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मूवी रिव्यू : गाँव से मैदान तक संघर्ष, पहचान और आत्मसम्मान के लिए – पेड्डी की कहानी

मूवी रिव्यू: पेड्डी 

निर्देशक: बुच्ची बाबू सना

कलाकार: राम चरण, जाह्नवी कपूर, बोमन ईरानी, दिव्येंदु शर्मा, शिवराजकुमार

संगीत: ए. आर. रहमान

रेटिंग : ⭐⭐⭐⭐ (4/5)

एक साहासिक और ऊर्जा से भरा खिलाड़ी पेद्दी, जिसके क्रिकेट खेला, जिसने कुश्ती खेली, जिसने किस्मत और समय से हार न मानते हुए अपने एक पैर को गवां कर भी दौड़ में गोल्ड मेडल जीता, वो भी अपने गांव और गांव के लोगों को पहचान दिलाने के लिए। खेलों के किरदारों को लेकर इतिहास में अभी तक जितनी भी बाॅयोपिक फिल्में बनी हैं, शायद यह पेद्दी के संघर्ष को दिखाती यह फिल्म सबसे ज्यादा दमदार फिल्म है। अगर पेद्दी की जीत और संघर्ष की कहानी को इस फिल्म के माध्यम से नहीं दिखाया जाता तो, देश के इस युवा खिलाड़ी द्वारा लड़ी जंग को कोई समझ और जान नहीं पाता। धन्य हैं, वे निर्माता और निर्देशक जिन्होंने पेद्दी फिल्म को बनाकर अपनी मेहनत को बड़े पर्दे पर साकार किया।

असल में कहानी यह है कि फिल्म पेड्डी एक ऐसे युवा खिलाड़ी की गाथा है जो खेल के माध्यम से अपने गाँव और समुदाय को पहचान दिलाने की कोशिश करता है। विजयनगरम का ‘आटा कूली’ यानी किराए पर खेलने वाला पहाड़िया खिलाड़ी पेद्दी (राम चरण) सिर्फ जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि अपने लोगों की अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई का चेहरा भी है। क्रिकेट से लेकर कुश्ती और दौड़ तक, उसका संघर्ष सिर्फ खेल का नहीं बल्कि सम्मान और पहचान का है। उसने अपने पूरे जीवन में अपने अस्तित्व और गांव और वहां के लोगों के आत्मसम्मान के लिए और गांव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जो लड़ाई लड़ी है। वह अद्वित्य है। पेड्डी नेे खेल के जरिए अपने गाँव और समुदाय को पहचान दिलाने का सपना देखा तो उसको पूरा भी किया। यह सिर्फ जीत की लड़ाई नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और अस्मिता की गाथा है। जहां एक खेल का मैदान उसके लिए जीवन का प्रतीक बन जाता है, जहाँ हर संघर्ष उसे सम्मान की ओर ले जाता है।

अभिनय: राम चरण ने इस फिल्म में अपने करियर का सबसे दमदार प्रदर्शन दिया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, इमोशन और दृढ़ संकल्प हर फ्रेम में झलकता है। जाह्नवी कपूर का किरदार सीमित है, लेकिन उनकी मौजूदगी कहानी में एक भावनात्मक परत जोड़ती है। दिव्येंदु शर्मा का यह पहला तेलुगू डूब्यू है, उनका किरदार भी आकर्षक है। बोमन ईरानी ने मिस्टर पैस्वाल का किरदार निभाया है, जो युवा मामलों और खेल मंत्रालय से जुड़े अधिकारी हैं। वे विजयनगरम पहुँचकर पेड्डी (राम चरण) की असाधारण खेल प्रतिभा को देखते हैं और उसकी कहानी को सामने लाने का प्रयास करते हैं। वहीं केसरी पहलवान के रूप में शिवराजकुमार ने भी शानदार काम किया है।

संगीत: ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म की आत्मा है। रहमान का दिल छू लेने वाला संगीत, बैकग्राउंड स्कोर हर सीन को और भी गहराई देता है। सिनेमैटोग्राफी हरे-भरे जंगल के दृश्य, गाँव की मिट्टी खेल के जुनून को बड़े परदे पर जीवंत बना देती है।

खासियत: जहां इस फिल्म में खेल और इमोशन का बेहतरीन तालमेल मिलता है, वहीं राम चरण का करिश्माई अभिनय दर्शकों को जरूर भाएगा। फिल्म द्वारा एक विजेता खिलाड़ी ने किस तरह अपने गाँव की पहचान के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया यह उसी जीवन को दर्शाती एक जमीनी कहानी है।

कमजोरियाँ: फिल्म की लंबाई (3 घंटे से अधिक) दर्शकों को भारी लग सकती है। असल में कहानी के दृश्य फास्ट हैं, तो कहीं-कहीं आपको कुछ बोरियत सी हो सकती है। लेकिन अभिनत्री जाह्नवी का किरदार और भी मजबूत लिखा जा सकता था। उनके किरदार के आकर्षण में कमी देखने को मिलती है।

पेड्डी सिर्फ एक स्पोर्ट्स ड्रामा नहीं, बल्कि संघर्ष, पहचान और आत्मसम्मान की कहानी है। यह फिल्म दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोरती है और खेल के मैदान से बाहर भी एक गहरी सोच छोड़ जाती है। तो देर किस बात की है कल रिलीज हो रही है। अपने दोस्तों और अपने परिवार के साथ जाकर यह फिल्म जरूर देख कर आएं।

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