Hot News

Cultural Journeys

Cultural Journeys

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सोनिया विहार वाॅटर स्पोर्ट्स क्लब में विशेष आयोजन, क्लब अध्यक्ष कुंवरपाल सिंह को श्रद्धांजलि

दिल्ली : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सोनिया विहार वाॅटर स्पोर्ट्स क्लब में पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा जी द्वारा योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत द्विपप्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद क्लब के अध्यक्ष स्व. कुंवरपाल सिंह जी को श्रद्धांजलि स्वरूप सभी उपस्थित लोगों ने मौन रखकर उन्हें याद किया। इसके पश्चात योगाभ्यास कार्यक्रम आरंभ हुआ। इस बार क्लब द्वारा आयोजित होने वाला ‘पानी पर योग’ का विशेष कार्यक्रम क्लब प्रशासन द्वारा रद्द कर दिया गया था। फिर भी विश्वभर में योग दिवस की श्रृंखला को बनाए रखने के उद्देश्य से पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा जी ने क्लब में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें क्लब अधिकारियों और क्लब के खिलाड़ियों के साथ-साथ विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कलकत्ता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को सभी लोगों ने लाईव सुना, जिसमें उन्होंने देशवासियों को योग अपनाने और इसे जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने का एक अद्भुत साधन है। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर विशेष जोर देते हुए बताया कि योग ने विश्वभर में भारत की पहचान को मजबूत किया है और आज यह वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। मोदी जी ने योग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित योगाभ्यास से न केवल शारीरिक रोगों से बचाव होता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे रोज़मर्रा की आदत बनाकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

Cultural Journeys

दुनिया के सबसे बड़े 5211 किलो वजनी पारद शिवलिंग का निर्माण रघुनाथ गुरुजी ने किया, हरिद्वार में सम्पन्न हुई भव्य प्राण प्रतिष्ठा

उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित श्री साई शिव गंगा धाम में दुनिया के सबसे बड़े 5211 किलोग्राम वजनी पारद शिवलिंग की तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा विधि श्रद्धा, वैदिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुई। इस भव्य आयोजन में देशभर से आए 2000 से अधिक श्रद्धालुओं, साधकों, संत-महात्माओं और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। इस विशाल पारद शिवलिंग का निर्माण ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी ने लगभग दस वर्षों की साधना, अनुसंधान और पारद विज्ञान के गहन अध्ययन के आधार पर किया है। शिवलिंग के निर्माण में पारा, चांदी, स्वर्ण (गोल्ड) तथा 108 प्रकार की जड़ी-बूटियों के अर्क का उपयोग किया गया है। आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार यह अपने प्रकार का विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, पारद विज्ञान और ध्यान साधना का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह गुरु गोरक्षनाथ महाराज की परंपरा, गिरनार के पूज्य पीर योगी महंत सोमनाथ बापू के आशीर्वाद तथा पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सकारात्मक ऊर्जा के संदेश को समाज तक पहुंचाना था। रघुनाथ गुरुजी ने बताया कि यह शिवलिंग केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ध्यान, आत्मचिंतन और सकारात्मक चेतना का केंद्र है। उन्होंने कहा कि वर्षों की साधना और अनुसंधान के बाद तैयार यह शिवलिंग मानव कल्याण और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है। इससे पूर्व वर्ष 2019 में उन्होंने लगभग 10,000 लोगों की सहभागिता के साथ एक विशाल अश्वमेध यज्ञ का आयोजन भी किया था। तीन दिनों तक चले प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ, ध्यान साधना, आध्यात्मिक प्रवचन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सद्भाव का महापर्व बताया। समारोह में अनेक प्रतिष्ठित संत, धर्माचार्य और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इनमें परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज, परम पूज्य श्री सुधांशु जी महाराज, परम पूज्य स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज, परम पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, परम पूज्य स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज, श्री दिनेश चंद्र जी, विश्व हिन्दू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी, साध्वी ऋतंभरा जी, आचार्य मनीष जी (HIIMS), सांसद राघव चड्ढा तथा राज्य मंत्री एवं गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम सहित अनेक विशिष्ट अतिथि शामिल रहे। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में उद्योगपति एवं समाजसेवी राजीव बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन की व्यवस्थाओं और समन्वय में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। राजीव बंसल ने कहा, “मैं साईं बाबा का भक्त हूं। बाबा के आशीर्वाद से मुझे इस दिव्य कार्य का हिस्सा बनने का अवसर मिला। यह मेरे लिए सेवा और श्रद्धा का विषय है।”   समारोह के समापन अवसर पर रघुनाथ गुरुजी ने सभी संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से राजीव बंसल के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति वाला यह विशाल आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका। प्राण प्रतिष्ठा समारोह की सफलता में राजीव बंसल, आदरणीय दादाश्री, मनोज तोषनीवाल परिवार, मनोज गोहद, आईजी तकवाले, ममता जिवाल, तरुण भंडारी, अमित अग्रवाल, रमेश सांवरथिया, डॉलरभाई कोटेचा, सुधीर अग्रवाल, राजू ओसवाल, जितेन्द्र राठी सहित अनेक श्रद्धालुओं और सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ रघुनाथ गुरुजी दिव्यांग आत्मनिर्भरता, महिला किसान सशक्तिकरण, पर्यावरण जागरूकता और नवाचार आधारित सामाजिक अभियानों से भी जुड़े हुए हैं। दिव्यांग इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCAI) के माध्यम से देशभर में दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान में DICCAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित अग्रवाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समारोह के अंत में “ध्यान से शांति, शांति से सद्भाव और सद्भाव से विश्व कल्याण” का संदेश दिया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे अध्यात्म, विज्ञान, सेवा और मानव कल्याण के संगम का एक ऐतिहासिक आयोजन बताया।

