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देहरादून बनेगा संवाद, समरसता और विश्व बंधुत्व का केंद्र

महावीरायतन फाउंडेशन की प्रेरणादायी राष्ट्रीय पहल “संवाद से समाधान” का भव्य आयोजन 4 अगस्त को देहरादून : समाज में बढ़ती वैचारिक चुनौतियों, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकात्मता तथा वैश्विक सद्भाव को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से महावीरायतन फाउंडेशन की प्रेरणादायी राष्ट्रीय पहल “संवाद से समाधान” की अगली कड़ी का भव्य आयोजन 04 अगस्त 2026 को लोक भवन, देहरादून (उत्तराखण्ड) में आयोजित किया जाएगा। भगवान महावीर के शाश्वत सिद्धांतों से प्रेरित “संवाद से समाधान” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवाद, सहअस्तित्व और मानवीय मूल्यों पर आधारित एक सशक्त राष्ट्रीय जन-अभियान है। “जियो और जीने दो” तथा “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सार्वभौमिक संदेश से प्रेरित यह पहल “सशक्त भारत, समृद्ध भारत” के संकल्प को साकार करने हेतु समाज के विविध वर्गों को एक साझा मंच पर लाकर संवाद, सहयोग और सामूहिक चिंतन के माध्यम से समकालीन चुनौतियों के सकारात्मक एवं स्थायी समाधान की दिशा में कार्य करती है। वर्ष 2025 से प्रारम्भ हुई “संवाद से समाधान” कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों में अनेक सफल आयोजन सम्पन्न हो चुके हैं। इस अभियान में भारत के उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राज्यों के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री, अनेक केंद्रीय मंत्री, सांसद, संत-महात्मा, शिक्षाविद, न्यायविद, उद्योगपति तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित अतिथियों ने सहभागिता की है। प्रत्येक आयोजन में समाज, राष्ट्र एवं मानवता के लिए उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित कर सेवा, समर्पण और लोककल्याण की भावना को प्रोत्साहित किया जाता है। महावीरायतन फाउंडेशन एक राष्ट्रीय सामाजिक, आध्यात्मिक एवं जनकल्याणकारी संस्था है, जो संवाद, सेवा और संस्कार के माध्यम से सामाजिक समरसता, मूल्यनिष्ठ शिक्षा, सांस्कृतिक जागरण, पर्यावरण संरक्षण, युवा सशक्तिकरण तथा राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्यरत है। महावीरायतन फाउंडेशन के संस्थापक श्रद्धेय स्वामी श्री देवेन्द्र ब्रह्मचारी जी पिछले दो दशकों से भगवान महावीर के शाश्वत सिद्धांतों के आलोक में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण एवं मानवीय मूल्यों के संवर्धन हेतु समर्पित हैं। उनके प्रेरक नेतृत्व में अनेक जनकल्याणकारी अभियान समाज में सकारात्मक परिवर्तन, नैतिक चेतना और जनभागीदारी को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। इस आयोजन को उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) जी का मुख्य आतिथ्य प्राप्त होगा। आदरणीय श्री भगत सिंह कोश्यारी जी (पूर्व राज्यपाल, महाराष्ट्र एवं गोवा तथा पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जबकि महन्त श्री लोकेश दास जी महाराज, पीठाधीश्वर, स्वामी जगन्नाथ आश्रम, ऋषिकेश का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा। संत-महात्माओं, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, सामाजिक नेतृत्व, युवा प्रतिनिधियों तथा देश-विदेश के प्रबुद्ध जनों की सहभागिता से समृद्ध यह आयोजन विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं सम्मान समारोह के माध्यम से संवाद, विश्वास, सद्भाव और सहअस्तित्व की संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। महावीरायतन फाउंडेशन का विश्वास है कि जब संवाद संस्कारों से जुड़ता है, तब समाधान केवल समाज का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग बनता है। संस्था समाज के सभी वर्गों से इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागी बनकर भगवान महावीर के शाश्वत संदेश— जियो और जीने दो • वसुधैव कुटुम्बकम् सशक्त भारत, समृद्ध भारत को जन-जन तक पहुँचाने तथा “एक भारत • समरस भारत • सशक्त भारत” के संकल्प को साकार करने का आह्वान करती है। महावीरायतन फाउंडेशन धर्म • समाज • राष्ट्र के उत्थान हेतु समर्पित

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श्री रामलीला महासंघ का रणबीर कपूर की मेगा बजट फिल्म रामायण के मेकर्स को चेतावनी

