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Film Review : आधुनिक राम के किरादार में दिखते नानी ने किया विलेन रूपी रावण का वध


  • प्रस्तुति : के. कुमार

फिल्म : दासारा
कलाकार : नानी, कीर्ति सुरेश, दीक्षित शेट्टी और साई कुमार
लेखक : श्रीकांत ओडेला, जे ला श्रीनाथ, अर्जुन पाटुरी और वामसी कृष्णा पी.
निर्देशक : श्रीकांत ओडेला
निर्माता : सुधाकर चेरुकुरी
रेटिंग : 3

साउथ सिनेमा के नेचुरल स्टार कहे जाने वाले नानी अपनी फिल्म दशहरा के द्वारा फिर से हिंदी भाषी दर्शको के मन में बसने आए हैं। साउथ में नानी अपनी दमदार फिल्मों से काफी चर्चित हैं, तो वहीं साउथ की डबिंग देखने वाले दर्शक भी उन्हें खूब पसंद करते हैं।

 

लेखक और निर्देशक श्रीकांत ओडेला और निर्माता सुधारक चेरुकुरी द्वारा प्रस्तुत फिल्म ‘दशहरा’ नानी की बेहद रियल और गोधवारीखानी के वीरलापल्ली गांव की कहानी हैं, जहां के लोग कोयले की खानों के पास रहकर मजदूरी करते हैं, और अपनी हिम्मत बनाए रखके के लिए शराब जरूरत से ज्यादा सेवन करते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि शराब न मिले तो वे जी नहीं सकते। उसी गांव के तीन मित्र धरनी (नानी) सूरी (दिक्षित सेट्टी) और वेनेला (कीर्ति सुरेश) युवाओं को दिखाया गया है। फिल्म में उन लोगों के रहन-सहन उनके संघर्ष को श्रींकांत ओडेला ने बाखूबी बड़े पर्दे पर उतारा है, जिसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। फिल्म में जैसा कि सभी फिल्मों में होता है, प्रेम प्रसंग, जिसमें नानी बचपन से ही वेनेला से प्रेम करता है, लेकिन वेनेला सूरी से प्रेम करती है। और दोनों का विवाह हो जाता है। लेकिन सूरी को जब यह पता चलता है कि धरनी बचपन से वेनेला से प्रेम करता है, तो उसको काफी दुख होता है कि उसने दोस्ती की खातिर अपने प्यार का कुर्बान कर दिया। लेकिन अक्सर प्रेम कहानी में विलेन भी होता है, जी हां वो विलेन है, चिन्ना नांबी (शाईन टॉम चोको) जो दो गुटों की राजनीतिक पार्टी में से एक विलेन है और वे वेनेला पर खराब नजर रखता है, और तरह-तरह के षड़यंत्र रचता है, जिसके चलते वह एक दिन उन सभी पर रात में हमला करवा देता है, और सूरी की गर्दन धड़ से अलग कर देता है।

अब धरनी की अपने पति सूरी के मृत्यु के बाद कैसे जिंदगी बदल जाती है और धरनी अपनी दोस्त की मृत्यु का बदला कैसे लेता है, यदि कहानी देखने लायक है, जो आप सब दर्शक इस फिल्म को जरूर देखने जाएं।

बता दें कि जब आप फिल्म को देखना शुरू करेंगें तो आपको फिल्म कुछ बोर और स्लो लगेगी लेकिन आपको अपना धैर्य बिल्कुल नहीं खोना है। फिल्म को समझने और देखने की कोशिश करनी है, हां आप सिर्फ फिल्म के किरदारों कहानी के परिदृश्य वहां के वातावरण और वहां के लोगों के रहन-सहन और उनके संघर्ष को जब देखेंंगे तो आप भावविभूत होंगें कि किस तरह एक मेहनतकश और मजदूर वर्ग अपने जीवन के लिए संघर्ष करता है और सदियों से शोषक वर्ग उनका शोषण करता आया है।

असल में अब हिंदी का वर्चस्व भी विश्व स्तरीय हो रहा है, और हिंदी को सीखने और समझने का क्रेज भी इसलिए साउथ सिनेमा भी अपनी फिल्मों के संस्करण हिंदी में डब कर दर्शकों के समक्ष पेक्ष कर रहे हैं, जैसे चाहे वो ‘केजीएफ’, ‘बाहुबली’ हो या ‘पुष्पा’ और ‘कांतारा’ जो दर्शकों को बेहद पसंद भी आईं हैं। अब देखना यह होगा कि फिल्म नानी की ‘दशहरा’ भी अपनी जादू दर्शकों को चलाएगी या फिर यूं ही निकल जाएगी। एक बात जरूर निर्देशक श्रीकांत ओडेला जी को ध्यान रखनी चाहिए थी कि नानी को ‘पुष्पा’ वाला लुक नहीं देना चाहिए था और फिल्म में जरूरत से ज्यादा मारकाट भी मन को नहीं भाती। लेकिन वे वाहवाही के पात्र भी इसलिए हैं, कि उन्होंने ग्रामीण और वहां के लोगों का जिस तरह से फिल्मांकन किया है, वह 100 प्रतिशत वास्तविक लगता है, उसमें कोई कमी नहीं लगती। वहीं डॉयलॉग डिलिवरी भी स्पष्ट है, नानी के लिए शरद केलकर ने डबिंग की है, जो उनके हिसाब से ज्यादा मेच्यूर लगती है। गानों और संगीत की बात करें तो उनमें धूम-धाम, जैसे गाने फास्ट हैं। वहीं चमकीली गाने में कीर्ति सुरेश और नानी प्रभावित करते हैं।

कलाकारों के अभिनय की बात करें तो नानी ने धरनी की भूमिका में बाखूबी निभाया है, इसी के साथ उसके एक्शन सुपर हैं, खसकार फिल्म के अंत में रावण रूपी विलेनी चिन्ना नांबी को जिस तरह रावण के जलते पुतले में से कूदकर मारना प्रभावित करता है। वहीं नायिका कीर्ति सुरेश भी वेनेला के बेहतरन किरदार में मन को भाती हैं। इसके अलावा जरिना वहाव, दीक्षित शेट्टी, समुथीरकानी, साई कुमार, राजेशेखर का अभिनय भी औसत है।

फिल्मों को बनाने में बहुत मेहनत लगती है, काफी रिसर्च करना पड़ता है। जब जाकर एक सफल फिल्म का निर्माण होता है। साउथ इंडियन मूवी ‘दशहरा’ एक गंभीर और सफल फिल्म है, जिसमें श्रीकांत ओडेला की मेहनत साफ दिखती है। तो फुल मनोरंजनात्मक फिल्मों से हटकर यह फिल्म भी देखने लायक है, तो देर किस बात की है। दर्शकों तैयार हो जाएं और इस फिल्म को जरूर देखकर आएं, जरूर पसंद आएगी।


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