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Business Buzz

दिल्ली का व्यापारिक परिदृश्य 2026 : बिज़नेस बज़ और बदलते रुझान

दिल्ली, भारत की राजधानी होने के साथ‑साथ देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता और व्यापारिक केंद्र भी है। यहाँ की मंडियाँ, कॉर्पोरेट दफ्तर, स्टार्टअप हब और ई‑कॉमर्स नेटवर्क मिलकर एक ऐसा आर्थिक ताना‑बाना रचते हैं जो न केवल दिल्ली बल्कि पूरे उत्तर भारत की दिशा तय करता है। 2026 में दिल्ली का व्यापारिक परिदृश्य कई नए बदलावों और अवसरों से भरा हुआ है। यह लेख लगभग 1000 शब्दों में दिल्ली के बिज़नेस ट्रेंड्स, स्टार्टअप्स, रोजगार, उपभोक्ता व्यवहार और निवेश की संभावनाओं पर प्रकाश डालता है। 1. दिल्ली का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली ने बैंगलुरु को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बनने का गौरव हासिल किया है। यहाँ के युवा उद्यमी फूड टेक, ई‑कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर और लाइफस्टाइल सेक्टर में नए प्रयोग कर रहे हैं। लेंसकार्ट जैसे ब्रांड ने दिखाया कि कैसे स्थानीय सोच को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया जा सकता है। मैपमाईइंडिया जैसी कंपनियाँ तकनीकी नवाचार और डेटा‑ड्रिवन सेवाओं के जरिए दिल्ली को डिजिटल मानचित्र पर चमका रही हैं। छोटे स्तर पर भी कई स्टार्टअप्स ₹50,000 से ₹2 लाख तक की पूंजी से शुरू होकर आज करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं। स्टार्टअप्स की सफलता का सबसे बड़ा कारण है—डिजिटल मार्केटिंग का प्रभावी उपयोग, स्थानीय नेटवर्किंग और उपभोक्ता की बदलती जरूरतों को समझना। 2. ई‑कॉमर्स और रिटेल का विस्तार दिल्ली का उपभोक्ता वर्ग तेजी से ऑनलाइन शॉपिंग की ओर बढ़ रहा है। फैशन और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स की मांग सबसे अधिक है। ऑर्गेनिक और वेलनेस प्रोडक्ट्स का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। किराना और फूड डिलीवरी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएँ और ऑफर मिल रहे हैं। दिल्ली की मंडियाँ जैसे करोल बाग, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर अब केवल ऑफलाइन ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। 3. रोजगार और करियर ट्रेंड्स 2026 में दिल्ली का रोजगार बाजार भी तेजी से बदल रहा है। एआई स्पेशलिस्ट्स और डेटा एनालिस्ट्स की मांग सबसे अधिक है। कंप्लायंस ऑफिसर्स और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की भूमिका अहम हो गई है। क्रिएटिव स्ट्रैटेजिस्ट्स और लीडरशिप रोल्स में युवाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। दिल्ली‑एनसीआर क्षेत्र देश का सबसे बड़ा रोजगार केंद्र बन चुका है, जहाँ लाखों लोग विभिन्न उद्योगों में काम कर रहे हैं। 