannes 2026

Continuing India’s strong presence at the 79th edition of the Cannes Film Festival 2026, internationally renowned Show Director Liza Varma from India led a delegation of Indian designers and jewellery labels across multiple fashion showcases.   Under the AEFW Paris (Asian European Fashion Show) held at the Majestic Hotel, Cannes from 7 PM to 8 PM (CEST), Indian designers Ambar Paridhi Sahay Mine of Designs, Sona Mandhiratta, Ashna Vaswani, and Veneraa Jewels by Eshita Kaur presented their collections before an international audience. The showcase highlighted a blend of contemporary silhouettes, Indian craftsmanship, and modern fashion aesthetics. Speaking about the initiative, Liza Varma said , “Cannes continues to serve as an important international platform to showcase the diversity and strength of Indian fashion and design talent. Through these showcases, our aim is to create meaningful global visibility and opportunities for both emerging and established Indian designers and jewellery labels.” The showcases formed part of a broader initiative led by Liza Varma to create sustained international exposure for Indian fashion talent during the Cannes period through curated runway presentations, fashion collaborations, and global industry participation.

Travel Diaries

Home Ground: How Meghalaya Is Turning Local Families into the Future of Tourism

When travellers visit a new place, they don’t always look for scenic spots. They look for genuine human connections. For years, Meghalaya has offered that warmth, rooted in its rich culture and deep hospitality. Today, that warmth is driving economic growth. The numbers tell this story clearly. Shillong recently topped Skyscanner’s 2025 Report as the most-searched travel destination in India. It is drawing more visitors than ever under its new tourism identity, Symphony in the Mist. Tourist arrivals have surged from roughly 12 lakhs in 2018 to over 16 lakhs today, and the State has set an ambitious target of 21 lakhs by 2028. In April 2026, NITI Aayog’s Divya Bharat: A Window to the Soul of India report added further weight to this momentum. It identified Meghalaya as one of India’s few year-round travel destinations with no clear off-season. It highlighted the State’s living root bridges, extensive cave systems, and indigenous cultural traditions. The message was clear: Meghalaya is no longer a seasonal stop. It is a destination for all seasons. But recognition alone does not fill a room. As visitor numbers climbed, a serious challenge emerged. Demand was outpacing supply. Many high-potential destinations lacked adequate lodging, and tourist spending went unrealised. The government saw that building massive hotels was not the only answer. Instead, it chose to empower the families who call these hills home. This thinking made the homestay model the cornerstone of Meghalaya’s tourism strategy. The government took the first step in September 2023 by launching the Meghalaya Tourism Homestay Scheme in convergence with the Prime Minister’s Employment Generation Programme (PMEGP). The scheme gives financial assistance of up to 70% for projects costing up to ₹10 lakhs. This includes a 35% subsidy under PMEGP and an equal 35% from the State’s Tourism Department, making it accessible to first-time entrepreneurs and rural households. The response was swift. The scheme sanctioned 900 applications. On the ground, more than 490 homestays became operational, creating 1,000 rooms and around 1,500 livelihood opportunities. With this proof of success, the government moved to scale. It launched the Chief Minister’s Meghalaya Homestay Mission in September 2025, building on the earlier scheme with greater ambition. The Mission targets 3,000 new homestays and 15,000 direct and indirect jobs by 2028. The support structure improved as well. New homestays can receive a subsidy of up to 70%, capped at ₹7 lakhs. Existing homestays can claim an upgradation incentive of up to ₹2 lakhs to improve quality and visitor experience. Early momentum has been strong, with 80 applications already approved across 10 districts, showing participation from every part of the State. These are not just statistics. For people like Daminot Kharshandi from Ri Bhoi district, a first-generation entrepreneur and scheme beneficiary, this support changed everything. “The Homestay Scheme gave me the financial confidence to launch my business, which I have successfully expanded,” he added. “The State’s Meghalaya Tourism branding policy has also brought more footfalls and revenue.” His story is becoming a familiar one across the region. It shows that the right support, reaching the right people, multiplies. One such story belongs to Donny Esmond Rapsang. His Friendship Homestay at Umden Umsaitprah, Umroi is a story of resilience and community empowerment. Rapsang once moved between multiple small jobs and businesses to support his family. The Government of Meghalaya’s Homestay Scheme opened a new door. With financial assistance of over ₹9 lakh, he began construction in 2023, completed the homestay in 2024, and opened it to the public in 2025. Today, the homestay supports his household and has created opportunities for local youth involved in its construction and operations. His journey, like Daminot’s, shows how tourism-based initiatives can strengthen livelihoods, promote self-employment, and empower rural communities. This wide participation reflects what Hon’ble Chief Minister, Shri Conrad K. Sangma has consistently emphasised. These initiatives are not isolated interventions. They build an ecosystem where homestay owners, local transport providers, food vendors, and tourist guides all grow together. The State treats smaller homestays as just as vital as large infrastructure, spreading the economic benefits of tourism to the grassroots rather than concentrating them at the top. Nowhere is this philosophy more visible than in the State’s plans for the upcoming 39th National Games, 2027. Meghalaya intends to house visitors in homestays rather than traditional Games Villages, placing local families at the centre of a national stage. As that moment approaches, the homestay revolution tells a bigger story about how Meghalaya is choosing to grow. By giving ordinary people, the tools to succeed, the Government of Meghalaya is doing more than expanding accommodation. It is building something more enduring, a tourism economy where benefits flow directly to the families who have always been its greatest hosts.

