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Expert Opinion

हेल्थकेयर सेक्टर में कौशल विकास और मरीजों की देखभाल में निरंतरता के लिए भारत-यूके के बीच सहयोग की पहल

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और बैपियो ट्रेनिंग एकेडमी ने आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयुष डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए विशेष पहल की घोषणा की दिल्ली : मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और बैपियो (BAPIO) ट्रेनिंग एकेडमी ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर आज दिल्ली में आयोजित इंडो-यूके हेल्थकेयर कॉन्क्लेव के दूसरे संस्करण में आयुष डॉक्टरों (बीएचएमएस और बीएएमएस) के क्लीनिकल कौशल को उन्नत करने की दिशा में कदम उठाने की घोषणा की। कॉन्क्लेव का उद्घाटन भारत सरकार के आयुष राज्य मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने किया। कॉन्क्लेव में स्ट्रक्चर्ड एजुकेशन, सुपरवाइज्ड क्लीनिकल ट्रेनिंग और एसेसमेंट के माध्यम से हेल्थकेयर सेक्टर में कौशल विकास और मरीजों की देखभाल में निरंतरता पर फोकस किया गया। इन पहलों में आयुष के स्नातक और स्नातकोत्तर डॉक्टरों के लिए छह-छह महीने के दो सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल हैं। इनका उद्देश्य डॉक्टरों के क्लीनिकल कौशल को बढ़ाना, मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हेल्थकेयर सिस्टम के भीतर देखभाल की निरंतरता (कॉन्टिन्यूटी ऑफ केयर) बनाए रखने में मदद करना है। “स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नवाचार के बीच सेतु” (ब्रिजिंग हेल्थकेयर, एजुकेशन एंड इनोवेशन) विषय पर आयोजित दो दिवसीय कॉन्क्लेव में भारत और ब्रिटेन के नीति-निर्माता, चिकित्सक, शिक्षाविद, स्वास्थ्य क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। यह कॉन्क्लेव 2025 में ब्रिटेन में आयोजित पहले संस्करण की अगली कड़ी है। पहले संस्करण की अध्यक्षता सांसद और इंडो-यूके हेल्थकेयर अलायंस के चेयर डॉ. संजय जायसवाल ने की थी। इस पहल का जोर विचार-विमर्श को व्यावहारिक कार्यक्रमों और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारियों में बदलने पर है। इस अवसर पर भारत सरकार के आयुष राज्य मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने कहा, “इंडो-यूके हेल्थ कॉन्क्लेव 2026 भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच दीर्घकालीन मित्रता, परस्पर सम्मान तथा निरंतर सुदृढ़ होती राजनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच चिकित्सा, शिक्षा तथा वैज्ञानिक प्रगति के क्षेत्र में सहयोग का एक समृद्ध इतिहास रहा है। हमारी सरकार का विशेष ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, वहनीयता (अफॉर्डेबिलिटी), गुणवत्ता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) तथा आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग पर केंद्रित है। भारत के पास पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की एक अनूठी और अमूल्य विरासत है। आयुष मंत्रालय का दायित्व संभालते हुए मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब इन पद्धतियों को वैज्ञानिक, अनुसंधान, उपयुक्त चिकित्सकीय प्रमाण, गुणवत्ता मानकों तथा जिम्मेदार समन्वय का समर्थन प्राप्त होता है, तब वे विश्वभर में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं और समग्र कल्याण को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह सम्मेलन इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। बैपियो ट्रेनिंग एकेडमी और मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल ग्रुप के संयुक्त सहयोग से आयुष चिकित्सकों के लिए एक सुव्यवस्थित प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है। इसका उद्देश्य आयुष चिकित्सकों की नैदानिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना एवं उनकी व्यावसायिक क्षमताओं का विस्तार करना है। यूके के पास क्लीनिकल गवर्नेंस, व्यावसायिक जवाबदेही, मरीजों की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सुव्यवस्थित प्रणालियों को विकसित करने का व्यापक अनुभव है। वहीं भारत के पास व्यापक चिकित्सकीय अनुभव, तकनीकी नवाचार, उच्च प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों का विशाल समूह तथा बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की क्षमता है। यदि हम दोनों देशों की इन पूरक क्षमताओं को एक साथ लाएं तो ऐसी संस्थागत व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं, जो अधिक प्रभावी, मरीज केंद्रित, जवाबदेह तथा समाज की वास्तविक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप हों। आयुष पेशेवरों के लिए सर्टिफिकेट प्रोग्राम : आयुष डॉक्टरों के क्लीनिकल कौशल से जुड़ी इस पहल में छह-छह महीने के दो सर्टिफिकेट प्रोग्राम तैयार किए गए हैं। इनमें ‘एक्यूट केयर एंड इमरजेंसी सपोर्ट’ और ‘लाइफस्टाइल हेल्थ एंड वेल-बीइंग काउंसलिंग एंड प्रैक्टिस’ सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल हैं। दोनों प्रोग्राम आयुष के स्नातक और स्नातकोत्तर डॉक्टरों के लिए तैयार किए गए हैं। इनमें व्यवस्थित शिक्षण के साथ सुपरवाइज्ड प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कराई जाएगी। एक्यूट केयर प्रोग्राम का उद्देश्य डॉक्टरों की क्षमताओं को विकसित करना तथा उन्हें इमरजेंसी विभागों एवं क्रिटिकल केयर यूनिटों में क्लीनिकल, प्रशासनिक और नेतृत्व संबंधी भूमिकाओं के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षण में मरीज की स्थिति बिगड़ने के संकेतों को पहचानने, समय पर वरिष्ठ विशेषज्ञों तक मामले को रेफर करने, कम्युनिकेशन, डॉक्युमेंटेशन, मरीजों की सुरक्षा, इमरजेंसी रूम एवं क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट के साथ-साथ मल्टीडिसिप्लिनरी टीम का हिस्सा बनकर ऑपरेशनल असिस्टेंस देने में सक्षम बनाने जैसे कदम शामिल हैं। लाइफस्टाइल हेल्थ प्रोग्राम में प्रिवेंटिव हेल्थ (निवारक स्वास्थ्य) और एविडेंस-इन्फॉर्म्ड काउंसिलिंग (प्रमाण-आधारित परामर्श) पर फोकस किया गया है। इसमें पोषण, शारीरिक गतिविधि, वेलनेस एवं लंबी उम्र तक स्वस्थ रहने, नींद, स्ट्रेस मैनेजमेंट, व्यवहार में बदलाव, हेल्थ चेक-अप और जरूरत पर मरीज को अन्य विशेषज्ञों के पास भेजने जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य अस्पतालों की वेलनेस सर्विसेज, प्रिवेंटिव हेल्थ डिपार्टमेंट और कॉरपोरेट या कम्युनिटी वेलनेस प्रोग्राम में सहयोग देना है। इस पहल पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के संस्थापक सदस्य, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. राजीव सिंघल ने कहा, “हमारे लिए इस साझेदारी की अहमियत इस बात में है कि इससे मरीजों और हेल्थकेयर टीमों के लिए क्या बदलाव आता है। हमारा उद्देश्य हेल्थकेयर सिस्टम को लगातार मजबूत करना, भारत एवं ब्रिटेन के अनुभवों को साझा करना, इलाज के मानकों (स्टैंडर्ड ऑफ केयर) को बेहतर बनाना और गुणवत्ता तथा गवर्नेंस को मजबूत करना है, ताकि इसका अंतिम लाभ मरीजों को मिले। इस तरह के मंचों के माध्यम से होने वाली किसी भी साझेदारी की असली कसौटी यही है। आज घोषित की गई इस पहल में स्ट्रक्चर्ड क्लीनिकल ट्रेनिंग, सुपरवाइज्ड प्रैक्टिस और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया गया है। ‘टीच, ट्रेन, ट्रीट’ यानी ‘सिखाना, प्रशिक्षित करना और इलाज करना’ की हमारी क्लीनिकल कॉरिडोर फिलॉसफी के माध्यम से हम इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर के मामले में दीर्घकालिक क्षमता विकसित करने, प्रिवेंटिव केयर में सहयोग करने और ज्ञान के आदान-प्रदान से अधिक सुरक्षित मेडिकल केयर एवं नतीजे देने के लिए प्रयासरत हैं।” बैपियो ट्रेनिंग एकेडमी के सीईओ एवं इंडो-यूके हेल्थकेयर अलायंस के वाइस चेयर प्रो. पराग सिंघल ओबीई ने कहा, “भारत और ब्रिटेन दोनों के पास एक-दूसरे से सीखने के लिए बहुत कुछ है। हमारा उद्देश्य अस्पतालों में ट्रेनिंग, साझा शिक्षण, कठोर मूल्यांकन और क्लीनिकल सहयोग के माध्यम से इस आदान-प्रदान को व्यावहारिक बनाना है। इन पहलों को इस तरह से तैयार किया गया है, जिससे

