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IITF 2026: भारत मंडपम में सजेगा कारोबार, संस्कृति और तकनीक का सबसे बड़ा उत्सव

13 से 27 नवंबर तक चलेगा इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर नई दिल्ली : भारत की सबसे प्रतिष्ठित व्यापार प्रदर्शनियों में से एक इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2026 का आयोजन 13 से 27 नवंबर तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस वर्ष मेले की थीम “विकास और विरासत“ रखी गई है, जो भारत की आधुनिक प्रगति और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगी। आईआईटीएफ 2026 में भारत और विदेशों से 3500 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा लेंगे, जबकि देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंडप आकर्षण का केंद्र होंगे। बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को पार्टनर स्टेट बनाया गया है, वहीं असम, दिल्ली, झारखंड और पश्चिम बंगाल फोकस स्टेट के रूप में शामिल होंगे। मेले में 10 देशों की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी देखने को मिलेगी, जिनमें थाईलैंड, ईरान, नेपाल, चीन, श्रीलंका और बांग्लादेश प्रमुख हैं। इसके अलावा 51 केंद्रीय मंत्रालय, सरकारी विभाग, पीएसयू और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी अपनी उपलब्धियों और योजनाओं का प्रदर्शन करेंगे। इस बार आगंतुकों के लिए हॉल ऑफ इंस्पिरेशन, ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) पवेलियन, इमर्सिव डिजिटल जोन और 90 से अधिक फूड आउटलेट्स विशेष आकर्षण रहेंगे। वहीं सूफी संगीत, ओडिसी नृत्य, कव्वाली, लाइव कॉन्सर्ट और लोक कला कार्यक्रम मेले को और रंगीन बनाएंगे। व्यावसायिक आगंतुकों के लिए 14 से 18 नवंबर तक विशेष B2B दिवस निर्धारित किए गए हैं, जबकि आम जनता के लिए मेला 19 से 27 नवंबर तक खुला रहेगा। IITF 2026 केवल एक व्यापार मेला नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति, नवाचार, संस्कृति और उद्यमिता का भव्य उत्सव बनने जा रहा है। IITF 2026 में आगंतुकों और प्रदर्शकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए कई उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मेले के परिसर में आवागमन को आसान बनाने के लिए शटल सेवा और गोल्फ कार्ट की व्यवस्था होगी। आगंतुकों के लिए पर्याप्त पार्किंग, ऐप-आधारित कैब सेवाओं के लिए विशेष पिक-अप एवं ड्रॉप प्वाइंट, चिकित्सा सहायता और आपातकालीन स्थितियों के लिए एंबुलेंस सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। दिव्यांगजनों के लिए विशेष सहायता एवं सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। पूरे आयोजन स्थल पर 24 घंटे निगरानी सहित मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, खोया-पाया केंद्र, विजिटर सहायता काउंटर, पोर्टर और कंसीयर्ज सेवाएं, क्लोक रूम सुविधाएं तथा पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन मोबिलिटी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। आगंतुकों को आवश्यक जानकारी, प्रदर्शनी से जुड़े अपडेट और प्रचार सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पूरे परिसर में डिजिटल डिस्प्ले और एलईडी मस्त लगाए जाएंगे। IITF 2026 में आगंतुकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश और टिकट व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाया गया है। सामान्य आगंतुकों के लिए भैरों रोड स्थित गेट नंबर 3 और 4 तथा मथुरा रोड स्थित गेट नंबर 6 और 10 से प्रवेश की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रोटोकॉल श्रेणी के आगंतुक गेट नंबर 1, 5A, 7 और 10 का उपयोग कर सकेंगे, जबकि मालवाहक वाहनों के लिए गेट नंबर 1, 3 और 5B निर्धारित किए गए हैं। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को देखते हुए प्रवेश मार्गों में आवश्यकतानुसार बदलाव किया जा सकता है, इसलिए आगंतुकों को ITPO और ट्रैफिक विभाग की नवीनतम सलाह का पालन करने की सलाह दी गई है। टिकट दरों की बात करें तो बिजनेस डेज़ के दौरान वयस्कों के लिए प्रवेश शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है। सामान्य दिनों में सप्ताहांत और राजपत्रित अवकाश पर वयस्कों के लिए टिकट 200 रुपये तथा बच्चों के लिए 100 रुपये रहेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सामान्य दिनों में केवल 50 रुपये का टिकट रखा गया है, जबकि 19 से 27 नवंबर के बीच वैध सरकारी पहचान पत्र दिखाने पर वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजन को निःशुल्क प्रवेश मिलेगा। इसके अलावा, सीजन टिकट, प्रदर्शक पास और विभिन्न श्रेणियों के विशेष टिकट भी उपलब्ध रहेंगे। आगंतुक ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए booking.indiatradefair.com वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं, जिससे मेले में प्रवेश प्रक्रिया और भी आसान एवं सुविधाजनक हो जाएगी।

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फेस्टिव सीजन में ‘झाड़फूँक’ का जलवा, JioHotstar पर टॉप ट्रेंडिंग फिल्मों में शामिल; खौफनाक जंगल और रूह कंपा देने वाली कहानी ने जीता दर्शकों का दिल