Cultural Journeys

महासंघ का सर्वसम्मति से फैसला दशहरा पर्व 20 अक्तूबर 2026 को मनाया जायेगा 

रामलीला कमेटियों को निःशुल्क बिजली दी जाये। नई दिल्ली : राजधानी की समस्त रामलीला कमेटियों की संस्था श्री रामलीला महासंघ की एक विशेष बैठक कांस्ट्टीयूशन क्लब नई दिल्ली में महासंघ के अध्यक्ष श्री अर्जुन कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई । रामलीला आयोजन के दौरान होनेवाली समस्याओं का एक मंच पर निवारण करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में सर्वसम्मत निर्णय हुआ कि इस वर्ष दशहरा पर्व 20 अक्तूबर 2026 को पूरे देश में मनाया जायेगा। इस बैठक में कमेटियों के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी समस्यों से अवगत कराया। श्री रामलीला महासंघ के अध्यक्ष श्री अर्जुन कुमार ने कहा पिछले वर्ष दिल्ली सरकार ने लीला कमेटियों को 1200 यूनिट निःशुल्क बिजली प्रदान की इसके लिए हम सरकार का धन्यवाद करते है। हम सरकार से अनुरोध करते है कि इस वर्ष से रामलीलाओं को निःशुल्क बिजली प्रदान की जाये। अन्य विभागों की तरह दिल्ली विकास प्राधिकरण भी रामलीलाओं के लिए अपने ग्राउण्ड 45 दिनों के लिए. निःशुल्क उपलब्ध कराये । महासंघ के महामंत्री श्री सुभाष गोयल ने कहा कि दिल्ली में जिन मैदानों में रामलीला मंचन किया जाता है, उन सभी मैदानों का नाम उत्सव स्थल (रामलीला) नामकरण किया जाये। इस वर्ष रामलीला महोत्सव 11 से 21 अक्तूबर 2026 तक मनाया जायेगा। इस अवसर पर भाजपा दिल्ली प्रदेश के नवयुक्त अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा, राज्यमंत्री भारत सरकार का सभी रामलीला कमेटियों की ओर से अभिनन्दन किया गया और उन्हें शक्ति की प्रतीक हनुमान जी गदा, शाल, आदि प्रदान की गयी, इसकी के साथ मंचन आसीन सभी सांसदों का महासंघ पदाधिकारियों ने रामनामी पट्टका, गदा भेंट कर सम्मान किया। भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा, राज्यमंत्री भारत सरकार ने कहा कि रामकाज में किसी को भी वाधक नहीं बनने दिया जायेगा। उन्होने कहा कि लीलाएं शुरू होने से पूर्व ही आयोजन की हर समास्या का हल करवाया जायेगा। सांसद श्री प्रवीण खण्डेलवाल ने कहा कि पिछले वर्ष भी हमने लीलाओं के लिए कार्य किया था, जो समस्याएं रह गयी है वह हम सभी सांसद मिलकर हल करवायेगे। सांसद श्री रामवीर सिंह बिधूडी ने बताया कि रामलीलाएं हमारी संस्कृति है हम रामलीलाओं की समस्याओं के निवारण के लिए हम सभी सांसद गृहमंत्री श्री अमित शाह के साथ-साथ उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू से मिलकर समाधान करवायेगे। सांसद श्रीमती कमलजीत सहरावत ने आश्वासन दिया कि केन्द्र, दिल्ली एवं निगम में रामभक्तों की सरकार है श्री रामलीला महासंघ की सभी समस्याओं का समाधान करवायेंगे, दिल्ली में श्रीमती रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री दिल्ली वासियों के लिए सक्रिय रूप से समर्पित है, उन्होंने पिछले वर्ष भी रामलीलाओं के लिए कार्य किया। दिल्ली सरकार एवं दिल्ली नगर निगम से उनका हल करवाया जायेगा। इस अवसर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली के संघचालक डा. अनिल अग्रवाल, कश्मीरीगेट रामलीला कमेटी जत्थेदार अवतार सिंह पूर्व मेयर, पीतमपुरा रामलीला कमेटी के संजय बगडिया, प्रवीण कपूर करोलबाग श्री सनातन धर्म रामलीला समिति, शिव शंकर नागर, शालीमार बाग रामलीला कमेटी, जोगिन्द्र पाल श्री रामलीला कमेटी ढक्का गांव, श्री धार्मिक रामलीला कमेटी, राजेन्द्र शौकीन न्यू वक्त क्लब मंगोलपुरी, श्री रामलीला कमेटी शाहदरा, सुभाष रामलीला कमेटी, नरेला, उत्तराखण्ड रामलीला समिति किशन गंज, श्री रामलीला समिति सेक्टर-6 रोहिणी, प्रगति शील लोक मंच, श्री दशरथ पुरी रामलीला कमेटी, आदर्श रामलीला कमेटी, सेवा मंचन सेक्टर-32 रोहिणी सहित पदाधिकारियों ने अपने-अपने विचार प्रकट किए ।