Expert Opinion

फोर्टिस शालीमार बाग ने एडवांस हार्ट फेलियर से पीड़ित 47-वर्षीय मरीज का सफल हृदय प्रत्यारोपण कर उन्हें सौंपा नए जीवन का उपहार, उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट

हृदय प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता चंचल यादव (केंद्र में)। फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग के डॉक्टरों ने 47 वर्षीय चंचल यादव का सफल हृदय प्रत्यारोपण कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया। यह उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट है। डोनर हार्ट को पीजीएमआईएस रोहतक से फोर्टिस शालीमार बाग पहुंचाया गया, हरियाणा और दिल्ली पुलिस की मदद से तैयार ग्रीन कॉरिडोर की मदद से कुल 95 किलोमीटर का सफर मात्र 63 मिनट में पूरा किया गया नई दिल्ली : फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग के डॉक्टरों ने 47-वर्षीय मरीज श्री चंचल यादव का सफल हृदय प्रत्यारोपण (हार्ट ट्रांसप्लांट) कर उन्हें नया जीवन सौंपा है। यह उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली में पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट है। मरीज श्री यादव पिछले कई वर्षों से एडवांस हार्ट फेलियर की समस्या से जूझ रहे थे। इस दौरान मिले बेहतरीन मेडिकल उपचार के बावजूद उनके हृदय की पम्पिंग क्षमता लगातार कमजोर पड़ती रही थी, जिसके कारण वह बिस्तर तक सिमटकर रह गए थे और बहुत अधिक सांस फूलने तथा बार-बार, जीवनघाती हार्ट शॉक की समस्या से पीड़ित थे, जिसके लिए उन्हें इमरजेंसी डिवाइस इंप्लांटेशन की आवश्यकता थी। उनकी हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि पारंपरिक दवाएं भी काम नहीं कर रही थी, ऐसे में उन्हें बचाने के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। डॉ दिनेश कुमार मित्तल, सीनियर डायरेक्टर एंड एचओडी, कार्डियोथोरेसिक एंड वास्क्युलर सर्जरी, फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग के नेतृत्व में डॉक्टरों की मल्टीडिसीप्लीनरी टीम ने हार्ट ट्रांसप्लांट की जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाया। इस मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पीजीआईएमएस रोहतक, हरियाणा में एक डोनर हार्ट उपलब्ध हुआ। इस संबंध में जानकारी मिलते ही, फोर्टिस शालीमार बाग की ट्रांसप्लांट टीम ने तत्काल डोनर हार्ट को प्राप्त करने और समय पर उसके रिट्रीवल तथा ट्रांसपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके बाद, भरपूर प्लानिंग और तालमेल के साथ, एक राज्य से दूसरे राज्य तक इस डोनर हार्ट को पहुंचाने के लिए समय के साथ होड़ शुरू हुई। इस पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए, अस्पताल प्रशासन, ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर्स, NOTTO, SOTTO के अलावा हरियाणा एवं दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मिलकर ऑर्गेन एलॉकेशन, रिट्रीवल तथा ट्रांसपोर्टेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। डोनर हार्ट को हरियाणा से दिल्ली लाने के लिए एक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया, जिसकी बदौलत रोहतक से फोर्टिस शालीमार बाग के बीच 95 किलोमीटर की दूरी महज़ 63 मिनट में तय की गई। इस तालमेल ने यह सुनिश्चित किया कि डोनर हार्ट बेहद कम समय में, यानी महत्वपूर्ण विंडो के दौरान, ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचे, ताकि कार्डियाक टीम को बिना देरी किए हार्ट ट्रांसप्लांट करने का मौका मिले। इस मामले की विस्तार से जानकारी देते हुए, डॉ दिनेश कुमार मित्तल, सीनियर डायरेक्टर एंड एचओडी, कार्डियोथोरेसिक एंड वास्क्युलर सर्जरी, फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग ने कहा, “हार्ट ट्रांसप्लांट को मेडिकल क्षेत्र में समय के लिहाज से काफी नाजुक प्रक्रिया माना जाता है, जिसमें एक-एक मिनट अंतिम परिणाम को प्रभावित करता है। रोहतक में डोनर हार्ट को निकाले जाने से लेकर यहां हमारे मरीज के शरीर में रक्त प्रवाह की बहाली करने तक, हर कदम पर हमने सावधानीपूर्वक प्लानिंग की और इसे सटीक तरीके से अंजाम दिया। हमारी ऑर्गेन रिट्रीवल, ट्रांसप्लांट सर्जरी, एनेस्थीसिया, परफ्यूज़न और क्रिटिकल केयर टीमों के बीच बेहतरीन तालमेल तथा तत्परता के साथ एक उद्देश्य के लिए कार्य भावना ने तथा टीमभावना ने इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया। हमें खुशी है कि उक्त मरीज ट्रांसप्लांट के बाद स्वास्थ्यलाभ कर रहे हैं। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए, ट्रांसप्लांटेशन काफी नाजुक और जीवन-रक्षक प्रक्रिया थी, लेकिन डोनर हार्ट उपलब्ध नहीं होने पर मरीज की हालत में कोई खास सुधार नहीं हो सकता था।” हृदय प्रत्यारोपण के बाद चंचल यादव ने कहा, “मेरे पास फोर्टिस शालीमार बाग के डॉक्टरों, नर्सों और पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं हैं जिन्होंने मुझे दूसरा जीवन दिया है। जब मुझे पता चला कि मुझे हार्ट ट्रांसप्लांट करवाना जरूरी है, तो मैं और मेरे परिजनों के मन में डर और अनिश्चितता बढ़ गई। लेकिन अस्पताल की टीम ने जिस तत्परता और देखभाल की भावना तथा समर्पण के साथ इस पूरी प्रक्रिया में हमारा साथ दिया, उससे हमारी ताकत और उम्मीद बढ़ी। मैं डोनर परिवार के लिए भी हृदय से आभारी हूं, जिनके