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दिल्ली में केसीसी पहुंच को मिली नई दिशा : नाबार्ड की अगुवाई में आयोजित हितधारक बैठक में नवम्बर तक की कार्ययोजना निर्धारित

दिल्ली में केसीसी तक पहुंच की चुनौतियों के समाधान हेतु नाबार्ड ने बैंकों और सरकारी विभागों को एक मंच पर लाया

नाबार्ड : नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 23 सितम्बर 2026 “केसीसी जारी करने में मुद्दे एवं चुनौतियाँ” विषय पर एक हितधारक बैठक आयोजित की। बैठक में श्री नवीन कुमार रॉय, मुख्य महाप्रबन्धक नाबार्ड, श्री डी. साहू, महाप्रबंधक एवं संयोजक, एसएलबीसी; डॉ. एस. शनमुगुवेल, निदेशक, पशुपालन विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार; डॉ. उबैद खान, उप निदेशक, कृषि विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार; श्री तुषार जाधव, उप महाप्रबंधक, भारतीय रिजर्व बैंक; डॉ. ऋतु सिंह, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा; बैंकों एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के अधिकारी; एलडीएम, भारतीय रिजर्व बैंक के एलडीओ तथा नाबार्ड के डीडीएम-आर सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

अपने मुख्य संबोधन में श्री नवीन कुमार राय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड द्वारा किसानों की किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) तक पहुंच बढ़ाने को प्राथमिकता बताया गया। उन्होने साथ ही सरकारी विभागों, बैंकों, सहकारी संस्थाओं तथा विकास संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया। पात्र किसानों को समयबद्ध एवं किफायती ऋण उपलब्ध कराने हेतु क्षेत्र स्तर की बाधाओं को सहयोगात्मक एवं नवोन्मेषी उपायों के माध्यम से दूर करने का आह्वान करते हुए मुख्य महाप्रबन्धक नाबार्ड द्वारा सभी से सहयोग की अपेकषा की गई।

पशुपालन विभाग के निदेशक ने बैंकों से दिल्ली के पशुपालकों को अधिकाधिक ऋण उपलब्ध कराने का आग्रह किया तथा डेयरी कॉलोनियों का दौरा करने हेतु बैंकों को आमंत्रित किया। वहीं, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने बताया कि दिल्ली में लगभग 20,000 भूमिधर किसान हैं, जो लगभग 28,000 हेक्टेयर शुद्ध बोया गया क्षेत्र में खेती करते हैं, जबकि केसीसी के अंतर्गत उनकी कवरेज अपेक्षाकृत बहुत कम है।

इस अवसर पर श्री डी. साहू, महाप्रबंधक एवं संयोजक, एसएलबीसी ने आश्वासन दिया कि केसीसी कवरेज से संबंधित मुद्दों को आगामी एसएलबीसी बैठक के एजेंडा में शामिल किया जाएगा ताकि इन विषयों पर संस्थागत स्तर पर निरंतर ध्यान एवं अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

विचार-विमर्श के दौरान प्रतिभागियों ने केसीसी जारी करने में आने वाली प्रमुख बाधाओं में अपर्याप्त अथवा अविश्वसनीय गिरदावरी अभिलेख, अस्पष्ट खेती अधिकार, खंडित जोतें, अधूरी नामांतरण प्रक्रियाएँ, भूमि सीमांकन का अभाव तथा मौखिक पट्टा व्यवस्थाओं को चिन्हित किया।

बैठक में बटाईदारों, मौखिक पट्टाधारकों, हिस्सेदारी किसानों तथा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) एवं संयुक्त दायित्व समूहों (जेएलजी) के माध्यम से संगठित किसानों के लिए वैकल्पिक ऋण वितरण मॉडलों पर भी चर्चा की गई। जुलाई 2026 से पशुपालन एवं मत्स्य पालन गतिविधियों के लिए केसीसी प्रावधानों के विस्तार पर भी विचार किया गया। प्रतिभागियों ने जागरूकता बढ़ाने तथा प्रलेखन एवं ऋण सुविधा शिविरों जैसे संस्थागत तंत्रों के माध्यम से इन प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए अल्पकालिक ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने हेतु एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकेगा तथा अधिकाधिक किसानों को संस्थागत ऋण व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।

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