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March 30, 2026

Cultural Journeys

सभ्यता फाउंडेशन ने विश्व सूफी संगीत महोत्सव के सहयोग से ‘जहाँ-ए-खुसरो 2026’ की मेजबानी की

“द स्टीड ऑफ लॉन्गिंग – सफ़र-ए-इश्क़ कंटीन्यूज” थीम के तहत मार्च 27 से मार्च 29, 2026 तक तीन दिनों का सूफी उत्सव” नई दिल्ली : सभ्यता फाउंडेशन, भारत सरकार की ‘अडॉप्ट अ हेरिटेज 2.0’ पहल के तहत पुराने किले की ‘स्मारक सारथी’, भारत के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध विश्व सूफी संगीत महोत्सव, “जहाँ-ए-खुसरो 2026” की वापसी के साथ गर्व से जुड़ रही है। इसका आयोजन 27 से 29 मार्च, 2026 तक नई दिल्ली के पुराने किले की भव्य पृष्ठभूमि में किया जा रहा है। इस वर्ष की थीम “द स्टीड ऑफ लॉन्गिंग – सफ़र-ए-इश्क़ कंटीन्यूज” , सूफी परंपराओं के मूल में निहित प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक खोज की चिरस्थायी यात्रा को दर्शाता है। इस कार्यक्रम में लगभग 17,000–18,000 लोगों की प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज की गई, जो इसकी व्यापक लोकप्रियता को दर्शाती है। यह सहयोग भारत के ऐतिहासिक स्मारकों को जीवंत सांस्कृतिक स्थलों में बदलने के एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जो जनता के लिए सुलभ हों, ऐतिहासिक रूप से सम्मानित हों और कला, विद्वत्ता एवं जनता के साझा अनुभव के माध्यम से सार्थक रूप से सक्रिय रहें। एक ‘स्मारक सारथी’ के रूप में, सभ्यता फाउंडेशन का प्रबंधन स्मारक सक्रियण के एक आधुनिक और प्रासंगिक मॉडल का प्रतिनिधित्व करता है, जो संरक्षण, सार्वजनिक भागीदारी और सांस्कृतिक पुनरुद्धार के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। विगत वर्षों में, जहाँ-ए-खुसरो अमीर खुसरो की कालातीत विरासत को समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित सांस्कृतिक मंच बन गया है, जो रूमी, बाबा बुल्ले शाह, लल्लेश्वरी और अन्य सूफी संतों की रहस्यमय परंपराओं को भी पुनर्जीवित करता है। एक उत्सव से कहीं बढ़कर, यह भक्ति और संवाद का एक ऐसा मिलन स्थल बन गया है जहाँ संगीत, कविता, शिल्प और सांस्कृतिक विचार एक साथ मिलते हैं। पुराने किले में इसकी वापसी एक विशेष गूंज पैदा करती है। यह स्मारक केवल एक आयोजन स्थल न रहकर, इस अनुभव का एक जीवंत हिस्सा बन जाता है, जो समकालीन सांस्कृतिक जीवन के माध्यम से विरासत वास्तुकला को पुनर्जीवित करने की एक पुरानी परंपरा को जारी रखता है। यह दृष्टिकोण पुराने किले और सफदरजंग मकबरे सहित राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्मारकों में सभ्यता फाउंडेशन के व्यापक कार्यों के साथ गहराई से मेल खाता है, जहाँ इतिहास, प्रदर्शन, विद्वत्ता और सार्वजनिक भागीदारी का संगम होता है। वर्ष 2026 के इस संस्करण में उपमहाद्वीप की प्रसिद्ध आवाजों के साथ एक असाधारण संगीतमय प्रस्तुति देखने को मिलेगी, जिसमें सतिंदर सरताज, सुखविंदर सिंह, हंसराज हंस और लखविंदर