निःस्वार्थ और परोपकारी फैसले ने मुझे एक नया जीवन दिया है और मैं आगे की जिंदगी को लेकर आशावान हूं।” डॉ नरेश कुमार गोयल, प्रिंसीपल डायरेक्टर एंड एचओडी, कार्डियोलॉजी एंड हार्ट फेलियर प्रोग्राम, फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग, ने कहा, “मरीज को जब अस्पताल लाया गया था तो वह हार्ट फेलियर की एडवांस स्टेज में पहुंच चुके थे जिसमें ऑप्टिमल मेडिकल थेरेपी और एआईसीडी से उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो सकता था। ऐसे में, हार्ट ट्रांसप्लांटेशन ही सबसे कारगर उपचार विकल्प रह गया था जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता था। हम डोनर परिवार की उदारता के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं, उनके इस परोपकार की बदौलत ही मरीज को स्वास्थ्यलाभ के साथ-साथ अधिक लंबा, और सक्रिय जीवन जीने का अवसर मिला है।” श्री महिपाल भनोत, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट एंड रीजनल डायरेक्टर, ऑपरेशंस एंड ऑपरेशंस लीड – एनसीआर प्रोजेक्ट्स, फोर्टिस हेल्थकेयर ने कहा, “इस सफल प्रत्यारोपण ने एक बार फिर हमारी असाधारण क्लीनिकल क्षमताओं, चौबीसों घंटे कार्यरत समर्पित टीमों की योग्यता, तथा हमारी मल्टीडिसीप्लीनरी टीमों के आपातकालीन परिस्थितियों में भरपूर तालमेल को प्रमाणित किया है। अब जबकि दिल्ली में SOTTO लॉन्च किया जा चुका है, इस तरह की महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं लोगों को अंगदान के बारे में जागरूक बनाने और समुदाय के लिए वर्ल्ड-क्लास हेल्थकेयर प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को मजबूती देती हैं।” श्री नवीन शर्मा, वाइस प्रेसीडेंट एंड फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस शालीमार बाग, ने कहा, “इस मामले में, NOTTO, हमारे ट्रांसप्लांट समन्वयकों, तथा दिल्ली एवं हरियाणा पुलिस अधिकारियों के बीच तालमेल रीढ़ की हड्डी की तरह मजबूत आधार साबित हुआ। सतर्कता और तत्परता ऐसे मामलों में डोनर ऑर्गेन को निर्धारित मंजिल तक समय पर पहुंचाने और उसके समुचित तरीके से इस्तेमाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसने इस जटिल और विभिन्न चरणों में लगातार पेश आने वाली चुनौतियों को पार कर हमारी टीम भावना को और मजबूती दी है।” फोर्टिस हेल्‍थकेयर लिमिटेड : फोर्टिस हेल्‍थकेयर लिमिटेड ने भारत के

Food & Beverages

पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 रोजगार और कौशल का बनेगा बड़ा मंच: उदय सिंह बयास

दिल्ली में आईपीईएमए की प्रेस कॉन्फ्रेंस, 24 नवंबर से हैदराबाद में होगा 18वां पोल्ट्री इंडिया एक्सपो नई दिल्ली : भारतीय पोल्ट्री उपकरण निर्माता संघ (आईपीईएमए) ने गुरुवार को द पार्क होटल, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पोल्ट्री इंडिया कर्टेन रेज़र 2026 और देश की पहली व सबसे बड़ी पोल्ट्री रोजगार प्रदर्शनी की घोषणा की। इस अवसर पर आईपीईएमए अध्यक्ष उदय सिंह बयास ने मीडिया को संबोधित करते हुए पोल्ट्री उद्योग में रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता की बढ़ती संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उदय सिंह बयास ने कहा, “पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता का बड़ा मंच है। भारत का पोल्ट्री क्षेत्र चिकन मीट में 8–10 प्रतिशत और अंडे में 6–8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। यह क्षेत्र ग्रामीण युवाओं, किसानों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और एग्री-टेक उद्यमियों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।” उन्होंने बताया कि 18वां पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 आगामी 24 से 27 नवंबर तक हैदराबाद में आयोजित होगा। 24 नवंबर को एचआईसीसी/नोवोटेल, हाईटेक सिटी में नॉलेज डे सेमिनार होगा, जबकि 25 से 27 नवंबर तक एचिटेक्स एग्जिबिशन सेंटर में मुख्य प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, एक्सपो में 120 से अधिक देशों के 550 से ज्यादा प्रदर्शकों और 51,000 से अधिक उद्योग विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि एक्सपो में ब्रीडिंग एवं जेनेटिक्स, हैचरी एवं फार्म ऑटोमेशन, फीड मिलिंग, एडवांस्ड न्यूट्रिशन, ईसी हाउसिंग एवं वेंटिलेशन, वेटरनरी डायग्नोस्टिक्स, बायोसिक्योरिटी, अंडा प्रोसेसिंग, मैन्योर मैनेजमेंट और ग्रीन पोल्ट्री सॉल्यूशंस जैसी आधुनिक तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा। आईपीईएमए के अनुसार, एक्सपो फार्म मैनेजमेंट, फीड मिलिंग, उपकरण निर्माण, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड चेन, फूड प्रोसेसिंग, सेल्स एवं मार्केटिंग, रिसर्च तथा एग्री-टेक स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में रोजगार, कारोबार और नेटवर्किंग के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। आयोजकों के मुताबिक, इस आयोजन को 20 से अधिक विदेशी पोल्ट्री संगठनों, 40 से अधिक राष्ट्रीय पोल्ट्री निकायों और अंतरराष्ट्रीय पोल्ट्री मीडिया का समर्थन प्राप्त है। “वन नेशन, वन एक्सपो” थीम के तहत आयोजित यह एक्सपो किसानों, युवाओं, उद्यमियों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने के साथ विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देने पर केंद्रित होगा।

