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स्वाद और संस्कृति का संगम सरस फूड फेस्टिवल का हुआ समापन


  • करीब सवा करोड़ के कारोबार के साथ विदा हुआ सरस फूड फेस्टिवल 
  •  सरस फूड फेस्टिवल ने पहली बार ही लिखी सफलता की कहानी
  •  पेस्टिवल में प्रबंधन, प्लानिंग और साफ-सफाई पर भी दिया गया पूरा ध्यान
  • 28 से 10 नवंबर तक चला सरस फूड फेस्टिवल
  •  17 राज्यों के उत्कृष्ट व्यंजनों का लोगों ने उठाया लुत्फ

नई दिल्ली : लगभग सवा करोड़ के कारोबार के साथ स्वाद और संसकृति का संगम सरस फूड फेस्टिवल का हुआ समापन। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस चौदह दिवसीय मेले का आयोजन 28 अक्टूबर 2022 से 10 नवंबर 2022तकनई दिल्ली में बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित हैंडीक्राफ्ट भवन पर किया गया।इसका उद्घाटन 28 अक्टूबर को ग्रामिण विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने किया। इस फेस्टिवल में देश भर के 17 राज्यों की क़रीब 150 महिला उद्यमी व स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने भाग लिया। श्री कुलस्ते ने विभिन्न फूड स्टॉलों पर जाकर उनके जायका का स्वाद भी चखा। इस फेस्टिवल के दौरान सरस से जुड़े सामानों की बिक्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी लांच किया गया, जो कि www.esaras.in है।इस फेस्टिवल में राजधानी के लोगों को भारतीय संस्कृतिव खान पान की झलक दिल्ली के हृदय कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में दिखाई दी। सरस फूड फेस्टिवल के तहत दिल्ली और समीपवर्ती राज्यों के लोग 17 राज्यों की संस्कृति और स्वाद के संगम के संगम से न केवल रूबरू हुए बल्कि इन राज्यों के सामाजिक ताने बाने के बारे में भी जान सकें और वहां की प्रसिद्ध व्यंजनों से परिचित हो उसका स्वाद भी चखे। अच्छे कारोबार होने से झूम उठी स्वयं सहायता समूह की महिलाए (दीदीयां)।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुख्य कार्यक्रम राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित देश भर के स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं को न केवल ग्रामीण उत्पाद बनाने में कुशलता हासिल है बल्कि विभिन्न राज्यों के परंपरागत पकवान बनाने में उनको दक्षता और महारथ हासिल है। ये महिलाएं और उनके साथ अपने कार्य क्षेत्र में दक्ष लोग यहां अपनी कला का प्रदर्शन किया।

17 राज्यों के स्वाद की संस्कृति की महक देखने को मिला

कनाट प्लेस स्थित बाबा खड़ग सिंह मार्ग पर 17 राज्यों के स्वाद की संस्कृति की महक देखने को मिला। यहां के व्यंजन और संस्कृति से लोग रूबरू हुए। इसमें मुख्य रूप से राजस्थान की कैर सागरी, गट्टे की सब्ज़ी, बाजरे की रोटी, बंगाल की हिलसा, फ़िश करी, तेलंगाना का चिकन, केरल की मालाबार बिरयानी, बिहार का लिट्टी चोखा, पंजाब का सरसों का साग और मक्के की रोटी सहित अन्य राज्यों के बेहतरीन स्वादिष्ट पकवान उपलब्ध रहें। इसमें हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल,असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और गुजरात सहित अन्य राज्यों ने हिस्सा लिया।

इसके साथ ही सरस फूड फेस्टिवल को सफल बनाने के लिए यहां प्रबंधन, प्लानिंग औऱ साफ सफाई पर भी ध्यान दिया गया। सरस सभी मेलों से सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है लेकिन फ़ूड फ़ेस्टिवल के सटीक मैनेजमेंट ने सभी मेलों को पीछे छोड़ते हुए पुनः रिकॉर्ड क़ायम किया है। एंबुलेंस, फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ी सीसीटीवी कैमरे और रात दिन लगी अधिकारियों की टीम की बदौलत सरस ने अपना नंबर वन का मुक़ाम बरकरार रखा है। सरस फूड फेस्टिवल में जहां स्वाद और संस्कृति का संगम देखने को मिला वहीं, इन सभी को संगठित तरीके से बनाए रखने के लिए यहां प्रबंधन और प्लानिंग पर भी पूरा ध्यान दिया गया। फेस्टिवल में किसी भी अनहोनी से निबटने के लिए अग्निशमन के साथ ही यहां एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की गई।

खास हैं राज्यों के खानें

  • राजस्थान- दाल बाटी चूरमा,प्याज कचौरी, दाल कचौरी
  • हरियाणा- राजमा चावल, बाजरे की खिचड़ी, कढ़ी चावल
  • तेलंगाना-हैदराबाद दम बिरयानी, कबाब
  • ओडिसा- मुगलई चिकन, तंदूरी चिकन, रस मलाई
  • अरुणाचल प्रदेश-स्पेशल बैंबू राइस, चाऊमीन, बैंबू चिकन
  • महाराष्ट्र- पुरन पूरी, वड़ा पाव, मिसल पाव, गावरन चिकन, भाकरी
  • केरल– मालाबार स्नैक, उतपम, कप्पा फिश कढी, नन्नारी शबरत, वनासुंदरी हर्बल चाय, हनी ग्रैप जूस, फ्रेश फ्रूट जूस, लेमनएड्स
  • उत्तर प्रदेश–पराठा, रोल्स, कबाब।
  • असम- मशरूम मोमोज, स्टिकी स्ट्रीम राइस एंड मशरूम कढ़ी, स्टिकी राइस खीर
  • पंजाब– सरसो का साग और मक्के की रोटी, छोले भटूरे, राम लड्डू, दाल मखनी और मक्के की रोटी
  • अरुणाचल प्रदेश–पाथेरकुलू, तंदूरी चिकन, आंध्रा चिकन, दम बिरयानी
  • गुजरात—ढोकला, दाल
  • उत्तराखंड–झंगर खीर, पिज्जा
  • गोआ– गोन फिश कढी, प्रॉन फाइ, रोज ऑमलेट

महिला सशक्तिकरण को प्रदर्शित करने वाला है यह उत्सव 

यह सरस फूड फेस्टिवल महिला सशक्तिकरण  का अनूठा उदाहरण है जो देश की राजधानी का हृदय कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य न केवल देश की खाद्य संस्कृति से लोगों को परिचित कराना है बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं को प्रेरित करना भी रहा। मंत्रालय द्वारा यह प्रयास वृहद स्तर पर आयोजित होता है।


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