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हेल्थकेयर सेक्टर में कौशल विकास और मरीजों की देखभाल में निरंतरता के लिए भारत-यूके के बीच सहयोग की पहल

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और बैपियो ट्रेनिंग एकेडमी ने आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयुष डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए विशेष पहल की घोषणा की

दिल्ली : मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और बैपियो (BAPIO) ट्रेनिंग एकेडमी ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर आज दिल्ली में आयोजित इंडो-यूके हेल्थकेयर कॉन्क्लेव के दूसरे संस्करण में आयुष डॉक्टरों (बीएचएमएस और बीएएमएस) के क्लीनिकल कौशल को उन्नत करने की दिशा में कदम उठाने की घोषणा की। कॉन्क्लेव का उद्घाटन भारत सरकार के आयुष राज्य मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने किया। कॉन्क्लेव में स्ट्रक्चर्ड एजुकेशन, सुपरवाइज्ड क्लीनिकल ट्रेनिंग और एसेसमेंट के माध्यम से हेल्थकेयर सेक्टर में कौशल विकास और मरीजों की देखभाल में निरंतरता पर फोकस किया गया।

इन पहलों में आयुष के स्नातक और स्नातकोत्तर डॉक्टरों के लिए छह-छह महीने के दो सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल हैं। इनका उद्देश्य डॉक्टरों के क्लीनिकल कौशल को बढ़ाना, मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हेल्थकेयर सिस्टम के भीतर देखभाल की निरंतरता (कॉन्टिन्यूटी ऑफ केयर) बनाए रखने में मदद करना है।


“स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नवाचार के बीच सेतु” (ब्रिजिंग हेल्थकेयर, एजुकेशन एंड इनोवेशन) विषय पर आयोजित दो दिवसीय कॉन्क्लेव में भारत और ब्रिटेन के नीति-निर्माता, चिकित्सक, शिक्षाविद, स्वास्थ्य क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। यह कॉन्क्लेव 2025 में ब्रिटेन में आयोजित पहले संस्करण की अगली कड़ी है। पहले संस्करण की अध्यक्षता सांसद और इंडो-यूके हेल्थकेयर अलायंस के चेयर डॉ. संजय जायसवाल ने की थी। इस पहल का जोर विचार-विमर्श को व्यावहारिक कार्यक्रमों और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारियों में बदलने पर है।

इस अवसर पर भारत सरकार के आयुष राज्य मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने कहा, “इंडो-यूके हेल्थ कॉन्क्लेव 2026 भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच दीर्घकालीन मित्रता, परस्पर सम्मान तथा निरंतर सुदृढ़ होती राजनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच चिकित्सा, शिक्षा तथा वैज्ञानिक प्रगति के क्षेत्र में सहयोग का एक समृद्ध इतिहास रहा है। हमारी सरकार का विशेष ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, वहनीयता (अफॉर्डेबिलिटी), गुणवत्ता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) तथा आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग पर केंद्रित है। भारत के पास पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की एक अनूठी और अमूल्य विरासत है। आयुष मंत्रालय का दायित्व संभालते हुए मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब इन पद्धतियों को वैज्ञानिक, अनुसंधान, उपयुक्त चिकित्सकीय प्रमाण, गुणवत्ता मानकों तथा जिम्मेदार समन्वय का समर्थन प्राप्त होता है, तब वे विश्वभर में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं और समग्र कल्याण को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि यह सम्मेलन इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। बैपियो ट्रेनिंग एकेडमी और मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल ग्रुप के संयुक्त सहयोग से आयुष चिकित्सकों के लिए एक सुव्यवस्थित प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है। इसका उद्देश्य आयुष चिकित्सकों की नैदानिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना एवं उनकी व्यावसायिक क्षमताओं का विस्तार करना है। यूके के पास क्लीनिकल गवर्नेंस, व्यावसायिक जवाबदेही, मरीजों की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सुव्यवस्थित प्रणालियों को विकसित करने का व्यापक अनुभव है। वहीं भारत के पास व्यापक चिकित्सकीय अनुभव, तकनीकी नवाचार, उच्च प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों का विशाल समूह तथा बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की क्षमता है। यदि हम दोनों देशों की इन पूरक क्षमताओं को एक साथ लाएं तो ऐसी संस्थागत व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं, जो अधिक प्रभावी, मरीज केंद्रित, जवाबदेह तथा समाज की वास्तविक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप हों।

आयुष पेशेवरों के लिए सर्टिफिकेट प्रोग्राम : आयुष डॉक्टरों के क्लीनिकल कौशल से जुड़ी इस पहल में छह-छह महीने के दो सर्टिफिकेट प्रोग्राम तैयार किए गए हैं। इनमें ‘एक्यूट केयर एंड इमरजेंसी सपोर्ट’ और ‘लाइफस्टाइल हेल्थ एंड वेल-बीइंग काउंसलिंग एंड प्रैक्टिस’ सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल हैं। दोनों प्रोग्राम आयुष के स्नातक और स्नातकोत्तर डॉक्टरों के लिए तैयार किए गए हैं। इनमें व्यवस्थित शिक्षण के साथ सुपरवाइज्ड प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कराई जाएगी।