Cultural Journeys

International Bharatanatyam Artist Apeksha Niranjan to Mark Her 50th Recital in Poland with a Special Indo-Polish Musical Collaboration

Internationally acclaimed Bharatanatyam artist Apeksha Niranjan is set to present a landmark performance in Poland on 8th June, marking her 50th recital in the country — a significant milestone in her artistic journey and her long-standing cultural association with Poland. The special performance will feature a unique collaboration with Polish and Indian musicians, bringing together the rhythmic sophistication of Bharatanatyam with the musical traditions of both nations. Through this cross-cultural production, Apeksha continues her artistic vision of building bridges between India and Poland through dance, music, and storytelling. Known for her deeply expressive performances and innovative choreographies, Apeksha Niranjan has consistently explored artistic dialogues between Indian classical traditions and Polish cultural narratives. Her previous productions have successfully incorporated Polish folk music, Gregorian chants, Marathi abhangas, and thematic explorations rooted in shared human emotions and histories. Born into a unique Indo-Polish heritage, with a Polish grandmother and Maharashtrian roots, Apeksha’s artistic journey has been closely intertwined with Poland over the years. Her performances have become symbolic of the enduring cultural relationship between the two countries. Speaking about the milestone, Apeksha Niranjan says, “Performing my 50th recital in Poland feels deeply emotional and personal to me. Poland has always embraced my art with immense warmth and love. This performance is not just a celebration of dance, but of the beautiful cultural dialogue and friendship between India and Poland that has shaped my artistic identity over the years.” A former Marathi actress and a noted Bharatanatyam exponent from Mumbai, Apeksha is recognised for her emotive storytelling, rhythmic precision, and innovative approach to classical dance. Her performances have been presented across India and internationally, earning appreciation for making Bharatanatyam accessible while retaining its traditional depth.

