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Cultural Journeys

शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल 2026 – नई दिल्ली प्रील्यूड का बीकानेर हाउस में शानदार शुभारंभ

नई दिल्ली : शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल 2026 – नई दिल्ली प्रील्यूड का आज बीकानेर हाउस, नई दिल्ली में भव्य शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में साहित्य, शासन, सिनेमा, पत्रकारिता और रचनात्मक कला जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। मेघालय सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय प्रील्यूड, 12 से 14 नवंबर 2026 तक शिलॉन्ग में आयोजित होने वाले मुख्य शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल से पहले का एक महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसकी घोषणा आज बीकानेर हाउस में की गई। इस फेस्टिवल का उद्देश्य मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक परंपराओं को सामने लाना है, साथ ही राज्य के क्रिएटिव इकोसिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी है। यह पहल संस्कृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और मेघालय को कला, साहित्य, संगीत और विचारों के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है। उद्घाटन दिवस का मुख्य आकर्षण माननीय मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के. संगमा और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता के बीच हुई विशेष बातचीत रही। इस चर्चा में नेतृत्व, शासन, युवाओं की आकांक्षाओं, संस्कृति और पूर्वोत्तर की बदलती पहचान जैसे विषयों पर बात हुई। बातचीत के दौरान मेघालय की क्रिएटिव इकॉनमी और राज्य में लगातार आयोजित होने वाले कैलेंडर इवेंट्स पर भी चर्चा हुई। श्री गुप्ता ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कई लिटरेरी फेस्टिवल देखे हैं, लेकिन शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल का माहौल, मौसम और दर्शकों की गुणवत्ता बेहद खास है। इन पहलों के पीछे की सोच पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फेस्टिवल राज्य में कई बड़े आयोजनों को एक मजबूत मंच देने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल जैसे आयोजनों को आगे बढ़ाकर सालभर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल की बढ़ती लोकप्रियता पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा, “हमने इसकी शुरुआत छोटे स्तर से की थी। अब यह लगातार आगे बढ़ रहा है। यह एक कैलेंडर इवेंट बन चुका है और पूरे देश में इसकी पहचान बन रही है। हमने सोचा कि दिल्ली में इसका यह प्रील्यूड आयोजित करने से इसे देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।” उन्होंने आगे कहा, “हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी और बड़ा बनेगा।” मुख्यमंत्री ने मेघालय की बढ़ती क्रिएटिव इकॉनमी, उद्यमिता की संस्कृति, सतत पर्यटन, शिक्षा क्षेत्र में विकास और राज्य के आर्थिक विकास को लेकर सरकार की सोच भी साझा की। स्वागत भाषण देते हुए पर्यटन विभाग, मेघालय सरकार के कमिश्नर एवं सेक्रेटरी डॉ. विजय कुमार डी., आईएएस ने कहा कि शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल मेघालय और पूर्वोत्तर की कहानियों, साहित्य, सिनेमा, संगीत और सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। नई दिल्ली प्रील्यूड के उद्देश्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन मेघालय की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास है। शिलॉन्ग की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नवंबर में जब शहर चेरी ब्लॉसम से गुलाबी रंग में रंग जाता है, तब “स्कॉटलैंड ऑफ द ईस्ट” कहलाने वाला शिलॉन्ग “क्योटो ऑफ द वेस्ट” में बदल जाता है। यह प्रसिद्ध उपमा लेखक विक्रम सेठ ने वर्ष 2024 में शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल के दौरान दी थी। उद्घाटन सत्रों में पूर्वोत्तर के सिनेमा जगत पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता डॉमिनिक संगमा और प्रदीप कुर्बाह ने पुलित्जर पुरस्कार विजेता पत्रकार सुपर्णा शर्मा के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सिनेमा की बदलती कहानियों, चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने ‘हेलो मेघालय’ को स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह ओटीटी प्लेटफॉर्म फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्मों को साझा करने और उनसे आय अर्जित करने का अवसर देता है, खासकर ऐसे समय में जब प्लेटफॉर्म तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। शाम का समापन दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की विशेष प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने विक्रम सेठ की प्रसिद्ध पुस्तक Beastly Tales from Here and There से “The Elephant and the Tragopan” का पाठ किया। इसके साथ उन्होंने जेम्स थर्बर की रचनाओं का भी पाठ किया। “The Bear Who Let It Alone”, “The Tiger Who Would Be King”, “The Owl Who Was God” और “The Very Proper Gander” जैसी कहानियों के माध्यम से उन्होंने प्रकृति और मानव लालच के बीच के संबंधों को दर्शाया। उनकी प्रस्तुति ने साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “रीडिंग्स फ्रॉम खासी एंड गारो क्लासिक्स” सत्र में प्रो. स्ट्रीमलेट डखार ने यू सोसो थाम की Ki Sngi Barim u Hynniewtrep और अपनी रचना Na Thwei Pyrkhat U Longshuwa का पाठ किया। वहीं डॉ. क्रिस्टल कॉर्नेलियस डी. मराक ने डी. एस. नेंगमिंजा की Seokgimin Poetryrang और Ku·bak-Ma·o Sanirang प्रस्तुत कीं, जिनमें गारो क्षेत्र की भौगोलिक और मौखिक परंपराओं को दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों ने क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को सामने रखा। फेस्टिवल के दूसरे दिन पूर्वोत्तर साहित्य, पर्यावरण, भोजन, अनुवाद और पहचान जैसे विषयों पर चर्चा होगी। “Shillong on a Plate” और “Once Upon a Time at a Literature Festival” जैसे सत्रों में शोभा डे, महारानी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया, संजय हजारिका, नमिता गोखले, पत्रिशिया मुखीम सहित कई प्रमुख वक्ता शामिल होंगे। शाम का समापन मुख्यमंत्री मेघालय ग्रासरूट्स म्यूजिक प्रोग्राम (CM-MGMP) के कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसने पूरे परिसर को मेघालय के संगीत, संस्कृति और उत्साह से भर दिया।