4. निवेश और उपभोक्ता व्यवहार भारत को 2026 में वैश्विक निवेश का केंद्र माना जा रहा है और दिल्ली इस दिशा में सबसे आगे है। विदेशी निवेशक दिल्ली को गेटवे टू इंडिया मानते हैं। उपभोक्ता खर्च बढ़ रहा है, खासकर मिडिल क्लास और यंग जनरेशन में। डेटा प्राइवेसी और एआई एडॉप्शन पर कंपनियाँ विशेष ध्यान दे रही हैं। दिल्ली का उपभोक्ता अब केवल उत्पाद नहीं, बल्कि अनुभव खरीदना चाहता है। यही कारण है कि ब्रांड्स अपने मार्केटिंग में भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर दे रहे हैं। 5. छोटे व्यवसाय और एमएसएमई दिल्ली में छोटे व्यवसाय और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हस्तशिल्प और हैंडलूम उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर वैश्विक पहचान मिल रही है। इवेंट मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में छोटे उद्यमियों के लिए बड़े अवसर हैं। फूड प्रोसेसिंग और ऑर्गेनिक फार्मिंग से जुड़े व्यवसाय दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में तेजी से फैल रहे हैं। 6. चुनौतियाँ और समाधान दिल्ली के व्यापारिक परिदृश्य में अवसरों के साथ चुनौतियाँ भी हैं। प्रदूषण और ट्रैफिक व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। साइबर सिक्योरिटी खतरे डिजिटल कारोबार के लिए चुनौती बने हुए हैं। रियल एस्टेट की ऊँची कीमतें छोटे उद्यमियों के लिए बाधा हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम कर रहे हैं। ग्रीन बिज़नेस मॉडल्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्मार्ट लॉजिस्टिक्स और डिजिटल सिक्योरिटी पर निवेश बढ़ रहा है। को‑वर्किंग स्पेसेज़ छोटे उद्यमियों को सस्ती जगह उपलब्ध करा रहे हैं। 7. भविष्य की दिशा दिल्ली का व्यापारिक परिदृश्य आने वाले वर्षों में और भी गतिशील होगा। एआई और ऑटोमेशन हर उद्योग में गहराई से प्रवेश करेंगे। सस्टेनेबल बिज़नेस मॉडल्स को प्राथमिकता मिलेगी। ग्लोबल ब्रांड्स और लोकल उद्यमियों का संगम दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मानचित्र पर और मजबूत करेगा। निष्कर्ष 2026 में दिल्ली का व्यापारिक परिदृश्य अवसरों, नवाचार और चुनौतियों से भरा हुआ है। स्टार्टअप्स से लेकर एमएसएमई तक, ई‑कॉमर्स से लेकर रोजगार बाजार तक—हर क्षेत्र में दिल्ली अपनी अलग पहचान बना रहा है। यह शहर न केवल भारत की राजधानी है, बल्कि व्यापार और निवेश की राजधानी भी बन चुका है। दिल्ली का बिज़नेस बज़ यह संदेश देता है कि अगर संकल्प, नवाचार और सहयोग हो, तो कोई भी बाजार सीमित नहीं होता। दिल्ली आज “लोकल टू ग्लोबल” की यात्रा पर है और आने वाले वर्षों में यह भारत की आर्थिक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा।

