नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित होने वाली विश्व विख्यात लव कुश रामलीला इस वर्ष सिर्फ भव्यता और आधुनिक तकनीक का ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी अनूठा संदेश देगी। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि इस बार रामलीला मैदान में 110 फीट ऊंचा रावण, 100 फीट ऊंचा कुंभकर्ण और 90 फीट ऊंचा मेघनाथ आकर्षण का मुख्य केंद्र होंगे।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम के तीर लगते ही रावण के पुतले में अद्भुत दृश्य दिखाई देंगे। रावण की नाभि से अमृत निकलता हुआ दिखाई देगा, उसकी मटकती आंखों से अग्नि की लपटें निकलेंगी और गले में सजी 11 चमकदार मालाएं रंग बदलती नजर आएंगी। अत्याधुनिक तकनीक और विशेष प्रभावों के साथ यह दृश्य दर्शकों के लिए रोमांचकारी अनुभव साबित होगा।
इस वर्ष की सबसे खास बात यह है कि रावण केवल दहन का प्रतीक नहीं रहेगा, बल्कि वह दिल्लीवासियों को तीन महत्वपूर्ण संदेश भी देगा। रावण के पुतले से आवाज गूंजेगी, “हर साल मैं तो जल जाता हूं, लेकिन मुझे मेरे अहंकार ने मारा। यदि समाज को आगे बढ़ाना है तो अपने भीतर छिपे अहंकार रूपी रावण का अंत करना होगा।”
रावण का दूसरा संदेश दिल्ली की गंभीर ट्रैफिक समस्या से जुड़ा होगा। वह लोगों से अपील करेगा कि वे निजी वाहनों के बजाय अधिक से अधिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें, ताकि सड़कों पर जाम कम हो और दिल्ली की रफ्तार बनी रहे।
तीसरा और सबसे अहम संदेश पर्यावरण संरक्षण को लेकर होगा। रावण लोगों को चेतावनी देगा कि बढ़ता प्रदूषण दिल्ली और आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। दूषित हवा न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
लव कुश रामलीला समिति का मानना है कि दशहरा केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व नहीं है, बल्कि समाज को नई दिशा देने और जनजागरण का भी अवसर है। इस वर्ष रावण दहन के माध्यम से अहंकार, ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी तीन बड़ी चुनौतियों के खिलाफ संदेश देकर दिल्लीवासियों को एक नई सोच और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित किया जाएगा।