Education

इन्फ्रा मेडि 2.0 संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी शो: स्वास्थ्य अवसंरचना और नवाचार पर मंथन

राजधानी के ले मेरिडियन होटल में आयोजित इन्फ्रा मेडि 2.0 संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी शो का सफल समापन हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन में स्वास्थ्य, अनुसंधान, नीति निर्माण और उद्योग से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों और हितधारकों ने भाग लेते हुए भारत के स्वास्थ्य अवसंरचना और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में जालौर-सिरोही (राजस्थान) से सांसद श्री लुम्बाराम चौधरी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत अवसंरचना और प्रभावी नीति निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ताओं के रूप में डॉ. संगमित्रा पाटी (अतिरिक्त महानिदेशक, ICMR), डॉ. मोना डुग्गल (निदेशक, ICMR–नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन डिजिटल हेल्थ एंड डेटा साइंस) और डॉ. रजनी कांत (निदेशक, RMRC गोरखपुर एवं प्रमुख, नीति एवं संचार, ICMR) ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने डिजिटल हेल्थ, अनुसंधान और नीति समन्वय की भूमिका पर प्रकाश डाला। इस आयोजन में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने गोल्ड स्पॉन्सर के रूप में अहम भूमिका निभाई। साथ ही फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI), सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन सिद्धा (CCRS) और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और समृद्ध बनाया। एनजीओ साझेदार लेडी सर्कल GMCLC160 और काराह फाउंडेशन ने सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और प्रख्यात ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. हर्षवर्धन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने उद्बोधन में स्वास्थ्य क्षेत्र में सशक्त नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों के महत्व को रेखांकित किया। आयोजन के दृश्य और अनुभवात्मक पहलुओं को सफलतापूर्वक प्रस्तुत करने में विजुअल मिथ्स की निदेशक सुश्री मीतू पॉल का विशेष योगदान रहा। “विजन 2047” के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप, इन्फ्रा मेडि 2.0 ने एक समावेशी, सशक्त और भविष्य-उन्मुख स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण पर जोर दिया, जो नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और सहयोगात्मक साझेदारी पर आधारित हो। इस अवसर पर इन्फ्रा मेडि 3.0 के आगामी संस्करण की भी घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य इस संवाद और सहभागिता को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम का समापन “विजन 2047” के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

Bollywood Beats

सलमान खान के फेडोरा लुक ने मचाई हलचल, तस्वीरों के साथ दी मजेदार लाइफ एडवाइस!