नई दिल्ली : श्री रामलीला महासंघ के प्रेसिडेंट श्री अर्जुन कुमार ने इस दिवाली पर देश विदेश में रिलीज हो रही रणबीर कपूर, सनी देओल यश स्टारर डायरेक्टर नितेश तिवारी की मेगा बजट फिल्म रामायण के मेकर्स को एक पत्र लिखकर मांग की है फिल्म को सिनेमा घरों में रिलीज करने से पूर्व यह फिल्म श्री रामलीला महासंघ के प्रतिनिधि मंडल को दिखाई जाएं । नितेश तिवारी ओर फिल्म की प्रोडक्शन कम्पनी को लिखे पत्र में अर्जुन कुमार ने उन्हें याद दिलाया है कि इससे पूर्व भूषण कुमार की मेगा बजट प्रभास, सैफ अली खान स्टारर फिल्म आदिपुरुष के भी कई दृश्यों पर सनातनी और रामलीला मंचन से जुडे लोगों ने कड़ा एतराज जताया था इन दृश्यों में सोने की लंका को काला दिखाना, महाज्ञानी रावण को मंगोल लुटेरो और उनकी सेना को राक्षसों की सेना आदि कई दृश्य थे। जिसका नतीजा बाक्स आफिस पर फिल्म फ्लाप रही । अर्जुन कुमार ने पत्र में आगे कहा है कि हमें मिली अधिकृत जानकारी के अनुसार इस फिल्म में ऐसे कई दृश्य है जो देश विदेश में बसे हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते है, ऐसे में श्री रामलीला महासंघ इस फिल्म को रिलीज से पूर्व विशेष शो में देखकर निश्चित करना चाहता है कि अगर फिल्म में ऐसा कोई विवादास्पद सीन अथवा संवाद है तो उसे रिलीज से पहले हटा दिया जाएं उन्होंने फिल्म के मेकर्स को चेतावनी दी है कि अगर ऐसा न किया गया तो दिल्ली सहित अन्य राज्यों के उन सिनेमाघरों के बाहर हिंदू संगठनों के साथ श्री रामलीला महासंघ के हजारों की संख्या में विरोध व धरना प्रदर्शन करेंगे।

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‘Naye Bharat Ki Nayi Khadi’ Showcased at Bharat Tex 2026

KVIC Chairman Shri Manoj Goel inaugurates and visits the ‘Khadi India Pavilion’ at Bharat Tex 2026, India’s largest global textiles event. He appreciated the modern interpretation of ‘Naye Bharat Ki Nayi Khadi’, highlighting innovation and contemporary design. He made a special visit to the Jamdani collection exhibited by Ghoranash Silk Khadi Gramodyog Samity of West Bengal. Chairman, KVIC stated that under the visionary leadership of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi, Khadi has emerged as a powerful symbol of India’s rich heritage, self-reliance, sustainable development, and the empowerment of rural livelihoods.  Shri Manoj Goel, Chairman, Khadi and Village Industries Commission (KVIC), Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSME), Government of India, on Tuesday inaugurated the ‘Khadi India Pavilion’ at Hall No. 10 of Bharat Tex 2026 and inspected the pavilion, interacting with exhibitors, artisans and representatives of Khadi institutions. Bharat Tex 2026, India’s largest global textiles event, is being held at Bharat Mandapam in New Delhi. This pavilion, set up by KVIC, showcases an extensive range of Khadi and Village Industries products, design-led innovations, and exclusive collections presented by Khadi institutions from across the country. During his visit, Shri Goel interacted with representatives of Khadi institutions and artisans from different states, gaining insights into their experiences and innovations. Senior officials and employees of KVIC and the Centre of Excellence for Khadi (CoEK) were also present on the occasion.   Shri Manoj Goel explored a wide range of Khadi home linen and home décor products, contemporary apparel, innovation-driven Khadi products, and traditional tools used in Khadi production. He remarked that under the visionary leadership of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi, Khadi—the legacy of Mahatma Gandhi—has transcended its traditional identity as a fabric to become a powerful emblem of India’s rich heritage, self-reliance, sustainability, and the empowerment of millions of rural artisans. The Chairman paid special attention to the ‘Mula’ Jamdani saree and apparel collection showcased by the Ghoranash Silk Khadi Gramodyog Samiti of West Bengal. While interacting with the institution’s representatives, he appreciated their efforts to blend the traditional Jamdani weaving technique with contemporary design. He remarked that such innovations would play a significant role in establishing a new identity for Indian Khadi and handicrafts in the global market.  Today, it has become a powerful medium for realizing the vision of Atmanirbhar Bharat, Vocal for Local, Local to Global, and Viksit Bharat 2047. He emphasized that Khadi is not merely a fabric but represents the livelihoods of millions of artisans and weavers, India’s cultural heritage, and its commitment to sustainable development. Chairman, KVIC stated that the Khadi India Pavilion demonstrates how, through research, design, and innovation, the ‘New Khadi of New India’ is being crafted to align with the preferences of the new generation and the requirements of the global market. Today Khadi has expanded well beyond apparel and has established a distinct presence in contemporary lifestyle products and the global fashion industry. The Khadi India Pavilion showcases the diverse dimensions of Khadi under the theme, “Khadi Reimagined: Tradition for Contemporary Living.”. Among the key highlights of the pavilion are contemporary home décor products, innovations based on indigenous fibres, displays of traditional Khadi tools, and an exclusive range of new Khadi products developed for the younger generation under the theme “Naye Bharat Ki Nayi Khadi – Khadi for Nation, Khadi for Fashion, Khadi for Transformation.” In a statement, Shri Goyal said that the Khadi and Village Industries sector has achieved unprecedented progress as a result of the visionary thinking and policies of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi. During the financial year 2025–26, the sector recorded a turnover of over ₹1.87 lakh crore, while providing employment to more than 2.04 crore people across the country. He expressed confidence that the sustained growth of the Khadi and Village Industries sector would enable it to achieve a turnover of ₹2.51 lakh crore in the coming years. Bharat Tex 2026 is being held from 14 to 17 July 2026 at Bharat Mandapam, New Delhi. The global event has brought together thousands of buyers, industry leaders, designers, entrepreneurs, and policymakers from India and abroad. Through the Khadi India Pavilion, KVIC is effectively showcasing India’s rich Khadi heritage, innovation, design excellence, and commitment to sustainable development before a global audience.