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पैन-इंडिया फिल्म ‘पेद्दी’ स्टार राम चरण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को किया याद, जानें क्या कहा

राम चरण ने पीएम नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत पर दिया बयान, बताया फिल्म ‘पेद्दी’ से जुड़ी हुई थी कौन सी बात! इस साल की सबसे बड़ी और मोस्ट-अवेक्युटेड पैन-इंडिया फिल्म ‘पेद्दी’ का ट्रेलर रिलीज होते ही पूरे देश में छा गया है। कई अलग-अलग खेलों के इर्द-गिर्द बुनी गई यह फिल्म दर्शकों को गांव के मिट्टी के मैदानों से लेकर इंटरनेशनल अखाड़ों तक के एक बेहद रोमांचक सफर पर ले जाने का वादा करती है। फिल्म को लेकर बढ़ते जबरदस्त क्रेज के बीच, मेगास्टार राम चरण ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें बताया कि कैसे ‘पेद्दी’ की कहानी हमारे गांवों को सशक्त बनाने की सोच पर आधारित है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ अपनी इस खास मुलाकात को याद करते हुए राम चरण ने कहा, “आज हम साउथ में जो फिल्में बना रहे हैं, उनकी जड़ें हमारी संस्कृति और मिट्टी से गहराई से जुड़ी हैं। ये शहर पर आधारित फिल्में नहीं हैं, बल्कि गांवों और कस्बों की कहानियां हैं। भारत की तीरंदाजी (archery) टीम में कई आदिवासी खिलाड़ी शामिल हैं, क्योंकि यह टैलेंट उनके पास नेचुरल होता है। जब गांवों के ऐसे टैलेंट को पहचान मिलती है, तो यह देखना बेहद खूबसूरत होता है।” उन्होंने आगे बताया, “पिछली बार जब मैं दिल्ली में हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी से मिला, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि ‘पेद्दी’ किस बारे में है। मैंने उनसे कहा कि यह एक विकसित भारत और हमारे गांवों को सशक्त बनाने के बारे में है। तब मोदी जी ने पश्चिम बंगाल की एक कहानी साझा की, जहाँ दशकों पहले एक छोटे से गाँव के फुटबॉलर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था और आज उसी गाँव के 85 से अधिक लोग फुटबॉल खेलते हैं।” ​23 मई को भोपाल में ‘पेद्दी’ के लिए अब तक के सबसे बड़े म्यूजिकल इवेंट का आयोजन किया गया। इस ग्रैंड इवेंट में राम चरण, जाह्नवी कपूर, रवि किशन, शिवा राजकुमार, दिव्येंदु शर्मा और जगपति बाबू सहित फिल्म की पूरी स्टार कास्ट एक साथ नजर आई। उनके साथ निर्देशक बुच्ची बाबू सना और ऑस्कर विजेता म्यूजिक कंपोजर ए.आर. रहमान भी मौजूद रहे। गानों और पोस्टर्स से लेकर टीज़र और ट्रेलर तक, बैक-टू-बैक ब्लॉकबस्टर कंटेंट देने के बाद अब यह नया गाना फिल्म का एक और धमाकेदार एसेट बनकर सामने आया है, जिसने फिल्म की रिलीज के लिए फैंस की एक्साइटमेंट को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। ​आपको बता दें कि राम चरण ‘पेद्दी’ में एक ‘क्रॉसओवर एथलीट’ की भूमिका में नजर आएंगे। ठीक वैसे ही जैसे एमएस धोनी क्रिकेटर बनने से पहले एक फुटबॉलर थे और सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के भगवान बनने से पहले टेनिस में काफी दिलचस्पी रखते थे, हमारे देश के कुछ सबसे बड़े स्पोर्ट्स आइकॉन्स का अपने करियर में ऐसा ही क्रॉसओवर सफर रहा है। बुची बाबू सना द्वारा लिखित और निर्देशित ‘पेद्दी’ में मेगास्टार राम चरण लीड रोल में हैं, जिन्हें स्क्रीन पर शिवा राजकुमार, जाह्नवी कपूर, दिव्येंदु शर्मा और जगपति बाबू जैसे एक्टर्स का साथ मिला है। यह दमदार स्टार कास्ट फिल्म के स्केल और इम्पैक्ट को एक अलग ही लेवल पर ले जाती है। इस फिल्म का निर्माण ‘वृद्धि सिनेमाज’ के बैनर तले वेंकट सतीश किलारु द्वारा किया जा रहा है, जिसमें ‘मैत्री मूवी मेकर्स’, ‘सुकुमार राइटिंग्स’ और ‘आईवीवाई (IVY) एंटरटेनमेंट’ ने हाथ मिलाया है, जबकि ईशान सक्सेना इसके को-प्रोड्यूसर हैं। ​साल 2020 में अपनी शुरुआत करने वाली ‘आईवीवाई (IVY) एंटरटेनमेंट’ ने बहुत कम समय में भारत के सबसे पॉपुलर प्रोडक्शन हाउसेस और फिल्म राइट्स हासिल करने वाली कंपनियों में अपनी मजबूत जगह बना ली है। यह कंपनी लगातार प्रीमियम आईपी (IP) और फिल्म राइट्स का एक बड़ा और शानदार पोर्टफोलियो तैयार कर रही है। साथ ही, यह क्रिएटिव प्रोडक्शन हाउसेस को लगातार ऐसी बेहतरीन फिल्में बनाने के लिए सपोर्ट और सशक्त कर रही है, जो दुनिया भर के दर्शकों के दिलों को छू सकें। शानदार स्टार कास्ट के साथ-साथ इस फिल्म के पास एक बेहद मजबूत और दमदार टेक्निकल टीम भी है। फिल्म में म्यूजिक ऑस्कर विनर ए.आर. रहमान का है, सिनेमैटोग्राफी आर. रथनावेलु की है, प्रोडक्शन डिजाइन अविनाश कोल्ला ने संभाला है, एडिटिंग नवीन नूली की है और एग्जीक्यूटिव प्रोडक्शन वी.वाई. प्रवीण कुमार का है। यह बेहतरीन टीम फिल्म को सिनेमाई तौर पर और भी ग्रैंड बनाती है, जिससे फैंस की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ​’धुरंधर’, ‘धुरंधर द रिवेंज’ और ‘राजा शिवाजी’ की छप्परफाड़ कामयाबी के बाद, अब जियो स्टूडियोज इस फिल्म को उत्तर भारत में रिलीज करने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 3 जून 2026 को होगा, जिसके बाद 4 जून 2026 को इसे दुनिया भर के थिएटर्स में बंपर लेवल पर रिलीज किया जाएगा।

