एक वक्त लगा कि मैंने एथलीट बनने के लिए साइन कर लिया है!” – ‘द रिवोल्यूशनरीज’ की तैयारी पर रोहित सराफ
रोहित सराफ हाल ही में रिलीज हुई पीरियड ड्रामा सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ को लेकर काफी चर्चा में हैं। इस सीरीज का निर्देशन निखिल आडवाणी ने किया है। इस प्रोजेक्ट के साथ रोहित ने अपने अब तक के रोमांटिक और शहरी किरदारों से बिल्कुल अलग अंदाज दिखाया है। इस बार वह स्वतंत्रता सेनानी सचिंद्रनाथ सान्याल की भूमिका में नजर आ रहे हैं। इस किरदार को पर्दे पर जीवंत करने के लिए रोहित को अपनी फिटनेस और शरीर पर काफी मेहनत करनी पड़ी। रोहित बताते हैं, “मुझे बहुत पहले ही समझ आ गया था कि सिर्फ मजबूत दिखना ही सचिन के किरदार को विश्वसनीय नहीं बनाएगा। मुझे अपने शरीर में बदलाव महसूस करना था। मैं उनके अंदर एक खास तरह की मजबूती देखता था। सिर्फ शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि ऐसी मजबूती जो मुश्किल हालात को सहने की क्षमता देती है। ये युवा ऐसे समय में जी रहे थे, जहां परिस्थितियां बेहद मुश्किल थीं। वे लगातार सफर कर रहे थे, ट्रेनिंग कर रहे थे, छिप रहे थे, लड़ रहे थे और बहुत कम सुविधाओं के साथ जिंदगी जी रहे थे। फिर भी वे अपने मकसद पर आगे बढ़ते रहे। मैं चाहता था कि उनकी यही मजबूती मेरे अंदर भी स्वाभाविक रूप से आए, न कि मुझे उसे सिर्फ एक्टिंग के जरिए दिखाना पड़े।” रोहित ने अपनी फिजिकल तैयारी के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कलारीपयट्टू और कंडीशनिंग का सहारा लिया। उनका कहना है कि इस ट्रेनिंग ने उन्हें अपने किरदार को समझने का एक नया नजरिया दिया। वह कहते हैं, “कलारी और एक्शन ट्रेनिंग ने इसमें मेरी बहुत मदद की। धीरे-धीरे ऐसा होने लगा कि मैं अपने शरीर के बारे में सोचना बंद करके उसे एक अलग तरीके से इस्तेमाल करने लगा। सच कहूं तो कुछ समय के लिए मुझे लगा कि मैंने गलती से एथलीट बनने के लिए साइन अप कर लिया है! तेजस के साथ स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग, कलारी, एक्शन रिहर्सल, मूवमेंट ट्रेनिंग, डांस रिहर्सल और भी बहुत कुछ था। और इन सबके बाद मुझे अपना असली काम यानी एक्टिंग भी करनी होती थी।” वह आगे मजाकिया अंदाज में कहते हैं, “सबसे मजेदार बात तब समझ आई जब मुझे एहसास हुआ कि जिम में भारी वजन उठाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप कलारी भी आसानी से कर सकते हैं। अचानक आप जमीन पर होते हैं और सोच रहे होते हैं कि फिट होने को लेकर आपने अब तक जो भी दावे किए थे, वो सब कहां चले गए!” इस पूरी तैयारी के दौरान रोहित को महसूस हुआ कि हर तरह की ट्रेनिंग ने उनके किरदार में कुछ अलग जोड़ा। वह कहते हैं, “मुझे यह हिस्सा बहुत पसंद आया। हर तरह की ट्रेनिंग मेरे शरीर को कुछ अलग सिखा रही थी। जिम ने मुझे साइज और ताकत दी, कलारी ने फुर्ती और कंट्रोल दिया और एक्शन ट्रेनिंग ने सिखाया कि इन सबका इस्तेमाल कैसे करना है। धीरे-धीरे ऐसा समय आया जब मैं इन चीजों को अलग-अलग नहीं सोच रहा था। यही मैं चाहता भी था।” अपनी डाइट में किए गए बदलावों के बारे में रोहित बताते