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April 22, 2026

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इंडिया ऑटिज़्म सेंटर ने प्रथम नेशनल एएलएफ़ओसी कॉन्क्लेव में समावेशी आवासीय देखभाल पर ज़ोर दिया

दिल्ली  : इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (आईएसी), जो ऑटिज़्म और संबंधित विकासात्मक स्थितियों वाले व्यक्तियों के समर्थन के लिए समर्पित एक अग्रणी गैर-लाभकारी संगठन है, ने प्रथम नेशनल एएलएफ़ओसी (असिस्टेड लिविंग फैसिलिटी ऑर्गनाइजेशन्स कंसोर्टियम) कॉन्क्लेव में भाग लिया। यह एक दिवसीय संगोष्ठी थी, जिसका उद्देश्य विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों के लिए असिस्टेड लिविंग पर संवाद को आगे बढ़ाना था। वर्तमान में ‘सामावेश’ का विकास करते हुए जो न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों के लिए भारत का सबसे बड़ा आजीवन आवासीय देखभाल तंत्र बनने की दिशा में है आईएसी की भागीदारी ने एक अधिक समावेशी, जागरूक और सहयोगी सामुदायिक ढांचे के निर्माण के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाया। कॉन्क्लेव में असिस्टेड लिविंग क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें श्री जयशंकर नटराजन (निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर), सुश्री नीना वाघ (संस्थापक निदेशक – एएलएफ़ओसी), सुश्री मुग्धा कालरा (पत्रकार एवं पीएचडी शोधार्थी – असिस्टेड लिविंग), सुश्री सीमा चड्ढा (मुस्कान पीएईपीआईडी), सुश्री संगीता जैन (संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी – एक्या असिस्टेड लिविंग), कर्नल उपदेश (पीएसीटी असिस्टेड लिविंग), सुश्री कविता बेनीवाल (समर्थ असिस्टेड लिविंग), और श्री जितेंद्र पी.एस. सोलंकी (आरआईए, एस्टेट प्लानर एवं विशेष आवश्यकता योजनाकार) सहित अन्य प्रमुख हितधारक शामिल थे, जो इस क्षेत्र को आकार दे रहे हैं। विशेषज्ञों, कार्यकर्ताओं और परिवारों को एक साथ लाते हुए, यह कॉन्क्लेव भारत में आवासीय देखभाल के भविष्य पर विचार-विमर्श के लिए एक सहयोगात्मक मंच बना। चर्चा के दौरान, श्री जयशंकर नटराजन, निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (आईएसी) ने कोलकाता में आईएसी की आगामी आवासीय पहल ‘सामावेश’ का परिचय दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जब बात ऑटिज़्म और अन्य विकासात्मक स्थितियों वाले व्यक्तियों के लिए आजीवन देखभाल की योजना बनाने की आती है। जैसे-जैसे जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, भविष्य के लिए तैयार मजबूत आवासीय तंत्र बनाने की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हो जाती है। असिस्टेड लिविंग को इस प्रकार डिज़ाइन किया जाना चाहिए कि हर जीवन चरण में गरिमा, स्वतंत्रता और निरंतर देखभाल सुनिश्चित हो सके। ‘सामावेश’ के माध्यम से, हमारा लक्ष्य एक समग्र और टिकाऊ मॉडल तैयार करना है, जो व्यक्तियों को सशक्त बनाए और परिवारों को दीर्घकालिक आश्वासन एवं सहयोग प्रदान करे।” कॉन्क्लेव का एक प्रमुख आकर्षण सुश्री मुग्धा कालरा द्वारा संचालित पैनल चर्चा थी, जिसमें क्षेत्र के नेताओं ने असिस्टेड लिविंग के संचालनात्मक और भावनात्मक पहलुओं पर व्यावहारिक अनुभव साझा किए। प्रथम नेशनल एएलएफ़ओसी (असिस्टेड लिविंग फैसिलिटी ऑर्गनाइजेशन्स कंसोर्टियम) कॉन्क्लेव २०२६ के बारे में, सुश्री नीना वाघ, संस्थापक निदेशक, एएलएफ़ओसी ने कहा, “भारत में असिस्टेड लिविंग को लेकर संवाद लगातार गति पकड़ रहा है, फिर भी कई परिवारों के लिए यह यात्रा अभी भी अनिश्चित और बिखरी हुई प्रतीत होती है। वे केवल देखभाल नहीं, बल्कि आश्वासन चाहते हैं ऐसे स्थान जहाँ उनके प्रियजन गरिमा और अपनापन के साथ जीवन जी सकें। साथ ही, इस तंत्र को स्पष्ट मानकों, साझा दिशानिर्देशों और निरंतर सहयोग के माध्यम से विकसित करने की आवश्यकता है। एएलएफ़ओसी जैसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं संवाद को बढ़ावा देकर, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करके, और एक अधिक संवेदनशील तथा सहयोगात्मक देखभाल व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़कर।” क्षेत्र के नेताओं के साथ सक्रिय सहभागिता और ‘सामावेश’ के माध्यम से अपनी दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए, आईएसी विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों के लिए एक अधिक संरचित, सहयोगात्मक और भविष्य-उन्मुख असिस्टेड लिविंग तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है।