Technology & AI

Review: ‘रिटर्न ऑफ द जंगल’: संघर्ष से स्क्रीन तक

रिटर्न ऑफ द जंगल एनिमेटिड फिल्म “रिटर्न ऑफ द जंगल” – 15 साल की मेहनत से बनी लेखक, निर्माता ,  निर्देशक : वैभव कुमारेश, सेंसर: यू , अवधि : 124 मिनट रेटिंग 3 .5 स्टार देश विदेश में अपनी अलग इमेज बना चुके प्रख्यात एनीमेटर वैभव कुमारेश के निर्देशन में बनी यह फिल्म भारतीय एनीमेशन इन्डस्ट्री को नई दिशा देती है.इस फिल्म को मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पेश किया गया, जहां इसे सभी ने खूब सराहा। फिल्म में वीएफएक्स का काम अव्वल दर्जे का है ,इस फिल्म को आप स्कूली बच्चों को एक नई दिशा , और भारतीय संस्कृति और किसी भी खेल में जीत हार के अनुभवों को किस तरह से लिया जाए यही सब बिग स्क्रीन बड़े पर दिखाने का नेक और अच्छा प्रयास है स्टोरी प्लॉट केंद्रीय विद्यालय के कुछ बच्चों के जीवन और उनके अटूट विश्वास पर राह में आने वाली चुनौतियों को खेल और प्रतियोगिता के माध्यम से पेश किया गया है । जहां इस स्कूल में राहुल मल्होत्रा खुद को स्पाइडर मैन से कम नहीं मानता और स्कूल में होने वाली सभी प्रतियोगिताओं को जीतता है वहीं दूसरी क्लास के छात्र भी इस बार छोटू के नेतृत्व में स्कूल की सभी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का फैसला करते है और इन सब के साथ थाथा का आशीर्वाद है , फैशन शो से क्रिकेट तक के मुकाबले फिल्म में है तो वहीं इस फिल्म में इन सभी की पक्की दोस्ती, चुनौतियो को दिखाया गया है. फिल्म में ‘थाथा’ का किरदार जो हर मुश्किल वक़्त में इन बच्चों का साथ और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है पारंपरिक पंचतंत्र शैली की कहानियों से लिया गया है । ओवर ऑल 15 साल की मेहनत : आप हैरान होंगे बिना स्टार कास्ट के करीब दो घंटे की इस फिल्म को बनाने में फिल्म के निर्माता और उनकी पूरी टीम की करीब 15 साल का वक्त लग गया ।यह फिल्म टीम के लंबे संघर्ष का परिणाम है। इस फिल्म को तैयार करने में लगभग 15 साल का समय लगा है, मेरी नजर में यह फिल्म एनीमेशन जगत में युवा फिल्म मेकर्स ने बढ़ रहे आत्मविश्वास का संकेत है, जहां वैभव कुमारेश ने अपनी पहचान स्थापित करने की अच्छी कोशिश की है । यह केवल बच्चों के लिए है नहीं है बल्कि पूरे परिवार के लिए बनी है , तो इस बार अपने सोनू मीनू के साथ अपने पास के सिनेमा में यह फिल्म देखने जाये यकीनन आप सब की कसौटी पर फिल्म खरी उतरेगी ।

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