क्लासी तस्वीरों संग सलमान खान का स्ट्रीट-स्मार्ट अंदाज वायरल, फैंस बोले- आपका संडे पोस्ट शानदार है! बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान हमेशा अपने मजेदार कैप्शन और सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में एक्टर ने कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें वह क्लासिक ब्लैक फेडोरा पहने नजर आए और अपने खास अंदाज में शानदार स्वैग दिखाया। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान उनके कैप्शन ने खींचा। अपने खुले और बातचीत वाले अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले सलमान खान ने इन तस्वीरों के साथ ऐसा मैसेज लिखा, जो मोटिवेशनल सलाह और स्ट्रीट-स्मार्ट समझदारी का मिश्रण लगा। अपने खास हिंग्लिश अंदाज में उन्होंने लिखा, “थिंकिंग ये है किसी भी फील्ड में। सोच लो समझ लो क्लियर हो जाओ डिसीजन लो और सब भूल के आगे बढ़ो और टोपी से याद आया टोपी खुद पहनो किसी को पहनाओ नहीं ना किसी को पहनाने दो।” https://www.instagram.com/p/DX3fzJsCCE_/?img_index=1&igsh=MWJ3c3BjdWRhbTkydw== उनके कैप्शन का आखिरी हिस्सा बड़ी समझदारी से “टोपी” शब्द का इस्तेमाल करता है, जिससे ईमानदारी और सच्चाई की अहमियत बताई गई है। उनका मतलब था कि ना तो किसी को धोखा दो और ना ही खुद किसी के धोखे में आओ। जैसे ही सलमान खान ने ये तस्वीरें शेयर कीं, फैंस ने कमेंट सेक्शन में प्यार बरसा दिया। एक फैन ने लिखा, “सलमानसी, मैं बहुत बड़ा फैन हूं, आपकी प्यारी तस्वीरें देखकर संडे और भी खास बन गया।” एक दूसरे फैन ने लिखा, “बहुत फिट और हैंडसम लग रहे हो।” एक फैन ने कमेंट किया, ❤️♡❤️♡❤️♡ “माय जान, माय लव, माय आइडल, माय भाई, हमेशा प्यार।” एक और फैन ने लिखा, “कोई इतना हैंडसम कैसे हो सकता है 😍 आई लव यू।” जहां सलमान खान बड़े पर्दे पर लगातार छाए हुए हैं, वहीं ऐसे पल दिखाते हैं कि वह सिनेमा से आगे बढ़कर भी लोगों से जुड़ने का हुनर रखते हैं। काम की बात करें तो सलमान खान अपनी आने वाली और बहुप्रतीक्षित फिल्म मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस की तैयारी में जुटे हैं। मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस को सलमा खान ने सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया है, जबकि निर्देशन की कमान अपूर्व लाखिया संभाल रहे हैं। यह फिल्म बहादुरी, बलिदान और हौसले की दमदार कहानी दिखाने का वादा करती है। फिल्म में चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में नजर आएंगी।