Cultural Journeys

महाकुंभ 2027 हेतु साध्वी शक्तियों का ऐतिहासिक संगम, नाशिक से सनातन एकता का संदेश

नाशिक, महाराष्ट्र : नाशिक की पावन धरा पर आज एक ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब आद्या शंकराचार्य त्रिकाल भवन्ता सरस्वती जी महाराज द्वारा श्री श्री 1008 जगतगुरु दुर्गाचार्य कंचन भवानी जी का विशेष सम्मान किया गया। यह अवसर सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना एवं नारी शक्ति के उत्थान का प्रेरणादायी प्रतीक बन गया। इस विशेष अवसर पर श्री पंच महाभूत परमहंस अखाड़ा एवं परी अखाड़ा ने संयुक्त रूप से आगामी महाकुंभ 2027 को एक साथ आयोजित करने का संकल्प लिया। साथ ही देशभर की साध्वी शक्तियों, संत समाज एवं सनातन धर्मावलंबियों से धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित में एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया गया। दोनों पूज्य संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि —“शक्ति ही सृष्टि का मूल आधार है। जब सभी शक्तियाँ एक हो जाती हैं, तब धर्म, संस्कृति और समाज को नई दिशा प्राप्त होती है।” उन्होंने कहा कि नारी शक्ति केवल संरक्षण का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस, तपस्या, नेतृत्व और परिवर्तन की दिव्य ऊर्जा है। आज आवश्यकता है कि समाज में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने हेतु सभी शक्तियाँ एक मंच पर आएँ। संत समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर सशक्त करने के लिए अखाड़ों एवं आध्यात्मिक संगठनों की एकता अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से दोनों अखाड़े वर्तमान में महाकुंभ 2027 को दिव्य, भव्य, अनुशासित एवं ऐतिहासिक स्वरूप देने हेतु व्यापक रणनीति तैयार कर रहे हैं। यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं होगा, बल्कि विश्वभर में सनातन एकता, नारी शक्ति, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति का वैश्विक संदेश देने वाला महाआंदोलन सिद्ध होगा।

Cultural Journeys

युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का सफल प्रयास बना “कला संस्कृति उत्सव”

नई दिल्ली : नृत्यकल्प डांस एकेडमी द्वारा लाजपत भवन ऑडिटोरियम में “कला संस्कृति उत्सव 2026 सीज़न-3” के अंतर्गत नेशनल एवं स्टेट लेवल आर्ट, डांस एवं सिंगिंग प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। प्रतियोगिता में बच्चों एवं युवाओं ने नृत्य, गायन और कला के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य देश की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना तथा युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना रहा। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित भी किया गया। कला संस्कृति उत्सव निर्णायक जजों में लखनऊ से आए कत्थक, लोक नृत्य एवं सेमी क्लासिकल डांस के मास्टर गोविंद चौधरी, भरतनाट्यम कथक गुरु डॉ रजनी राव, कथक गुरु नीपा घोष एवं फोक सेमी क्लासिकल में पूनम सिंह रहीं । नृत्य कल्प डांस एकेडमी की फाउंडर एवं कार्यक्रम की संयोजिका आचार्य कल्पना ने बताया कि हम भारतीय संस्कृति और कला को भारत सरकार के सहयोग से विगत कई वर्षों से देश-विदेश में प्रचार प्रसार करते आ रहे हैं और हम कला संस्कृति उत्सव को देश के अन्य राज्यों में भी आयोजित करेंगे । हमारा उद्देश्य है कि भारतीय नाट्य एवं कला से आज की युवा पीढ़ी को जोड़ना और अपनी सनातनी पहचान को विश्व में दोबारा स्थापित करना । डांस अकैडमी के कार्यकर्ताओं ने बहुत अच्छा प्रबंध किया । कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति से जुड़े कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए इस प्रकार के आयोजनों को समाज और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण बताया। पूरे आयोजन में दर्शकों का उत्साह देखने योग्य रहा तथा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

Cultural Journeys

Shillong Literary Festival 2026 – New Delhi Prelude Opens to Resounding Success at Bikaner House