Bollywood Beats

सामाजिक मुद्दे पर बनी संवेदनशील फिल्म : ‘पारो-पिनाकी की प्रेम कहानी’

मूवी रिव्यू : पारो पिनाकी की प्रेम कहानी कलाकार : इशिता सिंह, संजय बिस्नोई, हनुमान सोनी, धन्नजय सरदेश पांडे निर्माता: इशिता सिंह, उत्कर्ष सिंह, संजय बिस्नोई, प्रताप जादौन समर सिंह निर्देशक: रुद्र जादोन, संगीत: ब्रिटो, सेंसर: यू, अवधि: 94 मिनट, रेटिंग: तीन स्टार इस फिल्म को देखने के उपरांत आप भी फिल्म की लीड एक्ट्रेस मेकर इशिता सिंह की इस बात के लिए एकबारगी जरूर तारीफ करेंगे कि उन्होंने अपनी अब तक की अपनी जमापूंजी को लगाकर एक ऐसे विषय पर पूर्ण सादगी और ईमानदारी के साथ फिल्म बनाई जहां बॉक्स ऑफिस के मोह और प्रॉफिट कमाने की उनकी मंशा दूर दूर तक नजर नहीं आती है। एक बार नहीं अनेको बार हम अखबारों के अंदर के पन्नो पर पर यह खबर पढ़ते है सीवर की सफाई करते हुए या बंद सीवर को खोलने के बीच निकली उसकी बेहद जहरीली गैस से सीवरकर्मी की मौत, और हम ऐसी खबरों को अक्सर इग्नोर कर अखबार का पन्ना बदल देते है यही हाल सरकार और सत्ता से जुड़े बाबुओं का भी होता है लेकिन जाने आम आदमी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की बेटी इशिता सिंह ने इस मुद्दे को संजीदगी से लिया अपनी रिसर्च टीम के साथ इस विषय पर काम किया । इस गंभीर मुद्दे को एक बेहद सिंपल प्रेम कहानी के साथ एक ऐसी प्रेम कहानी के साथ पेश किया जो कभी अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। स्टोरी प्लॉट : मुंबई की एक स्लम बस्ती में अपने परिवार के साथ रहने वाली मरियम इशिता सिंह अपने अब्बा के साथ बाजार में सब्जी बेचती है , मरियम उर्फ पारो ( इशिता सिंह ) को पास की कालोनी में रहने वाले पिनाकी ( संजय बिश्नोई)जो सीवर की सफाई का काम करता है से ऐसा सच्चा प्यार होता है कि अपने घर से उसके लिए खाना लेकर उससे मिलने जाती है , मरियम के अब्बा को यह न मंजूर नहीं और वह अपनी बेटी को एक ऐसे मानव तस्करी करने वाले एक गिरोह को बेच देते है और मरियम अपने सच्चे प्यार से दूर घुट घुट कर जीने को मजबूर हो जाती है, अपने प्यार की तलाश मे अपना सब कुछ भूल पिनाकी इधर उधर उसकी तलाश में लग जाता है क्या उसकी तलाश कामयाब होती है और पारो उर्फ मरियम को उसका सच्चा प्यार मिल पाता है यह जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी। ओवर ऑल : फिल्म की लीड, एक्ट्रेस इशिता सिंह ने एक भेंट में बताया मेरी इस फिल्म की कहानी सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि समाज के उन तबकों की सच्चाई को दिखाने की मेरी कोशिश है, जिनकी बात शायद हम कभी नहीं करते फिल्मों में ऐसी स्टोरी की तो कोई सोच भी नहीं सकता ।एक सीवर कर्मी और सब्जी बेचने वालों की असली जिंदगी को पर्दे पर लाने की कोशिश हमने की है. इशिता ने अपने किरदार को बिना मेकअप किए पूरी ईमानदारी से निभाया है पीनारो के किरदार में संजय बिश्नोई बेशक कुछ दृश्यों में कमजोर रहे लेकिन अपने किरदार के साथ उन्होंने पूरी ईमानदारी बरती है लेखक और निर्देशक रुद्र जादौन की इस बात के लिए तारीफ होनी चाहिए कि उन्होंने सीमित बजट में कहानी की डिमांड के अनुसार पूरी फिल्म को आउटडोर लोकेशन में शूट किया हैं, फिल्म में एक बेहद गंभीर मुद्दा उठाया गया है यही वजह हम फिल्म की खामियों को नजर अंदाज करते है। अगर आप सच के साथ जुड़ी फिल्में पसंद करते है तो फिल्म आपके लिए है।