Cultural Journeys

115 स्टॉलों में सजी भारत की विविध विरासत; खादी, ग्रामोद्योग और पीएमईजीपी इकाइयों के उत्पादों में दिखी ‘मिनी इंडिया’ की झलक

‘खादी महोत्सव-2026’ के अंतर्गत आई.एन.ए. दिल्ली हाट में केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने विशेष खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया 15 अक्टूबर तक चलेगी प्रदर्शनी; सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की खरीदारी का अवसर. अध्यक्ष केवीआईसी ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सेवा संकल्प अभियान’ और स्वदेशी आंदोलन के आह्वान को जन-जन और जेन-जी (Gen-Z) तक पहुंचाना प्रदर्शनी का प्रमुख उद्देश्य है।“ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कारीगरी और स्वदेशी उद्यमिता का जीवंत संगम गुरुवार को आई.एन.ए. स्थित दिल्ली हाट में देखने को मिला। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार द्वारा आयोजित विशेष खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन केवीआईसी के अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने किया। 15 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाली इस प्रदर्शनी में कुल 115 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें 48 स्टॉल खादी के हैं, जबकि शेष स्टॉल ग्रामोद्योग एवं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) से जुड़े उद्यमियों और कारीगरों के हैं। देश के लगभग हर हिस्से से आए कारीगरों, खादी संस्थानों, ग्रामोद्योग इकाइयों और उद्यमियों ने यहां अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया है। इस लिहाज से दिल्ली हाट की यह प्रदर्शनी एक तरह से ‘लघु भारत’ का स्वरूप लेती दिखाई दे रही है। उद्घाटन कार्यक्रम में केवीआईसी की सीईओ, एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव (एआरआई), केवीआईसी के वित्तीय सलाहकार समेत अधिकारी, कर्मचारी, खादी संस्थाओं के प्रतिनिधि और कारीगर उपस्थित रहे। उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सेवा संकल्प अभियान व स्वदेशी आंदोलन के आह्वान को जन-जन और जेन-जी (Gen-Z) तक पहुंचाने के लिए केवीआईसी ने इस प्रदर्शनी का आयोजन किया है। उन्होंने आगे कहा कि खादी और ग्रामोद्योग केवल उत्पादों की बिक्री का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे देश के लाखों कारीगरों, बुनकरों और ग्रामीण उद्यमियों की मेहनत और आत्मनिर्भरता की कहानी जुड़ी है। दिल्ली हाट में आयोजित यह प्रदर्शनी देश के अलग-अलग हिस्सों की इसी जीवंत परंपरा को एक मंच पर प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बाजार और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण स्वदेशी विकल्प उपलब्ध कराना, खादी एवं ग्रामोद्योग के व्यापक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने दिल्लीवासियों और दिल्ली आने वाले पर्यटकों से अपील की कि वे दिल्ली हाट की इस प्रदर्शनी में जरूर आएं, भारतीय कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को देखें तथा अपनी खरीदारी में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें। अध्यक्ष केवीआईसी श्री गोयल ने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग केवल उत्पादों की बिक्री का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे लाखों कारीगरों, बुनकरों और ग्रामीण उद्यमियों की मेहनत, कौशल और आत्मनिर्भरता की कहानी है। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार युवाओं को सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि कौशल, उद्यमिता, वित्त और बाजार से जोड़कर रोजगार का पूरा इकोसिस्टम तैयार कर रही है। खादी और ग्रामोद्योग इस दिशा में ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसरों का मजबूत माध्यम बन रहे हैं।” प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि यहां भारत के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों की विशिष्ट खादी, वस्त्र एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को एक ही स्थान पर देखा और खरीदा जा सकता है। कर्नाटक के रेशमी उत्पाद, तमिलनाडु की पारंपरिक बुनाई एवं सिल्क, आंध्र प्रदेश के कलमकारी उत्पाद, तेलंगाना की इक्कत परंपरा और केरल की पारंपरिक वस्त्र शिल्प शैली यहां आगंतुकों को आकर्षित कर रही है। पूर्वी भारत से पश्चिम बंगाल की महीन मसलिन एवं हथकरघा परंपरा, बिहार के रेशमी एवं टसर उत्पाद तथा ओडिशा की पारंपरिक बुनाई और इक्कत शिल्प की झलक देखने को मिल रही है। वहीं पूर्वोत्तर भारत से खादी के साथ-साथ बांस एवं प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए गए आकर्षक उत्पाद प्रदर्शनी की विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। असम के पारंपरिक रेशमी उत्पादों तथा पूर्वोत्तर के हस्तशिल्प और बांस शिल्प के उत्पाद भी यहां उपलब्ध हैं। उत्तर और पश्चिम भारत से भी बड़ी संख्या में प्रतिभागी अपने विशिष्ट उत्पाद लेकर पहुंचे हैं। गुजरात की पारंपरिक वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा, राजस्थान के रंग-बिरंगे हस्तशिल्प और पारंपरिक प्रिंट, हिमाचल प्रदेश के ऊनी उत्पाद, उत्तर प्रदेश की पारंपरिक बुनाई एवं हस्तशिल्प, हरियाणा के ग्रामीण उत्पाद तथा झारखंड और छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक एवं जनजातीय शिल्प यहां प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त देश के अन्य राज्यों से आए प्रतिभागी भी अपने-अपने क्षेत्र की पारंपरिक पहचान से जुड़े खादी वस्त्र, सिल्क, हस्तशिल्प, प्राकृतिक उत्पाद, खाद्य प्रसंस्कृत सामग्री, हर्बल उत्पाद और ग्रामोद्योग उत्पाद लेकर पहुंचे हैं। मीडिया से संवाद के दौरान केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और नीतियों के परिणामस्वरूप खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने भी अभूतपूर्व प्रगति की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि इस क्षेत्र के माध्यम से 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में यह क्षेत्र 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के लक्ष्य को भी प्राप्त करेगा।

