केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने लिज्जत पापड़ की कारीगर बहनों से किया संवाद, महिला सशक्तिकरण की सराहना
1966 में लिज्जत पापड़ को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग से ग्रामोद्योग के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी। केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप लिज्जत पापड़ महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की प्रेरक मिसाल बन चुका है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने बुधवार को मुंबई के श्री षण्मुखानंद चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती ऑडिटोरियम, सायन (पूर्व), मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की कारीगर बहनों को संबोधित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केवीआईसी अध्यक्ष ने महिला कारीगरों के कार्य की सराहना की और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में लिज्जत पापड़ जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की प्रेसिडेंट श्रीमती स्वाति आर. पराडकर भी उपस्थित रहीं। उन्होंने संस्था की छह दशक से अधिक की प्रेरक यात्रा, महिला कारीगरों की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर जानकारी साझा की। अपने संबोधन में अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज गोयल ने कहा कि लिज्जत पापड़ की कहानी 15 मार्च 1959 को केवल 7 बहनों और 80 रुपये से शुरू हुई थी। यह प्रयास केवल पापड़ बनाने का नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने, सम्मान के साथ जीने और आत्मनिर्भर बनने का सपना था। वर्ष 1966 में केवीआईसी द्वारा लिज्जत पापड़ को ग्रामोद्योग के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद इस यात्रा को नई गति मिली। आज लिज्जत पापड़ की 83 शाखाओं के माध्यम से 16 राज्यों में 45 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की यात्रा से जुड़ी हैं। लिज्जत पापड़ ने समय के साथ अपने उत्पादों में भी विस्तार किया है। पापड़ के अलावा संस्था मसाले, आटा, डिटर्जेंट और लिक्विड सोप जैसे उत्पादों का भी निर्माण कर रही है। इसके उत्पाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण अफ्रीका सहित 30 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि लिज्जत पापड़ की सबसे बड़ी ताकत गुणवत्ता, मेहनत और अनुशासन है। उन्होंने कहा कि यह संस्था प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को साकार करने का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा, “लिज्जत सिर्फ पापड़ नहीं बनाती, वह सम्मान, आत्मविश्वास और अवसर गूंथती है।” श्री गोयल ने कहा कि लिज्जत पापड़ की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। वर्ष 2003 में सर्वश्रेष्ठ ग्रामोद्योग पुरस्कार, 2005 में ब्रांड इक्विटी अवार्ड और 2017 में महिला विकास पुरस्कार से संस्था को सम्मानित किया गया। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों और मीडिया ने भी लिज्जत पापड़ की प्रेरक यात्रा को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। केवीआईसी अध्यक्ष ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग से जुड़ी की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि देशभर में करीब 3 हजार खादी संस्थाओं के माध्यम से लगभग 5 लाख कारीगरों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। पिछले 12 वर्षों में खादी कारीगरों की वेजेज में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये और बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत पिछले 12 वर्षों में 3.23 लाख से अधिक मशीन एवं टूलकिट वितरित किए गए हैं। वहीं, PMEGP के अंतर्गत अभी तक करीब 11 लाख नई परियोजनाएं स्थापित हुईं, जिनके लिए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गई और करीब 1 करोड़ नए लोगों को रोजगार मिला।