30 अक्टूबर को OTT पर रिलीज होते ही फिल्म को मिला दर्शकों का प्यार, लंबे समय बाद भारतीय OTT पर देखने को मिली रोंगटे खड़े कर देने वाली हॉरर कहानी; यशपाल शर्मा और सुम्बुल तौकीर खान की परफॉर्मेंस बनी आकर्षण का केंद्र। फेस्टिव सीजन में हॉरर और सस्पेंस का ऐसा तड़का लगा है कि दर्शक भी खौफ के इस अनुभव को पसंद कर रहे हैं। फिल्म ‘झाड़फूँक’ इन दिनों JioHotstar पर अपनी लोकप्रियता को लेकर चर्चा में है। 30 अक्टूबर को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई इस फिल्म को पहले दिन से ही दर्शकों का प्यार मिलना शुरू हो गया। फिल्म JioHotstar पर अंग्रेजी फिल्म ‘Obsession’ के बाद दूसरे स्थान पर ट्रेंड कर रही है, जबकि हिंदी फिल्मों की श्रेणी में यह नंबर 1 की पोजिशन पर बनी हुई है। खास बात यह है कि ‘झाड़फूँक’ सिर्फ अपनी कहानी ही नहीं, बल्कि अपने खौफनाक दृश्यों और डर पैदा करने वाले माहौल के कारण भी दर्शकों का ध्यान खींच रही है। लंबे समय बाद भारतीय OTT पर ऐसी हॉरर फिल्म देखने को मिल रही है, जिसके कई दृश्य सचमुच रूह कंपा देने वाला अनुभव देते हैं। फिल्म में दिखाया गया घना और डरावना जंगल, रहस्यमयी घर, अजीबोगरीब घटनाएं और अचानक सामने आने वाले डरावने मोड़ दर्शकों को लगातार रोमांचित करते हैं। फिल्म के कई सीन को लेकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी दर्शकों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। खास तौर पर इसके डरावने सीक्वेंस और अप्रत्याशित घटनाक्रम दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। हॉरर के साथ सस्पेंस और इमोशन का मेल फिल्म को फेस्टिव सीजन का एक अलग OTT अनुभव बना रहा है। खौफनाक जंगल, रहस्यमयी घर और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी ‘झाड़फूँक’ की कहानी उत्तराखंड की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच घटने वाली रहस्यमयी घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म की मुख्य किरदार आस्था की जिंदगी एक सड़क दुर्घटना के बाद पूरी तरह बदल जाती है। गर्भवती आस्था को एक अनजान घर में शरण मिलती है, जहां रहने वाला परिवार पहली नजर में बेहद मददगार और सहज दिखाई देता है। लेकिन धीरे-धीरे उस घर में होने वाली अजीबोगरीब घटनाएं और एक रहस्यमयी महिला की मौजूदगी आस्था के लिए खौफ का कारण बनने लगती है। अपने साथी के अचानक लापता होने और अपने होने वाले बच्चे की सुरक्षा की चिंता के बीच आस्था एक ऐसे रहस्य में उलझ जाती है, जहां हर चेहरा और हर घटना संदेह पैदा करती है। जंगल का डरावना वातावरण, घर के भीतर घटने वाली रहस्यमयी घटनाएं और कहानी में लगातार आते नए मोड़ दर्शकों की उत्सुकता को बनाए रखते हैं। फिल्म की कहानी अंत तक कई सवालों के बीच दर्शकों को उलझाए रखती है। यशपाल शर्मा और सुम्बुल तौकीर खान की परफॉर्मेंस बनी आकर्षण का केंद्र फिल्म की सफलता में इसके कलाकारों की अदाकारी भी अहम भूमिका निभाती नजर आ रही है। अभिनेता यशपाल शर्मा ने अपने प्रभावशाली अभिनय से कहानी को मजबूती दी है। वहीं सुम्बुल तौकीर खान अपनी भूमिका में खास छाप छोड़ती हैं। दोनों की परफॉर्मेंस फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। इसके अलावा पद्मिनी कोल्हापुरे का अनुभव और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को एक अलग आयाम देता है। हर्ष राजपूत और अप्रतिम सिंह भी अपनी भूमिकाओं के जरिए कहानी के रहस्य और रोमांच को आगे बढ़ाते हैं। सभी कलाकारों की मौजूदगी फिल्म के सस्पेंस को प्रभावशाली बनाने में मदद करती है। नीव एंटरटेनमेंट इंडिया के बैनर तले बनी है फिल्म ‘झाड़फूँक’ का निर्माण नीव एंटरटेनमेंट इंडिया के बैनर तले किया गया है। फिल्म का निर्देशन राजन रामगोपाल वर्मा ने किया है। इसके निर्माता शैलेश परिहार और सह-निर्माता वृंदा ब्रह्मभट्ट हैं। फिल्म में यशपाल शर्मा, पद्मिनी कोल्हापुरे, सुम्बुल तौकीर खान, हर्ष राजपूत और अप्रतिम सिंह प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। फेस्टिव सीजन में रिलीज हुई ‘झाड़फूँक’ ने हॉरर, सस्पेंस और दमदार अभिनय के मेल से OTT दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है। JioHotstar पर मिल रही लोकप्रियता और इंटरनेट पर इसके डरावने दृश्यों को लेकर हो रही चर्चा फिल्म की टीम के लिए उत्साहजनक है। अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जो डराने के साथ-साथ अंत तक रहस्य बनाए रखें, तो ‘झाड़फूँक’ आपके लिए एक दिलचस्प हॉरर अनुभव साबित हो सकती है।

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रामायण: जब भारतीय सिनेमा ने रचा भव्यता, आस्था और कल्पना का नया इतिहास