Adventure Trails, Travel Diaries

आदि कैलाश यात्रा : सहस्र लोकों की अद्भुत अनुभूति

आदि कैलाश, जिसे छोटा कैलाश भी कहा जाता है, हिमालय की गोद में स्थित वह पवित्र स्थल है जहाँ प्रकृति और अध्यात्म का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। यह यात्रा केवल एक भौगोलिक मार्ग नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों तक उतरने वाली साधना है। जब यात्री आदि कैलाश की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो वे एक ही संसार में नहीं, बल्कि सहस्र लोकों की यात्रा कर रहे हों—हर मोड़ पर एक नया दृश्य, हर घाटी में एक नई अनुभूति। हिमालय की ऊँची चोटियाँ, बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाएँ और निर्मल झीलें इस यात्रा को दिव्यता से भर देती हैं। यहाँ की हर हवा में शिव का स्पंदन है, हर पत्थर में तपस्या की गूँज है। यात्रियों को लगता है कि वे समय और स्थान की सीमाओं से परे पहुँच गए हैं, जहाँ केवल शांति, श्रद्धा और आत्मिक ऊर्जा का वास है। आदि कैलाश की यात्रा में न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का दर्शन होता है, बल्कि यह आत्मा को सहस्र अनुभवों से समृद्ध करती है। यहाँ पहुँचकर लगता है कि जीवन के हजारों संसार एक साथ खुल गए हों—कभी प्रकृति की गोद में बालपन की निश्छलता, कभी तपस्वियों की गहन साधना, और कभी शिव के चरणों में समर्पण की अनंत शांति। यह यात्रा हमें सिखाती है कि संसार चाहे हजारों हों, मार्ग चाहे कठिन हो, लेकिन श्रद्धा और संकल्प से हर यात्री अपने भीतर के कैलाश तक पहुँच सकता है। आदि कैलाश की यह यात्रा वास्तव में सहस्र लोकों की यात्रा है—जहाँ हर क्षण एक नया अध्याय, हर दृश्य एक नया लोक और हर अनुभव एक नई आत्मिक ऊँचाई प्रदान करता है। आदि कैलाश केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि हजारों संसारों का द्वार है—जहाँ पहुँचकर मनुष्य स्वयं को ब्रह्मांड का हिस्सा महसूस करता है।

Bollywood Beats, OTT & TV Trends

‘मां बहन’ में तृप्ति डिमरी का कॉमिक अंदाज़ दर्शकों को आ रहा है खूब पसंद, एक फैन ने कहा – “आजकल की स्मिता पाटिल”

‘बुलबुल’ और ‘क़ाला’ के बाद, नेटफ्लिक्स की ‘मां बहन’ को लेकर बढ़ा क्रेज़, डार्क कॉमेडी में कदम रखने पर तृप्ति डिमरी को मिला फैंस का थम्स अप ‘बुलबुल’ और ‘क़ाला’ के बाद, तृप्ति डिमरी अपनी अगली नेटफ्लिक्स फिल्म ‘मां बहन’ के साथ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। यह एक डार्क कॉमेडी फिल्म है, जिसे सुरेश त्रिवेणी ने निर्देशित किया है। इस फिल्म में पहली बार माधुरी दीक्षित, रवि किशन और धारणा दुर्गा साथ नजर आएंगे। कहानी रेखा और उसकी दो बेटियों, जया और सुषमा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें उनके मोहल्ले में पहले से ही शक की नजर से देखा जाता है। कहानी तब मजेदार मोड़ लेती है, जब उनकी रसोई में एक लाश मिलती है और उसे छुपाने के लिए तीनों को मजबूरी में साथ आना पड़ता है। फिल्म में तृप्ति डिमरी का डार्क कॉमेडी की ओर रुख करना दर्शकों को खासा पसंद आ रहा है। उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग, ‘बड़ी बहन’ के किरदार में जिम्मेदारी और हल्की-फुल्की शरारत, साथ ही उनकी सहज घरेलू बोली उनके किरदार को बेहद असली बनाती है। यही वजह है कि दर्शक उनके इस नए अंदाज़ को खूब सराह रहे हैं। एक फैन ने लिखा, “तृप्ति कॉमेडी में बहुत अच्छी हैं,” वहीं दूसरे ने कहा, “टाइमपास कॉमेडी फिल्म है, लेकिन तृप्ति डिमरी अब अच्छे प्रोजेक्ट्स चुन रही हैं।” किसी ने उनकी तारीफ करते हुए लिखा, “तृप्ति में असली टैलेंट और ह्यूमर है,” तो एक यूज़र ने उन्हें “आजकल की स्मिता पाटिल” तक कह दिया। कई दर्शकों ने ट्रेलर देखने के बाद फिल्म को दिलचस्प बताया और तृप्ति डिमरी की स्क्रीन प्रेज़ेंस की जमकर तारीफ की। नेटफ्लिक्स ने भी उनके ‘कमबैक’ से जुड़े एक कमेंट पर मजेदार जवाब देते हुए लिखा, “वो कभी गई ही नहीं!” ‘ओ’ रोमियो’ में गंभीर और सधी हुई अदाकारी दिखाने के बाद, ‘मां बहन’ में तृप्ति डिमरी का यह चुलबुला और अनदेखा रूप सामने आ रहा है। यह साफ दिखाता है कि तृप्ति डिमरी आज की सबसे बहुमुखी अभिनेत्रियों में से एक हैं, जो हर किरदार में आसानी से ढल जाती हैं। पहले ‘ओ’ रोमियो’ और अब ‘मां बहन’ बड़े पर्दे से लेकर नेटफ्लिक्स तक, दर्शकों को तृप्ति डिमरी से भरपूर मनोरंजन मिलने वाला है।

