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November 5, 2026

Business Buzz

IITF 2026: भारत मंडपम में सजेगा कारोबार, संस्कृति और तकनीक का सबसे बड़ा उत्सव

13 से 27 नवंबर तक चलेगा इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर नई दिल्ली : भारत की सबसे प्रतिष्ठित व्यापार प्रदर्शनियों में से एक इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2026 का आयोजन 13 से 27 नवंबर तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस वर्ष मेले की थीम “विकास और विरासत“ रखी गई है, जो भारत की आधुनिक प्रगति और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगी। आईआईटीएफ 2026 में भारत और विदेशों से 3500 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा लेंगे, जबकि देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंडप आकर्षण का केंद्र होंगे। बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को पार्टनर स्टेट बनाया गया है, वहीं असम, दिल्ली, झारखंड और पश्चिम बंगाल फोकस स्टेट के रूप में शामिल होंगे। मेले में 10 देशों की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी देखने को मिलेगी, जिनमें थाईलैंड, ईरान, नेपाल, चीन, श्रीलंका और बांग्लादेश प्रमुख हैं। इसके अलावा 51 केंद्रीय मंत्रालय, सरकारी विभाग, पीएसयू और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी अपनी उपलब्धियों और योजनाओं का प्रदर्शन करेंगे। इस बार आगंतुकों के लिए हॉल ऑफ इंस्पिरेशन, ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) पवेलियन, इमर्सिव डिजिटल जोन और 90 से अधिक फूड आउटलेट्स विशेष आकर्षण रहेंगे। वहीं सूफी संगीत, ओडिसी नृत्य, कव्वाली, लाइव कॉन्सर्ट और लोक कला कार्यक्रम मेले को और रंगीन बनाएंगे। व्यावसायिक आगंतुकों के लिए 14 से 18 नवंबर तक विशेष B2B दिवस निर्धारित किए गए हैं, जबकि आम जनता के लिए मेला 19 से 27 नवंबर तक खुला रहेगा। IITF 2026 केवल एक व्यापार मेला नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति, नवाचार, संस्कृति और उद्यमिता का भव्य उत्सव बनने जा रहा है। IITF 2026 में आगंतुकों और प्रदर्शकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए कई उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मेले के परिसर में आवागमन को आसान बनाने के लिए शटल सेवा और गोल्फ कार्ट की व्यवस्था होगी। आगंतुकों के लिए पर्याप्त पार्किंग, ऐप-आधारित कैब सेवाओं के लिए विशेष पिक-अप एवं ड्रॉप प्वाइंट, चिकित्सा सहायता और आपातकालीन स्थितियों के लिए एंबुलेंस सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। दिव्यांगजनों के लिए विशेष सहायता एवं सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। पूरे आयोजन स्थल पर 24 घंटे निगरानी सहित मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, खोया-पाया केंद्र, विजिटर सहायता काउंटर, पोर्टर और कंसीयर्ज सेवाएं, क्लोक रूम सुविधाएं तथा पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन मोबिलिटी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। आगंतुकों को आवश्यक जानकारी, प्रदर्शनी से जुड़े अपडेट और प्रचार सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पूरे परिसर में डिजिटल डिस्प्ले और एलईडी मस्त लगाए जाएंगे। IITF 2026 में आगंतुकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश और टिकट व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाया गया है। सामान्य आगंतुकों के लिए भैरों रोड स्थित गेट नंबर 3 और 4 तथा मथुरा रोड स्थित गेट नंबर 6 और 10 से प्रवेश की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रोटोकॉल श्रेणी के आगंतुक गेट नंबर 1, 5A, 7 और 10 का उपयोग कर सकेंगे, जबकि मालवाहक वाहनों के लिए गेट नंबर 1, 3 और 5B निर्धारित किए गए हैं। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को देखते हुए प्रवेश मार्गों में आवश्यकतानुसार बदलाव किया जा सकता है, इसलिए आगंतुकों को ITPO और ट्रैफिक विभाग की नवीनतम सलाह का पालन करने की सलाह दी गई है। टिकट दरों की बात करें तो बिजनेस डेज़ के दौरान वयस्कों के लिए प्रवेश शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है। सामान्य दिनों में सप्ताहांत और राजपत्रित अवकाश पर वयस्कों के लिए टिकट 200 रुपये तथा बच्चों के लिए 100 रुपये रहेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सामान्य दिनों में केवल 50 रुपये का टिकट रखा गया है, जबकि 19 से 27 नवंबर के बीच वैध सरकारी पहचान पत्र दिखाने पर वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजन को निःशुल्क प्रवेश मिलेगा। इसके अलावा, सीजन टिकट, प्रदर्शक पास और विभिन्न श्रेणियों के विशेष टिकट भी उपलब्ध रहेंगे। आगंतुक ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए booking.indiatradefair.com वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं, जिससे मेले में प्रवेश प्रक्रिया और भी आसान एवं सुविधाजनक हो जाएगी।

