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बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री: वैशाली में परोसा खाना, सोनपुर में पंगत में बैठकर किया भोजन

मुख्यमंत्री ने हाजीपुर और सोनपुर के राहत शिविरों का किया निरीक्षण, बोले- सरकार पूरी तरह लोगों के साथ, अगले दो-तीन दिनों में स्थिति में और राहत की उम्मीद

पटना/नई दिल्ली : बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को वैशाली और सारण जिलों का सघन दौरा किया। संकट की इस घड़ी में आपदा प्रभावितों का ढांढस बंधाते हुए मुख्यमंत्री का एक मानवीय चेहरा उस समय सामने आया, जब उन्होंने स्वयं सामुदायिक रसोई का कमान संभाल ली। वैशाली जिले में निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने राहत शिविर की कम्युनिटी किचन में बाढ़ पीड़ितों को अपने हाथों से खाना परोसा। वहीं, सारण जिले के सोनपुर में संचालित राहत शिविर में वे आम लोगों के साथ पंगत में बैठकर भोजन करते नजर आए और खुद भोजन की गुणवत्ता को परखा। सीएम ने शिविरों में मौजूद बच्चों से उनकी पढ़ाई-लिखाई और खान-पान का हाल जाना, जबकि महिलाओं और पुरुषों के लिए की गई पृथक आवास व्यवस्था का अवलोकन किया।

गंगा के जलस्तर में गिरावट, सर्वे के बाद मिलेगा मुआवजा

स्थिति का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि गंगा नदी के जलस्तर में 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। फरक्का बराज से करीब 15 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज जारी है, जिससे अगले दो-तीन दिनों में स्थिति में और सुधार की उम्मीद है। सीएम ने स्पष्ट किया कि जलस्तर सामान्य होते ही प्रत्येक प्रभावित परिवार के नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। फसल क्षति का भी सटीक आकलन कर किसानों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग रहने की व्यवस्था को भी देखा। स्वास्थ्य शिविर में चिकित्सकों से जांच एवं इलाज की सुविधाओं की जानकारी लेते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि बीमार होने की स्थिति में बाढ़ पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

पशु चिकित्सा शिविर की जानकारी लेते हुए मुख्यमंत्री ने पशुओं के लिए पर्याप्त दवा और चारा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण पशुओं को भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

बाढ़ का निकाला जाएगा स्थायी समाधान

प्रतिवर्ष गंगा में आने वाली बाढ़ की विभीषिका पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसके स्थायी समाधान पर गंभीरता से काम कर रही है। गंगा नदी के प्रवाह क्षेत्र (स्ट्रेच) को एक निश्चित सीमा में बांधने को लेकर केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों से वार्ता चल रही है, ताकि हर साल होने वाली तबाही से बिहार के नागरिकों को मुक्ति मिल सके।

राहत कार्यों का आंकड़ा:

*राज्य में 226 सामुदायिक रसोई संचालित, जिनके माध्यम से अब तक 3.75 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है।*चार राहत शिविरों में 2505 बाढ़ प्रभावितों लोगों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था।*

*बाढ़ प्रभावितों में 81,100 पॉलीथिन शीट और 19,000 ड्राई राशन पैकेट वितरित।*

*आवागमन के लिए 1,602 नावें कार्यरत; NDRF और SDRF की 37 टीमें मुस्तैद।*

*बाढ़ के पानी में डूबने से हुई मौतों पर आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की तत्काल अनुग्रह राशि जारी।*

निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विधायक श्री जनक सिंह, विधायक श्री संजय सिंह, विधायक श्री सिद्धार्थ पटेल, अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल, गृह विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज कुमार, वैशाली की जिलाधिकारी श्रीमती वर्षा सिंह, सारण के जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव, सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक श्री रौशन कुमार, वैशाली के पुलिस अधीक्षक श्री शुभांक मिश्रा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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