New Delhi : The Shillong Literary Festival 2026 – New Delhi Prelude was inaugurated today at Bikaner House, New Delhi, bringing together leading voices from literature, governance, cinema, journalism, and the creative arts. Organised by the Department of Tourism, Government of Meghalaya, the two-day national prelude marks a major lead-up to the main Shillong Literary Festival scheduled to be held in Shillong from November 12th to 14th,2026 as announced today, at the Bikaner House. The festival aims to showcase Meghalaya’s rich cultural identity and literary traditions while expanding the national footprint of the State’s creative ecosystem. The initiative also seeks to strengthen culture-led tourism, encourage local talent, and position Meghalaya as a growing hub for arts, literature, music, and ideas. A major highlight of the opening day was an engaging conversation between Hon’ble Chief Minister Shri Conrad K. Sangma and senior journalist Shekhar Gupta, where discussions revolved around leadership, governance, youth aspirations, culture, and the evolving identity of the Northeast. The dialogue transitioned to Meghalaya’s focus on the creative economy and the promotion of consistent calendar events. Shri Gupta commended the Hon’ble Chief Minister for initiating the Shillong Literary Festival, noting that while he has attended many literary festivals, the setting, weather, environment, and audience quality at SLF are unmatched. Discussing the vision behind these initiatives, Hon’ble Chief Minister added how the festival ties into a strategy to develop multi-event platforms, expanding on events like the Cherry Blossom Festival to ensure year-round engagement rather than random occurrences. Expressing his delight on the growth of Shillong Literary Festival, he said, “We started off small. Now we are seeing it grow. It has become a calendar event; and more importantly it is known throughout the country. And we thought that bringing it to Delhi- this prelude, would expose this entire event and would be able to reach out to the other parts of the country.” He added, “We hope that in the years to come, it will become a much-much bigger event, not just nationally, but even globally.” Hon’ble Chief Minister also expressed the vision of the government in aspects related to Meghalaya’s growing creative economy, culture of entrepreneurship, emphasis on sustainable tourism, development in education sector and its rationalisation, and economic development of the state. Delivering the welcome address, Dr. Vijay Kumar D., IAS, Commissioner & Secretary, Department of Tourism, Government of Meghalaya, said the Shillong Literary Festival has emerged as a platform celebrating the stories, literature, cinema, music, and cultural identity of Meghalaya and the Northeast. Highlighting the vision behind the New Delhi Prelude, he noted that the festival is an effort to place Meghalaya’s literary and cultural wealth on a wider national stage. Referring to Shillong’s growing cultural identity, he added that as the city turns pink with cherry blossoms in November, its popular description as the “Scotland of the East” transforms into the “Kyoto of the West”, a phrase famously used by legendary author Vikram Seth during his visit to the festival in Shillong in 2024. The inaugural sessions also placed the spotlight on the cinematic landscape of the Northeast. Acclaimed filmmakers Dominic Sangma and Pradip Kurbah, in conversation with Pulitzer Prize-winning journalist Suparna Sharma, discussed the evolving narratives, challenges, and opportunities for cinema emerging from the region. The speakers praised ‘Hello Meghalaya’ as a “saving grace” for independent filmmakers, highlighting it as an OTT platform that provides a supportive space to monetize and share their films at a time, when access to platforms remains a challenge. The evening culminated with legendary actor Naseeruddin Shah captivating audiences through The Elephant and the Tragopan, a special reading from Vikram Seth’s celebrated Beastly Tales from Here and There. He interspersed the poems with James Thurber’s works and read out his four stories to the literary enthusiasts, who filled the house. Reading Thurber’s works like, “The bear who let it alone,” “The Tiger who would be king,” “The owl who was God” and “The very proper gander,” before Seth’s works, Shah drew a parallel with the calls nature’s offerings and human’s greed. The session “Readings from Khasi and Garo Classics” featured Prof. Streamlet Dkhar reading from U Soso Tham’s Ki Sngi Barim u Hynniewtrep and her own work, Na Thwei Pyrkhat U Longshuwa. Dr. Crystal Cornelious D. Marak presented D. S. Nengminza’s Seokgimin Poetryrang and Ku·bak-Ma·o Sanirang, exploring Garo topography and the oral traditions of the gods Goera and Salgra. The readings celebrated the rich ancestral heritage and linguistic history of the region. Day 02 of the festival will feature discussions on Northeast literature, ecology, food, translation, and identity through sessions such as Shillong on a Plate and Once Upon a Time at a Literature Festival. The sessions will feature prominent speakers including Shobhaa De, Maharani Priyadarshini Raje Scindia, Sanjoy Hazarika, Namita Gokhale, Patricia Mukhim, and several others. The evening concluded with vibrant performances by artists under the Chief Minister’s Meghalaya Grassroots Music Program (CM-MGMP), transforming the venue into a celebration of Meghalaya’s music, rhythm, and cultural identity.

Cultural Journeys

शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल 2026 – नई दिल्ली प्रील्यूड का बीकानेर हाउस में शानदार शुभारंभ