नमित मल्होत्रा की महत्वाकांक्षी प्रस्तुति में आस्था, संस्कृति और तकनीक का अद्भुत संगम की सुंदर प्रस्तुति। कलाकार : रणबीर कपूर , साई पल्लवी, यश, अरुण गोविल , रकुल प्रीत , लारा दत्ता, विवेक ओबेरॉय निर्माता : नमित मल्होत्रा लेखक : श्रीधर राघवन, नितेश तिवारी, श्रेयस जैन निर्देशक : नितेश तिवारी रेटिंगरू ★★★★☆ (4.5/5) रामायण में प्रभु श्रीराम की गाथा को हो कोई जानता है, क्योंकि भारतीय सभ्यता की आत्मा यदि किसी एक महाकाव्य में समाहित है, तो वह निस्संदेह रामायण है। यह केवल भगवान श्रीराम की कथा नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य, त्याग, प्रेम और आदर्शों की ऐसी गाथा है, जिसने सदियों से करोड़ों लोगों के जीवन को दिशा दी है। ऐसे में जब निर्माता नमित मल्होत्रा ने रामायण की अमर कथा को वैश्विक स्तर की तकनीक और भव्य सिनेमाई दृष्टि के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया है, तो यह परियोजना एक साधारण फिल्म नहीं रह जाती, बल्कि भारतीय संस्कृति के गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला एक ऐतिहासिक प्रयास बन जाती है। भव्यता से कहीं अधिक, भावनाओं का महाकाव्य रामायण की सबसे बड़ी शक्ति उसकी भावनात्मक गहराई है। युद्ध, महल, वनवास और चमत्कार इसकी बाहरी परत हैं, जबकि इसकी आत्मा श्रीराम के आदर्शों, सीता माता की सहनशीलता, लक्ष्मण की निष्ठा और हनुमानजी की अद्वितीय भक्ति में निवास करती है। किसी भी रामायण की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इन भावनाओं को कितनी सच्चाई और श्रद्धा के साथ प्रस्तुत करती है। नमित मल्होत्रा की इस प्रस्तुति को लेकर जो उत्साह दिखाई देता है, उसका सबसे बड़ा कारण यही है कि इसमें केवल दृश्य वैभव नहीं, बल्कि कथा की मूल आत्मा को भी महत्व दिया गया है, जब तकनीक और संवेदना का संतुलन बनता है, तब कोई फिल्म केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक अनुभव बन पाती है। विश्वस्तरीय तकनीक के साथ रामायण की कहानी आज का दर्शक विश्व सिनेमा देखता है और तकनीकी गुणवत्ता के मामले में किसी प्रकार का समझौता नहीं चाहता। लंबे समय से भारतीय दर्शक ऐसी पौराणिक फिल्म की प्रतीक्षा कर रहे थे, जो तकनीकी दृष्टि से हॉलीवुड स्तर की हो और विषयवस्तु में पूरी तरह भारतीय हो। यहीं पर नमित मल्होत्रा की विशेषज्ञता सबसे अधिक प्रभावित करती है। दृश्य प्रभावों और आधुनिक फिल्म निर्माण तकनीकों के क्षेत्र में उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुई है। यही कारण है कि रामायण से यह उम्मीद की जा रही है कि यह भारतीय सिनेमा की तकनीकी सीमाओं को नए अतुल्नीय आयाम देगी। अयोध्या की दिव्यता, दंडकारण्य का प्राकृतिक वैभव, लंका का स्वर्णिम वैभव और धर्म-अधर्म के बीच देवताओं और असुरों का निर्णायक युद्ध अपेक्षित स्तर पर प्रस्तुत किए हैं, जिससे यह फिल्म भारतीय दर्शकों के लिए केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक भव्य दृश्य अनुभव साबित होगी। कास्ट और उनके किरदार राम का अभिनय करने वाले अभिनेता रणबीर कपूर फिल्म में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भूमिका में नजर आते हैं। उनके किरदार में आदर्श पुत्र, आदर्श पति और धर्म की रक्षा करने वाले योद्धा की छवि दिखाई गई है। वहीं अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता के रूप में दिखाई देती हैं। अभिनेता यश लंकापती रावण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में रावण को एक शक्तिशाली, विद्वान और जटिल व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है। तो वहीं अभिनेता रवि दुबे लक्ष्मण लक्ष्मण के किरदार में हैं, जो श्रीराम के सबसे बड़े सहयोगी और उनके प्रति पूर्णतः समर्पित भाई के रूप में दिखाई देते हैं। 1987 की प्रसिद्ध रामायण में श्रीराम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल राजा दशरथ के प्रभावशाली किरदार में नजर आते हैं। अभिनेत्री लारा दत्ता – कैकेयी की भूमिका में हैं, जिनके निर्णय से राम के वनवास की कथा शुरू होती है। वहीं एक रामायण का के प्रसिद्ध चरित्र के मंथरा के रूप में अभिनेत्री शीबा चड्ढा दिखाई देती हैं, जो कैकेयी को राम के वनवास के लिए उकसाती है। रावण की बहन के बनी शूर्पणखा के किरदार को निभाया है अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने जिनकी वजह से कथा एक महत्वपूर्ण मोड़ लेती है। राम के भाई बने आदिनाथ कोठारे – भरत की भूमिका में हैं, जो श्रीराम के प्रति अपनी निष्ठा और त्याग के लिए जाने जाते हैं। नई पीढ़ी के लिए पुरातन मूल्यों का सेतु समय के साथ जीवनशैली बदलती है, लेकिन मूल मूल्य नहीं बदलते। सत्य, मर्यादा, कर्तव्य, सम्मान और करुणा आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने त्रेता युग में थे। आधुनिक पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन मूल्यों को प्रासंगिक और रोचक रूप में प्रस्तुत करना है। रामायण जैसी फिल्म इस अंतर को पाटने की क्षमता रखती है। यह नई पीढ़ी को न केवल अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ेगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि महानता शक्ति में नहीं, बल्कि चरित्र में होती है। यही संदेश रामायण को कालजयी बनाता है और यही इसे हर युग में प्रासंगिक बनाए रखता है। वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व रामायण केवल भारत की विरासत नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशिया सहित दुनिया के अनेक देशों में इसके विभिन्न स्वरूप सदियों से लोकप्रिय रहे हैं। इसलिए यह फिल्म केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि इसमें वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने की क्षमता भी नजर आती है। जिस प्रकार दुनिया ने विभिन्न देशों की मिथकीय कथाओं को बड़े पर्दे पर अपनाया है, उसी प्रकार रामायण भी विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर सकती है। यह केवल मनोरंजन प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि भारतीय दर्शन, आध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों का परिचय भी कराती है। आस्था और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन रामायण जैसे विषय पर काम करना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। करोडों लोगों की श्रद्धा इस कथा से जुड़ी हुई है। इसलिए इसकी प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ संवेदनशीलता भी आवश्यक है। इस परियोजना के प्रति लोगों की उत्सुकता का कारण केवल इसकी भव्यता नहीं, बल्कि यह विश्वास भी है कि कथा का सम्मान बनाए रखने का प्रयास किया गया है। जब किसी सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक स्वरूप दिया जाता है, तब सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि नवीनता और परंपरा दोनों का सम्मान बना रहे। यदि फिल्म इस संतुलन को सफलतापूर्वक साध लेती है, तो यह आने वाले दशकों तक भारतीय सिनेमा के लिए एक मानक बन सकती है। संगीत, भावनाएं और सिनेमाई

