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September 23, 2026

Bollywood Beats

फातिमा सना शेख ने फेमिनिज़्म, प्रियंका चोपड़ा जोनस और ‘हुंकार: द रोअर’ में पुलिसवाले का किरदार निभाने पर की बात

“मैं सिर्फ बराबरी के अधिकार मांग रही हूं”: फातिमा सना शेख ने बताया कि वह खुद को फेमिनिस्ट क्यों कहती हैं फातिमा सना शेख बोलीं, “फेमिनिज्म का मतलब पुरुषों के अधिकार छीनना नहीं, बराबरी मांगना है” फातिमा सना शेख ने हमेशा खुद को फेमिनिस्ट कहने से परहेज़ नहीं किया है। ‘हुंकार: द रोअर’ में एक जांबाज़ पुलिस ऑफिसर का किरदार निभाने वाली फातिमा ने उस शब्द को लेकर खुलकर बात की, जिसे इंडस्ट्री में आज भी कई लोग कहने से बचते हैं। इस दौरान उन्होंने प्रियंका चोपड़ा जोनस का भी ज़िक्र किया, जिन्होंने हमेशा इस शब्द को खुलकर अपनाया है। फातिमा कहती हैं, “फेमिनिज़्म को बहुत से लोग एक बुरे शब्द की तरह देखते हैं। यह देखकर हैरानी होती है कि कुछ एक्ट्रेसेस खुद को फेमिनिस्ट नहीं कहतीं। फेमिनिस्ट होने का मतलब यह नहीं है कि मैं किसी पुरुष के अधिकार छीन रही हूं। मैं तो सिर्फ अपने लिए बराबरी के अधिकार मांग रही हूं।” वह प्रियंका चोपड़ा का उदाहरण देते हुए कहती हैं कि खुद को फेमिनिस्ट कहने से दर्शकों का प्यार कम नहीं होता। “प्रियंका चोपड़ा खुद को फेमिनिस्ट कहती हैं और उनकी बहुत बड़ी मेल फैन फॉलोइंग है। अगर आपकी नीयत साफ है और आप इस बात को सही तरीके से रखते हैं, तो लोग आपकी बात जरूर सुनेंगे।” जियोहॉटस्टार की इस सीरीज में फातिमा एक पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभा रही हैं, जो एक ऐसे मामले की जांच करती है, जिसमें अनीत पड्डा द्वारा निभाया गया एक नाबालिग लड़की का किरदार एक आध्यात्मिक गुरु पर यौन शोषण का आरोप लगाता है। फातिमा इसे अपने करियर के सबसे शानदार और सीख देने वाले अनुभवों में से एक मानती हैं। उनके मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की खास बात यह रही कि मेकर्स ने उन्हें हमेशा बराबरी का दर्जा दिया और उनकी राय को महत्व दिया। बिरला स्टूडियोज और अप्लॉज एंटरटेनमेंट ने पर्पल पेबल पिक्चर्स और मंगाटा फिल्म्स के साथ मिलकर इस सीरीज का निर्माण किया है। करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा के निर्देशन में बनी ‘हुंकार: द रोअर’ 25 सितंबर से जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम होगी।

Expert Opinion

IAP के जॉइंट सेक्रेटरी (ईस्ट ज़ोन) डॉ. जोजी जॉन के खिलाफ यौन शोषण और धोखाधड़ी के आरोपों में FIR दर्ज, प्रेस क्लब दिल्ली में पीड़िता और वकीलों ने रखी बात

नई दिल्ली : दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) के जॉइंट सेक्रेटरी (ईस्ट ज़ोन) डॉ. जोजी जॉन के खिलाफ एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक पेशेवर मेंटरशिप संबंध धीरे-धीरे भावनात्मक और व्यक्तिगत शोषण में बदल गया। 4 जून 2026 को दर्ज FIR (संख्या 0241) के अनुसार, शिकायतकर्ता ने डॉ. जॉन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 69, 75 और 79 के तहत आरोप लगाए हैं, जो धोखे से यौन संबंध, यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित हैं। शिकायत के अनुसार, अगस्त 2025 में दोनों की पहली बातचीत फेसबुक मैसेंजर के माध्यम से हुई थी। आरोप है कि डॉ. जॉन ने स्वयं को एक वरिष्ठ पेशेवर बताते हुए शिकायतकर्ता के करियर को मार्गदर्शन देने, पेशेवर नेटवर्क बनाने और फिजियोथेरेपी क्षेत्र में अवसर दिलाने का आश्वासन दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि शुरुआती पेशेवर बातचीत धीरे-धीरे व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंधों में बदल गई। उन्हें करियर में उन्नति, पेशेवर पहचान, संगठनों में पद दिलाने, लेक्चर और प्रकाशन के अवसर तथा क्लिनिक स्थापित करने में सहायता का भरोसा दिया गया। FIR में उल्लेख है कि इन आश्वासनों के चलते शिकायतकर्ता भावनात्मक रूप से जुड़ गईं और अपने पेशेवर भविष्य को लेकर डॉ. जॉन पर भरोसा करने लगीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. जॉन ने स्वयं को शादीशुदा होने के बावजूद उनसे भावनात्मक रूप से जुड़े होने का दावा किया और कहा कि वे अपनी पत्नी से अलग रह रहे हैं।शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 27 मार्च 2026 को अहमदाबाद से दिल्ली आने-जाने के लिए उनके टिकट की व्यवस्था की, जिसके बाद दोनों की दिल्ली में मुलाकात हुई। आरोप है कि इन वादों और भरोसे का इस्तेमाल कर उनसे व्यक्तिगत और यौन संबंध बनाए गए। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़िता ने मीडिया के सामने अपने आरोपों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत के कुछ महत्वपूर्ण पहलू FIR में शामिल नहीं किए गए, जबकि उन्होंने इसकी जानकारी जांच अधिकारी को दी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान उन्हें बिना जानकारी के कुछ पिलाया गया, जिसे FIR में दर्ज नहीं किया गया। पीड़िता ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा, “इस घटना और इसके बाद की परिस्थितियों के कारण मैं अवसाद में चली गई थी। मुझे संभलने और आगे आने की हिम्मत जुटाने में समय लगा। अब मैं मजबूत महसूस कर रही हूं और न्याय की मांग के लिए सामने आई हूं। मैं निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई चाहती हूं।” इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़िता के साथ उनके कानूनी सलाहकार और वकील भी मौजूद रहे, जिन्होंने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी। इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से हितेन मेहता (लीगल एडवाइजर), भावसर एंड मेहता एंड कंपनी एडवोकेट कृति भावसर, भावसर एंड मेहता एंड कंपनी एडवोकेट एशना कुमार (एसोसिएट, भावसर एंड मेहता एंड कंपनी) सहयोग कर रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़िता और उनके वकीलों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मामले के सभी पहलुओं को गंभीरता से लिया जाए और सच्चाई सामने लाई जाए। फिलहाल मामले की जांच जारी है। अभी तक किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया गया है।