Cultural Journeys

अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में ज्योत्स्ना बंसल की विशेष उपलब्धि — “तर्कन्यूमरो” के माध्यम से भारतीय दर्शन और अंकज्योतिष को जोड़ने वाली पहली महिला अंकशास्त्री

नई दिल्ली : थाईलैंड के बैंकॉक स्थित सिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय में 28–30 सितम्बर 2026 को पंचम वैश्विक संस्कृत सम्मेलन–2026 आयोजित हुआ। भारतीय ज्ञान परम्परा पर आयोजित इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन ग्लोबल संस्कृत फोरम, भारत, सिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय के संस्कृत अध्ययन केन्द्र, पुरातत्त्व संकाय तथा थाई भारत सांस्कृतिक लॉज, बैंकॉक ने किया। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थाईलैंड में भारत के राजदूत श्री पुनीत अग्रवाल तथा समारोह के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. डॉ. चिरापत प्रपाण्डविद्या थे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. बालमुकुन्द पाण्डेय एवं प्रो. बलराम पाणी (डीन, दिल्ली विश्वविद्यालय) सम्मिलित रहे। सम्मेलन के संयोजक डॉ. राजेश कुमार मिश्र तथा आयोजन सचिव डॉ. वुथिफोंग थाविनसोम्बत थे। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ज्योत्स्ना बंसल की पुस्तक ‘TarkaNumero: Numbers through the Logic of Indian Philosophy’ का लोकार्पण विशेष आकर्षण रहा। TarkaNumero के माध्यम से उन्होंने अन्नम्भट्ट के तर्कसंग्रह पर आधारित भारतीय दर्शन के सिद्धान्तों और अंकज्योतिष के बीच एक मौलिक वैचारिक सम्बन्ध प्रस्तुत किया है। इस प्रकार भारतीय दर्शन और अंकज्योतिष को शोधपरक रूप से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुस्तक प्रस्तुत करने वाली वे पहली भारतीय महिला अंकशास्त्री हैं। इससे पूर्व इस विषय पर उनका प्रारम्भिक शोध Prajna शोध-पत्रिका (पूर्णप्रज्ञ संशोधन मन्दिर द्वारा ) में प्रकाशित हो चुका है। यह संस्थान केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त आदर्श शोध संस्थान है। समापन समारोह में पद्मश्री प्रो. डॉ. चिरापत प्रपाण्डविद्या की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि प्रो. सुषमा यादव (अध्यक्ष, UGC Steering Committee on LOCF), सारस्वत अतिथि प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल एवं डॉ. आई मेड धर्मसा (इंडोनेशिया) की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंतरराष्ट्रीय मंच पर TarkaNumero का लोकार्पण भारतीय ज्ञान परम्परा, भारतीय दर्शन और अंकज्योतिष को वैश्विक पाठक वर्ग तक पहुँचाने तथा इनके बीच एक नए संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय पहल है।

Education

केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने लिज्जत पापड़ की कारीगर बहनों से किया संवाद, महिला सशक्तिकरण की सराहना

1966 में लिज्जत पापड़ को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग से ग्रामोद्योग के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी। केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप लिज्जत पापड़ महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की प्रेरक मिसाल बन चुका है।  खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने बुधवार को मुंबई के श्री षण्मुखानंद चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती ऑडिटोरियम, सायन (पूर्व), मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की कारीगर बहनों को संबोधित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केवीआईसी अध्यक्ष ने महिला कारीगरों के कार्य की सराहना की और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में लिज्जत पापड़ जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की प्रेसिडेंट श्रीमती स्वाति आर. पराडकर भी उपस्थित रहीं। उन्होंने संस्था की छह दशक से अधिक की प्रेरक यात्रा, महिला कारीगरों की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर जानकारी साझा की। अपने संबोधन में अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज गोयल ने कहा कि लिज्जत पापड़ की कहानी 15 मार्च 1959 को केवल 7 बहनों और 80 रुपये से शुरू हुई थी। यह प्रयास केवल पापड़ बनाने का नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने, सम्मान के साथ जीने और आत्मनिर्भर बनने का सपना था। वर्ष 1966 में केवीआईसी द्वारा लिज्जत पापड़ को ग्रामोद्योग के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद इस यात्रा को नई गति मिली। आज लिज्जत पापड़ की 83 शाखाओं के माध्यम से 16 राज्यों में 45 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की यात्रा से जुड़ी हैं। लिज्जत पापड़ ने समय के साथ अपने उत्पादों में भी विस्तार किया है। पापड़ के अलावा संस्था मसाले, आटा, डिटर्जेंट और लिक्विड सोप जैसे उत्पादों का भी निर्माण कर रही है। इसके उत्पाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण अफ्रीका सहित 30 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि लिज्जत पापड़ की सबसे बड़ी ताकत गुणवत्ता, मेहनत और अनुशासन है। उन्होंने कहा कि यह संस्था प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को साकार करने का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा, “लिज्जत सिर्फ पापड़ नहीं बनाती, वह सम्मान, आत्मविश्वास और अवसर गूंथती है।” श्री गोयल ने कहा कि लिज्जत पापड़ की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। वर्ष 2003 में सर्वश्रेष्ठ ग्रामोद्योग पुरस्कार, 2005 में ब्रांड इक्विटी अवार्ड और 2017 में महिला विकास पुरस्कार से संस्था को सम्मानित किया गया। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों और मीडिया ने भी लिज्जत पापड़ की प्रेरक यात्रा को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। केवीआईसी अध्यक्ष ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग से जुड़ी की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि देशभर में करीब 3 हजार खादी संस्थाओं के माध्यम से लगभग 5 लाख कारीगरों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। पिछले 12 वर्षों में खादी कारीगरों की वेजेज में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये और बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत पिछले 12 वर्षों में 3.23 लाख से अधिक मशीन एवं टूलकिट वितरित किए गए हैं। वहीं, PMEGP के अंतर्गत अभी तक करीब 11 लाख नई परियोजनाएं स्थापित हुईं, जिनके लिए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गई और करीब 1 करोड़ नए लोगों को रोजगार मिला।