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फेस्टिव सीजन में ‘झाड़फूँक’ का जलवा, JioHotstar पर टॉप ट्रेंडिंग फिल्मों में शामिल; खौफनाक जंगल और रूह कंपा देने वाली कहानी ने जीता दर्शकों का दिल

30 अक्टूबर को OTT पर रिलीज होते ही फिल्म को मिला दर्शकों का प्यार, लंबे समय बाद भारतीय OTT पर देखने को मिली रोंगटे खड़े कर देने वाली हॉरर कहानी; यशपाल शर्मा और सुम्बुल तौकीर खान की परफॉर्मेंस बनी आकर्षण का केंद्र। फेस्टिव सीजन में हॉरर और सस्पेंस का ऐसा तड़का लगा है कि दर्शक भी खौफ के इस अनुभव को पसंद कर रहे हैं। फिल्म ‘झाड़फूँक’ इन दिनों JioHotstar पर अपनी लोकप्रियता को लेकर चर्चा में है। 30 अक्टूबर को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई इस फिल्म को पहले दिन से ही दर्शकों का प्यार मिलना शुरू हो गया। फिल्म JioHotstar पर अंग्रेजी फिल्म ‘Obsession’ के बाद दूसरे स्थान पर ट्रेंड कर रही है, जबकि हिंदी फिल्मों की श्रेणी में यह नंबर 1 की पोजिशन पर बनी हुई है। खास बात यह है कि ‘झाड़फूँक’ सिर्फ अपनी कहानी ही नहीं, बल्कि अपने खौफनाक दृश्यों और डर पैदा करने वाले माहौल के कारण भी दर्शकों का ध्यान खींच रही है। लंबे समय बाद भारतीय OTT पर ऐसी हॉरर फिल्म देखने को मिल रही है, जिसके कई दृश्य सचमुच रूह कंपा देने वाला अनुभव देते हैं। फिल्म में दिखाया गया घना और डरावना जंगल, रहस्यमयी घर, अजीबोगरीब घटनाएं और अचानक सामने आने वाले डरावने मोड़ दर्शकों को लगातार रोमांचित करते हैं। फिल्म के कई सीन को लेकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी दर्शकों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। खास तौर पर इसके डरावने सीक्वेंस और अप्रत्याशित घटनाक्रम दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। हॉरर के साथ सस्पेंस और इमोशन का मेल फिल्म को फेस्टिव सीजन का एक अलग OTT अनुभव बना रहा है। खौफनाक जंगल, रहस्यमयी घर और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी ‘झाड़फूँक’ की कहानी उत्तराखंड की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच घटने वाली रहस्यमयी घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म की मुख्य किरदार आस्था की जिंदगी एक सड़क दुर्घटना के बाद पूरी तरह बदल जाती है। गर्भवती आस्था को एक अनजान घर में शरण मिलती है, जहां रहने वाला परिवार पहली नजर में बेहद मददगार और सहज दिखाई देता है। लेकिन धीरे-धीरे उस घर में होने वाली अजीबोगरीब घटनाएं और एक रहस्यमयी महिला की मौजूदगी आस्था के लिए खौफ का कारण बनने लगती है। अपने साथी के अचानक लापता होने और अपने होने वाले बच्चे की सुरक्षा की चिंता के बीच आस्था एक ऐसे रहस्य में उलझ जाती है, जहां हर चेहरा और हर घटना संदेह पैदा करती है। जंगल का डरावना वातावरण, घर के भीतर घटने वाली रहस्यमयी घटनाएं और कहानी में लगातार आते नए मोड़ दर्शकों की उत्सुकता को बनाए रखते हैं। फिल्म की कहानी अंत तक कई सवालों के बीच दर्शकों को उलझाए रखती है। यशपाल शर्मा और सुम्बुल तौकीर खान की परफॉर्मेंस बनी आकर्षण का केंद्र फिल्म की सफलता में इसके कलाकारों की अदाकारी भी अहम भूमिका निभाती नजर आ रही है। अभिनेता यशपाल शर्मा ने अपने प्रभावशाली अभिनय से कहानी को मजबूती दी है। वहीं सुम्बुल तौकीर खान अपनी भूमिका में खास छाप छोड़ती हैं। दोनों की परफॉर्मेंस फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। इसके अलावा पद्मिनी कोल्हापुरे का अनुभव और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को एक अलग आयाम देता है। हर्ष राजपूत और अप्रतिम सिंह भी अपनी भूमिकाओं के जरिए कहानी के रहस्य और रोमांच को आगे बढ़ाते हैं। सभी कलाकारों की मौजूदगी फिल्म के सस्पेंस को प्रभावशाली बनाने में मदद करती है। नीव एंटरटेनमेंट इंडिया के बैनर तले बनी है फिल्म ‘झाड़फूँक’ का निर्माण नीव एंटरटेनमेंट इंडिया के बैनर तले किया गया है। फिल्म का निर्देशन राजन रामगोपाल वर्मा ने किया है। इसके निर्माता शैलेश परिहार और सह-निर्माता वृंदा ब्रह्मभट्ट हैं। फिल्म में यशपाल शर्मा, पद्मिनी कोल्हापुरे, सुम्बुल तौकीर खान, हर्ष राजपूत और अप्रतिम सिंह प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। फेस्टिव सीजन में रिलीज हुई ‘झाड़फूँक’ ने हॉरर, सस्पेंस और दमदार अभिनय के मेल से OTT दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है। JioHotstar पर मिल रही लोकप्रियता और इंटरनेट पर इसके डरावने दृश्यों को लेकर हो रही चर्चा फिल्म की टीम के लिए उत्साहजनक है। अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जो डराने के साथ-साथ अंत तक रहस्य बनाए रखें, तो ‘झाड़फूँक’ आपके लिए एक दिलचस्प हॉरर अनुभव साबित हो सकती है।