Music News

बजाज धुनिवर्स ने 19 वर्षीय रत्निका श्रीवास्तव को सीजन 1 की विजेता घोषित किया

जब मेहनत को मंच मिलता है, तब भारत आगे बढ़ता है मुंबई : बजाज फिनसर्व के डिजिटल फर्स्ट म्यूज़िक डिस्कवरी प्लेटफ़ॉर्म बजाज धुनिवर्स ने अपने पहले सीज़न की विजेता के रूप में 19 वर्षीय मुंबई आधारित गायिका रतनिका श्रीवास्तव को ताज पहनाया है। देशभर से आई 64,000 से अधिक एंट्रीज़ पर बाज़ी मारते हुए रतनिका ने यह खिताब अपने नाम किया। दिग्गज संगीतकार तिकड़ी शंकर–एहसान–लॉय द्वारा सर्वसम्मति से चुनी गई रतनिका की यह जीत राष्ट्रीय मंच पर एक सशक्त नई आवाज़ के उदय का संकेत देती है। अपनी इस बड़ी जीत के साथ रतनिका के लिए चमकते अवसरों के नए दरवाज़े खुल गए हैं। उन्हें Zee Music Company के साथ एक स्वतंत्र एल्बम बनाने का मौका मिलेगा, साथ ही शंकर–एहसान–लॉय के साथ एक हाई प्रोफाइल सहयोग के तहत Spotify पर एक एक्सक्लूसिव रिलीज़ भी की जाएगी। इसके अलावा, रतनिका बजाज एंथम को भी सह निर्मित करेंगी—जो उन्हें सिर्फ़ खोज से नहीं, बल्कि एक स्थायी संगीत करियर की ओर निर्णायक छलांग दिलाएगा। इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए मानव मियांवाल, प्रेसिडेंट – डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स, बजाज फिनसर्व ने कहा, “बजाज धुनिवर्स को निरंतर प्रयास को पहचानने और उस प्रतिभा को आगे लाने के लिए बनाया गया है जो अनुशासन, संकल्प और निरंतरता दिखाती है। इस सीज़न ने एक सरल सच्चाई को दोहराया है—भारत में क्षमता हर जगह है, लेकिन अवसर नहीं। जब प्रयास को मंच मिलता है, तो देश को मंच मिलता है। इसी तरह भारत आगे बढ़ता है। बजाज धुनिवर्स जैसे प्लेटफ़ॉर्म इसे संभव बनाने का हमारा तरीका हैं।” शंकर महादेवन ने कहा, “रतनिका की आवाज़ में तुरंत जुड़ाव है—उसमें नज़ाकत भी है और ताक़त भी। पहली बार सुनते ही हमें समझ आ गया था कि वह कुछ ख़ास है। वह वाकई उस भावना का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसकी तलाश बजाज धुनिवर्स कर रहा था।” एहसान नूरानी ने जोड़ा, “रतनिका में जो बात सबसे अलग लगी, वह है अपने हुनर पर उनका नियंत्रण और प्रदर्शन में सच्ची भावनाओं को उतारने की क्षमता। इस पैमाने और स्तर की प्रतियोगिता में, यही गुण अंततः विजेता को अलग करता है।” लॉय मेंडोंसा ने कहा, “बजाज धुनिवर्स ने हमें अपार संतुष्टि दी है और रतनिका जैसी प्रतिभा के साथ बजाज की सॉनिक पहचान पर काम करना मेरे लिए बेहद उत्साहजनक है। उनमें हर सुर को महसूस कराने की दुर्लभ क्षमता है। मैं हमारे आने वाले रचनात्मक सफ़र को लेकर उत्साहित हूँ।” भारत में पीढ़ियों तक, अक्सर जन्म की परिस्थितियाँ ही सपनों की सीमाएँ तय करती रही हैं। प्रतिभा हर कोने में थी, लेकिन मंच सीमित थे और अवसर असमान। हज़ारों आवाज़ें कोशिश की कमी से नहीं, बल्कि पहुँच की कमी के कारण कभी सामने नहीं आ सकीं। इसी सोच को बदलने के लिए बजाज धुनिवर्स की शुरुआत की गई। बजाज फिनसर्व द्वारा निर्मित यह डिजिटल फर्स्ट, राष्ट्रीय स्तर पर सुलभ म्यूज़िक डिस्कवरी प्लेटफ़ॉर्म इस विश्वास पर आधारित है कि जब योग्यता को आगे बढ़ने का मौका मिलता है, तो प्रगति स्वाभाविक होती है—और उसके साथ भारत आगे बढ़ता है। इस खोज की शुरुआत 7 नवंबर 2025 को एक खुले आह्वान के साथ हुई, जहाँ भूगोल, पृष्ठभूमि या उम्र की कोई बाधा नहीं थी—जो प्लेटफ़ॉर्म की समावेशी सोच को दर्शाता है। 8 जनवरी 2026 तक, बिना किसी टेलीविज़न प्रचार या बड़े पैमाने के मीडिया अभियानों के, बजाज धुनिवर्स को 64,000 से अधिक प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी डिजिटल ओनली म्यूज़िक टैलेंट खोजों में से एक बन गया। कठोर, बहु स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद शीर्ष 100 प्रतिभागियों का चयन किया गया, फिर मेंटरशिप, 10 फ़ाइनलिस्ट और एक वाइल्ड कार्ड एंट्री के साथ प्रतिस्पर्धी फ़िनाले हुआ। 31 मार्च 2026 को आयोजित लाइव इवेंट को 5.3 लाख से अधिक व्यूज़ मिले। बजाज धुनिवर्स, समान अवसरों के ज़रिये आकांक्षाओं को सक्षम बनाने की बजाज फिनसर्व की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पहल समावेशी विकास की दिशा में बजाज फिनसर्व की दीर्घकालिक यात्रा का एक और कदम है—जहाँ तकनीक बाधा नहीं, बल्कि पुल बनती है।

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