Bollywood Beats

शाहरुख खान की ‘किंग’ के लिए एड शीरन और अरिजीत सिंह का हुआ धमाकेदार ग्लोबल कोलैबोरेशन, सामने आई ‘तू मिल जाए’ गाने की BTS झलक

शाहरुख खान की ‘किंग’ के लिए हुआ सबसे बड़ा ग्लोबल म्यूजिकल कोलैबोरेशन, एड शीरन और अरिजीत सिंह की आवाज में आया ‘तू मिल जाए’ ग्लोबल पॉप स्टार एड शीरन ने बताया कि कैसे शाहरुख खान से हुई एक आम मुलाकात ने उन्हें फिल्म ‘किंग’ के गाने ‘तू मिल जाए’ से बॉलीवुड में अपना पहला गाना गाने का मौका दिलाया। इस गाने में उन्होंने अरिजीत सिंह और मधुबंती के साथ अपनी आवाज दी है। इंटरनेशनल सिंगर-सॉन्ग राइटर एड शीरन ने अपने फैंस को इंस्टाग्राम के जरिए शाहरुख खान स्टारर सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्म किंग के जरिए अपने गाए गए सबसे पहले हिंदी गाने ‘तू मिल जाए’ के रिकॉर्डिंग की झलक यानी बिहाइंड-द-सीन्स को शेयर किया है। बता दें कि यह फिल्म 24 दिसंबर को थिएटर में रिलीज होने वाली है। यह कोलैबोरेशन कैसे मुमकिन हुआ इसपर रोशनी डालते हुए एड ने बताया कि जब वे सबसे पहले शाहरुख खान से मिले, तब सुपरस्टार ने उन्हें कहा था कि उन्हें उनकी अगली फिल्म के लिए गाना बनाना होगा, जिससे एड का बॉलीवुड में डेब्यू भी होगा। पिछले कुछ सालों से वे एक दूसरे के संपर्क में हैं, और इस तरह से उनके बीच का बॉन्ड वक्त के साथ बना। अपने भारत में ट्रिप के दौरान एड ने शाहरुख खान के घर का दौरा भी किया, ताकि वे अरिजीत सिंह के साथ अपने म्यूजिक वीडियो में एक्टर का कैमियो अपीयरेंस शूट करवा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे इस ड्रीम प्रोजेक्ट ने उनके कुछ बेहद पसंदीदा लोगों को उनके करीब लाया। https://www.instagram.com/reel/DfR1OmtoDO_/?obrf=MW02N3RrcjV1dmtkdw== गाने को सचिन-जिगर ने कंपोज किया है, अरिजीत सिंह, एड शीरन और फीमेल सिंगर मधुबंती की आवाज से सजा फिल्म ‘किंग’ का गाना ‘तू मिल जाए’ एक खास ग्लोबल म्यूजिकल मोमेंट बन गया है। अब फैंस शाहरुख खान के जादू को पर्दे पर देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

Food & Beverages

गृहिणी से बनीं हेल्थ उद्यमी: सोनिया की ‘तोशिका नेचुरल’ लौटा रही है शुद्ध कच्ची घानी तेल की परंपरा

नई दिल्ली : आज के दौर में जब बाजार मिलावटी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों से भरे पड़े हैं, तब शुद्ध और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों की तलाश हर घर की प्राथमिकता बनती जा रही है। इसी सोच को वास्तविकता में बदलने का काम कर रही हैं दिल्ली की उद्यमी सोनिया, जिन्होंने अपने ब्रांड ‘तोशिका नेचुरल कोल्ड प्रेस्ड ऑयल’ के माध्यम से पारंपरिक भारतीय कच्ची घानी पद्धति को आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। सोनिया का मानना है कि स्वस्थ जीवन की शुरुआत शुद्ध खानपान से होती है। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जहां लोगों को केवल तेल नहीं बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और विश्वास का अनुभव भी मिलता है। उनका ब्रांड आज उन परिवारों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बन रहा है जो अपने भोजन में प्राकृतिक और पोषण से भरपूर उत्पादों को शामिल करना चाहते हैं। पारंपरिक तकनीक से तैयार होता है तेल तोशिका नेचुरल में तेल निकालने के लिए पारंपरिक लकड़ी की कच्ची घानी (वुडन कोल्ड प्रेस्ड) तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें तेल धीमी गति से निकाला जाता है, जिससे बीजों के प्राकृतिक गुण, सुगंध और स्वाद काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। ब्रांड का दावा है कि तेल निर्माण की पूरी प्रक्रिया में रासायनिक मिश्रण और अनावश्यक प्रोसेसिंग से बचा जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति सजग उपभोक्ताओं के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। खाना पकाने के अलावा कई ग्राहक इन तेलों का उपयोग त्वचा और बालों की देखभाल के लिए भी करते हैं। पारदर्शिता बनी सबसे बड़ी ताकत आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में जहां अधिकांश उपभोक्ता यह नहीं जान पाते कि उनके द्वारा खरीदा गया उत्पाद किस प्रकार तैयार हुआ है, वहीं तोशिका नेचुरल ने पारदर्शिता को अपनी सबसे बड़ी पहचान बनाया है। दिल्ली स्थित यूनिट में ग्राहक स्वयं आकर तेल निकालने की पूरी प्रक्रिया देख सकते हैं। वे अपने सामने बीजों को तेल में बदलते हुए देख सकते हैं और यह जान सकते हैं कि उत्पाद किस प्रकार तैयार किया जाता है। यह पहल ग्राहकों के विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ ब्रांड को अन्य कंपनियों से अलग पहचान भी देती है। जागरूकता को दे रही हैं बढ़ावा सोनिया का मानना है कि केवल उत्पाद बेचना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को सही जानकारी देना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के तहत तोशिका नेचुरल ग्राहकों को विभिन्न प्रकार के तेलों के गुण, उनके उपयोग और स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में जागरूक करने का कार्य भी कर रही है। उनका उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसे विकल्प उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने परिवार के लिए बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक निर्णय ले सकें। ब्रांड लगातार लोगों में प्राकृतिक उत्पादों और पारंपरिक भारतीय खाद्य पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। संघर्ष, विश्वास और सफलता की कहानी सोनिया का सफर एक सामान्य गृहिणी से सफल उद्यमी बनने तक का प्रेरणादायक उदाहरण है। परिवार, विशेषकर अपने पति के सहयोग और स्वयं के आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने इस पहल को शुरू किया। शुरुआत में चुनौतियां थीं, लेकिन गुणवत्ता से कभी समझौता न करने के उनके निर्णय ने आज उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है। देशभर में पहुंचाने का सपना अब सोनिया का लक्ष्य केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। वह चाहती हैं कि देशभर के परिवार शुद्ध, प्राकृतिक और पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए तेलों का लाभ उठा सकें। उनका विश्वास है कि यदि उत्पाद की गुणवत्ता और ईमानदारी बनाए रखी जाए, तो ग्राहक स्वयं ब्रांड की सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं। ‘तोशिका नेचुरल’ आज केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, पारंपरिक भारतीय ज्ञान और उपभोक्ता विश्वास का प्रतीक बनकर उभर रहा है। सोनिया की यह पहल उन सभी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने की इच्छाशक्ति रखती हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहती हैं।

