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दिल्ली के दिल में सजा देश की लोककला एवं बुनकरों का संसार

• कनॉट प्लेस में ‘दशहरा महोत्सव 2026’ का भव्य आगाज़
• स्टेट एम्पोरिया कॉम्प्लेक्स में 19 अक्टूबर तक चलेगा 12 दिवसीय मेला
• कश्मीरी पश्मीना से लेकर बनारसी साड़ियों के स्टॉलों पर उमड़ रही भारी भीड़
• मिथिला पेंटिंग, नक्काशीदार काष्ठ-शिल्प के सजावटी सामान बने मुख्य आकर्षण

नई दिल्ली : त्योहारी मौसम के आगाज़ के साथ ही राजधानी दिल्ली की धड़कन कहे जाने वाले बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित ‘स्टेट एम्पोरिया कॉम्प्लेक्स’ में भारतीय संस्कृति, कला और हथकरघा के अनूठे संगम का रंग बिखर गया है। आना हैंडलूम्स के तत्वावधान में आयोजित 12 दिवसीय भव्य ‘हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट मेला – दशहरा महोत्सव 2026’ का आगाज़ हो चुका है, जो 8 से 19 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। मेले के परिसर में कदम रखते ही देशभर के पारंपरिक हुनर की जीवंत छटा और कारीगरों की कारीगरी देखते ही बनती है। दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों और पारंपरिक बुनकर परिवारों के उत्पादों से सजे इस प्रांगण में उत्सव जैसी चहल-पहल और उत्साह का माहौल नजर आ रहा है।

मेले का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में बदरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के साथ स्थानीय गणमान्य नागरिक, कला प्रेमी और बड़ी संख्या में शिल्पकार उपस्थित रहे। उद्घाटन के पश्चात मुख्य अतिथियों ने स्टॉलों का अवलोकन किया और कारीगरों से रूबरू हुए।

इस बार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों एवं बुनकरों के 80 से अधिक आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं। कश्मीर की वादियों से आया नायाब पश्मीना शॉल, दक्षिण भारत की समृद्ध परंपरा को दर्शाती कांजीपुरम साड़ियां, बंगाल का सुप्रसिद्ध तांत व बालूचरी सिल्क और बनारस के अनुभवी बुनकरों की महीन जरीदार बनारसी साड़ियों के स्टॉल महिलाओं के विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वस्त्रों के अतिरिक्त बिहार की विश्वप्रसिद्ध मिथिला (मधुबनी) पेंटिंग्स, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुशल कारीगरों द्वारा गढ़े गए नक्काशीदार लकड़ी व पत्थरों के मनमोहक सजावटी सामान, धातु शिल्प, जूट उत्पाद तथा मिट्टी, चीनी मिट्टी व शीशे के कलात्मक पात्र (क्राकरी) भी लोगों को खूब लुभा रहे हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक तत्वों से तैयार पारंपरिक घरेलू आचार, पापड़, बांस और घास से बुनी गई कलात्मक डलियां व गृह-उपयोगी वस्तुएं भी हाथों-हाथ बिक रही हैं। इसके अलावा सूखे मेवे के स्टॉलों पर भी उच्च गुणवत्ता वाले ड्राई फ्रूट्स की वेराइटी उपलब्ध है। नवरात्रि को लेकर इन सूखे मेवे के स्टॉलों पर लोगों की खासी रुचि देखी जा रही है।

मेले के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए आयोजक संस्था आना हैंडलूम्स के अध्यक्ष मो. बी इस्लाम ने कहा, “हमारा मूल ध्येय देश के अंतिम छोर पर बैठे उन हुनरमंद दस्तकारों और बुनकरों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं से जोड़ना है, जिनकी कला सदियों पुरानी है। बिचौलियों के बिना मिलने वाले इस मंच से न केवल खरीदारों को प्रामाणिक उत्पाद उचित मूल्य पर मिलते हैं, बल्कि कारीगरों की मेहनत का पूरा मेहनताना भी सीधा उनके हाथों में पहुंचता है।”

वहीं संस्था के उपाध्यक्ष धर्मवीर सिंह ने बताया, “दशहरा और दीपावली के त्योहारी मौसम में लोग अपने घरों को सजाने और अपनों को विशेष उपहार देने के लिए हाथ से बनी पारंपरिक वस्तुओं को पहली प्राथमिकता देते हैं। दिल्लीवासियों का उत्साह पहले ही दिन से देखने लायक है और हमें पूरा विश्वास है कि आगामी दिनों में बिक्री नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।”

संस्था के सचिव राम सिंह ने मेले की व्यवस्थाओं और कारीगरों के कल्याण पर जोर देते हुए कहा, “हमारी प्राथमिकता देश के कोने-कोने से आए इन दस्तकारों और बुनकरों को एक बेहतर और सुविधाजनक मंच उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी कला का सही मूल्य पा सकें। मेले में आम जनता का प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क है और यह 19 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से लेकर रात 8:00 बजे तक खुला रहेगा। इससे परिवार सहित आने वाले लोग खरीदारी के साथ-साथ हमारी समृद्ध लोक-संस्कृति का भी आनंद ले सकें।”

विभिन्न राज्यों के कारीगर भी सीधे ग्राहकों से संवाद कर अपनी कला की बारीकियां साझा कर रहे हैं। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये लोगों के भरपूर मनोरंजन की व्यवस्था की गई है, जहाँ भारत के अलग-अलग राज्यों की लोकसंस्कृतियों को सुंदर प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया जा रहा है। मेले में न केवल कला की खरीदारी हो रही है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का यह अनूठा संगम ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

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