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जहाँ धर्म और विज्ञान दोनों मिल जाते हैं, वह दुर्लभ दर्शन है – आशुतोष राणा

दुर्लभ दर्शन: आशुतोष राणा लॉन्च करेंगे दुनिया का पहला 6D आध्यात्मिक अनुभव दिल्ली : अब भक्तगण एक जगह बैठ कर ही देश के प्रसिद्ध मंदिरों का दर्शन एवं वहाँ होने वाले समस्त पूजा-अनुष्ठान देख पाएँगे, और वह भी मंदिर में अपनी प्रत्यक्ष उपस्थिति जैसे अनुभव के साथ। दुर्लभ दर्शन द्वारा तैयार की गई विशेष 6D VR टेक्नोलॉजी के जरिए यह सब अनुभव संभव हो पाएगा। विशेष बात यह होगी कि इस वर्चुअल रियलिटी में आप 3D दृश्य के साथ-साथ मंदिर के वातावरण में मौजूद जल, वायु और सुगंध की भी हुबहू अनुभूति कर सकेंगे। इस अनुभव को जीवंत कराने के लिए प्रख्यात फ़िल्म अभिनेता आशुतोष राणा बतौर ब्रांड एंबेसडर और मेंटर, दुर्लभ दर्शन से जुड़ गए हैं। दुर्लभ दर्शन, आशुतोष राणा के साथ मिल कर, विश्व के पहले 100 से अधिक 6D अनुभव वाले केंद्र खोलेगा। फिलहाल इस सुविधा का आनंद देश के ग्यारह प्रसिद्ध मंदिरों में लिया जा सकेगा। दिल्ली में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में आशुतोष राणा ने दुर्लभ दर्शन के बारे में बात करते हुए बताया कि “धर्म का अपना विज्ञान होता है और विज्ञान का अपना धर्म, पर जहाँ धर्म और विज्ञान दोनों मिल जाते हैं, वह दुर्लभ दर्शन है। यह विश्व का पहला 6D आध्यात्मिक अनुभव होगा, जिसका आनंद आप VR टेक्नोलॉजी के माध्यम से कहीं भी बैठ कर ले सकेंगे। हर मंदिर के अनुभव में उस मंदिर की पौराणिक कहानियाँ व आध्यात्मिक महत्व के साथ मंदिर में होने वाली प्रत्येक पूजा-पद्धति व आरती इत्यादि की भी सूक्ष्म जानकारी सीधी-सरल भाषा में होगी।” अभिनेता आशुतोष राणा अब ब्रांड एंबेसडर और मेंटर के रूप में ‘दुर्लभ दर्शन’ से जुड़े हैं। यह विश्व का पहला 6D VR आधारित आध्यात्मिक प्लेटफॉर्म है, जहाँ एक जगह बैठकर देश के प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन, पूजा-अनुष्ठान और आरती का जीवंत अनुभव लिया जा सकेगा। दुर्लभ दर्शन की खास 6D टेक्नोलॉजी में 3D विज़ुअल के साथ-साथ मंदिर के वातावरण का जल, वायु और सुगंध भी महसूस होगी। फिलहाल देश के 11 प्रसिद्ध मंदिरों से इसकी शुरुआत हो रही है। 1 जुलाई से “श्रीराम की अयोध्या” और “उज्जैयिनी के महाकाल” अनुभव आम लोगों के लिए खुलेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष राणा ने कहा, “धर्म का अपना विज्ञान होता है और विज्ञान का अपना धर्म। पर जहाँ धर्म और विज्ञान दोनों मिल जाते हैं, वह दुर्लभ दर्शन है।” हर मंदिर के अनुभव में पौराणिक कथाएँ, आध्यात्मिक महत्व और पूजा-पद्धति की जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी। अभिनेता आशुतोष राना बतौर प्रस्तोता (एंकर) इन प्रमुख मंदिरों का महत्व व मंदिरों से जुड़ी कहानियाँ बताएँगे और दर्शन कराएँगे। इन ग्यारह आध्यात्मिक कहानियों को साहित्यकार आलोक श्रीवास्तव ने लिखा है। आलोक श्रीवास्तव पहले शिव तांडव स्तोत्र का भावानुवाद भी कर चुके हैं जो आशुतोष राना के स्वर में अत्यंत लोकप्रिय है। ग्यारह आध्यात्मिक यात्राओं के 6D VR अनुभव दुर्लभ दर्शन और TechXR Innovations के Founder, IIT Kanpur Alumnus और पूर्व IRS अधिकारी प्रशान्त मिश्रा ने बताया कि ‘सुप्रसिद्ध अभिनेता और ‘राम राज्य’ जैसी चर्चित पुस्तक के लेखक आशुतोष राना, हमारे devotional platform दुर्लभ दर्शन के ब्रांड एम्बेसडर और मेंटर के तौर पर अब हमें मार्गदर्शित करेंगे। दुर्लभ दर्शन ने भारत के प्रमुख मंदिरों में immersive experience centers – दुर्लभ दर्शन केंद्र की स्थापना की है जिसमें मंदिर विशेष में होने वाले गर्भगृह के अनुष्ठान, आरतियों की अनुभूति ऐसे होगी, जैसे आप स्वयं वहाँ उपस्थित हों। साथ ही दुर्लभ दर्शन मोबाइल VR किट द्वारा घर बैठे 60 से अधिक दिव्य स्थलों की यात्रा का अनुभव किया जा सकता है। दुर्लभ दर्शन अब आशुतोष राणा जी के साथ 11 दिव्य आध्यात्मिक स्थलों की इमर्सिव यात्रायों की सीरीज ला रहा है जिस में आप दुर्लभ दर्शन केंद्रों में बैठ कर 6D VR तकनीक के माध्यम से जल वायु एवं सुगंध की अनुभूति के साथ, वहाँ होने वाले अनुष्ठानों का अनुभव कर सकेंगे, वहाँ अपनी उपस्थिति अनुभव कर सकेंगे एवं मंदिर से संबंधित पौराणिक महत्व और कहानियों को जान सकेंगे। आशुतोष राना और दुर्लभ दर्शन का यह अपने तरीके का पहला प्रयोग है जिसमें आध्यात्मिक अनुभव को VR में इतना सजीव दिखाया जा रहा है। यह साझेदारी भारत की आध्यात्मिक भावना और आधुनिक टेक्नोलॉजी को साथ लेकर चलने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। Durlabh Darshan का उद्देश्य है — हर भक्त तक “मन भर दर्शन” पहुँचाना। भक्ति-गीतों, भजनों और अद्भुत दृश्यों के रोमांचित अनुभव से भरी इन फिल्मों का संगीत युवा संगीतकार सौरभ मेहता ने दिया है।’ कंपनी का लक्ष्य विश्व के पहले 100 से अधिक 6D अनुभव केंद्र खोलना है। क्या है Durlabh Darshan और यह किस समस्या का समाधान करता है भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु इस भावनाओं के साथ पहुँचते हैं कि उन्हें अपने आराध्य के समीप से मनभर दर्शन हो सके और निर्बाध रूप से उनकी प्रार्थना कर सकें, लेकिन अत्यधिक भीड़ के चलते प्रत्येक श्रद्धालु को इस तरह के दर्शन हो पाना संभव नहीं होता है। अक्सर श्रद्धालुओं को क्षणिक एवं दूर से दर्शन करने पर ही संतोष करना पड़ता है एवं उनके मन में कहीं न कहीं ये इच्छा होती है कि कुछ और समय अपने आराध्य का साथ मिल जाता, निकट से दर्शन हो जाते। भक्तों की इस आंतरिक इच्छा की पूर्ति करने का विनम्र प्रयास है दुर्लभ दर्शन। 100 प्रतिशत मेड इन इंडिया टेक्नोलॉजी है 6D दुर्लभ दर्शन की 6D technology 100 प्रतिशत मेड इन इंडिया है एवं इसका पेटेंट का आवेदन भी दिया जा चुका है, जो किसी भी साइज के अनुभव केंद्र को 6D immersive अनुभव केंद्र में परिवर्तित कर सकती है। durlabh darshan ki yah 6D machines, VR headset से जुड़ जाती हैं और समय विशेष पर जल, वायु एवं सुगंध का अनुभव जोड़ देती हैं। ये दुर्लभ दर्शन केंद्र भारत के प्रमुख मंदिरों के सहयोग से मंदिर परिसर के प्रांगण अथवा समीप स्थान पर खोले गए हैं, जहाँ पर श्रद्धालु 10 से 15 मिनट तक ऐसा महसूस करता है जैसे वह मंदिर विशेष के गर्भगृह में स्वयं उपस्थित है।। Durlabh Darshan अब तक लाखों भक्तों को सेवा दे चुका है और इसके अनेक केंद्र अभी तक देश के राज्यों में संचालित हैं, जिनमें प्रमुख हैं- श्री काशी विश्वनाथ, Varanasi श्री महाकालेश्वर, उज्जैन माँ वैष्णो देवी राजद्वार पार्क , हनुमान गढ़ी