Cultural Journeys

राजधानी दिल्ली में पहले ‘चीनी फिल्म महोत्सव 2026’ का भव्य समापन; ‘द कंपोज़र’ बनी बेस्ट फिल्म, जल्द ही बीजिंग में सजेगा ‘इंडियन फिल्म फेस्टिवल’ का मंच

राजधानी दिल्ली में पहले ‘चीनी फिल्म महोत्सव 2026’ का भव्य समापन; ‘द कंपोज़र’ बनी बेस्ट फिल्म, जल्द ही बीजिंग में सजेगा ‘इंडियन फिल्म फेस्टिवल’ का मंच • सिनेमा बना भारत-चीन के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक पुल; फिल्म डिवीजन ऑडिटोरियम में दो दिवसीय सिनेमाई मेले का सफल समापन • अगले संस्करण की बड़ी घोषणा: दिल्ली में जल्द होगा ‘2nd चीनी फिल्म महोत्सव’ और इसी तर्ज पर चीन के बीजिंग में आयोजित होगा ‘इंडियन फिल्म फेस्टिवल’ • बीजिंग में होने वाले इस ऐतिहासिक भारतीय फिल्म महोत्सव का आयोजन इंडियन एंबेसी (भारतीय दूतावास) और दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) के विशेष सहयोग से किया जाएगा • चीनी दूतावास के मिनिस्टर काउंसलर ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD), संस्कृति मंत्रालय और सूचना व प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के बेमिसाल सहयोग के लिए जताया विशेष आभार • सभी श्रेणियों के विजेताओं और उत्कृष्ट प्रतिभाओं को आधिकारिक ट्रॉफी के साथ स्वर्ण पदक (Gold Medal) और प्रमाण पत्र (Certificate) देकर किया गया सम्मानित नई दिल्ली, सिनेमा, रंगमंच और कला के माध्यम से भारत और चीन के द्विपक्षीय व सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए, देश की राजधानी में आयोजित दो दिवसीय “1st Delhi International Film Festival चीनी फिल्म महोत्सव 2026” का आज पुरस्कार वितरण समारोह और भविष्य की दो बड़ी ऐतिहासिक घोषणाओं के साथ भव्य समापन हो गया। द एंबेसी ऑफ द पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) और संस्कृति मंत्रालय की स्वायत्त संस्था नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के विशेष सहयोग से आयोजित यह महोत्सव महादेव रोड स्थित फिल्म्स डिवीजन ऑडिटोरियम (FDA) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के तहत आयोजित इस फेस्टिवल में दोनों देशों की 10 से ज्यादा बेहतरीन फ़िल्में दिखाई गईं, जिन्हें दर्शकों और कला प्रेमियों का भरपूर प्यार मिला। इस भव्य आयोजन को सुचारू रूप से प्रबंधित करने में ‘बीट लाइफ एंटरटेनमेंट’ की मुख्य भूमिका रही, जिसके कर्ता-धर्ता पीयूष सागर ने बतौर संयोजक और ऑपरेशनल हेड अपनी शानदार प्रतिभा का परिचय दिया। भविष्य के सिनेमाई सफर की दो बड़ी घोषणाएं: इस महोत्सव की सबसे बड़ी उपलब्धि इसके समापन पर सामने आई, जहां भारत और चीन के सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं: 1. राजधानी दिल्ली में जल्द ही “2nd चीनी फिल्म महोत्सव” (2nd Chinese Film Festival) की तारीखों की घोषणा की जाएगी। 2. इसी तर्ज पर, चीन की राजधानी बीजिंग (Beijing) में भी बहुत जल्द एक भव्य ‘इंडियन फिल्म फेस्टिवल’ (Indian Film Festival) आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक महोत्सव का आयोजन चीन स्थित इंडियन एंबेसी (भारतीय दूतावास) और दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) के विशेष आपसी सहयोग और तालमेल से किया जाएगा, ताकि भारतीय सिनेमा की खुशबू चीनी दर्शकों तक पहुंच सके। पुरस्कार, स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र वितरण (Awards & Honors): समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में जूरी और सिलेक्शन कमेटी द्वारा घोषित किए गए विजेताओं को प्रतिष्ठित ट्रॉफी के साथ-साथ स्वर्ण पदक (Gold Medal) और प्रमाण पत्र (Certificate) वितरित कर सम्मानित किया गया। ‘चीनी फिल्म महोत्सव 2026’ के आधिकारिक पुरस्कारों की सूची: • बेस्ट फीचर फिल्म (Best Feature Film): ‘द कंपोज़र’ (निर्देशक: ज़िएरझाती याहेफू) • सिलेक्शन कमिटी चॉइस अवार्ड (Selection Committee Choice Award): ‘द सिंकिंग ऑफ द लिस्बन मारू’ (निर्देशक: मिंग फैन, लिली गोंग, फैंग ली) • फीचर फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर (Best Director – Feature): यिहुई शाओ (फिल्म: ‘हर स्टोरी’) • फीचर फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर (Best Actor – Feature): हू जुन (फिल्म: ‘द कंपोज़र’ / निर्देशक: ज़िएरझाती याहेफू) • फीचर फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस (Best Actress – Feature): ‘नाइट रेड’ (एक्सिस ऑफ वॉर: नाइट रेड FF) • बेस्ट शॉर्ट फिल्म (Best Short Film): ‘अ पासिंग क्लाउड्स’ (निर्देशक: पेइयान तांग) • बेस्ट चाइल्ड एक्ट्रेस (Best Child Actress): आराध्या (फिल्म: ‘द गर्ल विद क्लोज लिप्स’ / निर्देशक: रामकिशोर पारचा) भारत-चीन संबंधों और मंत्रालयों के सहयोग पर आधिकारिक विचार (Official Versions): महोत्सव के सफल आयोजन और इसके गहरे प्रभाव पर चीनी दूतावास के प्रतिनिधियों और भारत के कला दिग्गजों ने अपने आधिकारिक विचार साझा किए: चीनी दूतावास के मिनिस्टर काउंसलर श्री वांग शिनमिंग ने भारत-चीन फिल्म जगत के साझा विजन पर प्रकाश डालते हुए और भारतीय मंत्रालयों व संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “सिनेमा एक ऐसा प्रभावशाली और जीवंत माध्यम है जो बिना किसी भौगोलिक सीमा के दो महान सभ्यताओं के लोगों के दिलों को सीधे जोड़ता है। भारत और चीन दोनों की सांस्कृतिक जड़ें बेहद गहरी हैं। हम इस ऐतिहासिक महोत्सव को सफल बनाने के लिए नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD), संस्कृति मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के अद्भुत और सुचारू सहयोग के लिए दिल से विशेष आभार (Special Thanks) व्यक्त करते हैं। यह आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच आपसी समझ, विश्वास और दोस्ती के स्थायी बंधन को और मजबूत करेगा।” इससे पूर्व, चीनी दूतावास के फर्स्ट सेक्रेटरी डॉ. झांग हाइलिन ने भी सिनेमा की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “यह फिल्म फेस्टिवल हमारी गहरी सांस्कृतिक जड़ों का प्रमाण है। सिनेमा के प्रभावशाली माध्यम से, हम भारत और चीन के लोगों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा दे सकते हैं, सांस्कृतिक दूरियों को पाट सकते हैं और दोस्ती के स्थायी बंधन बना सकते हैं।” वहीं इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहल की सराहना करते हुए महोत्सव के जूरी हेड और प्रख्यात थिएटर डायरेक्टर श्री अरविंद गौड़ ने कहा, “सिनेमा और रंगमंच सीमाओं से परे जाकर संवाद का सबसे मजबूत सेतु तैयार करते हैं। भारत और चीन जैसे दो बड़े पड़ोसियों के बीच ऐसे फिल्म महोत्सवों का होना बहुत जरूरी है, क्योंकि कला ही वो जरिया है जो दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के इतिहास, जीवनशैली और संवेदनाओं को गहराई से समझने का मौका देती है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) का इस फेस्टिवल के साथ जुड़ना देश के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।” DIFF के संस्थापक अध्यक्ष व फेस्टिवल डायरेक्टर श्री रामकिशोर पारचा ने भी सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया और देश के इतिहास में पहली बार नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के इस फिल्म फेस्टिवल के साथ जुड़ने को ऐतिहासिक करार दिया।