नई दिल्ली : शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल 2026 – नई दिल्ली प्रील्यूड का आज बीकानेर हाउस, नई दिल्ली में भव्य शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में साहित्य, शासन, सिनेमा, पत्रकारिता और रचनात्मक कला जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। मेघालय सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय प्रील्यूड, 12 से 14 नवंबर 2026 तक शिलॉन्ग में आयोजित होने वाले मुख्य शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल से पहले का एक महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसकी घोषणा आज बीकानेर हाउस में की गई। इस फेस्टिवल का उद्देश्य मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक परंपराओं को सामने लाना है, साथ ही राज्य के क्रिएटिव इकोसिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी है। यह पहल संस्कृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और मेघालय को कला, साहित्य, संगीत और विचारों के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है। उद्घाटन दिवस का मुख्य आकर्षण माननीय मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के. संगमा और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता के बीच हुई विशेष बातचीत रही। इस चर्चा में नेतृत्व, शासन, युवाओं की आकांक्षाओं, संस्कृति और पूर्वोत्तर की बदलती पहचान जैसे विषयों पर बात हुई। बातचीत के दौरान मेघालय की क्रिएटिव इकॉनमी और राज्य में लगातार आयोजित होने वाले कैलेंडर इवेंट्स पर भी चर्चा हुई। श्री गुप्ता ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कई लिटरेरी फेस्टिवल देखे हैं, लेकिन शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल का माहौल, मौसम और दर्शकों की गुणवत्ता बेहद खास है। इन पहलों के पीछे की सोच पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फेस्टिवल राज्य में कई बड़े आयोजनों को एक मजबूत मंच देने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल जैसे आयोजनों को आगे बढ़ाकर सालभर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल की बढ़ती लोकप्रियता पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा, “हमने इसकी शुरुआत छोटे स्तर से की थी। अब यह लगातार आगे बढ़ रहा है। यह एक कैलेंडर इवेंट बन चुका है और पूरे देश में इसकी पहचान बन रही है। हमने सोचा कि दिल्ली में इसका यह प्रील्यूड आयोजित करने से इसे देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।” उन्होंने आगे कहा, “हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी और बड़ा बनेगा।” मुख्यमंत्री ने मेघालय की बढ़ती क्रिएटिव इकॉनमी, उद्यमिता की संस्कृति, सतत पर्यटन, शिक्षा क्षेत्र में विकास और राज्य के आर्थिक विकास को लेकर सरकार की सोच भी साझा की। स्वागत भाषण देते हुए पर्यटन विभाग, मेघालय सरकार के कमिश्नर एवं सेक्रेटरी डॉ. विजय कुमार डी., आईएएस ने कहा कि शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल मेघालय और पूर्वोत्तर की कहानियों, साहित्य, सिनेमा, संगीत और सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। नई दिल्ली प्रील्यूड के उद्देश्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन मेघालय की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास है। शिलॉन्ग की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नवंबर में जब शहर चेरी ब्लॉसम से गुलाबी रंग में रंग जाता है, तब “स्कॉटलैंड ऑफ द ईस्ट” कहलाने वाला शिलॉन्ग “क्योटो ऑफ द वेस्ट” में बदल जाता है। यह प्रसिद्ध उपमा लेखक विक्रम सेठ ने वर्ष 2024 में शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल के दौरान दी थी। उद्घाटन सत्रों में पूर्वोत्तर के सिनेमा जगत पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता डॉमिनिक संगमा और प्रदीप कुर्बाह ने पुलित्जर पुरस्कार विजेता पत्रकार सुपर्णा शर्मा के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सिनेमा की बदलती कहानियों, चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने ‘हेलो मेघालय’ को स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह ओटीटी प्लेटफॉर्म फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्मों को साझा करने और उनसे आय अर्जित करने का अवसर देता है, खासकर ऐसे समय में जब प्लेटफॉर्म तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। शाम का समापन दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की विशेष प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने विक्रम सेठ की प्रसिद्ध पुस्तक Beastly Tales from Here and There से “The Elephant and the Tragopan” का पाठ किया। इसके साथ उन्होंने जेम्स थर्बर की रचनाओं का भी पाठ किया। “The Bear Who Let It Alone”, “The Tiger Who Would Be King”, “The Owl Who Was God” और “The Very Proper Gander” जैसी कहानियों के माध्यम से उन्होंने प्रकृति और मानव लालच के बीच के संबंधों को दर्शाया। उनकी प्रस्तुति ने साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “रीडिंग्स फ्रॉम खासी एंड गारो क्लासिक्स” सत्र में प्रो. स्ट्रीमलेट डखार ने यू सोसो थाम की Ki Sngi Barim u Hynniewtrep और अपनी रचना Na Thwei Pyrkhat U Longshuwa का पाठ किया। वहीं डॉ. क्रिस्टल कॉर्नेलियस डी. मराक ने डी. एस. नेंगमिंजा की Seokgimin Poetryrang और Ku·bak-Ma·o Sanirang प्रस्तुत कीं, जिनमें गारो क्षेत्र की भौगोलिक और मौखिक परंपराओं को दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों ने क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को सामने रखा। फेस्टिवल के दूसरे दिन पूर्वोत्तर साहित्य, पर्यावरण, भोजन, अनुवाद और पहचान जैसे विषयों पर चर्चा होगी। “Shillong on a Plate” और “Once Upon a Time at a Literature Festival” जैसे सत्रों में शोभा डे, महारानी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया, संजय हजारिका, नमिता गोखले, पत्रिशिया मुखीम सहित कई प्रमुख वक्ता शामिल होंगे। शाम का समापन मुख्यमंत्री मेघालय ग्रासरूट्स म्यूजिक प्रोग्राम (CM-MGMP) के कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसने पूरे परिसर को मेघालय के संगीत, संस्कृति और उत्साह से भर दिया।