Bollywood Beats

रिव्यू : कभी कभी एक दिन हमारी पूरी जिंदगी का रुख बदल सकता है

फिल्म : ‘एक दिन’ निर्माता : आमिर खान प्रोडक्शन डायरेक्टर : सुनील पांडे मुख्य कलाकार : जुनैद खान, साई पल्लवी, कुणाल कपूर,केविन डेव अवधि : 2 घंटे 5 मिनट रेटिंग : 3 स्टार आमिर खान के प्रोडक्शन और सुनील पांडे के निर्देशन में बनी ‘एक दिन’ फिल्म दो किरदारों की जिंदगी को बदल देने वाली फिल्म है, जिसमें दिनेश उर्फ डीनो (जुनैद खान) का किरदार एक युवा व्यक्ति का है, जो एक आईटी कंपनी में काम करते हुए अपने सपनों और जिम्मेदारियों के बीच उलझा हुआ है। वहीं उसके आॅफिस में एक लड़की मीरा (साई पल्लवी)एक संवेदनशील, दृढ़ और भावनात्मक महिला के रूप में सामने आती हैं, जिसकी उपस्थिति कहानी को गहराई देती है। दिनेश उर्फ डीनो मीरा का मन ही मन चाहता है, लेकिन खुद को उसके लायक नहीं समझता, इसलिए वह मीरा से सीधे अपने मन की बात नहीं कह पाता। आगे चलकर फिल्म की कहानी आॅफिस से सीधे जापान की यात्रा पर निकलती है, जो जुनैद खान और साई पल्लवी की कहानी में एक दिन का उतार-चढ़ाव आता है। आमिर खान के प्रभावशाली व्यक्तित्व और उनके दमदार अभिनय से प्रेरित हो उनके बेटे जुनैद खान ने भी फिल्मों में अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इससे पहले भी वे ‘महाराज’ और ‘लवयापा’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं, और इस बार अमिर खान प्रोडक्शन द्वारा निर्मित फिल्म ‘एक दिन’ में लीड रोल में दर्शकों के सामने आए हैं। यह फिल्म जुनैद खान के अभिनय यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने अपने किरदार में सहजता और ईमानदारी दिखाई है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी में एक नया आत्मविश्वास झलकता है। वहीं साई पल्लवी की अदाकारी और भावनाओं को अभिव्यक्त करने की क्षमता फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है। वह हर दृश्य में दर्शकों को अपने साथ जोड़ लेती हैं। निर्देशन और प्रस्तुति की बात करें तो आमिर खान प्रोडक्शन की पहचान हमेशा से गहन और विचारशील सिनेमा रही है। ‘एक दिन’ भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। फिल्म का निर्देशन संवेदनशील है, जापान के खूबसूरत दृश्यों और कैमरे का इस्तेमाल कहानी को और प्रभावशाली बनाता है। फिल्म के संगीत और तकनीकी पक्ष के चलते फिल्म का संगीत भावनाओं को और गहराई देता है। बैकग्राउंड स्कोर दृश्यों की नाटकीयता को बढ़ाता है, जबकि गाने कहानी के प्रवाह में सहजता से घुल जाते हैं। सिनेमैटोग्राफी में रोजमर्रा की जिंदगी को खूबसूरती से कैद किया गया है। ‘एक दिन’ सिर्फ एक फिल्म ही नहीं, बल्कि एक अनुभव है, जो हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी एक ही दिन हमारी पूरी जिंदगी का रुख बदल सकता है। जुनैद खान और साई पल्लवी की जोड़ी ताजगी भरी है और दर्शकों को लंबे समय तक याद रहेगी। यहां बात सिर्फ रिव्यू पढ़ने की है और रिव्यू पढ़ने से ज्यादा कुछ समझ में नहीं आने वाला क्योंकि पढ़ने से ज्यादा जब कहानी पर्दे पर चलती है, तो आप दृश्यों और कलाकारों से ज्यादा जुड़ाव महसूस होता है। तो देर किस बात की इस वीकेंड को हाथ से न जाने दें और जल्द से जल्द देख आएं इस बेहतरीन फिल्म को, जो एक दिन में आपके अंदर भी कुछ बदलता हुआ महसूस कराएगी।

Bollywood Beats

वरिष्ठ फिल्मकार के. सी. बोकाडिया का सफर : ‘रिवाज़’ से ‘तीसरी बेगम’ तक

मुंबई : हिंदी फिल्म जगत में के. सी. बोकाडिया का नाम एक ऐसे फिल्मकार के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने लंबे समय तक दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और अनेक सफल फिल्में दीं। उनका सफर मेहनत, लगन और निरंतर काम करते रहने की मिसाल है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्म रिवाज़ से की थी। इस फिल्म में संजीव कुमार , माला सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े कलाकार थे। यहीं से उनके फिल्मी सफर की मजबूत शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने लगभग 60 फिल्मों का निर्माण किया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उनकी सफल फिल्मों में प्यार झुकता नहीं, तेरी मेहरबानियां, आज का अर्जुन, नसीब अपना अपना, मैदान ऐ जंग , कुदरत का क़ानून ,जवाब हम देंगे और फूल बने अंगारे शामिल हैं। इन फिल्मों को दर्शकों ने खूब सराहा। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ आज का अर्जुन और लाल बादशाह जैसी फिल्में बनाईं, जो काफी सफल रहीं। वहीं रजनीकांत के साथ भी उन्होंने पांच फिल्में कीं, जो उनकी विशेष उपलब्धि मानी जाती है। प्रियंका चोपड़ा ,सनी देओल सहित लगभग सभी प्रमुख कलाकारों के साथ उन्होंने काम किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रसिद्ध निर्देशक के आसिफ़ की अधूरी फिल्म लव एंड गॉड को भी पूरा किया। यह उनके अनुभव और समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ भी काम किया। सलमान ख़ान , शाहरुख़ ख़ान ,माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय को लेकर उन्होंने हम तुम्हारे हैं सनम बनाई, जिसे दर्शकों ने पसंद किया। हाल ही में उनका धारावाहिक सरदार दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ और दर्शकों को पसंद भी आया। इसके अलावा अनुपम खेर ,महिमा चौधरी और अन्नू कपूर अभिनीत फिल्म सिग्नेचर को भी अच्छा प्रतिसाद मिला। अब उनकी नई फिल्म तीसरी बेगम 29 मई को प्रदर्शित होने जा रही है। फिल्म की कहानी एक ऐसे मुस्लिम किरदार की है, जो तीन शादियां करता है—एक मुस्लिम, एक राजपूत और एक ब्राह्मण पत्नी से। यह फिल्म पहले प्रमाणन प्रक्रिया में अटकी हुई थी, लेकिन अब सभी मंजूरी मिलने के बाद इसके प्रदर्शन का मार्ग साफ हो गया है। के. सी. बोकाडिया उन गिने-चुने फिल्मकारों में हैं, जिन्होंने लगभग हर बड़े कलाकार के साथ काम किया है। उनका अनुभव और योगदान आज भी फिल्म जगत के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