Cultural Journeys

शाम-ए-अख्तरी’ में फिर गूंज उठी बेगम अख्तर की रूह, पद्मश्री डॉ. सोमा घोष की गायकी ने किया मंत्रमुग्ध

बेगम अख्तर की 52वीं पुण्यतिथि पर संगीत और सिनेमा का अनूठा संगम, शुभंकर घोष की फिल्म के साथ सोमा घोष ने सुरों में जीवंत की मलिका-ए-ग़ज़ल की दास्तान नई दिल्ली, ग़ज़ल की दुनिया में अपनी मखमली आवाज़ और दर्द भरी गायकी से अमिट छाप छोड़ने वाली पद्म भूषण बेगम अख्तर की 52वीं पुण्यतिथि पर राजधानी दिल्ली में एक यादगार संगीतमय शाम सजी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के समवेत सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘शाम-ए-अख्तरी’ में पद्मश्री डॉ. सोमा घोष ने अपनी भावपूर्ण गायकी से सुरों की मल्लिका बेगम अख्तर को ऐसी श्रद्धांजलि दी कि श्रोता भावविभोर हो उठे। इस संगीतमय आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता संगीत और सिनेमा का अनूठा प्रयोग रहा। मधु मूर्च्छना की संस्थापिका डॉ. सोमा घोष एवं प्रो. शुभंकर घोष द्वारा निर्मित फिल्म के माध्यम से बेगम अख्तर के जीवन के अनछुए पहलुओं, संघर्ष, संगीत साधना और उनकी गायकी के बदलते स्वरूप को प्रस्तुत किया गया। पर्दे पर बेगम अख्तर की जिंदगी की कहानी आगे बढ़ती रही और उसके साथ सोमा घोष अपनी आवाज़ से उन भावनाओं को जीवंत करती रहीं। फिल्म और लाइव गायन की इस अद्भुत जुगलबंदी ने दर्शकों को ऐसा अनुभव कराया, मानो बेगम अख्तर एक बार फिर उनके बीच मौजूद हों। उनके जीवन के उतार-चढ़ाव के साथ गायकी में आए बदलावों को सोमा घोष ने बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। इस अभिनव प्रयोग को उपस्थित संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा। हमारी कोशिश नई पीढ़ी को महान संगीत विभूतियों से जोड़ने की है : सोमा घोष इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. सोमा घोष ने कहा, “आज की पीढ़ी धीरे-धीरे भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान विभूतियों और उनकी विरासत से दूर होती जा रही है। मेरी हमेशा कोशिश रही है कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और बेगम अख्तर जैसी महान हस्तियों के जीवन और संगीत को युवाओं के सामने नए अंदाज़ में प्रस्तुत कर सकूं।” उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “आज गायन के दौरान एक पल के लिए मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे बेगम अख्तर स्वयं मेरे सामने आकर खड़ी हो गई हों। मैंने उनके गीतों को केवल गाने के बजाय उनकी जिंदगी की कहानी के साथ जोड़कर प्रस्तुत करने की कोशिश की है। उम्मीद है कि हमारा यह प्रयास सभी के दिलों तक पहुंचा होगा।” दिग्गज हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति इस विशेष अवसर पर प्रख्यात शास्त्रीय नृत्यांगना एवं राज्यसभा की पूर्व सांसद पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक हेमंत शर्मा तथा संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव अरविन्द कुमार सहित कला, साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के कला दर्शन विभाग की अध्यक्ष प्रो. डॉ. ऋचा काम्बोज के नेतृत्व एवं विभाग के सहयोग से किया गया। इन कलाकारों ने सजाई सुरों की महफिल ‘शाम-ए-अख्तरी’ में डॉ. सोमा घोष के साथ कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से शाम को यादगार बनाया। तबले पर नवाज़िश जब्बार हुसैन खान, हारमोनियम पर परमिता मुखर्जी, कीबोर्ड पर उमेश कुमार साहू, सारंगी पर काशिफ निज़ामी तथा साइड रिदम पर पंकज बनई ने संगीत की खूबसूरत संगत की। वहीं सुश्री आस्था गुप्ता एवं आंचल शर्मा ने अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगाए। कार्यक्रम का संचालन विशाल पांडे ने किया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित संगीत प्रेमियों ने डॉ. सोमा घोष और उनकी पूरी टीम के इस अभिनव प्रयोग की सराहना की। ‘शाम-ए-अख्तरी’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महान कलाकार भले ही दुनिया से विदा हो जाएं, लेकिन उनकी आवाज़ और कला सदियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहती है।

