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संघर्ष के दम पर कैसे बचती है, एक साहसी लड़की, देखिए मिलि की सर्वाइवल कहानी


  • के. कुमार

फिल्म रिव्यू : मिली।

मुख्य कलाकार : जाह्नवी कपूर, सनी कौशल, मनोज पाहवा।

निर्देशक : माथुकुट्टी जेवियर

समय : दो घंटा नौ मिनट।

स्टार : तीन।

बॉलीवुड में जब सर्वाइल फिल्म बनती है, तो वाकई में दर्शकों में सिरहन पैदा करती हैं। एक लड़की के संघर्ष को दिखाती फिल्म ‘मिलि’ भी दर्शकों को रोमांचित और आनंदित करती है। असल में यह फिल्म मलयालम फिल्म हेलेन की हिंदी रीमेक है। और इसके डॉयरेक्टर माथुकुट्टी जेवियर ने ही इस फिल्म का निर्देशन किया है, जिसमें वह पूर्णतः सफल रहे।

जीवन में किसी भी समय आपके समक्ष कोई भी विपरीत परिस्थित आ सकती है, लेकिन आपमें संयम और मनोबल है, तो आप उसको पार कर जाएंगें। ‘मिली’ की कहानी भी कुछ ऐसी है, जो एक बेहद विषम परिस्थित में फंस जाती है। कुछ ऐसी ही जैसे ‘राजकुमार राव’ की फिल्म ‘टै्रप्ड’ ने दर्शकों को रोमांचित किया था।

कहानी

उत्तराखण्ड के देहारादून की एक लड़की ‘मिली नौटियाल’ (जह्ानवी कपूर) जो नर्सिंग का कोर्स करने के बाद आइईएलटी परीक्षा देने के बाद कनाडा जाना चाहती है। साथ ही वह वहीं के ‘दून किचन’ में पार्ट टाईम जॉब करती है। उसके परिवार में पिता (मनोज पाहवा) हैं, दोनों की बॉडिंग बहुत ही खास है। वहीं मिली के एक और दोस्त समीर (सनी कौशल) जिससे वह प्यार करती है। लेकिन समीर के नौकरी न होने के चलते वह उसके बारे में अपने पापा को नहीं बता पाती, क्योंकि वह चाहती थी कि वह समीर के नौकरी लगने के बाद ही पापा को बताए।

कहानी में उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और उनके आपसी रिश्तों को दर्शाया गया है, वहीं समीर के साथ जब एक रोज मिलि घर वापस आ रही होती है, तो पुलिस द्वारा उनसे बदसलूकी करना और समाज में पुलिस का क्रूर रवैया भी दर्शया गया है।

फिल्म की कहानी फर्स्ट हॉफ से पहले थोड़ा लंबी खींच दी गई है, उसको और थोड़ा कॉम्पेक्ट किया जा सकता था। लेकिन सेकेण्ड हॉफ के बाद कहानी अपना थ्रील पैदा करती है, वो ऐसे कि जब एक दिन मिलि के पिता को समीर के बारे में पता चलता है, तो वह मिलि से नाराज हो जाते हैं, और उससे बात नहीं करते, जिससे मिलि उस दिन काफी रात तक ‘दून किचन’ में अपनी जॉब टाईम खत्म होने के बाद भी बैठी रहती है, तो उसी के दो वर्कर उसको फ्रीजर में दो बॉक्स रखने के लिए कहती हैं, उसके मना करने पर भी वह उसको मना लेते हैं, और बॉक्स उसको सौंप देते हैं, जिसे बाद वह उनको एक एक कर फ्रिजर में रखना शुरू कर देती हैं, रात के 12 बजे का समय होता है, और सबके जाने के बाद रेस्टोरेंट का मैनेजर उस फ्रिजर रूप को लॉक कर देता है, जिसमें मिलि होती है, और वह वहां से चला जाता है, बस अब क्या था, मिलि समझ जाती है कि वह बेहद गंभीर मुसीबत में फंस चुंकी होती है, क्योंकि फ्रिजर का तापमान माईनस 12 डिग्री से 17 डिग्री तक पहुंच जाता है, अब देखना यह होगा कि मिलि अपने को इस हाड़ कंपा और गला देने वाली सर्दी में कैसे अपने आपको बचाती है। आगे की कहानी के लिए आपको एक बार जरूर यह फिल्म देख कर आनी होगी। यही इस फिल्म में मिलि के सर्वाइवल की कहानी है।

वैसे एक बात तो तय है कि यह फिल्म को जाह्नवी कपूर अपने दम पर अकेले सफल करती नजर आती हैं। उनका सहज, सरल अभिनय और सौम्य डॉयलग दर्शकों के मन को जरूर भाते हैं। विषम परिस्थिति में उनके जज्बे, और उनकी सभी भावनाओं को उनके चेहरे पर बाखूबी देखा जा सकता है। वहीं दूसरे मुख्य अभिनेता की बात करें तो वह हैं मनोज पाहवा, जो कमाल के अभिनेता हैं, हर फिल्म की भांति इसमें भी या यूं कहें कि और ज्यादा प्रभावशाली लगते हैं। और तीसरे अभिनेता सनी कौशल भी अपने अभिनय में शानदार छाप छोड़ते हैं।

मिलि सरीखी लड़की की अनोखी कहानी उन सभी लड़कियों को एक सीख देती हैं, कि कभी भी जीवन में आप विषम परिस्थित में फंस जाएं तो उससे हार ना मानें चाहे कुछ भी हो जाए, अपने अस्तित्व और अपने जीवन के लिए जरूर लड़ें। तो रिव्यू में ज्यादा कुछ कहना न होगा, इससे बेहतर है कि दर्शकगण आप मन बनाएं, और फिल्म ‘मिलि’ को देखकर जरूर आएं।

 


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