OTT & TV Trends

भूमि सतीश पेडनेकर की ‘दलदल’ को मिला दुनियाभर में प्यार

भूमि सतीश पेडनेकर कभी भी तयशुदा फॉर्मूले पर चलने वाली कलाकार नहीं रही हैं। उनकी फिल्मोग्राफी साफ दिखाती है कि वह ग्लैमर और ज़रूरत से ज़्यादा ड्रामा से दूर, अलग और दमदार कहानियों को चुनती हैं। अपनी पहली फिल्म से ही भूमि ने दम लगा के हईशा, टॉयलेट: एक प्रेम कथा, पति पत्नी और वो, बधाई दो, थैंक यू फॉर कमिंग, शुभ मंगल सावधान, बाला, भीड़, भक्षक, सांड की आंख जैसी फिल्मों के ज़रिए समाज से जुड़े मुद्दों पर बात करने की हिम्मत दिखाई है। अब उनकी ग्लोबल ओटीटी हिट सीरीज़ दलदल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। भूमि की फिल्मों और शोज़ में दिखावा कम और कंटेंट ज़्यादा होता है। यही वजह है कि दर्शक उनकी कहानियों से जुड़ते हैं और बार-बार उन्हें देखना चाहते हैं। दलदल के ओटीटी हिट बनने के साथ भूमि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके लिए माध्यम नहीं, बल्कि कला और अभिनय सबसे ज़रूरी है। बड़े पर्दे पर अपनी मजबूत पहचान बनाने के बाद, भूमि ने अमेज़न प्राइम की टॉप-ट्रेंडिंग साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर दलदल के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी पकड़ साबित की है। यह सीरीज़ अमेरिका, यूके, यूएई समेत कई देशों में ट्रेंड कर रही है और दुनियाभर में सराही जा रही है। इसकी सफलता भूमि की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है और उन्हें भारत की सबसे भरोसेमंद और निडर अभिनेत्रियों में शामिल करती है। दलदल को मिल रही वैश्विक सराहना यह भी दिखाती है कि भूमि हमेशा कंटेंट और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को प्राथमिकता देती हैं। जहां कई कलाकार ऐसे किरदारों से हिचकते हैं जिनमें शारीरिक बदलाव, गहरी भावनात्मक तैयारी और व्यक्तित्व में बदलाव की जरूरत होती है, वहीं भूमि ने इन्हें अपनी ताकत बना लिया है। सिनेमाघरों से लेकर दुनियाभर के स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तक, भूमि ऐसा काम कर रही हैं जो खुद बोलता है। दलदल की सफलता के साथ यह साफ है कि भूमि सतीश पेडनेकर हर बार बड़ा जोखिम लेती हैं और उसे पूरी मजबूती से निभाती हैं।

Sports Arena

दिल्ली की बेटियों का कैनोइंग में जलवा

दिल्ली की यमुना नदी के किनारे, सोनिया विहार वॉटर स्पोर्ट्स पर सुबह‑शाम अथक परिश्रम करती हुईं ये बेटियां आज राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर रही हैं। कोचों के मार्गदर्शन और क्लब कार्यकारिणी व दिल्ली एसोसिएशन की निरंतर तत्परता ने इनके सपनों को पंख दिए हैं। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद इनकी मेहनत ने भोपाल में आयोजित 36वीं नेशनल कैनो स्प्रिंट चैंपियनशिप में पदकों की झड़ी लगा दी। यह उपलब्धि न केवल दिल्ली के खेल इतिहास में एक गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सामूहिक सहयोग से बेटियां हर क्षेत्र में अव्वल साबित हो सकती हैं। इनकी जीत पूरे समाज के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए आशा की किरण।