Cultural Journeys

कथक और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा: अमायरा डांस अकैडमी का सफल आयोजन

नई दिल्ली : राजधानी में अमायरा डांस अकैडमी द्वारा एक भव्य सांस्कृतिक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं निर्णायक मंडल के रूप में आचार्या कल्पना, रजनी राव और शफीता खान उपस्थित रहीं। प्रतियोगिता में विशेष रूप से छोटे बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रतिभा और मेहनत की सराहना करते हुए विजेताओं को ट्रॉफी एवं अन्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन अमायरा डांस अकैडमी की ऑनर मिस्टी आनंद के नेतृत्व में किया गया। उनके कुशल प्रबंधन और समर्पण के चलते आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित एवं आकर्षक रहा। मिस्टी आनंद ने इस अवसर पर कहा कि उनका उद्देश्य कथक एवं भारतीय नृत्य कला को प्रोत्साहित करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। वे पारंपरिक और आधुनिक नृत्य शैलियों के समन्वय के माध्यम से भारतीय संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

Cultural Journeys

सभ्यता फाउंडेशन ने विश्व सूफी संगीत महोत्सव के सहयोग से ‘जहाँ-ए-खुसरो 2026’ की मेजबानी की

“द स्टीड ऑफ लॉन्गिंग – सफ़र-ए-इश्क़ कंटीन्यूज” थीम के तहत मार्च 27 से मार्च 29, 2026 तक तीन दिनों का सूफी उत्सव” नई दिल्ली : सभ्यता फाउंडेशन, भारत सरकार की ‘अडॉप्ट अ हेरिटेज 2.0’ पहल के तहत पुराने किले की ‘स्मारक सारथी’, भारत के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध विश्व सूफी संगीत महोत्सव, “जहाँ-ए-खुसरो 2026” की वापसी के साथ गर्व से जुड़ रही है। इसका आयोजन 27 से 29 मार्च, 2026 तक नई दिल्ली के पुराने किले की भव्य पृष्ठभूमि में किया जा रहा है। इस वर्ष की थीम “द स्टीड ऑफ लॉन्गिंग – सफ़र-ए-इश्क़ कंटीन्यूज” , सूफी परंपराओं के मूल में निहित प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक खोज की चिरस्थायी यात्रा को दर्शाता है। इस कार्यक्रम में लगभग 17,000–18,000 लोगों की प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज की गई, जो इसकी व्यापक लोकप्रियता को दर्शाती है। यह सहयोग भारत के ऐतिहासिक स्मारकों को जीवंत सांस्कृतिक स्थलों में बदलने के एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जो जनता के लिए सुलभ हों, ऐतिहासिक रूप से सम्मानित हों और कला, विद्वत्ता एवं जनता के साझा अनुभव के माध्यम से सार्थक रूप से सक्रिय रहें। एक ‘स्मारक सारथी’ के रूप में, सभ्यता फाउंडेशन का प्रबंधन स्मारक सक्रियण के एक आधुनिक और प्रासंगिक मॉडल का प्रतिनिधित्व करता है, जो संरक्षण, सार्वजनिक भागीदारी और सांस्कृतिक पुनरुद्धार के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। विगत वर्षों में, जहाँ-ए-खुसरो अमीर खुसरो की कालातीत विरासत को समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित सांस्कृतिक मंच बन गया है, जो रूमी, बाबा बुल्ले शाह, लल्लेश्वरी और अन्य सूफी संतों की रहस्यमय परंपराओं को भी पुनर्जीवित करता है। एक उत्सव से कहीं बढ़कर, यह भक्ति और संवाद का एक ऐसा मिलन स्थल बन गया है जहाँ संगीत, कविता, शिल्प और सांस्कृतिक विचार एक साथ मिलते हैं। पुराने किले में इसकी वापसी एक विशेष गूंज पैदा करती है। यह स्मारक केवल एक आयोजन स्थल न रहकर, इस अनुभव का एक जीवंत हिस्सा बन जाता है, जो समकालीन सांस्कृतिक जीवन के माध्यम से विरासत वास्तुकला को पुनर्जीवित करने की एक पुरानी परंपरा