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‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो -2026’ : पूर्वोत्तर भारत में आईटी हब के रूप में विकसित होगा बिहार 

-100 से अधिक देशों की बड़ी आईटी व एआई कंपनियों से रूबरू होंगी बिहार की आईटी व एआई कंपनियां देश की राजधानी नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो 2026’ का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक होने जा रहा है। इस समिट में बिहार की उपस्थिति ने दुनिया को यह सन्देश दिया है कि बिहार पूर्वोत्तर भारत के आईटी हब के रूप में विकसित होने के मार्ग पर अग्रसर है। विदित हो कि बिहार सरकार ने हाल ही में बिहार जीसीसी पॉलिसी,2026 और बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी,2026 को मंजूरी दी है। इस समिट में बिहार पैवेलियन का उद्घाटन मंगलवार को राज्य के माननीय उप मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी करेंगे। इस मौके पर केन्द्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह करेंगे जबकि बिहार की सूचना प्रावैधिकी मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह सहित बिहार के माननीय सांसदों एवं गणमान्य लोगों की गरिमामयी मौजूदगी रहेगी। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो 2026’ में बिहार पैवेलियन को भारत मंडपम के हॉल 5-एफ में स्टाल संख्या 8 और 12 में स्थापित किया गया है। बिहार पैवेलियन का पूरा प्रबंधन बिहार सरकार के सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव श्री अभय कुमार सिंह और विशेष सचिव श्री अरविन्द कुमार चौधरी अपनी देखरेख में कर रहे हैं। इस दौरान बिहार सरकार के द्वारा नवाचार एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देने हेतु महत्वपूर्ण घोषणा भी की जाएगी। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी दुनिया की बड़ी कंपनियां हिस्सा लेने जा रही हैं। इस पांच दिवसीय आयोजन में 100  से ज्यादा देशों ने हिस्सा लेने की पुष्टि की है। इसमें गूगल, एनवीडिया और ओपनएआई जैसी कई दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।  साथ ही इन कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य एआई इकोसिस्टम से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाना और उन्हें आपस में जोड़ना है। इस दौरान बिहार के इनोवेटर्स को भी अपनी तकनीक और क्षमताएं दिखाने का मौका मिलेगा। एक्सपो में स्टार्टअप्स और निवेशकों को जोड़ने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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Stellantis–Tata Motors Mark 20 Years, Sign MOU for Future Collaboration

More than 1.37 Million vehicles produced since the beginning of the partnership 50/50 JV today employs almost 5,000 and produces 222,000 vehicles/year 4 Jeep and 3 Tata Motors PVs are currently produced at the JV Plant Pune— Stellantis, a leading global automaker, and Tata Motors Passenger Vehicles, India’s leading manufacturer of cars and SUVs, commemorated 20-years of successful partnering viatheir 50:50 joint venture,Fiat India Automobiles Private Limited (FIAPL). To mark the occasion, both companies signed a Memorandum of Understanding (MoU) today to explore further opportunities for collaboration across manufacturing, engineering and supply chain in India and overseas. Building on this successful partnership and leveraging Stellantis’ global expertise and Tata Motors Passenger Vehicles’ deep local capabilities, FIAPL has developed robust strength across manufacturing, powertrain, and supply‑chain excellence, laying a strong foundation for expanding future collaboration. Speaking on the milestone and the opportunity ahead, Grégoire Olivier, Chief Operating Officer of Stellantis Asia Pacific, said: “FIAPL stands as a testament to what two strong organizations can achieve together. As we commemorate this milestone, we remain focused on evolving the partnership to support future-ready manufacturing, innovation, and sustainable growth in the region.” Shailesh Chandra, Managing Director & CEO, Tata Motors Passenger Vehicles, added: “Our partnership with Stellantis through FIAPL reflects the strength of a long-standing collaboration built on trust, shared values and a common vision. We look forward to deepening this relationship with Stellantis in theyears ahead.”