एक्यूट केयर प्रोग्राम का उद्देश्य डॉक्टरों की क्षमताओं को विकसित करना तथा उन्हें इमरजेंसी विभागों एवं क्रिटिकल केयर यूनिटों में क्लीनिकल, प्रशासनिक और नेतृत्व संबंधी भूमिकाओं के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षण में मरीज की स्थिति बिगड़ने के संकेतों को पहचानने, समय पर वरिष्ठ विशेषज्ञों तक मामले को रेफर करने, कम्युनिकेशन, डॉक्युमेंटेशन, मरीजों की सुरक्षा, इमरजेंसी रूम एवं क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट के साथ-साथ मल्टीडिसिप्लिनरी टीम का हिस्सा बनकर ऑपरेशनल असिस्टेंस देने में सक्षम बनाने जैसे कदम शामिल हैं।

लाइफस्टाइल हेल्थ प्रोग्राम में प्रिवेंटिव हेल्थ (निवारक स्वास्थ्य) और एविडेंस-इन्फॉर्म्ड काउंसिलिंग (प्रमाण-आधारित परामर्श) पर फोकस किया गया है। इसमें पोषण, शारीरिक गतिविधि, वेलनेस एवं लंबी उम्र तक स्वस्थ रहने, नींद, स्ट्रेस मैनेजमेंट, व्यवहार में बदलाव, हेल्थ चेक-अप और जरूरत पर मरीज को अन्य विशेषज्ञों के पास भेजने जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य अस्पतालों की वेलनेस सर्विसेज, प्रिवेंटिव हेल्थ डिपार्टमेंट और कॉरपोरेट या कम्युनिटी वेलनेस प्रोग्राम में सहयोग देना है।

इस पहल पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के संस्थापक सदस्य, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. राजीव सिंघल ने कहा, “हमारे लिए इस साझेदारी की अहमियत इस बात में है कि इससे मरीजों और हेल्थकेयर टीमों के लिए क्या बदलाव आता है। हमारा उद्देश्य हेल्थकेयर सिस्टम को लगातार मजबूत करना, भारत एवं ब्रिटेन के अनुभवों को साझा करना, इलाज के मानकों (स्टैंडर्ड ऑफ केयर) को बेहतर बनाना और गुणवत्ता तथा गवर्नेंस को मजबूत करना है, ताकि इसका अंतिम लाभ मरीजों को मिले। इस तरह के मंचों के माध्यम से होने वाली किसी भी साझेदारी की असली कसौटी यही है। आज घोषित की गई इस पहल में स्ट्रक्चर्ड क्लीनिकल ट्रेनिंग, सुपरवाइज्ड प्रैक्टिस और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया गया है। ‘टीच, ट्रेन, ट्रीट’ यानी ‘सिखाना, प्रशिक्षित करना और इलाज करना’ की हमारी क्लीनिकल कॉरिडोर फिलॉसफी के माध्यम से हम इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर के मामले में दीर्घकालिक क्षमता विकसित करने, प्रिवेंटिव केयर में सहयोग करने और ज्ञान के आदान-प्रदान से अधिक सुरक्षित मेडिकल केयर एवं नतीजे देने के लिए प्रयासरत हैं।”

बैपियो ट्रेनिंग एकेडमी के सीईओ एवं इंडो-यूके हेल्थकेयर अलायंस के वाइस चेयर प्रो. पराग सिंघल ओबीई ने कहा, “भारत और ब्रिटेन दोनों के पास एक-दूसरे से सीखने के लिए बहुत कुछ है। हमारा उद्देश्य अस्पतालों में ट्रेनिंग, साझा शिक्षण, कठोर मूल्यांकन और क्लीनिकल सहयोग के माध्यम से इस आदान-प्रदान को व्यावहारिक बनाना है। इन पहलों को इस तरह से तैयार किया गया है, जिससे हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स अपना कौशल बढ़ा सकें और साथ ही उन व्यवस्थाओं को भी मजबूत बना सकें, जिनमें वे काम करते हैं। हमारा ध्यान ऐसी दीर्घकालिक शैक्षणिक साझेदारियों के गठन पर है, जिनसे चिकित्सकों और मरीजों, दोनों को फायदा हो।”

इन पहलों के माध्यम से मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और बैपियो ट्रेनिंग एकेडमी का उद्देश्य हेल्थ एजुकेशन, क्लीनिकल प्रैक्टिस और इनोवेशन के क्षेत्र में भारत-ब्रिटेन गठजोड़ के लिए एक सतत मंच तैयार करना है। इस साझेदारी का साझा लक्ष्य मरीजों की देखभाल (पेशेंट केयर) को बेहतर बनाना है।

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