IFFD 2026 के तीसरे दिन आयोजित CineXchange सत्र में भारतीय फ़िल्म वितरण के बदलते परिदृश्य पर उद्योग के दिग्गजों ने विचार साझा किए। इस चर्चा में संजय राम, अनिल थडानी, जी.पी. विजयकुमार और गायत्री गुलियानी जैसे प्रमुख वितरकों ने भाग लिया।
उन्होंने बताया कि कैसे पारंपरिक थिएटर रिलीज़ और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के बीच संतुलन लगातार बदल रहा है। पहले जहाँ फ़िल्मों की सफलता का पैमाना केवल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन होता था, वहीं अब ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म और डिजिटल स्ट्रीमिंग ने दर्शकों तक पहुँचने के नए रास्ते खोल दिए हैं।
अनिल थडानी ने कहा कि बड़े बजट की फ़िल्में अब भी थिएटर में रिलीज़ होकर ही अपनी पहचान बनाती हैं, लेकिन छोटे और मध्यम बजट की फ़िल्मों के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म एक सुरक्षित विकल्प बन चुके हैं। संजय राम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि क्षेत्रीय सिनेमा को डिजिटल माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शक मिल रहे हैं।
जी.पी. विजयकुमार ने वितरण रणनीतियों में लचीलापन अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दर्शकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए निर्माताओं को थिएटर और डिजिटल दोनों माध्यमों का संतुलित उपयोग करना चाहिए। वहीं गायत्री गुलियानी ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में सहयोगी मॉडल ही सफल होंगे, जहाँ निर्माता, वितरक और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म मिलकर काम करेंगे।









