महाकुंभ 2027 हेतु साध्वी शक्तियों का ऐतिहासिक संगम, नाशिक से सनातन एकता का संदेश
नाशिक, महाराष्ट्र : नाशिक की पावन धरा पर आज एक ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब आद्या शंकराचार्य त्रिकाल भवन्ता सरस्वती जी महाराज द्वारा श्री श्री 1008 जगतगुरु दुर्गाचार्य कंचन भवानी जी का विशेष सम्मान किया गया। यह अवसर सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना एवं नारी शक्ति के उत्थान का प्रेरणादायी प्रतीक बन गया। इस विशेष अवसर पर श्री पंच महाभूत परमहंस अखाड़ा एवं परी अखाड़ा ने संयुक्त रूप से आगामी महाकुंभ 2027 को एक साथ आयोजित करने का संकल्प लिया। साथ ही देशभर की साध्वी शक्तियों, संत समाज एवं सनातन धर्मावलंबियों से धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित में एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया गया। दोनों पूज्य संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि —“शक्ति ही सृष्टि का मूल आधार है। जब सभी शक्तियाँ एक हो जाती हैं, तब धर्म, संस्कृति और समाज को नई दिशा प्राप्त होती है।” उन्होंने कहा कि नारी शक्ति केवल संरक्षण का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस, तपस्या, नेतृत्व और परिवर्तन की दिव्य ऊर्जा है। आज आवश्यकता है कि समाज में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने हेतु सभी शक्तियाँ एक मंच पर आएँ। संत समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर सशक्त करने के लिए अखाड़ों एवं आध्यात्मिक संगठनों की एकता अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से दोनों अखाड़े वर्तमान में महाकुंभ 2027 को दिव्य, भव्य, अनुशासित एवं ऐतिहासिक स्वरूप देने हेतु व्यापक रणनीति तैयार कर रहे हैं। यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं होगा, बल्कि विश्वभर में सनातन एकता, नारी शक्ति, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति का वैश्विक संदेश देने वाला महाआंदोलन सिद्ध होगा।