Business Buzz

दिल्ली में केसीसी पहुंच को मिली नई दिशा : नाबार्ड की अगुवाई में आयोजित हितधारक बैठक में नवम्बर तक की कार्ययोजना निर्धारित

दिल्ली में केसीसी तक पहुंच की चुनौतियों के समाधान हेतु नाबार्ड ने बैंकों और सरकारी विभागों को एक मंच पर लाया नाबार्ड : नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 23 सितम्बर 2026 “केसीसी जारी करने में मुद्दे एवं चुनौतियाँ” विषय पर एक हितधारक बैठक आयोजित की। बैठक में श्री नवीन कुमार रॉय, मुख्य महाप्रबन्धक नाबार्ड, श्री डी. साहू, महाप्रबंधक एवं संयोजक, एसएलबीसी; डॉ. एस. शनमुगुवेल, निदेशक, पशुपालन विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार; डॉ. उबैद खान, उप निदेशक, कृषि विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार; श्री तुषार जाधव, उप महाप्रबंधक, भारतीय रिजर्व बैंक; डॉ. ऋतु सिंह, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा; बैंकों एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के अधिकारी; एलडीएम, भारतीय रिजर्व बैंक के एलडीओ तथा नाबार्ड के डीडीएम-आर सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अपने मुख्य संबोधन में श्री नवीन कुमार राय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड द्वारा किसानों की किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) तक पहुंच बढ़ाने को प्राथमिकता बताया गया। उन्होने साथ ही सरकारी विभागों, बैंकों, सहकारी संस्थाओं तथा विकास संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया। पात्र किसानों को समयबद्ध एवं किफायती ऋण उपलब्ध कराने हेतु क्षेत्र स्तर की बाधाओं को सहयोगात्मक एवं नवोन्मेषी उपायों के माध्यम से दूर करने का आह्वान करते हुए मुख्य महाप्रबन्धक नाबार्ड द्वारा सभी से सहयोग की अपेकषा की गई। पशुपालन विभाग के निदेशक ने बैंकों से दिल्ली के पशुपालकों को अधिकाधिक ऋण उपलब्ध कराने का आग्रह किया तथा डेयरी कॉलोनियों का दौरा करने हेतु बैंकों को आमंत्रित किया। वहीं, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने बताया कि दिल्ली में लगभग 20,000 भूमिधर किसान हैं, जो लगभग 28,000 हेक्टेयर शुद्ध बोया गया क्षेत्र में खेती करते हैं, जबकि केसीसी के अंतर्गत उनकी कवरेज अपेक्षाकृत बहुत कम है। इस अवसर पर श्री डी. साहू, महाप्रबंधक एवं संयोजक, एसएलबीसी ने आश्वासन दिया कि केसीसी कवरेज से संबंधित मुद्दों को आगामी एसएलबीसी बैठक के एजेंडा में शामिल किया जाएगा ताकि इन विषयों पर संस्थागत स्तर पर निरंतर ध्यान एवं अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। विचार-विमर्श के दौरान प्रतिभागियों ने केसीसी जारी करने में आने वाली प्रमुख बाधाओं में अपर्याप्त अथवा अविश्वसनीय गिरदावरी अभिलेख, अस्पष्ट खेती अधिकार, खंडित जोतें, अधूरी नामांतरण प्रक्रियाएँ, भूमि सीमांकन का अभाव तथा मौखिक पट्टा व्यवस्थाओं को चिन्हित किया। बैठक में बटाईदारों, मौखिक पट्टाधारकों, हिस्सेदारी किसानों तथा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) एवं संयुक्त दायित्व समूहों (जेएलजी) के माध्यम से संगठित किसानों के लिए वैकल्पिक ऋण वितरण मॉडलों पर भी चर्चा की गई। जुलाई 2026 से पशुपालन एवं मत्स्य पालन गतिविधियों के लिए केसीसी प्रावधानों के विस्तार पर भी विचार किया गया। प्रतिभागियों ने जागरूकता बढ़ाने तथा प्रलेखन एवं ऋण सुविधा शिविरों जैसे संस्थागत तंत्रों के माध्यम से इन प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए अल्पकालिक ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने हेतु एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकेगा तथा अधिकाधिक किसानों को संस्थागत ऋण व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।

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