Business Buzz

अंतरराष्ट्रीय संपर्क सम्मेलन में खनन, महत्वपूर्ण खनिजों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश-स्तरीय भागीदारी, निवेश के अवसरों और सहयोग पर चर्चा की गई।

भारत के खनन और खनिज क्षेत्र के लिए आयोजित सबसे बड़े सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी, इंडिया माइनिंग वीक 2026 ने ‘इंडिया माइनिंग: ग्लोबल कनेक्ट’ की मेजबानी की। इस अंतरराष्ट्रीय संवाद सत्र में 19 देशों के राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि भारत के खनन और खनिज क्षेत्र में अधिक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और सहयोग के अवसरों पर चर्चा करने के लिए शामिल हुए। इस संवाद सत्र का आयोजन कोयला मंत्रालय और खान मंत्रालय द्वारा खनन उद्योग के सहयोग से 15-17 नवंबर 2026 को यशोभूमि, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इंडिया माइनिंग वीक 2026 की तैयारियों के हिस्से के रूप में किया गया था। इस संवाद सत्र की मेजबानी कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे और कोयला मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती रुपिंदर बराड़ ने की। इसमें भाग लेने वाले राजनयिक मिशनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने खनन एवं खनिज इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ मिलकर इंडिया माइनिंग वीक 2026 में देश-स्तरीय सहभागिता के अवसरों पर चर्चा की। कोयला और खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने इंडिया माइनिंग वीक 2026 में वैश्विक खनन समुदाय से सक्रिय सहयोग और भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने भागीदार देशों को प्रमुख खनन कंपनियों, बड़े निवेशकों और प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए आमंत्रित किया और इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की भागीदारी पारस्परिक रूप से लाभकारी होगी और खनन एवं खनिज क्षेत्र में सहयोग के अवसरों को और मजबूत करेगी। श्री सतीश चंद्र दुबे ने साझेदार देशों के खनन मामलों के मंत्रियों के साथ-साथ प्रमुख निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी सहित व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहभागिता सुनिश्चित करने में अपनी गहरी रुचि व्यक्त की। उन्होंने सभी गणमान्य व्यक्तियों और हितधारकों को 15 नवंबर को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में आयोजित होने वाले इंडिया माइनिंग वीक 2026 के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। कोयला मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती रुपिंदर बराड़ ने इस अवसर पर कहा, “वसुधैव कुटुंबकम” के शाश्वत भारतीय आदर्श का आह्वान किया और वैश्विक खनन क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली साझेदारी और सहयोग की भावना पर प्रकाश डाला। भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में प्रगति कर रहा है, ऐसे में खनन और खनिज क्षेत्र देश के विकास और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने नवंबर में आयोजित होने वाले इंडिया माइनिंग वीक 2026 के मद्देनजर, वैश्विक खनन समुदाय को एक साथ आने, विचारों का आदान-प्रदान करने, विशेषज्ञता साझा करने और सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया। सुश्री बराड़ ने इस बात पर बल दिया कि भारत एक अधिक नवोन्मेषी, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर जुड़े खनन क्षेत्र को आकार देने के लिए विश्व भर के भागीदारों के विचारों, अनुभवों और समर्थन की प्रतीक्षा कर रहा है। इस संवाद सत्र में मलावी, श्रीलंका, मोज़ाम्बिक, अल्जीरिया, अमेरिका, चिली, भूटान, इंडोनेशिया, इथियोपिया, रूस, इराक, मोरक्को, वेनेजुएला, स्पेन, पोलैंड, मंगोलिया, ज़ाम्बिया, फ्रांस, घाना और यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संवाद सत्र में देश के प्रतिनिधिमंडलों, सरकारी और संस्थागत प्रतिनिधियों, व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडलों, वक्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, खनन और खनिज कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, उपकरण निर्माताओं, निवेशकों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग संघों के माध्यम से संभावित भागीदारी पर विचार-विमर्श किया गया। इस संवाद सत्र के दौरान इंडिया माइनिंग वीक 2026 के दायरे और कार्यक्रम को साझा करने और महत्वपूर्ण खनिजों, खनिज अन्वेषण, खनन प्रौद्योगिकी, भारी खनन उपकरण, नवाचार, निवेश, व्यापार और संसाधन विकास जैसे पारस्परिक हित के क्षेत्रों पर चर्चा की गई। इसमें भाग लेने वाले मिशनों को अपने-अपने देशों की संबंधित कंपनियों, सरकारी एजेंसियों, संस्थानों और उद्योग निकायों की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था। भारत द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों, संसाधन सुरक्षा, अवसंरचना विकास और घरेलू विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, खनन मूल्य श्रृंखला में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। इंडिया माइनिंग वीक 2026 विभिन्न देशों और कंपनियों को अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने, व्यावसायिक अवसरों का पता लगाने और भारतीय नीति निर्माताओं, खनन कंपनियों, निवेशकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के लिए एक मंच प्रदान करेगा। तीन दिवसीय इंडिया माइनिंग वीक 2026 में 25,000 से अधिक उद्योग पेशेवर और निर्णयकर्ता, 500 से अधिक प्रदर्शक और प्रौद्योगिकी प्रदाता, 200 से अधिक वक्ता और उद्योग विशेषज्ञ, 100 से अधिक सम्मेलन सत्र और तकनीकी प्रस्तुतियाँ, 1,000 से अधिक सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधि और 300 से अधिक खनन और खनिज कंपनियां एक साथ आएंगी , जिसमें 50 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद है । इस आयोजन में एक उच्च स्तरीय सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी, तकनीकी सत्र, नेतृत्व संवाद, एक के बाद एक बैठकें, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और उत्पाद शामिल होंगे। इसके साथ ही कोयला, धातु, महत्वपूर्ण खनिज, अन्वेषण, खनन प्रौद्योगिकी, स्वचालन, खान सुरक्षा, स्थिरता, खनिज को शुद्ध रूप में प्राप्त करना और संसाधन दक्षता जैसे विषयों पर चर्चा भी होगी। ‘इंडिया माइनिंग: ग्लोबल कनेक्ट’ संवाद सत्र, इंडिया माइनिंग वीक 2026 से पहले चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय पहुंच कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत नवंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों, खनन कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, निवेशकों और उद्योग संगठनों के साथ और अधिक जुड़ाव की योजना बनाई गई । इंडिया माइनिंग वीक 2026 के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें https://www.indiaminingweek.org/