वडाली मुख्य कलाकारों के रूप में शामिल होंगे। उनके साथ, यह महोत्सव जस्सू खान मंगनियार, शिवानी वर्मा, साहिल आगा और संयुक्ता सिन्हा जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों को भी प्रस्तुत करेगा। अन्य कलाकारों की घोषणा इस सप्ताह के अंत में होने की उम्मीद है। सभ्यता फाउंडेशन की सलाहकार बोर्ड की को-चेयरमैन सुश्री अवंतिका डालमिया ने कहा, “सभ्यता फाउंडेशन में हमारा मानना है कि सांस्कृतिक अनुभव तब सबसे सार्थक होते हैं जब वे सुलभ, अपनी जड़ों से जुड़े और साझा किए जाने वाले हों। ‘जहाँ-ए-खुसरो 2026’ पुराने किले में कलाकारों, दर्शकों और परंपराओं को एक साथ लाकर इस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है—जो अतीत का सम्मान करने के साथ-साथ समकालीन अभिव्यक्ति के लिए भी स्थान बनाता है। ऐसा करके, यह हमारे उस बड़े प्रयास को भी मजबूत करता है जिसके तहत भारत के ऐतिहासिक स्मारक जीवंत सार्वजनिक स्थल बने रहें, जहाँ विरासत, संवाद और कलात्मक उत्कृष्टता फलती-फूलती रहे।” महोत्सव की सतत यात्रा पर विचार साझा करते हुए, मुजफ्फर अली कहते हैं, “‘जहाँ-ए-खुसरो’ का जन्म संतों की फुसफुसाहट और सूफियों की मधुर स्वर लहरियों से हुआ था। दो दशकों से अधिक समय से, यह एक ऐसा अभयारण्य रहा है जहाँ संगीत, कविता और भक्ति सीमाओं को मिटा देते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि प्रेम ही एकता का अंतिम मार्ग है।”  महोत्सव की सह-क्यूरेटर, मीरा अली कहती हैं, “जहाँ-ए-खुसरो का एक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप विकास जारी है। हर संस्करण के साथ हमारा प्रयास एक ऐसी जगह तैयार करने का होता है जहां कला मरहम लगा सके, परंपराएँ संवाद कर सकें और दर्शक हमारी साझा विरासत की आध्यात्मिक गहराई से दोबारा जुड़ सकें।” जबकि यह महोत्सव अपने 26वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जहाँ-ए-खुसरो एक ठहराव के रूप में नहीं बल्कि एक यात्रा के रूप में आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष का विषय है, “द स्टीड ऑफ लॉन्गिंग | सफ़र-ए-इश्क़ कंटीन्यूज”, जो घोड़े के शक्तिशाली प्रतीक को विजय के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि गतिशीलता और आध्यात्मिक लालसा के रूपक के रूप में प्रस्तुत करता है। अपने 26वें वर्ष में, जहाँ-ए-खुसरो भारत के कलात्मक और सभ्यतागत परिदृश्य के भीतर एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक मंच के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है। सभ्यता फाउंडेशन के प्रबंधन के तहत पुराने किले में इसकी वापसी, राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के भीतर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आंदोलनों को स्थापित करने की आवश्यकता की पुष्टि करती है। यह उस व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है जिसमें विरासत और सार्वजनिक संस्कृति गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