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वर्ल्ड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने नई दिल्ली में आयोजित किया कॉर्पोरेट गवर्नेस एक्सीलेंस समिट एंड अवॉर्डस 2026

नई दिल्लीः वर्ल्ड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने 30 अक्टूबर को नई दिल्ली में कॉर्पोरेट गवर्नेस एक्सीलेंस समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन किया। सम्मेलन का उद्देश्य कॉर्पोरेट प्रशासन, जिम्मेदार नेतृत्व और बोर्डरूम मानकों को मजबूत करना था। वर्ल्ड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन डायरेक्टर्स इंस्टीट्यूट वर्ल्ड काउंसिल ऑफ डायरेक्टर्स के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में वर्ल्ड एसोसिएशन फॉर स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (WASME) ने सहयोग किया। सम्मेलन की थीम विश्वसनीय वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जिम्मेदार बोर्डों का निर्माण’ रही। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण 100 भावी निदेशकों को ‘सर्टिफाइड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर’ और ‘सर्टिफाइड इंटरनेशनल कॉर्पोरेट डायरेक्टर’ की उपाधियां प्रदान करना रहा। इन प्रतिभागियों ने संस्थान का निर्धारित प्रशिक्षण और मूल्यांकन कार्यक्रम पूरा किया। इस अवसर पर अनुभवी निदेशकों और कार्यक्रम के स्नातकों को भी सम्मानित किया गया। वर्ल्ड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ श्री ज़ीशान पठान ने कहा, “विश्वास, पूंजी से भी तेज गति से आगे बढ़ता है। हम एक-एक तैयार बोर्डरूम के माध्यम से इस विश्वास का निर्माण कर रहे हैं और यूनेस्को में इसे दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे।” डायरेक्टर्स इंस्टीट्यूट वर्ल्ड काउंसिल ऑफ डायरेक्टर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. हेवल मेहता ने कहा, “बेहतरीन निदेशक बनने की तैयारी बोर्डरूम में पहुंचने से बहुत पहले शुरू होती है। हम उन्हें वर्षों का प्रशिक्षण देते हैं, ताकि जिम्मेदारी मिलने पर वे उसे निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हों।” वर्ल्ड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के सीएफओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, गवर्नेस एंड ऑपरेशंस स्ट्रैटेजी श्री अयूब शेख ने कहा, “किसी उपाधि का महत्व उसके पीछे निर्धारित मानकों से तय होता है। हम अपने मानकों की सावधानीपूर्वक रक्षा करते हैं, क्योंकि यही मानक प्रमाणन को विश्वसनीयता प्रदान करते हैं।” सम्मेलन में कॉर्पोरेट गवर्नेस और पर्यावरण, सामाजिक एवं प्रशासनिक (ESG) नेतृत्व पर चर्चा हुई। संस्थान के अनुसार, उसने भारत और मध्य पूर्व में 7,000 से अधिक निदेशकों एवं वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। वर्ष 2025 के आयोजन के बाद आयोजित यह सम्मेलन कॉर्पोरेट गवर्नेस और जिम्मेदार नेतृत्व के लिए एक वार्षिक मंच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Cultural Journeys