Politics & Nation

12 अक्टूबर से डाक भवन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान

• आरएमएस बंद करने के प्रस्ताव के खिलाफ कर्मचारियों में आक्रोश • ट्रांजिट सेक्शन खत्म करने की प्रक्रिया रोकने की मांग • निजी व्यवस्था से डाक सेवा महंगी और धीमी होने की आशंका • निजी आरटीएन के बजाय विभागीय मेल मोटर सेवा मजबूत करने पर जोर • कर्मचारियों की सेवा शर्तें और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग नई दिल्ली : भारतीय डाक विभाग में आरएमएस कार्यालयों को बंद अथवा अन्य डिवीजनों में विलय करने, आरएमएस के ट्रांजिट सेक्शन समाप्त करने तथा मेल मोटर सेवा के स्थान पर निजी आरटीएन चलाने के प्रस्ताव के विरोध में भारतीय आरएमएस एवं एमएमएस कर्मचारी संघ वर्ग-III और भारतीय आरएमएस एवं एमएमएस मेलगार्ड एवं एमटीएस संघ ने आंदोलन का ऐलान किया है। दोनों संगठनों ने कहा है कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर 12 अक्टूबर से डाक भवन, नई दिल्ली में अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ के महासचिव अनंत कुमार पाल, भारतीय आरएमएस एवं एमएमएस कर्मचारी संघ वर्ग-III के राष्ट्रीय महामंत्री राजेश कुमार, भारतीय आरएमएस एवं एमएमएस मेलगार्ड एवं एमटीएस संघ के राष्ट्रीय महामंत्री त्रिलोकी टंडन तथा भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ के संरक्षक व पूर्व महासचिव संतोष कुमार सिंह ने आंदोलन के संबंध में जानकारी दी। भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ के महासचिव अनंत कुमार पाल ने कहा कि विभाग द्वारा आरएमएस कार्यालयों को बंद करने या अन्य डिवीजनों में मिलाने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जानी चाहिए। आरएमएस के ट्रांजिट सेक्शनों को समाप्त करने के प्रस्ताव को वापस लेने और मेल मोटर सेवा के स्थान पर निजी आरटीएन चलाने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार की भी मांग की गई। भारतीय आरएमएस एवं एमएमएस कर्मचारी यूनियन क्लास-III के राष्ट्रीय महामंत्री राजेश कुमार ने कहा कि यदि सरकार का निजी आरटीएन के माध्यम से डाक भेजने का प्रस्ताव लागू होता है तो इसका असर केवल कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि डाक उपभोक्ताओं पर भी आर्थिक दबाव बढ़ेगा और सेवाओं को पहुंचाने में अधिक समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के माध्यम से डाक भेजने की व्यवस्था शुरू होने पर डाक की सुरक्षित डिलीवरी भी एक बड़ी चिंता का विषय होगी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षित ढंग से गंतव्य तक पहुंचाने में वर्तमान डाक व्यवस्था का रिकॉर्ड अच्छा रहा है। ऐसे में इस व्यवस्था को कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया जाना चाहिए। हाल के नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले ने परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर चिंता को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि आरएमएस और मेल मोटर सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के पद, सेवा शर्तें, वरिष्ठता तथा भविष्य की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारतीय आरएमएस एवं एमएमएस मेल गार्ड एवं एमटीएस यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री, त्रिलोकी टंडन ने कहा कि ट्रांजिट सेक्शनों को समाप्त करने तथा मेल मोटर सेवा की जगह निजी व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाकर विभागीय व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित मुद्दों पर दोनों संगठनों के साथ तत्काल द्विपक्षीय वार्ता की मांग की। भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ के संरक्षक व पूर्व महासचिव संतोष कुमार सिंह ने कहा कि संघों ने विभाग के समक्ष अपनी मांगें कई बैठकों में रखी हैं। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन का निर्णय लिया गया है। नेताओं ने विभाग से समय रहते सकारात्मक निर्णय लेने और प्रस्तावों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो 12 अक्टूबर से डाक भवन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।

Technology & AI

जब परफेक्ट बहू का सामना हुआ सिरफिरे घरवालों से, तो मचा धमाल; ‘नई नवेली’ का ट्रेलर आउट!

