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‘मां बहन’ में तृप्ति डिमरी का कॉमिक अंदाज़ दर्शकों को आ रहा है खूब पसंद, एक फैन ने कहा – “आजकल की स्मिता पाटिल”

‘बुलबुल’ और ‘क़ाला’ के बाद, नेटफ्लिक्स की ‘मां बहन’ को लेकर बढ़ा क्रेज़, डार्क कॉमेडी में कदम रखने पर तृप्ति डिमरी को मिला फैंस का थम्स अप ‘बुलबुल’ और ‘क़ाला’ के बाद, तृप्ति डिमरी अपनी अगली नेटफ्लिक्स फिल्म ‘मां बहन’ के साथ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। यह एक डार्क कॉमेडी फिल्म है, जिसे सुरेश त्रिवेणी ने निर्देशित किया है। इस फिल्म में पहली बार माधुरी दीक्षित, रवि किशन और धारणा दुर्गा साथ नजर आएंगे। कहानी रेखा और उसकी दो बेटियों, जया और सुषमा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें उनके मोहल्ले में पहले से ही शक की नजर से देखा जाता है। कहानी तब मजेदार मोड़ लेती है, जब उनकी रसोई में एक लाश मिलती है और उसे छुपाने के लिए तीनों को मजबूरी में साथ आना पड़ता है। फिल्म में तृप्ति डिमरी का डार्क कॉमेडी की ओर रुख करना दर्शकों को खासा पसंद आ रहा है। उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग, ‘बड़ी बहन’ के किरदार में जिम्मेदारी और हल्की-फुल्की शरारत, साथ ही उनकी सहज घरेलू बोली उनके किरदार को बेहद असली बनाती है। यही वजह है कि दर्शक उनके इस नए अंदाज़ को खूब सराह रहे हैं। एक फैन ने लिखा, “तृप्ति कॉमेडी में बहुत अच्छी हैं,” वहीं दूसरे ने कहा, “टाइमपास कॉमेडी फिल्म है, लेकिन तृप्ति डिमरी अब अच्छे प्रोजेक्ट्स चुन रही हैं।” किसी ने उनकी तारीफ करते हुए लिखा, “तृप्ति में असली टैलेंट और ह्यूमर है,” तो एक यूज़र ने उन्हें “आजकल की स्मिता पाटिल” तक कह दिया। कई दर्शकों ने ट्रेलर देखने के बाद फिल्म को दिलचस्प बताया और तृप्ति डिमरी की स्क्रीन प्रेज़ेंस की जमकर तारीफ की। नेटफ्लिक्स ने भी उनके ‘कमबैक’ से जुड़े एक कमेंट पर मजेदार जवाब देते हुए लिखा, “वो कभी गई ही नहीं!” ‘ओ’ रोमियो’ में गंभीर और सधी हुई अदाकारी दिखाने के बाद, ‘मां बहन’ में तृप्ति डिमरी का यह चुलबुला और अनदेखा रूप सामने आ रहा है। यह साफ दिखाता है कि तृप्ति डिमरी आज की सबसे बहुमुखी अभिनेत्रियों में से एक हैं, जो हर किरदार में आसानी से ढल जाती हैं। पहले ‘ओ’ रोमियो’ और अब ‘मां बहन’ बड़े पर्दे से लेकर नेटफ्लिक्स तक, दर्शकों को तृप्ति डिमरी से भरपूर मनोरंजन मिलने वाला है।

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भूमि सतीश पेडनेकर की ‘दलदल’ को मिला दुनियाभर में प्यार

भूमि सतीश पेडनेकर कभी भी तयशुदा फॉर्मूले पर चलने वाली कलाकार नहीं रही हैं। उनकी फिल्मोग्राफी साफ दिखाती है कि वह ग्लैमर और ज़रूरत से ज़्यादा ड्रामा से दूर, अलग और दमदार कहानियों को चुनती हैं। अपनी पहली फिल्म से ही भूमि ने दम लगा के हईशा, टॉयलेट: एक प्रेम कथा, पति पत्नी और वो, बधाई दो, थैंक यू फॉर कमिंग, शुभ मंगल सावधान, बाला, भीड़, भक्षक, सांड की आंख जैसी फिल्मों के ज़रिए समाज से जुड़े मुद्दों पर बात करने की हिम्मत दिखाई है। अब उनकी ग्लोबल ओटीटी हिट सीरीज़ दलदल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। भूमि की फिल्मों और शोज़ में दिखावा कम और कंटेंट ज़्यादा होता है। यही वजह है कि दर्शक उनकी कहानियों से जुड़ते हैं और बार-बार उन्हें देखना चाहते हैं। दलदल के ओटीटी हिट बनने के साथ भूमि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके लिए माध्यम नहीं, बल्कि कला और अभिनय सबसे ज़रूरी है। बड़े पर्दे पर अपनी मजबूत पहचान बनाने के बाद, भूमि ने अमेज़न प्राइम की टॉप-ट्रेंडिंग साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर दलदल के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी पकड़ साबित की है। यह सीरीज़ अमेरिका, यूके, यूएई समेत कई देशों में ट्रेंड कर रही है और दुनियाभर में सराही जा रही है। इसकी सफलता भूमि की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है और उन्हें भारत की सबसे भरोसेमंद और निडर अभिनेत्रियों में शामिल करती है। दलदल को मिल रही वैश्विक सराहना यह भी दिखाती है कि भूमि हमेशा कंटेंट और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को प्राथमिकता देती हैं। जहां कई कलाकार ऐसे किरदारों से हिचकते हैं जिनमें शारीरिक बदलाव, गहरी भावनात्मक तैयारी और व्यक्तित्व में बदलाव की जरूरत होती है, वहीं भूमि ने इन्हें अपनी ताकत बना लिया है। सिनेमाघरों से लेकर दुनियाभर के स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तक, भूमि ऐसा काम कर रही हैं जो खुद बोलता है। दलदल की सफलता के साथ यह साफ है कि भूमि सतीश पेडनेकर हर बार बड़ा जोखिम लेती हैं और उसे पूरी मजबूती से निभाती हैं।

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