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दिल्ली बिज़नेस बज़ : समिट, बंद और बाज़ार की हलचल

दिल्ली इन दिनों व्यापारिक गतिविधियों और आर्थिक चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। राजधानी में आयोजित ग्लोबल बिज़नेस समिट 2026 और हाल ही में घोषित भारत बंद ने व्यापार जगत को गहराई से प्रभावित किया है। साथ ही, सोने-चाँदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। आइए विस्तार से देखते हैं कि दिल्ली के व्यापारिक परिदृश्य में क्या हलचल है। ग्लोबल बिज़नेस समिट 2026 13–14 फ़रवरी को दिल्ली में आयोजित ET Now ग्लोबल बिज़नेस समिट एशिया का सबसे बड़ा नेतृत्व मंच साबित हुआ। इसमें दुनिया भर के उद्योगपति, नीति-निर्माता और निवेशक शामिल हुए। चर्चा का मुख्य विषय था तकनीकी बदलाव, भू-राजनीतिक चुनौतियाँ और पूँजी का पुनर्वितरण। इस सम्मेलन ने भारत को वैश्विक व्यापारिक मानचित्र पर और मज़बूत स्थिति दिलाई। भारत बंद का असर 12 फ़रवरी को दिल्ली समेत पूरे देश में भारत बंद का आयोजन हुआ। 10 से अधिक ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने केंद्र की नीतियों के विरोध में यह कदम उठाया। दिल्ली में बैंकों, परिवहन और कुछ सरकारी कार्यालयों पर इसका असर देखने को मिला। व्यापारिक गतिविधियाँ धीमी रहीं और बाज़ारों में ग्राहक कम दिखाई दिए। अनुमान है कि इस बंद से करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। सोना-चाँदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव दिल्ली में सोने और चाँदी की कीमतें लगातार बदल रही हैं। 11 फ़रवरी को 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,58,790 प्रति 10 ग्राम पर रहा, जबकि चाँदी ₹2,90,000 प्रति किलो के आसपास रही। निवेशक वैश्विक संकेतों और घरेलू मांग पर नज़र रख रहे हैं। शादी-ब्याह के सीज़न में इन कीमतों का सीधा असर ज्वेलरी कारोबार पर पड़ा है। दिल्ली का व्यापारिक माहौल इस समय मिश्रित है। एक ओर ग्लोबल बिज़नेस समिट ने भविष्य की संभावनाओं को उजागर किया है, वहीं भारत बंद और सोने-चाँदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने बाज़ार को अस्थिर किया है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली का व्यापार जगत इन चुनौतियों और अवसरों का सामना कैसे करता है।

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दिल्ली का व्यापारिक परिदृश्य 2026 : बिज़नेस बज़ और बदलते रुझान