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दूसरे दिन 50% की ज़बरदस्त उछाल, मर्दानी 3 ने दो दिन में कमाए 10 करोड़

यशराज फिल्म्स की हिट फ्रेंचाइज़ी मर्दानी 3 बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। रानी मुखर्जी अभिनीत इस फिल्म ने रिलीज़ के दूसरे दिन 50 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगाते हुए दो दिनों में कुल 10 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। शनिवार को फिल्म ने 6 करोड़ रुपये नेट का कारोबार किया, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि रविवार को कलेक्शन में और भी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। पहले दिन मर्दानी 3 ने 4 करोड़ रुपये की कमाई के साथ न सिर्फ मर्दानी फ्रेंचाइज़ी की अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग दर्ज की, बल्कि रानी मुखर्जी की किसी भी सोलो फिल्म की सर्वश्रेष्ठ ओपनिंग भी साबित हुई। बेहतरीन समीक्षाओं और मजबूत वर्ड ऑफ माउथ का फायदा फिल्म को लगातार मिल रहा है। सामाजिक संदेश से जुड़ी इस थ्रिलर को दर्शकों से खासा प्यार मिल रहा है और कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म ‘मस्ट वॉच’ बनती जा रही है। फिल्म को एक संतुलित और नियंत्रित रिलीज़ रणनीति के तहत मुख्य रूप से मेट्रो और शहरी केंद्रों में प्रदर्शित किया गया है, जहां लंबी रेस को ध्यान में रखते हुए कदम बढ़ाया गया। प्रतिस्पर्धी फिल्मों की मौजूदगी के बावजूद दूसरे दिन आई 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया को साफ तौर पर दर्शाती है। पोस्ट-पैंडेमिक दौर में जहां थ्रिलर फिल्मों को सिनेमाघरों में संघर्ष करना पड़ा है, वहीं मर्दानी 3 उन चुनिंदा हिंदी थ्रिलर्स में शामिल हो गई है, जिसने थिएट्रिकल स्तर पर ठोस पकड़ बनाई है। रानी मुखर्जी की थिएटर अपील एक बार फिर साबित हुई है। अपने 30 साल के फिल्मी करियर में वह आज भी सोलो लीड के तौर पर दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल रही हैं, जो उनके मजबूत बॉक्स ऑफिस भरोसे को दर्शाता है।

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नई दिल्ली में खुला अनुपम खेर का ‘एक्टर प्रिपेयर्स’ एक्टिंग इंस्टीट्यूट, युवाओं को मिलेगा वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग प्लेटफॉर्मनई

दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अभिनेता और पद्म भूषण सम्मानित अनुपम खेर के अभिनय संस्थान एक्टर प्रिपेयर्स ने राजधानी दिल्ली में अपना नया सेंटर शुरू कर दिया है। सफदरजंग एन्क्लेव में स्थापित यह केंद्र संस्थान के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के युवाओं को विश्वस्तरीय अभिनय प्रशिक्षण दिल्ली में ही उपलब्ध होगा। एक्टर प्रिपेयर्स की स्थापना वर्ष 2005 में मुंबई में अनुपम खेर द्वारा की गई थी। यह संस्थान भारत के प्रमुख अभिनय प्रशिक्षण केंद्रों में गिना जाता है और इसे दुनिया का ऐसा अभिनय स्कूल माना जाता है जिसे एक सक्रिय अंतरराष्ट्रीय फिल्म कलाकार स्वयं संचालित करता है। संस्थान आधुनिक अभिनय तकनीकों और व्यावहारिक प्रशिक्षण के मिश्रण के लिए जाना जाता है और वर्षों से कई सफल कलाकारों को तैयार कर चुका है। नए केंद्र के शुभारंभ पर अनुपम खेर ने कहा कि दिल्ली रचनात्मक ऊर्जा और प्रतिभा से भरपूर शहर है और यह केंद्र ऐसे युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगा जो पेशेवर स्तर पर अभिनय सीखना चाहते हैं। वहीं संस्थान के उद्घाटन के अवसर पर अभिनेता-लेखक-निर्देशक बोमन ईरानी ने कहा कि ऐसे संस्थान न केवल कलाकार तैयार करते हैं बल्कि अनुशासन, मौलिकता और रचनात्मक साहस को भी बढ़ावा देते हैं। संस्थान ने अब तक दीपिका पादुकोण, ऋतिक रोशन, वरुण धवन, कियारा आडवाणी, अभिषेक बच्चन, प्रीति जिंटा, ईशा गुप्ता और गौहर खान जैसे कई सफल कलाकारों को प्रशिक्षित किया है, जिससे इसकी पहचान गंभीर अभिनय प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में बनी हुई है दिल्ली केंद्र में छात्रों के लिए फुल-लेंथ एक्टिंग प्रोग्राम, ऑन-कैमरा ट्रेनिंग, विशेष वर्कशॉप, ऑडिशन तैयारी और इंडस्ट्री मास्टरक्लास जैसे कोर्स उपलब्ध होंगे। संस्थान का पाठ्यक्रम छात्रों में आत्मविश्वास, अभिनय कौशल और पेशेवर समझ विकसित करने पर केंद्रित रहेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद छात्रों को आधिकारिक प्रमाणपत्र दिया जाएगा और इन-हाउस कास्टिंग टीम के माध्यम से इंडस्ट्री में आगे बढ़ने का मार्गदर्शन भी किया जाएगा। संस्थान प्रबंधन के अनुसार, अनुभवी फैकल्टी और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स के मार्गदर्शन में यह नया केंद्र दिल्ली के उभरते कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।

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दिल्ली के धुरंधरों ने जीते 36वीं नेशनल कैनो सि्ंप्रट प्रतियोगता पदक जीत लहराया अपना परचम

दिल्ली की कंपकंपाती ठंड और मां यमुना के आंचल में लगातार अभ्यास करने के बाद जब दिल्ली के खिलाड़ी मध्यप्रदेश के भोपाल में आयोजित 36वीं नेशनल कैनो स्प्रिंट चैंपियनशिप में उतरे, तो उनके मन में केवल एक ही संकल्प था—पदक जीतकर दिल्ली का नाम रोशन करना। यह दृढ़संकल्प उनकी मेहनत और जुनून के साथ मिलकर जीत में बदल गया और दिल्ली के खिलाड़ियों ने सीनियर मेन और वूमेन वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक हासिल किए। देशभर से आए खिलाड़ियों के बीच दिल्ली की टीम ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 1000 मीटर, वूमेन सी-2 में निक्की और सलोनी ने कांस्य पदक जीता। वहीं 1000 मीटर, मेन सी-2 में योगेश और तरुण ने भी कांस्य पदक हासिल किया। वूमेन सी-1 1000 मीटर में निक्की ने व्यक्तिगत रूप से कांस्य पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसके अलावा 500 मीटर, सी-2 मिक्स में नितिन और सुमेधा ने सिल्वर पदक जीता, जबकि 500 मीटर, मेन सी-2 में योगेश और तरुण ने भी सिल्वर पदक अपने नाम किया। इन उपलब्धियों पर दिल्ली एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी त्रिलोचन सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि दिल्ली के खिलाड़ी वॉटर स्पोर्ट्स में राष्ट्रीय स्तर पर लगातार पदक जीतकर राजधानी का नाम रोशन कर रहे हैं। वहीं सोनिया विहार वॉटर स्पोर्ट्स क्लब के अध्यक्ष कुंवरपाल सिंह ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि दिल्ली की ठिठुरती ठंड में सुबह-शाम की कठिन प्रैक्टिस का फल अब पदकों के रूप में मिला है, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है। खिलाड़ियों की मेहनत, कोचों का मार्गदर्शन और टीम भावना ने इस प्रतियोगिता को यादगार बना दिया। यह जीत न केवल दिल्ली के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती है कि कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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IILF – 2026 OPENS AT CHENNAI TRADE CENTER