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दिल, दौलत और रिश्तों का अनोखा मंत्र, दिल्ली में गूंजा ‘प्यार, पैसा, परिवार’

नई दिल्ली : आध्यात्मिक मार्गदर्शन और लोगों के व्यक्तिगत विकास के लिए काम करने वाले प्लेटफॉर्म सोलसेंसई ने नई दिल्ली के चिन्मय मिशन सेंटर में रविवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का विषय था “प्यार, पैसा, परिवार” और इसे प्रसिद्ध लाइफ कोच एवं मोटिवेशनल स्पीकर काव्याल सेदानी ने संचालित किया।सोलसेंसई भारत का एकमात्र आध्यात्मिक वेलनेस (समग्र आध्यात्मिक कल्याण) प्लेटफॉर्म है, जो लोगों को लाइव ऑनलाइन वर्कशॉप के साथ-साथ ऑफलाइन प्रत्यक्ष और अनुभव देने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर भी उपलब्ध कराता है। करीब तीन घंटे तक चले इस सत्र में लोगों को यह समझाया गया कि प्रेम संबंधों को कैसे बेहतर बनाया जाए। पैसे के प्रति सकारात्मक और संतुलित सोच कैसे विकसित की जाए। परिवार में रिश्तों को कैसे मजबूत किया जाए। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को अपने जीवन, भावनाओं और रिश्तों को एक नए और सकारात्मक नजरिए से समझने में मदद करना था, ताकि वे अधिक खुशहाल और संतुलित जीवन जी सकें। यह कार्यक्रम लोगों को प्यार, धन और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी समस्याओं को समझने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का मार्ग दिखाने के लिए आयोजित किया गया था। सोलसेंसई (SoulSensei) का मानना है कि हर व्यक्ति खुशहाल और संतुष्ट जीवन जीने का अधिकार रखता है। इसी उद्देश्य से यह मंच भरोसेमंद आध्यात्मिक विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से लोगों को आत्मविकास का अवसर प्रदान कर रहा है। सोलसेंसई का मानना है कि हर इंसान को ऐसा जीवन मिलना चाहिए जिसमें खुशी हो, मानसिक शांति हो और जीवन का एक स्पष्ट उद्देश्य हो। इसलिए संस्था सिर्फ ज्ञान देने या भाषण कराने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती है, जिनसे लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें। व्यक्ति अनजाने में खुद ही अपनी सफलता या खुशियों के रास्ते में रुकावट बन जाता है। कोई व्यक्ति नई नौकरी के लिए आवेदन ही नहीं करता क्योंकि उसे पहले से लगता है कि वह सफल नहीं होगा। कोई अच्छा रिश्ता मिलने के बावजूद डर या संदेह के कारण उसे खुद ही खराब कर देता है। कोई व्यक्ति काम को बार-बार टालता है और बाद में असफल हो जाता है। व्यक्ति की अपनी सोच और आदतें ही उसकी तरक्की रोक देती हैं। व्यक्ति हर समस्या के लिए परिस्थितियों या दूसरों को जिम्मेदार मानता है और खुद बदलाव की कोशिश नहीं करता। उदाहरण के लिए वह सोचता है कि “मेरे साथ ही हमेशा बुरा क्यों होता है?” “मेरी असफलता की वजह सिर्फ दूसरे लोग हैं।” ऐसी सोच इंसान को आगे बढ़ने से रोकती है। काव्याल सेदानी ने बताया कि हमारा दिमाग (Brain) नई चीजों और बदलाव से अक्सर डरता है। इसलिए इंसान बदलना चाहता है, लेकिन उसका मस्तिष्क उसे पुरानी आदतों और पुराने व्यवहार की ओर वापस खींच लेता है। अच्छी आदतें अपनाना कई बार मुश्किल लगता है।सेशन में स्कार थ्योरी का सिद्धांत बताया गया। जीवन में मिले पुराने भावनात्मक आघात—जैसे बचपन की उपेक्षा, किसी का धोखा, रिश्तों में कड़वे अनुभव या असफलताएं—भले ही समय के साथ दिखाई न दें, लेकिन उनका असर व्यक्ति की सोच, फैसलों और रिश्तों पर बना रहता है। सेशन में विजुअलाइजेशन के बारे में समझाया गया। एक मानसिक अभ्यास है, जिसमें व्यक्ति अपनी आंखें बंद करके किसी सकारात्मक स्थिति या लक्ष्य की कल्पना करता है। इससे व्यक्ति खुद को आत्मविश्वास से भरा, सफल या मानसिक रूप से शांत महसूस करता है। इसका उद्देश्य नकारात्मक सोच को कम करना और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना होता है। आत्मचिंतन कर वह अपने विचारों, व्यवहार और निर्णयों पर ईमानदारी से सोच सकता है । अपने विचारों, भावनाओं, अनुभवों और लक्ष्यों को नियमित रूप से डायरी या नोटबुक में लिख सकता है । इससे व्यक्ति को खुद को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश था कि व्यक्ति अपने जीवन में “यह मेरे साथ ही क्यों हो रहा है?” पूछने की जगह “यह मुझे क्या सिखा रहा है?” जैसी सकारात्मक सोच विकसित करे। खुद को परिस्थितियों का शिकार मानने की जगह हर कठिनाई को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मानना चाहिए। प्रतिभागियों से 15 ऐसे प्रश्न पूछे गए, जिनसे वे समझ सकें कि उनकी सोच कैसी है? उनकी सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी क्या है? वे रिश्तों, पैसे और जीवन की चुनौतियों को किस नजरिए से देखते हैं? उन्हें किन आदतों में बदलाव की जरूरत है? इस अभ्यास का उद्देश्य लोगों को अपने बारे में बेहतर समझ देना था। सोलसेंसई (SoulSensei) की संस्थापक जान्हवी पारिख ने कहा कि दिल्ली में कार्यक्रम को मिली अच्छी प्रतिक्रिया से यह साफ है कि लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। संस्था सिर्फ भाषण या जानकारी देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ऐसे अनुभव देना चाहती है, जिनसे लोगों की सोच और जीवन में वास्तव में बदलाव आए। इसी कारण भविष्य में भी देश के विभिन्न शहरों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोलसेंसई (SoulSensei) का संदेश यह है कि यदि लोगों को अनुभवी विशेषज्ञों का सही मार्गदर्शन, भरोसेमंद सलाह और खुद को बेहतर बनाने के अवसर मिलें, तो वे अपने जीवन में संतुलन ला सकते हैं, रिश्तों को बेहतर बना सकते हैं।मानसिक रूप से अधिक खुश रह सकते हैं और अपने जीवन को अधिक सार्थक बना सकते हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह सिखाना था कि वे अपनी समस्याओं के लिए केवल परिस्थितियों को दोष देने की जगह उनसे सीख लेकर अपनी सोच, व्यवहार और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं। इसके लिए आत्ममूल्यांकन, आत्मचिंतन और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन जैसे व्यावहारिक तरीकों पर जोर दिया गया। मौजूदा समय में सोलसेंसई (SoulSensei) से 300 से अधिक विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं। “सोलसेंसई के साथ 300 से अधिक आध्यात्मिक और व्यक्तिगत विकास से जुड़े विशेषज्ञ काम कर रहे हैं। ये विशेषज्ञ अब तक 2,000 से अधिक लाइव ऑनलाइन सत्र (वेबिनार/वर्कशॉप) आयोजित कर चुके हैं, जिनमें भारत और विदेशों के 50,000 से अधिक लोग शामिल होकर लाभ उठा चुके हैं। यह मंच लोगों को कई विषयों पर मार्गदर्शन देता है, जैसे ध्यान से मन को शांत और एकाग्र करना सिखाया जाता है। प्राणायाम या सांसों का अभ्यास सिखाया जाता है। सकारात्मक सोच और स्पष्ट लक्ष्य के जरिए अनुकूल परिणाम पाने की मानसिक प्रक्रिया