खादी वाली दिवाली’ थीम पर आयोजित ‘खादी फेस्ट-2026’ का उद्घाटन केवीआईसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने किया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ के आह्वान को जेन-जी तक पहुंचाने के उद्देश्य से दिल्ली के कनॉट में ‘खादी दिवाली फेस्ट-2026’ का आयोजन. ‘खादी वाली दिवाली’ थीम पर आयोजित ‘खादी फेस्ट-2026’ का उद्घाटन केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने किया. ‘बात खादी की’ पॉडकास्ट के माध्यम से जेन-जी को खादी एवं स्वदेशी आंदोलन से जोड़ने की पहल। अध्यक्ष केवीआईसी ने कहा, “त्योहारों के अवसर पर खादी, स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों की खरीद से मजबूत होगा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प.” प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित एनडीएमसी पालिका पार्क, रीगल सिनेमा के सामने ‘खादी दिवाली फेस्ट-2026’ का आयोजन किया। कार्यक्रम में मीडिया जगत के प्रतिनिधियों के साथ विशेष संवाद एवं दिवाली मिलन आयोजित किया गया। केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। ‘खादी वाली दिवाली’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य दीपावली एवं अन्य त्योहारों के अवसर पर देशवासियों को खादी और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित करना, भारतीय कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाना तथा विशेष रूप से युवा पीढ़ी को स्वदेशी आंदोलन से जोड़ना है। इस अवसर पर केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी को केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि स्वावलंबन, स्वाभिमान और आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनाया था। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खादी और स्वदेशी आंदोलन को नई ऊर्जा और व्यापक जनभागीदारी मिली है। प्रधानमंत्री जी का ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ का आह्वान केवल स्वदेशी वस्तुओं की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय उत्पादों के प्रति गर्व की भावना विकसित करने, स्थानीय उत्पादकों को प्रोत्साहित करने और देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का एक व्यापक अभियान है। श्री गोयल ने कहा कि त्योहारों का समय भारतीय अर्थव्यवस्था, स्थानीय बाजारों और कारीगरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि प्रत्येक परिवार त्योहारों के अवसर पर खादी और अन्य स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देता है, तो इसका सीधा लाभ देश के लाखों कारीगरों, बुनकरों, ग्रामीण उद्यमियों और उनके परिवारों तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों की खरीद केवल एक उपभोक्ता विकल्प नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को मजबूत करने में नागरिकों की महत्वपूर्ण भागीदारी है। केवीआईसी अध्यक्ष ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी और जेन-जी (Gen-Z) से स्वदेशी अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि आज का युवा फैशन, डिजाइन, तकनीक और नए विचारों के प्रति जागरूक है। खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, आकर्षक प्रस्तुतीकरण, बेहतर ब्रांडिंग और समकालीन जीवनशैली से जोड़कर युवाओं के बीच और अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि युवा केवल स्वदेशी उत्पादों के उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि उनके ब्रांड एंबेसडर, डिजाइनर, डिजिटल प्रमोटर और उद्यमी भी बन सकते हैं। श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को साकार करने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग और स्टार्टअप के माध्यम से युवा खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी नई पहचान दिला सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत@2047’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए केवीआईसी ने ‘बात खादी की’ पॉडकास्ट की शुरुआत की है। इसके माध्यम से खादी की विरासत, आधुनिक फैशन, नवाचार और युवा उद्यमिता जैसे विषयों पर बातचीत कर जेन-जी को खादी और स्वदेशी आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल नई पीढ़ी के बीच खादी को लोकप्रिय बनाने और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने में सहायक होगी। मीडिया जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और नीतियों के परिणामस्वरूप खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि इस क्षेत्र के माध्यम से 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में यह क्षेत्र 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के लक्ष्य को भी प्राप्त करेगा। 31 अक्टूबर से शुरु हुए खादी दिवाली फेस्ट-2026 में खादी उत्पादों पर 20 प्रतिशत तथा ग्रामोद्योग उत्पादों पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। ये महोत्सव इस संदेश को सशक्त करता है कि इस दीपावली हम केवल घरों में दीपक ही नहीं जलाएं, बल्कि खादी और स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर देश के लाखों कारीगरों और ग्रामीण परिवारों के जीवन में भी खुशियों का प्रकाश फैलाएं।

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दिल्ली में पहली बार चीनी फिल्मों का ऐतिहासिक महोत्सव, ट्रॉफी और मेडल का भव्य अनावरण

The Embassy of the People’s Republic of China in New Delhi, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की अनूठी सांस्कृतिक जुगलबंदी, 30 और 31 अक्टूबर को फिल्म डिवीजन ऑडिटोरियम में सजेगी महफिल नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में पहली बार आयोजित होने जा रहे “1st Delhi International Film Festival Chinese Film Festival 2026” की आधिकारिक घोषणा बुधवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में की गई। यह महोत्सव 30 और 31 अक्टूबर को नई दिल्ली के फिल्म डिवीजन ऑडिटोरियम में आयोजित होगा, जिसमें चीन और भारत की 10 से अधिक चर्चित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन चीन के दूतावास, दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन के मिनिस्टर काउंसलर वांग शिनमिंग और फर्स्ट सेक्रेटरी डॉ. झांग हेलिन ने महोत्सव की आकर्षक ट्रॉफी और मेडल का भव्य अनावरण किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सिनेमा भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक संवाद एवं मैत्री को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है। दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के संस्थापक एवं फेस्टिवल डायरेक्टर राम किशोर परचा ने इसे दोनों देशों के फिल्म उद्योगों के बीच सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। महोत्सव का उद्घाटन 30 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग करेंगे, जबकि समापन समारोह एवं पुरस्कार वितरण 31 अक्टूबर शाम 6 बजे आयोजित होगा। प्रसिद्ध रंगकर्मी अरविंद गौड़ जूरी प्रमुख की भूमिका निभाएंगे। महोत्सव के दौरान विशेष सिनेमा वर्कशॉप, फिल्म चर्चा सत्र तथा भारत-चीन को-प्रोडक्शन और सहयोग पर विशेष संवाद भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे युवा फिल्मकारों और छात्रों को अंतरराष्ट्रीय सिनेमा को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। महोत्सव की मुख्य कड़ियाँ (Schedule at a Glance): * तारीख: 30 और 31 अक्टूबर 2026 * स्थान (वेन्यू): फिल्म डिवीजन ऑडिटोरियम (FDA), महादेव रोड, नई दिल्ली * भव्य उद्घाटन समारोह: 30 अक्टूबर 2026, सुबह 11:30 बजे (विशिष्ट अतिथि: महामहिम शू फेइहोंग, चीनी राजदूत) * सिनेमा वर्कशॉप (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा सहयोग): दोनों दिन दोपहर 3:00 बजे * को-प्रोडक्शन और कोलैबोरेशन टॉक: 31 अक्टूबर 2026 * समापन व पुरस्कार वितरण: 31 अक्टूबर 2026, शाम 06:00 बजे

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