को जारी रखता है। यह दृष्टिकोण पुराने किले और सफदरजंग मकबरे सहित राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्मारकों में सभ्यता फाउंडेशन के व्यापक कार्यों के साथ गहराई से मेल खाता है, जहाँ इतिहास, प्रदर्शन, विद्वत्ता और सार्वजनिक भागीदारी का संगम होता है। वर्ष 2026 के इस संस्करण में उपमहाद्वीप की प्रसिद्ध आवाजों के साथ एक असाधारण संगीतमय प्रस्तुति देखने को मिलेगी, जिसमें सतिंदर सरताज, सुखविंदर सिंह, हंसराज हंस और लखविंदर वडाली मुख्य कलाकारों के रूप में शामिल होंगे। उनके साथ, यह महोत्सव जस्सू खान मंगनियार, शिवानी वर्मा, साहिल आगा और संयुक्ता सिन्हा जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों को भी प्रस्तुत करेगा। अन्य कलाकारों की घोषणा इस सप्ताह के अंत में होने की उम्मीद है। सभ्यता फाउंडेशन की सलाहकार बोर्ड की को-चेयरमैन सुश्री अवंतिका डालमिया ने कहा, “सभ्यता फाउंडेशन में हमारा मानना है कि सांस्कृतिक अनुभव तब सबसे सार्थक होते हैं जब वे सुलभ, अपनी जड़ों से जुड़े और साझा किए जाने वाले हों। ‘जहाँ-ए-खुसरो 2026’ पुराने किले में कलाकारों, दर्शकों और परंपराओं को एक साथ लाकर इस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है—जो अतीत का सम्मान करने के साथ-साथ समकालीन अभिव्यक्ति के लिए भी स्थान बनाता है। ऐसा करके, यह हमारे उस बड़े प्रयास को भी मजबूत करता है जिसके तहत भारत के ऐतिहासिक स्मारक जीवंत सार्वजनिक स्थल बने रहें, जहाँ विरासत, संवाद और कलात्मक उत्कृष्टता फलती-फूलती रहे।” महोत्सव की सतत यात्रा पर विचार साझा करते हुए, मुजफ्फर अली कहते हैं, “‘जहाँ-ए-खुसरो’ का जन्म संतों की फुसफुसाहट और सूफियों की मधुर स्वर लहरियों से हुआ था। दो दशकों से अधिक समय से, यह एक ऐसा अभयारण्य रहा है जहाँ संगीत, कविता और भक्ति सीमाओं को मिटा देते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि प्रेम ही एकता का अंतिम मार्ग है।”  महोत्सव की सह-क्यूरेटर, मीरा अली कहती हैं, “जहाँ-ए-खुसरो का एक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप विकास जारी है। हर संस्करण के साथ हमारा प्रयास एक ऐसी जगह तैयार करने का होता है जहां कला मरहम लगा सके, परंपराएँ संवाद कर सकें और दर्शक हमारी साझा विरासत की आध्यात्मिक गहराई से दोबारा जुड़ सकें।” जबकि यह महोत्सव अपने 26वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जहाँ-ए-खुसरो एक ठहराव के रूप में नहीं बल्कि एक यात्रा के रूप में आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष का विषय है, “द स्टीड ऑफ लॉन्गिंग | सफ़र-ए-इश्क़ कंटीन्यूज”, जो घोड़े के शक्तिशाली प्रतीक को विजय के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि गतिशीलता और आध्यात्मिक लालसा के रूपक के रूप में प्रस्तुत करता है। अपने 26वें वर्ष में, जहाँ-ए-खुसरो भारत के कलात्मक और सभ्यतागत परिदृश्य के भीतर एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक मंच के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है। सभ्यता फाउंडेशन के प्रबंधन के तहत पुराने किले में इसकी वापसी, राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के भीतर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आंदोलनों को स्थापित करने की आवश्यकता की पुष्टि करती है। यह उस व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है जिसमें विरासत और सार्वजनिक संस्कृति गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

Scroll to Top