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सोनिया विहार वाॅटर स्पोर्ट्स क्लब में विशेष आयोजन, क्लब अध्यक्ष कुंवरपाल सिंह को श्रद्धांजलि

दिल्ली : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सोनिया विहार वाॅटर स्पोर्ट्स क्लब में पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा जी द्वारा योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत द्विपप्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद क्लब के अध्यक्ष स्व. कुंवरपाल सिंह जी को श्रद्धांजलि स्वरूप सभी उपस्थित लोगों ने मौन रखकर उन्हें याद किया। इसके पश्चात योगाभ्यास कार्यक्रम आरंभ हुआ। इस बार क्लब द्वारा आयोजित होने वाला ‘पानी पर योग’ का विशेष कार्यक्रम क्लब प्रशासन द्वारा रद्द कर दिया गया था। फिर भी विश्वभर में योग दिवस की श्रृंखला को बनाए रखने के उद्देश्य से पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा जी ने क्लब में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें क्लब अधिकारियों और क्लब के खिलाड़ियों के साथ-साथ विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कलकत्ता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को सभी लोगों ने लाईव सुना, जिसमें उन्होंने देशवासियों को योग अपनाने और इसे जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने का एक अद्भुत साधन है। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर विशेष जोर देते हुए बताया कि योग ने विश्वभर में भारत की पहचान को मजबूत किया है और आज यह वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। मोदी जी ने योग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित योगाभ्यास से न केवल शारीरिक रोगों से बचाव होता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे रोज़मर्रा की आदत बनाकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

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दुनिया के सबसे बड़े 5211 किलो वजनी पारद शिवलिंग का निर्माण रघुनाथ गुरुजी ने किया, हरिद्वार में सम्पन्न हुई भव्य प्राण प्रतिष्ठा

उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित श्री साई शिव गंगा धाम में दुनिया के सबसे बड़े 5211 किलोग्राम वजनी पारद शिवलिंग की तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा विधि श्रद्धा, वैदिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुई। इस भव्य आयोजन में देशभर से आए 2000 से अधिक श्रद्धालुओं, साधकों, संत-महात्माओं और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। इस विशाल पारद शिवलिंग का निर्माण ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी ने लगभग दस वर्षों की साधना, अनुसंधान और पारद विज्ञान के गहन अध्ययन के आधार पर किया है। शिवलिंग के निर्माण में पारा, चांदी, स्वर्ण (गोल्ड) तथा 108 प्रकार की जड़ी-बूटियों के अर्क का उपयोग किया गया है। आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार यह अपने प्रकार का विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, पारद विज्ञान और ध्यान साधना का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह गुरु गोरक्षनाथ महाराज की परंपरा, गिरनार के पूज्य पीर योगी महंत सोमनाथ बापू के आशीर्वाद तथा पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सकारात्मक ऊर्जा के संदेश को समाज तक पहुंचाना था। रघुनाथ गुरुजी ने बताया कि यह शिवलिंग केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ध्यान, आत्मचिंतन और सकारात्मक चेतना का केंद्र है। उन्होंने कहा कि वर्षों की साधना और अनुसंधान के बाद तैयार यह शिवलिंग मानव कल्याण और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है। इससे पूर्व वर्ष 2019 में उन्होंने लगभग 10,000 लोगों की सहभागिता के साथ एक विशाल अश्वमेध यज्ञ का आयोजन भी किया था। तीन दिनों तक चले प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ, ध्यान साधना, आध्यात्मिक प्रवचन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सद्भाव का महापर्व बताया। समारोह में अनेक प्रतिष्ठित संत, धर्माचार्य और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इनमें परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज, परम पूज्य श्री सुधांशु जी महाराज, परम पूज्य स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज, परम पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, परम पूज्य स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज, श्री दिनेश चंद्र जी, विश्व हिन्दू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी, साध्वी ऋतंभरा जी, आचार्य मनीष जी (HIIMS), सांसद राघव चड्ढा तथा राज्य मंत्री एवं गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम सहित अनेक विशिष्ट अतिथि शामिल रहे। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में उद्योगपति एवं समाजसेवी राजीव बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन की व्यवस्थाओं और समन्वय में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। राजीव बंसल ने कहा, “मैं साईं बाबा का भक्त हूं। बाबा के आशीर्वाद से मुझे इस दिव्य कार्य का हिस्सा बनने का अवसर मिला। यह मेरे लिए सेवा और श्रद्धा का विषय है।”   समारोह के समापन अवसर पर रघुनाथ गुरुजी ने सभी संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से राजीव बंसल के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति वाला यह विशाल आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका। प्राण प्रतिष्ठा समारोह की सफलता में राजीव बंसल, आदरणीय दादाश्री, मनोज तोषनीवाल परिवार, मनोज गोहद, आईजी तकवाले, ममता जिवाल, तरुण भंडारी, अमित अग्रवाल, रमेश सांवरथिया, डॉलरभाई कोटेचा, सुधीर अग्रवाल, राजू ओसवाल, जितेन्द्र राठी सहित अनेक श्रद्धालुओं और सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ रघुनाथ गुरुजी दिव्यांग आत्मनिर्भरता, महिला किसान सशक्तिकरण, पर्यावरण जागरूकता और नवाचार आधारित सामाजिक अभियानों से भी जुड़े हुए हैं। दिव्यांग इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCAI) के माध्यम से देशभर में दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान में DICCAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित अग्रवाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समारोह के अंत में “ध्यान से शांति, शांति से सद्भाव और सद्भाव से विश्व कल्याण” का संदेश दिया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे अध्यात्म, विज्ञान, सेवा और मानव कल्याण के संगम का एक ऐतिहासिक आयोजन बताया।