Cultural Journeys

कथक और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा: अमायरा डांस अकैडमी का सफल आयोजन

नई दिल्ली : राजधानी में अमायरा डांस अकैडमी द्वारा एक भव्य सांस्कृतिक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं निर्णायक मंडल के रूप में आचार्या कल्पना, रजनी राव और शफीता खान उपस्थित रहीं। प्रतियोगिता में विशेष रूप से छोटे बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रतिभा और मेहनत की सराहना करते हुए विजेताओं को ट्रॉफी एवं अन्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन अमायरा डांस अकैडमी की ऑनर मिस्टी आनंद के नेतृत्व में किया गया। उनके कुशल प्रबंधन और समर्पण के चलते आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित एवं आकर्षक रहा। मिस्टी आनंद ने इस अवसर पर कहा कि उनका उद्देश्य कथक एवं भारतीय नृत्य कला को प्रोत्साहित करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। वे पारंपरिक और आधुनिक नृत्य शैलियों के समन्वय के माध्यम से भारतीय संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

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‘सलमान खान अद्भुत हैं; धुरंधर अब तक की बेहतरीन फिल्मों में से एक’: एनडीटीवी युवा 2026 में चित्रांगदा सिंह

नई दिल्ली : अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने शनिवार को बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें ‘अद्भुत’ बताया। यहां आयोजित ‘एनडीटीवी युवा 2026’ कार्यक्रम में बोलते हुए चित्रांगदा ने कहा कि सलमान दूसरों के साथ सम्मान से पेश आते हैं और उनसे मिलना-जुलना काफी आसान है। दोनों कलाकार इस साल रिलीज होने वाली फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ में साथ नजर आएंगे। यह फिल्म जून 2020 में भारत और चीन के बीच हुए गलवान घाटी संघर्ष पर आधारित है। चित्रांगदा ने कहा, “लोग सलमान के बारे में कई बातें कहते थे, जैसे कि शेड्यूल लंबा हो जाएगा या वह समय पर नहीं आएंगे। लोग उन्हें अनप्रोफेशनल भी कहते थे, लेकिन वह अद्भुत हैं। वह सभी के साथ प्यार से पेश आते हैं, सबका ख्याल रखते हैं और क्रू मेंबर्स की भी चिंता करते हैं। उनसे बात करना बहुत आसान है। लोगों ने कहा था कि वह जल्दी नहीं आएंगे, लेकिन मेरी शूटिंग जल्दी थी, इसलिए वह भी समय से पहले आ गए।” अपनी प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जानी जाने वाली और ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय देने वाली चित्रांगदा ने ‘धुरंधर’ को अब तक की बेहतरीन फिल्मों में से एक बताया। उन्होंने कहा, “धुरंधर लंबे समय के बाद भारत में बनी सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इसकी कहानी, निर्देशन, अभिनय और हर छोटी बारीकी शानदार है।” चित्रांगदा ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी अभिनय को करियर के रूप में अपनाने के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने कहा, “हर चीज आपके हाथ में नहीं होती। मेरी पहली फिल्म के बाद लोगों को लगा कि मैं ग्रे शेड वाले किरदार अच्छे से निभा सकती हूं, इसलिए मुझे वैसे ही रोल मिलने लगे और मुझे वह करना अच्छा लग रहा था। हर भूमिका के साथ आप धीरे-धीरे खुद को एक अभिनेता के रूप में समझते हैं। असली चुनौती उसी संतुलन को बनाए रखना है। मैंने फिल्मों के जरिए खुद को काफी हद तक पहचाना। बाद में मुझे आइटम सॉन्ग्स के लिए भी ऑफर मिले। मुझे अपनी पहली फिल्म ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ में बेहतरीन भूमिका मिली थी।”