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इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि राजधानी की नई सांस्कृतिक पहचान बनाने की दिशा में एक कदम है – मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

IFFD 2026 का पांचवां दिन ‘नाइट ऑफ ऑनर्स’ के साथ समाप्त हुआ। हमारा लक्ष्य दिल्ली को न सिर्फ राजनीतिक राजधानी, बल्कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करना है – पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा नई दिल्ली :  इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ दिल्ली (IFFD) 2026 का पांचवां दिन भारत मंडपम में आयोजित भव्य ‘नाइट ऑफ ऑनर्स’ के साथ समाप्त हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय उपराज्यपाल श्री तरणजीत सिंह संधू, विशिष्ट अतिथि माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, पर्यटन मंत्री श्री कपिल मिश्रा, DTTDC के एमडी एवं सीईओ श्री सुनील अंचीपाका और फेस्टिवल डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा उपस्थित रहे। इस मौके पर माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “दिल्ली देश का दिल है, एक ऐसा शहर जो सभी को अपनाता है और जहां इतिहास के साथ भविष्य की उम्मीदें भी बसती हैं। यह फिल्म फेस्टिवल सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि राजधानी की नई सांस्कृतिक पहचान बनाने की दिशा में एक कदम है। सिनेमा लोगों को जोड़ने और प्रेरित करने की ताकत रखता है।” पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, “IFFD की परिकल्पना पिछले वर्ष बजट चर्चा के दौरान की गई थी, जिसे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में साकार किया गया। हमारा लक्ष्य दिल्ली को न सिर्फ राजनीतिक राजधानी, बल्कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करना है।” माननीय उपराज्यपाल ने कहा कि यह फेस्टिवल दिल्ली की बदलती सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है और इस मंच ने देश-विदेश के कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाया हैं।  फेस्टिवल डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने कहा, “IFFD सिर्फ फिल्मों का मंच नहीं है, बल्कि उन भावनाओं और संवादों का भी है, जो ये फिल्में लोगों के बीच पैदा करती हैं।” ‘नाइट ऑफ ऑनर्स’ की शुरुआत वंदे मातरम से हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान, दीप प्रज्वलन और औपचारिक संबोधन हुए। अभिनेता अनुपम खेर ने सिनेमा को समर्पित अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को भावुक कर दिया, वहीं रिकी केज के संगीत ने माहौल को और खास बना दिया। इस अवसर पर फेस्टिवल डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा और IFFD प्रीव्यू कमेटी के चेयरपर्सन सुनीत टंडन को सम्मानित किया गया। सिंगापुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के प्रतिनिधिमंडल का भी विशेष स्वागत किया गया। ‘शोले’ के 50 वर्ष पूरे होने पर निर्देशक रमेश सिप्पी को सम्मानित किया गया, वहीं अंतरराष्ट्रीय अभिनेता एनरिके आर्से की मौजूदगी ने फेस्टिवल के वैश्विक स्वरूप को दर्शाया। इस मौके पर AI फिल्ममेकिंग हैकाथॉन के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया और उनकी फिल्म प्रदर्शित की गई। ‘कैपिटल्स प्राइड’ के तहत गुनीत मोंगा, टी. पी. अग्रवाल और दिव्या दत्ता को सम्मानित किया गया। भूमि पेडनेकर को ‘एक्टर विद अ मिशन’ के रूप में सम्मानित किया गया। फिल्म पुरस्कारों में ‘सैयारा’ को ‘पाथब्रेकिंग फिल्म ऑफ द ईयर’ और ‘सितारे जमीन पर’ को ‘मोस्ट इंस्पायरिंग फिल्म ऑफ द ईयर’ चुना गया। ‘तन्वी द ग्रेट’ के लिए अनुपम खेर को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और शुभांगी दत्त को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू अभिनेता का पुरस्कार मिला। ‘धुरंधर’ के लिए रणवीर सिंह को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और आदित्य धर को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सम्मान मिला। दिन के दौरान आयोजित सत्रों में भी दर्शकों की अच्छी भागीदारी रही। ‘वीमेन एक्टर्स इन ओटीटी’ सत्र में दिव्या दत्ता, श्रिया पिलगांवकर और श्वेता बसु प्रसाद ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की बदलती भूमिका पर चर्चा की। अनुपम खेर की मास्टरक्लास भी खास रही, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए अभिनय में ईमानदारी और निरंतर सीखने की जरूरत पर जोर दिया। भूमि पेडनेकर ने अपने करियर की यात्रा और सिनेमा में सार्थक कहानियों के महत्व पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि दर्शकों का साथ ही अच्छी फिल्मों को आगे बढ़ाता है। फिल्म स्क्रीनिंग में भी दर्शकों की भारी भीड़ देखने को मिली। ‘अहिल्या: जंग एकाकी’, ‘नेने राजू नेने मंत्री’, ‘मां जाए’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके अलावा ‘धुरंधर 2’ की विशेष स्क्रीनिंग चाणक्य सिनेमा में आयोजित की गई। अब फेस्टिवल अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां और भी बड़े पलों और यादगार अनुभवों की उम्मीद की जा रही है। IFFD 2026 सिर्फ फिल्में नहीं दिखा रहा, बल्कि ऐसे अनुभव रच रहा है जो लंबे समय तक दर्शकों के साथ बने रहेंगे।

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