दिल्ली, भारत की राजधानी होने के साथ‑साथ देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता और व्यापारिक केंद्र भी है। यहाँ की मंडियाँ, कॉर्पोरेट दफ्तर, स्टार्टअप हब और ई‑कॉमर्स नेटवर्क मिलकर एक ऐसा आर्थिक ताना‑बाना रचते हैं जो न केवल दिल्ली बल्कि पूरे उत्तर भारत की दिशा तय करता है। 2026 में दिल्ली का व्यापारिक परिदृश्य कई नए बदलावों और अवसरों से भरा हुआ है। यह लेख लगभग 1000 शब्दों में दिल्ली के बिज़नेस ट्रेंड्स, स्टार्टअप्स, रोजगार, उपभोक्ता व्यवहार और निवेश की संभावनाओं पर प्रकाश डालता है। 1. दिल्ली का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली ने बैंगलुरु को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बनने का गौरव हासिल किया है। यहाँ के युवा उद्यमी फूड टेक, ई‑कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर और लाइफस्टाइल सेक्टर में नए प्रयोग कर रहे हैं। लेंसकार्ट जैसे ब्रांड ने दिखाया कि कैसे स्थानीय सोच को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया जा सकता है। मैपमाईइंडिया जैसी कंपनियाँ तकनीकी नवाचार और डेटा‑ड्रिवन सेवाओं के जरिए दिल्ली को डिजिटल मानचित्र पर चमका रही हैं। छोटे स्तर पर भी कई स्टार्टअप्स ₹50,000 से ₹2 लाख तक की पूंजी से शुरू होकर आज करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं। स्टार्टअप्स की सफलता का सबसे बड़ा कारण है—डिजिटल मार्केटिंग का प्रभावी उपयोग, स्थानीय नेटवर्किंग और उपभोक्ता की बदलती जरूरतों को समझना। 2. ई‑कॉमर्स और रिटेल का विस्तार दिल्ली का उपभोक्ता वर्ग तेजी से ऑनलाइन शॉपिंग की ओर बढ़ रहा है। फैशन और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स की मांग सबसे अधिक है। ऑर्गेनिक और वेलनेस प्रोडक्ट्स का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। किराना और फूड डिलीवरी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएँ और ऑफर मिल रहे हैं। दिल्ली की मंडियाँ जैसे करोल बाग, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर अब केवल ऑफलाइन ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। 3. रोजगार और करियर ट्रेंड्स 2026 में दिल्ली का रोजगार बाजार भी तेजी से बदल रहा है। एआई स्पेशलिस्ट्स और डेटा एनालिस्ट्स की मांग सबसे अधिक है। कंप्लायंस ऑफिसर्स और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की भूमिका अहम हो गई है। क्रिएटिव स्ट्रैटेजिस्ट्स और लीडरशिप रोल्स में युवाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। दिल्ली‑एनसीआर क्षेत्र देश का सबसे बड़ा रोजगार केंद्र बन चुका है, जहाँ लाखों लोग विभिन्न उद्योगों में काम कर रहे हैं। 4. निवेश और उपभोक्ता व्यवहार भारत को 2026 में वैश्विक निवेश का केंद्र माना जा रहा है और दिल्ली इस दिशा में सबसे आगे है। विदेशी निवेशक दिल्ली को गेटवे टू इंडिया मानते हैं। उपभोक्ता खर्च बढ़ रहा है, खासकर मिडिल क्लास और यंग जनरेशन में। डेटा प्राइवेसी और एआई एडॉप्शन पर कंपनियाँ विशेष ध्यान दे रही हैं। दिल्ली का उपभोक्ता अब केवल उत्पाद नहीं, बल्कि अनुभव खरीदना चाहता है। यही कारण है कि ब्रांड्स अपने मार्केटिंग में भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर दे रहे हैं। 5. छोटे व्यवसाय और एमएसएमई दिल्ली में छोटे व्यवसाय और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हस्तशिल्प और हैंडलूम उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर वैश्विक पहचान मिल रही है। इवेंट मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में छोटे उद्यमियों के लिए बड़े अवसर हैं। फूड प्रोसेसिंग और ऑर्गेनिक फार्मिंग से जुड़े व्यवसाय दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में तेजी से फैल रहे हैं। 6. चुनौतियाँ और समाधान दिल्ली के व्यापारिक परिदृश्य में अवसरों के साथ चुनौतियाँ भी हैं। प्रदूषण और ट्रैफिक व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। साइबर सिक्योरिटी खतरे डिजिटल कारोबार के लिए चुनौती बने हुए हैं। रियल एस्टेट की ऊँची कीमतें छोटे उद्यमियों के लिए बाधा हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम कर रहे हैं। ग्रीन बिज़नेस मॉडल्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्मार्ट लॉजिस्टिक्स और डिजिटल सिक्योरिटी पर निवेश बढ़ रहा है। को‑वर्किंग स्पेसेज़ छोटे उद्यमियों को सस्ती जगह उपलब्ध करा रहे हैं। 7. भविष्य की दिशा दिल्ली का व्यापारिक परिदृश्य आने वाले वर्षों में और भी गतिशील होगा। एआई और ऑटोमेशन हर उद्योग में गहराई से प्रवेश करेंगे। सस्टेनेबल बिज़नेस मॉडल्स को प्राथमिकता मिलेगी। ग्लोबल ब्रांड्स और लोकल उद्यमियों का संगम दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मानचित्र पर और मजबूत करेगा। निष्कर्ष 2026 में दिल्ली का व्यापारिक परिदृश्य अवसरों, नवाचार और चुनौतियों से भरा हुआ है। स्टार्टअप्स से लेकर एमएसएमई तक, ई‑कॉमर्स से लेकर रोजगार बाजार तक—हर क्षेत्र में दिल्ली अपनी अलग पहचान बना रहा है। यह शहर न केवल भारत की राजधानी है, बल्कि व्यापार और निवेश की राजधानी भी बन चुका है। दिल्ली का बिज़नेस बज़ यह संदेश देता है कि अगर संकल्प, नवाचार और सहयोग हो, तो कोई भी बाजार सीमित नहीं होता। दिल्ली आज “लोकल टू ग्लोबल” की यात्रा पर है और आने वाले वर्षों में यह भारत की आर्थिक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा।

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