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रामायण: जब भारतीय सिनेमा ने रचा भव्यता, आस्था और कल्पना का नया इतिहास

नमित मल्होत्रा की महत्वाकांक्षी प्रस्तुति में आस्था, संस्कृति और तकनीक का अद्भुत संगम की सुंदर प्रस्तुति। कलाकार : रणबीर कपूर , साई पल्लवी, यश, अरुण गोविल , रकुल प्रीत , लारा दत्ता, विवेक ओबेरॉय निर्माता : नमित मल्होत्रा लेखक : श्रीधर राघवन, नितेश तिवारी, श्रेयस जैन निर्देशक : नितेश तिवारी रेटिंगरू ★★★★☆ (4.5/5) रामायण में प्रभु श्रीराम की गाथा को हो कोई जानता है, क्योंकि भारतीय सभ्यता की आत्मा यदि किसी एक महाकाव्य में समाहित है, तो वह निस्संदेह रामायण है। यह केवल भगवान श्रीराम की कथा नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य, त्याग, प्रेम और आदर्शों की ऐसी गाथा है, जिसने सदियों से करोड़ों लोगों के जीवन को दिशा दी है। ऐसे में जब निर्माता नमित मल्होत्रा ने रामायण की अमर कथा को वैश्विक स्तर की तकनीक और भव्य सिनेमाई दृष्टि के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया है, तो यह परियोजना एक साधारण फिल्म नहीं रह जाती, बल्कि भारतीय संस्कृति के गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला एक ऐतिहासिक प्रयास बन जाती है। भव्यता से कहीं अधिक, भावनाओं का महाकाव्य रामायण की सबसे बड़ी शक्ति उसकी भावनात्मक गहराई है। युद्ध, महल, वनवास और चमत्कार इसकी बाहरी परत हैं, जबकि इसकी आत्मा श्रीराम के आदर्शों, सीता माता की सहनशीलता, लक्ष्मण की निष्ठा और हनुमानजी की अद्वितीय भक्ति में निवास करती है। किसी भी रामायण की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इन भावनाओं को कितनी सच्चाई और श्रद्धा के साथ प्रस्तुत करती है। नमित मल्होत्रा की इस प्रस्तुति को लेकर जो उत्साह दिखाई देता है, उसका सबसे बड़ा कारण यही है कि इसमें केवल दृश्य वैभव नहीं, बल्कि कथा की मूल आत्मा को भी महत्व दिया गया है, जब तकनीक और संवेदना का संतुलन बनता है, तब कोई फिल्म केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक अनुभव बन पाती है। विश्वस्तरीय तकनीक के साथ रामायण की कहानी आज का दर्शक विश्व सिनेमा देखता है और तकनीकी गुणवत्ता के मामले में किसी प्रकार का समझौता नहीं चाहता। लंबे समय से भारतीय दर्शक ऐसी पौराणिक फिल्म की प्रतीक्षा कर रहे थे, जो तकनीकी दृष्टि से हॉलीवुड स्तर की हो और विषयवस्तु में पूरी तरह भारतीय हो। यहीं पर नमित मल्होत्रा की विशेषज्ञता सबसे अधिक प्रभावित करती है। दृश्य प्रभावों और आधुनिक फिल्म निर्माण तकनीकों के क्षेत्र में उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुई है। यही कारण है कि रामायण से यह उम्मीद की जा रही है कि यह भारतीय सिनेमा की तकनीकी सीमाओं को नए अतुल्नीय आयाम देगी। अयोध्या की दिव्यता, दंडकारण्य का प्राकृतिक वैभव, लंका का स्वर्णिम वैभव और धर्म-अधर्म के बीच देवताओं और असुरों का निर्णायक युद्ध अपेक्षित स्तर पर प्रस्तुत किए हैं, जिससे यह फिल्म भारतीय दर्शकों के लिए केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक भव्य दृश्य अनुभव साबित होगी। कास्ट और उनके किरदार राम का अभिनय करने वाले अभिनेता रणबीर कपूर फिल्म में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भूमिका में नजर आते हैं। उनके किरदार में आदर्श पुत्र, आदर्श पति और धर्म की रक्षा करने वाले योद्धा की छवि दिखाई गई है। वहीं अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता के रूप में दिखाई देती हैं। अभिनेता यश लंकापती रावण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में रावण को एक शक्तिशाली, विद्वान और जटिल व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है। तो वहीं अभिनेता रवि दुबे लक्ष्मण लक्ष्मण के किरदार में हैं, जो श्रीराम के सबसे बड़े सहयोगी और उनके प्रति पूर्णतः समर्पित भाई के रूप में दिखाई देते हैं। 