ट्रेलर का लिंक : https://www.instagram.com/reel/Dd6aUNNMjop/?stkn=MTZlOXExd3BtdXFpcg== एमेज़ॅन एमजीएम स्टूडियोज़ और कलर येलो ने आज नई नवेली का ट्रेलर रिलीज़ किया, और इस फ़िल्म में दर्शक देखेंगे कि किस तरह “भाभी डायन है” वाला रहस्य उम्मीदों से परे एक धमाकेदार और मनोरंजक सफ़र में बदल जाता है। फ़िल्म में मोहिनी का किरदार निभाने वाली यामी गौतम धर के अब तक के सबसे अनदेखे अवतार में नज़र आने वाली हैं। ये फ़िल्म एक नई और आदर्श बहू, एक अतरंगी परिवार और एक ऐसे राज की कहानी है, जो घर की दहलीज पार कर कोसों दूर तक जाती है। बालाजी मोहन के निर्देशन में बनी, और हिमांशु शर्मा और दिव्य निधि शर्मा द्वारा लिखी, और आनंद एल. राय और हिमांशु शर्मा द्वारा प्रोड्यूस की गई नई नवेली की कहानी मेरठ पर आधारित है, जो भारत की अपनी फ़ैंटेसी फ़ैमिली-एंटरटेनर फ़िल्म है। यह फ़िल्म जबरदस्त हंसी-मजाक, पारिवारिक उथल-पुथल, अनसुलझे रहस्यों और धमाकेदार एक्शन की ऐसी जुगलबंदी है, जो पर्दे पर एक शानदार उत्सव जैसा अनुभव पेश करने वाली है। जी.वी. प्रकाश कुमार के संगीत से सजी यह फ़िल्म दशहरे के ठीक पहले 16 अक्टूबर, 2026 को आपके नजदीकी सिनेमाघरों में रिलीज़ के लिए तैयार है। इस फ़िल्म का ट्रेलर दर्शकों को अवस्थी परिवार की दुनिया में ले जाता है, जहाँ परिवार की नई बहू, मोहिनी के आने के बाद ऐसे कई सवाल सामने आते हैं, जिनका कोई जवाब नहीं है। एक सामान्य भारतीय परिवार के जाने-पहचाने माहौल में रंग-बिरंगे किरदार, उन सबकी अलग-अलग राय और शादी की तमाम रस्मों से शुरू होने वाला सिलसिला धीरे-धीरे दर्शकों की सोच से परे और हैरान करने वाली दुनिया के दरवाजे खोल देता है। यामी गौतम धर इस फ़िल्म की सबसे अहम कड़ी हैं और नई नवेली का ट्रेलर भी दर्शकों के मन में आगे की कहानी जानने की इच्छा जगाता है। दशहरे के मौके पर रिलीज़ होने वाली इस फ़िल्म की कहानी बिल्कुल अलग है जो दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करेगी। इस मौके पर फ़िल्म के निर्देशक, बालाजी मोहन ने कहा, “सच कहूं तो ‘नई नवेली’ मेरे लिए इसलिए खास है क्योंकि इसकी शुरुआत एक ऐसे परिवार से होती है जो बिल्कुल अपना-सा लगता है, जिसमें वो तमाम नोक-झोंक, अपनी राय और अजीबोगरीब पागलपन हैं जो हर घर में देखने को मिलता है। लेकिन फिर यह कहानी सोच से परे एक ऐसा मोड़ लेती है, जो दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाकर उन्हें हैरान कर देगी। फ़िल्म में एक से बढ़कर एक बेहतरीन कलाकार हैं, और सबने अपनी अनोखी अदाकारी से अपने-अपने किरदार में जान डाल दिया है, जबकि मोहिनी के किरदार में यामी का अपनापन, रहस्यमयी अंदाज़ और चुलबुलापन दर्शकों का दिल जीत लेगा। हमने घर-परिवार की इन जानी-पहचानी बातों को बड़े ही भव्य और अनोखे रूप में पेश किया है, साथ ही कॉमेडी का तड़का शुरू से आखिर तक बरकरार रखा है। मुझे बेहद खुशी है और उसे लम्हे का बेसब्री से इंतजार है, जब दर्शक इस बार दशहरे के मौके पर मेरी पहली फ़िल्म फिल्म और इस शानदार, काल्पनिक दुनिया का बड़े पर्दे पर आनंद लेंगे।” मोहिनी का किरदार निभाने के बारे में बात करते हुए यामी गौतम धर ने कहा, “मोहिनी का किरदार मुझे इसलिए पसंद आया क्योंकि वो वैसी नहीं है जैसी दर्शक उम्मीद करते हैं। उसमें एक अपनापन और जानी-पहचानी सी बात है, पर साथ ही एक ऐसा गहरा राज भी छुपा है जो धीरे-धीरे सामने आता है। नई नवेली ने मुझे एक ऐसा किरदार निभाने का मौका दिया, जो परिवार, हँसी-मज़ाक, जज़्बातों, जादुई दुनिया और धमाकेदार एक्शन के बीच आसानी से ढल जाती है, फिर भी दिल से अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है। बालाजी सर, आनंद सर, हिमांशु, कलर येलो की टीम और एमेज़ॅन एमजीएम स्टूडियोज़ के साथ काम करने का अनुभव शानदार। मैं इस बार दशहरे के मौके पर दर्शकों को मोहिनी से रूबरू कराने और उन्हें इस अनोखे सफर पर ले जाने के लिए बेहद उत्साहित हूँ।” नई नवेली का हो रहा है सिनेमा में गृह प्रवेश, 16 अक्टूबर को देखिए, अपने नज़दीकी सिनेमाघरों में!

Cultural Journeys

6th Shillong Literary Festival Set to Open Amid Cherry Blossoms at Ward’s Lake

~Edition VI introduces ‘First Bloom’ initiative to discover and award emerging writers across the Northeast ~Exclusive literature career workshops at State Convention Centre ~ The 6th Shillong Literary Festival is set to return from November 12 to 14, 2026, bringing together writers, thinkers, artists and readers for three days of books, ideas, dialogue, storytelling and performances at Ward’s Lake, Shillong. Supported by the Department of Tourism, Government of Meghalaya, the festival has grown into a significant cultural platform, bringing national and international literary voices to the State while showcasing Meghalaya’s rich storytelling traditions and creative ecosystem. Set against the Shillong’s cherry blossoms, the three-day festival will once again transform the city into what has often been described as the ‘Kyoto of the West’, offering visitors a distinctive combination of literature, culture and the natural beauty of Meghalaya. Ahead of Edition VI, the festival has introduced “FIRST BLOOM: Discovering New Writing from the Northeast,” an initiative aimed at identifying and encouraging emerging fiction and narrative non-fiction writers from across the region. The initiative will offer a total prize pool of ₹75,000, with ₹50,000 for the winner and ₹25,000 for the runner-up, creating a platform for new literary voices from the Northeast to reach wider audiences. As part of its pre-festival programming, the Shillong Literary Festival will also host two exclusive workshops on career prospects in literature on October 26, 2026, at the State Convention Centre, Shillong. The morning session, from 10:30 AM to 12:00 PM, will feature Kanishka Gupta, while the afternoon session, from 3:00 PM to 5:00 PM, will feature writers Mitra Phukan and Lalnunsanga Ralte. With 100 seats available for each workshop, registration will be on a first-come, first-served basis. The 2026 edition follows a successful prelude held earlier this year at Bikaner House in New Delhi, which featured prominent voices including veteran actor Naseeruddin Shah, 2026 Pulitzer Prize winner Suparna Sharma and veteran journalist Shekhar Gupta. The prelude expanded the festival’s cultural footprint beyond Meghalaya and strengthened its engagement with the wider literary, media and creative community. This year’s festival will once again serve as a confluence of intercultural exchange, bringing together the rich traditions, folklore and storytelling of the Khasi, Jaintia and Garo communities with contemporary Indian and global narratives. The programme will create spaces for conversations between regional thinkers, writers and international literary figures, while exploring the evolving relationship between literature, culture and society. Over the years, the Shillong Literary Festival has hosted several eminent authors, including Banu Mushtaq, Vikram Seth, Shobhaa De, Shehan Karunatilaka and Francesc Miralles, among many others. Author Shobhaa De has described the festival as the “prettiest lit fest ever,” reflecting its distinctive setting and intimate connection with Shillong’s cultural and natural landscape. Building on the more than 13,000 visitors recorded at last year’s edition, the upcoming festival will also feature cultural and culinary experience alongside its literary programming. Live music performances by artists from the Chief Minister’s Meghalaya Grassroots Music Program (CM-MGMP) will be held every evening, while food stalls showcasing local culinary talent will offer visitors an opportunity to experience Meghalaya’s diverse food culture. The festival also contributes to Meghalaya’s wider efforts to strengthen its creative economy and cultural tourism, creating opportunities for writers, artists, performers, local entrepreneurs and audiences to engage through a shared platform.

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