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शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल 2026 – नई दिल्ली प्रील्यूड का बीकानेर हाउस में शानदार शुभारंभ

नई दिल्ली : शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल 2026 – नई दिल्ली प्रील्यूड का आज बीकानेर हाउस, नई दिल्ली में भव्य शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में साहित्य, शासन, सिनेमा, पत्रकारिता और रचनात्मक कला जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। मेघालय सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय प्रील्यूड, 12 से 14 नवंबर 2026 तक शिलॉन्ग में आयोजित होने वाले मुख्य शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल से पहले का एक महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसकी घोषणा आज बीकानेर हाउस में की गई।

इस फेस्टिवल का उद्देश्य मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक परंपराओं को सामने लाना है, साथ ही राज्य के क्रिएटिव इकोसिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी है। यह पहल संस्कृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और मेघालय को कला, साहित्य, संगीत और विचारों के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है।

उद्घाटन दिवस का मुख्य आकर्षण माननीय मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के. संगमा और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता के बीच हुई विशेष बातचीत रही। इस चर्चा में नेतृत्व, शासन, युवाओं की आकांक्षाओं, संस्कृति और पूर्वोत्तर की बदलती पहचान जैसे विषयों पर बात हुई। बातचीत के दौरान मेघालय की क्रिएटिव इकॉनमी और राज्य में लगातार आयोजित होने वाले कैलेंडर इवेंट्स पर भी चर्चा हुई। श्री गुप्ता ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कई लिटरेरी फेस्टिवल देखे हैं, लेकिन शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल का माहौल, मौसम और दर्शकों की गुणवत्ता बेहद खास है।

इन पहलों के पीछे की सोच पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फेस्टिवल राज्य में कई बड़े आयोजनों को एक मजबूत मंच देने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल जैसे आयोजनों को आगे बढ़ाकर सालभर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल की बढ़ती लोकप्रियता पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा, “हमने इसकी शुरुआत छोटे स्तर से की थी। अब यह लगातार आगे बढ़ रहा है। यह एक कैलेंडर इवेंट बन चुका है और पूरे देश में इसकी पहचान बन रही है। हमने सोचा कि दिल्ली में इसका यह प्रील्यूड आयोजित करने से इसे देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।” उन्होंने आगे कहा, “हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी और बड़ा बनेगा।”

मुख्यमंत्री ने मेघालय की बढ़ती क्रिएटिव इकॉनमी, उद्यमिता की संस्कृति, सतत पर्यटन, शिक्षा क्षेत्र में विकास और राज्य के आर्थिक विकास को लेकर सरकार की सोच भी साझा की।

स्वागत भाषण देते हुए पर्यटन विभाग, मेघालय सरकार के कमिश्नर एवं सेक्रेटरी डॉ. विजय कुमार डी., आईएएस ने कहा कि शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल मेघालय और पूर्वोत्तर की कहानियों, साहित्य, सिनेमा, संगीत और सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। नई दिल्ली प्रील्यूड के उद्देश्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन मेघालय की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास है।

शिलॉन्ग की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नवंबर में जब शहर चेरी ब्लॉसम से गुलाबी रंग में रंग जाता है, तब “स्कॉटलैंड ऑफ द ईस्ट” कहलाने वाला शिलॉन्ग “क्योटो ऑफ द वेस्ट” में बदल जाता है। यह प्रसिद्ध उपमा लेखक विक्रम सेठ ने वर्ष 2024 में शिलॉन्ग लिटरेरी फेस्टिवल के दौरान दी थी।

उद्घाटन सत्रों में पूर्वोत्तर के सिनेमा जगत पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता डॉमिनिक संगमा और प्रदीप कुर्बाह ने पुलित्जर पुरस्कार विजेता पत्रकार सुपर्णा शर्मा के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सिनेमा की बदलती कहानियों, चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने ‘हेलो मेघालय’ को स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह ओटीटी प्लेटफॉर्म फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्मों को साझा करने और उनसे आय अर्जित करने का अवसर देता है, खासकर ऐसे समय में जब प्लेटफॉर्म तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

शाम का समापन दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की विशेष प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने विक्रम सेठ की प्रसिद्ध पुस्तक Beastly Tales from Here and There से “The Elephant and the Tragopan” का पाठ किया। इसके साथ उन्होंने जेम्स थर्बर की रचनाओं का भी पाठ किया। “The Bear Who Let It Alone”, “The Tiger Who Would Be King”, “The Owl Who Was God” और “The Very Proper Gander” जैसी कहानियों के माध्यम से उन्होंने प्रकृति और मानव लालच के बीच के संबंधों को दर्शाया। उनकी प्रस्तुति ने साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

“रीडिंग्स फ्रॉम खासी एंड गारो क्लासिक्स” सत्र में प्रो. स्ट्रीमलेट डखार ने यू सोसो थाम की Ki Sngi Barim u Hynniewtrep और अपनी रचना Na Thwei Pyrkhat U Longshuwa का पाठ किया। वहीं डॉ. क्रिस्टल कॉर्नेलियस डी. मराक ने डी. एस. नेंगमिंजा की Seokgimin Poetryrang और Ku·bak-Ma·o Sanirang प्रस्तुत कीं, जिनमें गारो क्षेत्र की भौगोलिक और मौखिक परंपराओं को दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों ने क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को सामने रखा।

फेस्टिवल के दूसरे दिन पूर्वोत्तर साहित्य, पर्यावरण, भोजन, अनुवाद और पहचान जैसे विषयों पर चर्चा होगी। “Shillong on a Plate” और “Once Upon a Time at a Literature Festival” जैसे सत्रों में शोभा डे, महारानी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया, संजय हजारिका, नमिता गोखले, पत्रिशिया मुखीम सहित कई प्रमुख वक्ता शामिल होंगे।

शाम का समापन मुख्यमंत्री मेघालय ग्रासरूट्स म्यूजिक प्रोग्राम (CM-MGMP) के कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसने पूरे परिसर को मेघालय के संगीत, संस्कृति और उत्साह से भर दिया।

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