1987 की प्रसिद्ध रामायण में श्रीराम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल राजा दशरथ के प्रभावशाली किरदार में नजर आते हैं। अभिनेत्री लारा दत्ता – कैकेयी की भूमिका में हैं, जिनके निर्णय से राम के वनवास की कथा शुरू होती है। वहीं एक रामायण का के प्रसिद्ध चरित्र के मंथरा के रूप में अभिनेत्री शीबा चड्ढा दिखाई देती हैं, जो कैकेयी को राम के वनवास के लिए उकसाती है। रावण की बहन के बनी शूर्पणखा के किरदार को निभाया है अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने जिनकी वजह से कथा एक महत्वपूर्ण मोड़ लेती है। राम के भाई बने आदिनाथ कोठारे – भरत की भूमिका में हैं, जो श्रीराम के प्रति अपनी निष्ठा और त्याग के लिए जाने जाते हैं। नई पीढ़ी के लिए पुरातन मूल्यों का सेतु समय के साथ जीवनशैली बदलती है, लेकिन मूल मूल्य नहीं बदलते। सत्य, मर्यादा, कर्तव्य, सम्मान और करुणा आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने त्रेता युग में थे। आधुनिक पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन मूल्यों को प्रासंगिक और रोचक रूप में प्रस्तुत करना है। रामायण जैसी फिल्म इस अंतर को पाटने की क्षमता रखती है। यह नई पीढ़ी को न केवल अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ेगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि महानता शक्ति में नहीं, बल्कि चरित्र में होती है। यही संदेश रामायण को कालजयी बनाता है और यही इसे हर युग में प्रासंगिक बनाए रखता है। वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व रामायण केवल भारत की विरासत नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशिया सहित दुनिया के अनेक देशों में इसके विभिन्न स्वरूप सदियों से लोकप्रिय रहे हैं। इसलिए यह फिल्म केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि इसमें वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने की क्षमता भी नजर आती है। जिस प्रकार दुनिया ने विभिन्न देशों की मिथकीय कथाओं को बड़े पर्दे पर अपनाया है, उसी प्रकार रामायण भी विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर सकती है। यह केवल मनोरंजन प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि भारतीय दर्शन, आध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों का परिचय भी कराती है। आस्था और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन रामायण जैसे विषय पर काम करना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। करोडों लोगों की श्रद्धा इस कथा से जुड़ी हुई है। इसलिए इसकी प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ संवेदनशीलता भी आवश्यक है। इस परियोजना के प्रति लोगों की उत्सुकता का कारण केवल इसकी भव्यता नहीं, बल्कि यह विश्वास भी है कि कथा का सम्मान बनाए रखने का प्रयास किया गया है। जब किसी सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक स्वरूप दिया जाता है, तब सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि नवीनता और परंपरा दोनों का सम्मान बना रहे। यदि फिल्म इस संतुलन को सफलतापूर्वक साध लेती है, तो यह आने वाले दशकों तक भारतीय सिनेमा के लिए एक मानक बन सकती है। संगीत, भावनाएं और सिनेमाई

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