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नाबार्ड ने दिल्ली की पहली राज्य ऋण संगोष्ठी की मेजबानी की, 2.62 लाख करोड़ रुपये के ऋण विजन का अनावरण किया

नई दिल्ली में 13 अप्रैल 2026 को नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) ने पहली बार राज्य ऋण संगोष्ठी का आयोजन किया। यह आयोजन दिल्ली एनसीटी के लिए ऋण नियोजन और विकास पारिस्थितिकी तंत्र में एक ऐतिहासिक पहल साबित हुआ। संगोष्ठी ने जिला-स्तरीय संभाव्यता युक्त ऋण योजनाओं (PLP) को राज्य फोकस पेपर (SFP) 2026-27 में एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के माननीय मंत्री श्री रविंद्र सिंह (इंद्राज) ने की। इस अवसर पर भारतीय रिजर्व बैंक, प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों, वित्तीय संस्थानों, शोध एवं शैक्षणिक निकायों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ-साथ कारीगरों और किसानों ने भी भाग लिया। संगोष्ठी ने सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाकर दिल्ली के ऋण ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सहयोगात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री नवीन कुमार राय ने अपने संबोधन में समावेशी और साक्ष्य-आधारित ऋण योजना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दिल्ली एनसीटी के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता 2.62 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा एमएसएमई क्षेत्र का है, जो दिल्ली की अर्थव्यवस्था में ऋण वृद्धि का मुख्य चालक माना जा रहा है। कृषि क्षेत्र के लिए 4284.20 करोड़ रुपये की क्षमता का अनुमान लगाया गया है, जिसमें फसल ऋण, कृषि बुनियादी ढांचे और सहायक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा आवास, निर्यात ऋण, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक बुनियादी ढांचे को भी प्राथमिकता क्षेत्रों में रखा गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक ने संगोष्ठी को दिल्ली के ऋण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हितधारकों के अभिसरण का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने एमएसएमई और सेवा क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने डिजिटल समाधानों जैसे TReDS प्लेटफॉर्म और Unified Loan Interface (ULI) को अपनाने की वकालत की, ताकि एमएसएमई वित्तपोषण और ऋण वितरण अधिक सहज और पारदर्शी हो सके।

मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री श्री रविंद्र सिंह (इंद्राज) ने संगोष्ठी को दिल्ली के ऋण और सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने पारंपरिक शिल्प और जीआई-टैग वाले उत्पादों के पुनरुद्धार और प्रचार की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक संपत्तियों में अपार आर्थिक मूल्य छिपा है, जिसे बेहतर विपणन, ब्रांडिंग और प्लेटफॉर्म निर्माण के माध्यम से उजागर किया जा सकता है। उन्होंने सभी हितधारकों से सामूहिक प्रयास और सहयोग की भावना के साथ काम करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर कई पहलें शुरू की गईं, जिनमें दिल्ली के लिए पहला राज्य फोकस पेपर (SFP) 2026-27 जारी करना, विरासत उत्पादों के जीआई पंजीकरण को बढ़ावा देना, ग्रामीण युवाओं के लिए ईवी कौशल विकास और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम शामिल थे। साथ ही, डिजिटल कैटलॉग “कला कुंभ – परंपरा से रोशन प्रगति पथ” और नाबार्ड के दिवाली हाट पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम में आयोजित पैनल चर्चा का विषय था – “एमएसएमई, एसएचजी और युवाओं के माध्यम से समावेशी विकास: नैनो और मिनी उद्यमों पर फोकस”। इस चर्चा ने अंतिम छोर तक ऋण वितरण और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए मूल्यवान सुझाव दिए। कुल मिलाकर, यह संगोष्ठी दिल्ली के क्रेडिट आर्किटेक्चर को मजबूत करने, एमएसएमई और विरासत-आधारित आजीविका को बढ़ावा देने तथा समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुई।

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