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‘असफलता और कुछ नया करने से डर नहीं लगता’ : एनडीटीवी युवा 2026 में बहुमुखी प्रतिभा की धनी सान्या मल्होत्रा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया

नई दिल्ली : बॉलीवुड की बहुमुखी अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा ने शनिवार को यहां आयोजित ‘एनडीटीवी युवा 2026’ कार्यक्रम में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 2016 की फिल्म ‘दंगल’ से पहचान बनाने वाली सान्या ने कहा कि उन्हें अपनी अब तक की यात्रा पर गर्व है और वह अपने 2016 वाले स्वरूप को कोई सलाह नहीं देना चाहतीं। सान्या ने उत्साहित भीड़, जिसमें बड़ी संख्या में जेन Z युवा शामिल थे, से कहा, “मुझे अपने अतीत पर इतना गर्व है कि मैं उसे कुछ नहीं कहना चाहूंगी। मुझे अपने 2016 के स्वरूप पर भी बहुत गर्व है। कोई चिंता नहीं, गलतियां करो। मैं खुद से कहूंगी कि तुम उन गलतियों से सीखते हुए बहुत आगे आ चुकी हो। अगर मैं खुद को कुछ और करने या न करने की सलाह दूंगी, तो मैं अपने ही अवसर छीन लूंगी।” बॉलीवुड में अपने किरदारों के चयन में जोखिम लेने के लिए जानी जाने वाली सान्या ने कहा कि उन्हें किसी तरह का दबाव महसूस नहीं होता। करीब एक दशक पहले बॉलीवुड में कदम रखने वाली सान्या ने कहा, “कभी ऐसा हो सकता है कि मैं कुछ करूं और वह लोगों को पसंद न आए। क्या इससे मैं जोखिम लेना बंद कर दूंगी? बिल्कुल नहीं। मुझे असफलता से और कुछ नया करने से डर नहीं लगता।” ‘दंगल’ के अलावा सान्या ‘बधाई हो’, ‘पगलैट’ और ‘कटहल’ जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वह एक प्रशिक्षित कंटेम्पररी और बैले डांसर भी हैं। कार्यक्रम के दौरान बातचीत में सान्या ने दिलजीत दोसांझ के साथ काम करने के अनुभव को भी याद किया और इसे खास बताया। उन्होंने कहा, “मुझे दिलजीत दोसांझ का संगीत बहुत पसंद है और मैं उनके गानों पर डांस करना भी पसंद करती हूं। उनका हर नया गाना आने पर मैं उस पर रील बनाती हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि उनके साथ काम करने का मौका मिलेगा। यह अनुभव मुझे बेहद पसंद आया।” गौरतलब है कि सान्या मल्होत्रा और दिलजीत दोसांझ ने पिछले साल अक्टूबर में रिलीज हुए म्यूजिक वीडियो ‘चार्मर’ (Charmer) में साथ काम किया था, जो पंजाबी अभिनेता-गायक के एल्बम ‘ऑरा’ (Aura) का हिस्सा था।

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कवि सुभाष गौड़ की ‘युग की गीता’: नैतिक चेतना की काव्यात्मक छवि