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महासंघ का सर्वसम्मति से फैसला दशहरा पर्व 20 अक्तूबर 2026 को मनाया जायेगा 

रामलीला कमेटियों को निःशुल्क बिजली दी जाये। नई दिल्ली : राजधानी की समस्त रामलीला कमेटियों की संस्था श्री रामलीला महासंघ की एक विशेष बैठक कांस्ट्टीयूशन क्लब नई दिल्ली में महासंघ के अध्यक्ष श्री अर्जुन कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई । रामलीला आयोजन के दौरान होनेवाली समस्याओं का एक मंच पर निवारण करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में सर्वसम्मत निर्णय हुआ कि इस वर्ष दशहरा पर्व 20 अक्तूबर 2026 को पूरे देश में मनाया जायेगा। इस बैठक में कमेटियों के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी समस्यों से अवगत कराया। श्री रामलीला महासंघ के अध्यक्ष श्री अर्जुन कुमार ने कहा पिछले वर्ष दिल्ली सरकार ने लीला कमेटियों को 1200 यूनिट निःशुल्क बिजली प्रदान की इसके लिए हम सरकार का धन्यवाद करते है। हम सरकार से अनुरोध करते है कि इस वर्ष से रामलीलाओं को निःशुल्क बिजली प्रदान की जाये। अन्य विभागों की तरह दिल्ली विकास प्राधिकरण भी रामलीलाओं के लिए अपने ग्राउण्ड 45 दिनों के लिए. निःशुल्क उपलब्ध कराये । महासंघ के महामंत्री श्री सुभाष गोयल ने कहा कि दिल्ली में जिन मैदानों में रामलीला मंचन किया जाता है, उन सभी मैदानों का नाम उत्सव स्थल (रामलीला) नामकरण किया जाये। इस वर्ष रामलीला महोत्सव 11 से 21 अक्तूबर 2026 तक मनाया जायेगा। इस अवसर पर भाजपा दिल्ली प्रदेश के नवयुक्त अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा, राज्यमंत्री भारत सरकार का सभी रामलीला कमेटियों की ओर से अभिनन्दन किया गया और उन्हें शक्ति की प्रतीक हनुमान जी गदा, शाल, आदि प्रदान की गयी, इसकी के साथ मंचन आसीन सभी सांसदों का महासंघ पदाधिकारियों ने रामनामी पट्टका, गदा भेंट कर सम्मान किया। भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा, राज्यमंत्री भारत सरकार ने कहा कि रामकाज में किसी को भी वाधक नहीं बनने दिया जायेगा। उन्होने कहा कि लीलाएं शुरू होने से पूर्व ही आयोजन की हर समास्या का हल करवाया जायेगा। सांसद श्री प्रवीण खण्डेलवाल ने कहा कि पिछले वर्ष भी हमने लीलाओं के लिए कार्य किया था, जो समस्याएं रह गयी है वह हम सभी सांसद मिलकर हल करवायेगे। सांसद श्री रामवीर सिंह बिधूडी ने बताया कि रामलीलाएं हमारी संस्कृति है हम रामलीलाओं की समस्याओं के निवारण के लिए हम सभी सांसद गृहमंत्री श्री अमित शाह के साथ-साथ उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू से मिलकर समाधान करवायेगे। सांसद श्रीमती कमलजीत सहरावत ने आश्वासन दिया कि केन्द्र, दिल्ली एवं निगम में रामभक्तों की सरकार है श्री रामलीला महासंघ की सभी समस्याओं का समाधान करवायेंगे, दिल्ली में श्रीमती रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री दिल्ली वासियों के लिए सक्रिय रूप से समर्पित है, उन्होंने पिछले वर्ष भी रामलीलाओं के लिए कार्य किया। दिल्ली सरकार एवं दिल्ली नगर निगम से उनका हल करवाया जायेगा। इस अवसर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली के संघचालक डा. अनिल अग्रवाल, कश्मीरीगेट रामलीला कमेटी जत्थेदार अवतार सिंह पूर्व मेयर, पीतमपुरा रामलीला कमेटी के संजय बगडिया, प्रवीण कपूर करोलबाग श्री सनातन धर्म रामलीला समिति, शिव शंकर नागर, शालीमार बाग रामलीला कमेटी, जोगिन्द्र पाल श्री रामलीला कमेटी ढक्का गांव, श्री धार्मिक रामलीला कमेटी, राजेन्द्र शौकीन न्यू वक्त क्लब मंगोलपुरी, श्री रामलीला कमेटी शाहदरा, सुभाष रामलीला कमेटी, नरेला, उत्तराखण्ड रामलीला समिति किशन गंज, श्री रामलीला समिति सेक्टर-6 रोहिणी, प्रगति शील लोक मंच, श्री दशरथ पुरी रामलीला कमेटी, आदर्श रामलीला कमेटी, सेवा मंचन सेक्टर-32 रोहिणी सहित पदाधिकारियों ने अपने-अपने विचार प्रकट किए ।

