दिल, दौलत और रिश्तों का अनोखा मंत्र, दिल्ली में गूंजा ‘प्यार, पैसा, परिवार’
नई दिल्ली : आध्यात्मिक मार्गदर्शन और लोगों के व्यक्तिगत विकास के लिए काम करने वाले प्लेटफॉर्म सोलसेंसई ने नई दिल्ली के चिन्मय मिशन सेंटर में रविवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का विषय था “प्यार, पैसा, परिवार” और इसे प्रसिद्ध लाइफ कोच एवं मोटिवेशनल स्पीकर काव्याल सेदानी ने संचालित किया।सोलसेंसई भारत का एकमात्र आध्यात्मिक वेलनेस (समग्र आध्यात्मिक कल्याण) प्लेटफॉर्म है, जो लोगों को लाइव ऑनलाइन वर्कशॉप के साथ-साथ ऑफलाइन प्रत्यक्ष और अनुभव देने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर भी उपलब्ध कराता है। करीब तीन घंटे तक चले इस सत्र में लोगों को यह समझाया गया कि प्रेम संबंधों को कैसे बेहतर बनाया जाए। पैसे के प्रति सकारात्मक और संतुलित सोच कैसे विकसित की जाए। परिवार में रिश्तों को कैसे मजबूत किया जाए। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को अपने जीवन, भावनाओं और रिश्तों को एक नए और सकारात्मक नजरिए से समझने में मदद करना था, ताकि वे अधिक खुशहाल और संतुलित जीवन जी सकें। यह कार्यक्रम लोगों को प्यार, धन और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी समस्याओं को समझने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का मार्ग दिखाने के लिए आयोजित किया गया था। सोलसेंसई (SoulSensei) का मानना है कि हर व्यक्ति खुशहाल और संतुष्ट जीवन जीने का अधिकार रखता है। इसी उद्देश्य से यह मंच भरोसेमंद आध्यात्मिक विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से लोगों को आत्मविकास का अवसर प्रदान कर रहा है। सोलसेंसई का मानना है कि हर इंसान को ऐसा जीवन मिलना चाहिए जिसमें खुशी हो, मानसिक शांति हो और जीवन का एक स्पष्ट उद्देश्य हो। इसलिए संस्था सिर्फ ज्ञान देने या भाषण कराने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती है, जिनसे लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें। व्यक्ति अनजाने में खुद ही अपनी सफलता या खुशियों के रास्ते में रुकावट बन जाता है। कोई व्यक्ति नई नौकरी के लिए आवेदन ही नहीं करता क्योंकि उसे पहले से लगता है कि वह सफल नहीं होगा। कोई अच्छा रिश्ता मिलने के बावजूद डर या संदेह के कारण उसे खुद ही खराब कर देता है। कोई व्यक्ति काम को बार-बार टालता है और बाद में असफल हो जाता है। व्यक्ति की अपनी सोच और आदतें ही उसकी तरक्की रोक देती हैं। व्यक्ति हर समस्या के लिए परिस्थितियों या दूसरों को जिम्मेदार मानता है और खुद बदलाव की कोशिश नहीं करता। उदाहरण के लिए वह सोचता है कि “मेरे साथ ही हमेशा बुरा क्यों होता है?” “मेरी असफलता की वजह सिर्फ दूसरे लोग हैं।” ऐसी सोच इंसान को आगे बढ़ने से रोकती है। काव्याल सेदानी ने बताया कि हमारा दिमाग (Brain) नई चीजों और बदलाव से अक्सर डरता है। इसलिए इंसान बदलना चाहता है, लेकिन उसका मस्तिष्क उसे पुरानी आदतों और पुराने व्यवहार की ओर वापस खींच लेता है। अच्छी आदतें अपनाना कई बार मुश्किल लगता है।