‘’सब व्यक्तियों में पार्थ मैं ही सर्वगुण संपन्न हूं- सिर्फ वोट लेने के लिए ही, पार्थ मैं विपन्न हूं’’- उज्जैन के वरिष्ठ व प्रतिष्ठित कवि श्री सुभाष गौड़ के काव्य संग्रह “युग की गीता’’ की ये पंक्तियां मौजूदा युग के खुरदरे व कड़वे यथार्थ को ज्यों का त्यों अभिव्यक्त करती हैं। यह काव्य संग्रह वस्तुत: हृदय की कोमल भावनाओं, समाज की विसंगतियों, राजनैतिक विद्रूपताओं और भविष्य की चिंताओं को उकेरता हुआ संवेदनाओं का इंद्रधनुष है। इसमें प्रेम की गहनतम अभीप्सा, उत्कंठा और अनुभव को कागज के पन्नों पर इस तरह उतारा गया है कि आप उसे उसकी तीव्रता के साथ महसूस कर सकें। मसलन एक कविता ‘इक तुम्हारा साथ पाकर’ की लयात्मकता, मधुरता और जीवंतता बेमिसाल है। कविता का एक अंश देखिए कि ‘’एक तुम्हारे साथ यह मौसम बदलकर रह गया है, एक तुम्हारे संग से हर ढंग बदलकर रह गया है, एक तुम ही हो कि जिससे सब बदलकर रह गया है, जिंदगी के गीत का सरगम बदलकर रह गया है’’- दरअसल यह प्रेम की जीत के जश्न का गीत है। इस कविता में हमसफर की अहमियत, उसकी मौजूदगी, अहसास के तल पर हुए बदलाव- इन सभी की बेहद सुंदर अभिव्यक्ति हुई है। वहीं आगे की कविता ‘मैं शब्दों का शिल्पकार’ में कवि अपनी भूमिका स्पष्ट करते हैं, जबकि एक और कविता ‘’युवकों से’ में कवि नौजवानों को प्रेरित करते और सुझाव देते हुए नजर आते हैं। यह दर्शाता है कि कवि के मन में समाज और देश के भविष्य को लेकर बड़ी गहरी चिंता है। कविताओं की श्रृंखला में कविताएं भी सिलसिलेवार तरीके से सुसज्जित है। उदाहरण के तौर पर “मौसम ने करवट ली’’ के बाद ‘कहां विश्राम लेगी’ में उनके अनुभूति की कोयल लय-ताल के साथ कूकती है। एक कविता ‘’बाहर शोर तमाशा है’’ की पंक्तियां देखिए- ‘कोशिश हर दम चलती है- किस्मत लेकिन छलती है’- निश्चित ही यह जीवन के अनिश्चित यथार्थ और अनुभव से गुंजित पंक्तियां हैं। कवि प्रेम में न जताने की कला को बड़े ही सपाट शब्दों में अभिव्यक्त करते हैं- प्यार जब करते हो तो छुपाते क्यों हो- बेरुखी हमसे है, ये दिखाते क्यों हो। देश की मौजूदा आंतरिक सुरक्षा की समस्या पर भी उनकी कविता ‘पहले अपना घर साफ करो’ सीधे प्रहार करती हुई नजर आती है-  यहां भीड़ लगी जयचंदों- जाफर और विभीषण की- पहले अपना घर साफ करो- फिर रण की हुंकार भरो। एक कविता का अंश देखिए कि ‘बदले हुए दौर में पैसे की हुकूमत – कैसे किधर से आया- कुछ ध्यान नहीं हैं- हालांकि इस कविता का शीर्षक देते हुए वरिष्ठ कवि से जल्दबाजी हो गई है या प्रकाशन की त्रुटि है, यह नहीं मालूम लेकिन इस कविता का शीर्षक होना चाहिए था- ‘रवायत’। एक दूसरी कविता की पंक्तियां देखिए- बरसों बाद मिले हम तुम जब- दिल धड़का और आंखें रोई- लेकिन तुम पर असर नहीं कुछ साफ दिखाई देता है। कविता ‘शब्दों के जंगल’ की यह पंक्तियां कितनी सटीक है कि ‘शब्दों से भावना की गोद नहीं भरती है, सही भावना तो बस मौन में उतरती है। कवि सुभाष गौड़ की कविताओं में प्रेम बेहद सरल-सहज रूप में अभिव्यक्त हुई है- आओ के बैठ कर के कहीं गुफ्तगूं करें – कुछ मेरी सुनो- अपनी सुना जाओ किसी दिन। ऐसी ही एक कविता का अंश देखिए- वो मिला भी है तुझसे तो अजनबी की तरह- फिर तेरा उससे वास्ता क्या है! सुभाष गौड़ जी के दोहे तो सभी एक से बढ़कर एक हैं- एक बानगी देखिए कि ‘रिश्ते-नाते व्यर्थ हैं, अगर नहीं है अर्थ- संबंधों की आजकल, यही है पहली शर्त। काव्य संग्रह के आखिर में जो क्षणिकाओं एवं मुक्तकों का संग्रह है- वो लाजवाब है। लंबी कविता ‘युग की गीता’ को पढ़ते हुए अलग-अलग विषयों पर उनका व्यंग्य, आनंद का सहज प्रवाह भी है तो वक्त के सामने तीखा सवाल भी- विस्तार से क्या काम तुझको- जान लो यह सार है- बस एक मेरे वंश से ही लोकतंत्र आबाद है। इस कविता से गुजरते हुए इस बात का भी आभास हो जाता है कि क्यों कवि ने इस काव्य संग्रह का नाम- ‘युग की गीता’ रखा है। कवि ने युग की छवि को व्यंग्य और तंज के सहारे इस तरह रचा है कि ‘युग की गीता’ आज के समय को समझने का एक आदर्श पाठ  बन जाती है— तीखा, सचेत और निर्भीक