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International Bharatanatyam Artist Apeksha Niranjan to Mark Her 50th Recital in Poland with a Special Indo-Polish Musical Collaboration

Internationally acclaimed Bharatanatyam artist Apeksha Niranjan is set to present a landmark performance in Poland on 8th June, marking her 50th recital in the country — a significant milestone in her artistic journey and her long-standing cultural association with Poland. The special performance will feature a unique collaboration with Polish and Indian musicians, bringing together the rhythmic sophistication of Bharatanatyam with the musical traditions of both nations. Through this cross-cultural production, Apeksha continues her artistic vision of building bridges between India and Poland through dance, music, and storytelling. Known for her deeply expressive performances and innovative choreographies, Apeksha Niranjan has consistently explored artistic dialogues between Indian classical traditions and Polish cultural narratives. Her previous productions have successfully incorporated Polish folk music, Gregorian chants, Marathi abhangas, and thematic explorations rooted in shared human emotions and histories. Born into a unique Indo-Polish heritage, with a Polish grandmother and Maharashtrian roots, Apeksha’s artistic journey has been closely intertwined with Poland over the years. Her performances have become symbolic of the enduring cultural relationship between the two countries. Speaking about the milestone, Apeksha Niranjan says, “Performing my 50th recital in Poland feels deeply emotional and personal to me. Poland has always embraced my art with immense warmth and love. This performance is not just a celebration of dance, but of the beautiful cultural dialogue and friendship between India and Poland that has shaped my artistic identity over the years.” A former Marathi actress and a noted Bharatanatyam exponent from Mumbai, Apeksha is recognised for her emotive storytelling, rhythmic precision, and innovative approach to classical dance. Her performances have been presented across India and internationally, earning appreciation for making Bharatanatyam accessible while retaining its traditional depth.

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महाकुंभ 2027 हेतु साध्वी शक्तियों का ऐतिहासिक संगम, नाशिक से सनातन एकता का संदेश

नाशिक, महाराष्ट्र : नाशिक की पावन धरा पर आज एक ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब आद्या शंकराचार्य त्रिकाल भवन्ता सरस्वती जी महाराज द्वारा श्री श्री 1008 जगतगुरु दुर्गाचार्य कंचन भवानी जी का विशेष सम्मान किया गया। यह अवसर सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना एवं नारी शक्ति के उत्थान का प्रेरणादायी प्रतीक बन गया। इस विशेष अवसर पर श्री पंच महाभूत परमहंस अखाड़ा एवं परी अखाड़ा ने संयुक्त रूप से आगामी महाकुंभ 2027 को एक साथ आयोजित करने का संकल्प लिया। साथ ही देशभर की साध्वी शक्तियों, संत समाज एवं सनातन धर्मावलंबियों से धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित में एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया गया। दोनों पूज्य संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि —“शक्ति ही सृष्टि का मूल आधार है। जब सभी शक्तियाँ एक हो जाती हैं, तब धर्म, संस्कृति और समाज को नई दिशा प्राप्त होती है।” उन्होंने कहा कि नारी शक्ति केवल संरक्षण का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस, तपस्या, नेतृत्व और परिवर्तन की दिव्य ऊर्जा है। आज आवश्यकता है कि समाज में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने हेतु सभी शक्तियाँ एक मंच पर आएँ। संत समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर सशक्त करने के लिए अखाड़ों एवं आध्यात्मिक संगठनों की एकता अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से दोनों अखाड़े वर्तमान में महाकुंभ 2027 को दिव्य, भव्य, अनुशासित एवं ऐतिहासिक स्वरूप देने हेतु व्यापक रणनीति तैयार कर रहे हैं। यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं होगा, बल्कि विश्वभर में सनातन एकता, नारी शक्ति, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति का वैश्विक संदेश देने वाला महाआंदोलन सिद्ध होगा।

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