हैं, “लोग सोचते हैं कि ट्रांसफॉर्मेशन का सबसे मुश्किल हिस्सा कम खाना होता है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब मुझे इतना ज्यादा खाना पड़ता था कि सच में मेरा अगला खाना देखने का भी मन नहीं करता था। सोचिए, आपका पेट पूरी तरह भरा हुआ है और आपको पता है कि खाने का एक और डिब्बा आपका इंतजार कर रहा है। फिर आपको इतनी मात्रा में खाने की आदत हो जाती है और अचानक कहा जाता है कि अब कैलोरी कम करनी हैं। तो आप कभी खुश नहीं होते।” रोहित के लिए यह फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन खुद एक मोटिवेशन बन गया था। वह कहते हैं, “लेकिन इस ट्रांसफॉर्मेशन को होते हुए देखना काफी दिलचस्प और कहीं न कहीं एडिक्टिव था। हर कुछ हफ्तों में कुछ नया बदलाव नजर आता था। कपड़े अलग तरह से फिट होने लगे थे। कभी सुबह उठकर अपने शरीर पर कोई नई मसल या स्ट्रिएशन नजर आती थी, जिसके बारे में मुझे पहले पता ही नहीं था। ट्रेनिंग की कोई तस्वीर देखता था तो लगता था, ‘ओके, ये सच में हो रहा है और मेहनत काम कर रही है।’ इससे मेरा आत्मविश्वास सिर्फ एक एक्टर के तौर पर नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी बढ़ा। मैं शारीरिक रूप से ऐसी चीजें करने में सक्षम महसूस करने लगा था, जो पहले नहीं कर पाता था। और एक्शन सेट पर उस आत्मविश्वास को लेकर जाना बहुत अच्छा एहसास था।” रोहित बताते हैं कि जैसे-जैसे वह शारीरिक रूप से मजबूत होते गए, वैसे-वैसे उन्होंने सचिन के किरदार को भावनात्मक रूप से समझना भी शुरू किया। वह कहते हैं, “मुझे लगता है कि जैसे-जैसे मैं शारीरिक रूप से मजबूत होता गया, मुझे सचिन को भावनात्मक रूप से बंद दिखाने की जरूरत कम महसूस हुई। यह मेरे लिए एक महत्वपूर्ण समझ थी। शुरुआत में मेरा स्वाभाविक विचार यह हो सकता था कि एक क्रांतिकारी का मतलब आक्रामक या बहुत सख्त इंसान होता है। लेकिन सचिन के बारे में जितना मैंने पढ़ा और जितना हमने उनके किरदार पर काम किया, उतना ही मुझे समझ आया कि वह कितने भावुक इंसान थे।” वह आगे कहते हैं, “उनका विश्वास इसलिए नहीं था क्योंकि उनमें डर, मासूमियत या भावनाएं नहीं थीं। बल्कि ये सारी चीजें उनके विश्वास के साथ मौजूद थीं। किसी विचार पर इतनी गहराई से विश्वास करना कि आप अपनी पूरी जिंदगी उसी के हिसाब से बदल दें, इसमें एक तरह की मासूमियत है। लेकिन उस विश्वास की कीमत बहुत बड़ी थी—जेल, हिंसा, परिवार से दूरी, नुकसान और क्रांति।” रोहित आगे कहते हैं, “उनके किरदार का यही विरोधाभास मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया। एक ऐसा इंसान जो बेहद भावुक और कमजोर हो सकता है, लेकिन जब सही और गलत की बात आए तो अपने विश्वास से बिल्कुल पीछे नहीं हटता।” ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में बॉय-नेक्स्ट-डोर इमेज से बिल्कुल अलग और इंटेंस सचिंद्रनाथ सान्याल का किरदार निभाने को लेकर रोहित कहते हैं, “ज्यादातर लोगों ने मुझे पहले कुछ खास तरह के किरदारों में देखा है और मैं समझ सकता हूं कि सचिन ऐसा किरदार नहीं था, जिसे लोग मेरे साथ तुरंत जोड़ते। लेकिन यही बात मेरे