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“पिट्ट सियापा” नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में छाया फिल्म का अनोखा कॉन्सेप्ट

नई दिल्ली : पंजाबी सिनेमा में एक बार फिर कुछ हटकर देखने को मिलने वाला है। आगामी कॉमेडी फिल्म “पिट्ट सियापा” का टीज़र रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है। इसी कड़ी में फिल्म की प्रेस कॉन्फ्रेंस राजधानी के प्रतिष्ठित होटल द ललित नई दिल्लीमें आयोजित की गई, जहां मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों की खास मौजूदगी रही। प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म की स्टार कास्ट सोनम बाजवा और परमवीर सिंह चीमाने हिस्सा लिया और फिल्म से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। सोनम बाजवा ने बताया कि फिल्म की कहानी बेहद अलग और दिलचस्प है, जो दर्शकों को हंसी के साथ-साथ इमोशन और ड्रामा का भी पूरा डोज़ देगी क्योंकि जल्दी ही गर्मी की छुट्टी है होने वाली है और गर्मी छुट्टी में एक ऐसी कॉमेडी फिल्म आनी जरूरी है जिसे पूरे परिवार के साथ बैठकर देखा जा सके। “पिट्ट सियापा” पूरे परिवार के साथ देखने वाली कॉमेडी फिल्म है। वैसे भी मुझे कॉमेडी करना बहुत पसंद है। परमवीर सिंह चीमाने बताया कि सोनम बाजवा पंजाब की सुपरस्टार और उनके साथ मेरी फिल्म आ रही है इससे बड़ी बात क्या हो सकती है सोनम की एक्टिंग का मैं हमेशा से प्रशंसक रहा हूं मेरा सौभाग्य है की मेरी पहली पंजाबी फिल्म सोनम बाजवा के साथ आ रही है। फिल्म का टीज़र रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा में है। “पिट्ट सियापा” की कहानी एक अनोखे कॉन्सेप्ट पर आधारित है, जहां फ्यूनरल बिज़नेस से शुरू होकर कहानी लव स्टोरी, कन्फ्यूजन और अनएक्सपेक्टेड ट्विस्ट्स तक पहुंचती है। यही अलग अंदाज़ इसे बाकी फिल्मों से खास बनाता है। फिल्म के निर्माता पंकज गुप्ता, संदीप वासवानी, सूर्या गुप्ता, योगेश राहर और केवल गर्ग ने भी फिल्म को लेकर अपनी उत्सुकता जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह फिल्म कॉमेडी, इमोशन और ड्रामा का परफेक्ट मिश्रण है, जो हर वर्ग के दर्शकों को पसंद आएगा। “पिट्ट सियापा” एक हल्की-फुल्की लेकिन अलग कहानी वाली फिल्म है, जिसमें पंजाबी हास्य का जबरदस्त तड़का देखने को मिलेगा। खास बात यह भी है कि सोनम बाजवा इस फिल्म में एक बिल्कुल नए और अनदेखे किरदार में नजर आएंगी। यह फिल्म मूवी टनल प्रोडक्शंस के बैनर तले निर्मित है। अब देखना दिलचस्प होगा कि अपने अनोखे कॉन्सेप्ट और दमदार कॉमेडी के साथ “पिट्ट सियापा” बॉक्स ऑफिस पर कितना धमाल मचाती है।

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