सेशन में स्कार थ्योरी का सिद्धांत बताया गया। जीवन में मिले पुराने भावनात्मक आघात—जैसे बचपन की उपेक्षा, किसी का धोखा, रिश्तों में कड़वे अनुभव या असफलताएं—भले ही समय के साथ दिखाई न दें, लेकिन उनका असर व्यक्ति की सोच, फैसलों और रिश्तों पर बना रहता है। सेशन में विजुअलाइजेशन के बारे में समझाया गया। एक मानसिक अभ्यास है, जिसमें व्यक्ति अपनी आंखें बंद करके किसी सकारात्मक स्थिति या लक्ष्य की कल्पना करता है। इससे व्यक्ति खुद को आत्मविश्वास से भरा, सफल या मानसिक रूप से शांत महसूस करता है। इसका उद्देश्य नकारात्मक सोच को कम करना और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना होता है। आत्मचिंतन कर वह अपने विचारों, व्यवहार और निर्णयों पर ईमानदारी से सोच सकता है । अपने विचारों, भावनाओं, अनुभवों और लक्ष्यों को नियमित रूप से डायरी या नोटबुक में लिख सकता है । इससे व्यक्ति को खुद को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश था कि व्यक्ति अपने जीवन में “यह मेरे साथ ही क्यों हो रहा है?” पूछने की जगह “यह मुझे क्या सिखा रहा है?” जैसी सकारात्मक सोच विकसित करे। खुद को परिस्थितियों का शिकार मानने की जगह हर कठिनाई को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मानना चाहिए। प्रतिभागियों से 15 ऐसे प्रश्न पूछे गए, जिनसे वे समझ सकें कि उनकी सोच कैसी है? उनकी सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी क्या है? वे रिश्तों, पैसे और जीवन की चुनौतियों को किस नजरिए से देखते हैं? उन्हें किन आदतों में बदलाव की जरूरत है? इस अभ्यास का उद्देश्य लोगों को अपने बारे में बेहतर समझ देना था। सोलसेंसई (SoulSensei) की संस्थापक जान्हवी पारिख ने कहा कि दिल्ली में कार्यक्रम को मिली अच्छी प्रतिक्रिया से यह साफ है कि लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। संस्था सिर्फ भाषण या जानकारी देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ऐसे अनुभव देना चाहती है, जिनसे लोगों की सोच और जीवन में वास्तव में बदलाव आए। इसी कारण भविष्य में भी देश के विभिन्न शहरों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोलसेंसई (SoulSensei) का संदेश यह है कि यदि लोगों को अनुभवी विशेषज्ञों का सही मार्गदर्शन, भरोसेमंद सलाह और खुद को बेहतर बनाने के अवसर मिलें, तो वे अपने जीवन में संतुलन ला सकते हैं, रिश्तों को बेहतर बना सकते हैं।मानसिक रूप से अधिक खुश रह सकते हैं और अपने जीवन को अधिक सार्थक बना सकते हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह सिखाना था कि वे अपनी समस्याओं के लिए केवल परिस्थितियों को दोष देने की जगह उनसे सीख लेकर अपनी सोच, व्यवहार और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं। इसके लिए आत्ममूल्यांकन, आत्मचिंतन और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन जैसे व्यावहारिक तरीकों पर जोर दिया गया। मौजूदा समय में सोलसेंसई (SoulSensei) से 300 से अधिक विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं। “सोलसेंसई के साथ 300 से अधिक आध्यात्मिक और व्यक्तिगत विकास से जुड़े विशेषज्ञ काम कर रहे हैं। ये विशेषज्ञ अब तक 2,000 से अधिक लाइव ऑनलाइन सत्र (वेबिनार/वर्कशॉप) आयोजित कर चुके हैं, जिनमें भारत और विदेशों के 50,000 से अधिक लोग शामिल होकर लाभ उठा चुके हैं। यह मंच लोगों को कई विषयों पर मार्गदर्शन देता है, जैसे ध्यान से मन को शांत और एकाग्र करना सिखाया जाता है। प्राणायाम या सांसों का अभ्यास सिखाया जाता है। सकारात्मक सोच और स्पष्ट लक्ष्य के जरिए अनुकूल परिणाम पाने की मानसिक प्रक्रिया