One of the most awaited B2B leather industry event, the 39th edition of India International Leather Fair (February 1-3, 2026) was formally inaugurated by the Amb. Shri Jawed Ashraf, IFS (Retd.) Chairman, India Trade Promotion Organisation (ITPO) in the presence of the captions of leather industry, senior government officials. 9th Designers fair organised by the Council of Leather Exports at IILF was also inaugurated by the Chairman, ITPO. Present on the occasion were Dr. Neeraj Kharwal IAS, Managing Director ITPO, Shri Ramesh Kumar Juneja, Chairman, CLE, Shri R. Selvam, Executive Director, CLE, Lt. Col. Harsh Kondilya, OSD and General Manager, ITPO, Smt. L. Bharathi Devi, Managing Director, TNTPO, Shri Vivek Sharma, MD, FDDI, Mr. Abdul Wahab, Regional Chairman (South, CLE), Shri Sanjay Gupta, Chairman, IFCOMA, Shri Brij Lal, General Manger, ITPO, Members of Diplomatics Corps, participants from India and abroad, delegates and media representatives.  The dignitaries from the overseas include Mr. Michael Hasper, Counsel General of Federal Republic of Germany in Chennai, Ms. Antonietta Baccanari, Trade Commissioner, Italy, Mr. Cameron Nobel, Dy. Consul General, Australia, Mr. Adil Australian Trade Commissioner and others. After opening the fair, Amb. Mr. Jawed Ashraf Chairman, ITPO visited the stalls and complimented all the associates for holding this edition of the fair IILF at an enhanced scale at Chennai Trade Center and its newly constructed exhibition halls. He informed that opening new avenues of growth in India’s leather & footwear industry. ITPO is committed to support and catalyse the promotional efforts in India and abroad, specially when the country is emerging as a vital destination after signing FTA’s with European Union and UK. After interaction with the senior representatives of CLE and other Apex bodies he informed that ITPO is planning hold similar leather fair in New Delhi. While addressing the foreign media he said specially when Europe and India are committed to shape new global order to boost economic growth in leather and its allied industries by slashing tariff on goods, enhancing service sector and fostering investment. Quality and on time delivery are imperatives to improve India’s performance to strengthen its supply chain. Prominent among from foreign media were Mr. Mario Luzon Blasco, Prensa Tenia, Spain, Mr. Mathew Henry Abott, world Trades Publishing Ltd., UK, Mr. Stefano Migliavacca, Edizioni AF s.r.L. Italy, Mr. Carlo Leoni, Editoriale Di Informazioni Settoriali, Italy, Mr. Frederico Avogadro Di Valdengo, MPA s.r.L., Italy. This year, the fair elicited participation of 368 Indian companies and 66 oversees participants. Germany & Italy have set-up their country pavilions at the fair. The other participating nations are Australia, Argentina, China, Ethiopia, Hong Kong, Japan, Saudi Arabia, Spain, Taiwan, The Netherlands, Turkey, United Arab Emirates, and United Kingdom. The fair is being organised by ITPO with the meaningful support of the Council of Leather Exports (CLE) as the Co-organiser and other associates including Central Leather Research Institute (CLRI), Indian Shoe Federation (ISF), Indian Finished Leather Manufacturers Exporters Association (IFLMEA), Indian Footwear Components Manufacturers, Association (IFCOMA), Footwear Design and Development Institute (FDDI) and Confederation of Indian Footwear Industries (CIFI). IILF Chennai 2026 (February 01-03) is open from 10.00 am to 6.00 pm. Entry for Business Visitors will be facilitated by Online Registration through the following link: https://iilf.eventink.in/visitor.html Business Visitors can also register on-site at the fair venue through QR Codes. After registering, Business Visitors may collect the badges from registration counters at the venue. Please visithttps://www.itpo.gov.in/iilf-2026, for more details.

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